विविधा

'खोदा पहाड़, निकली चुहिया' कहावत को गोरों ने झूठा सिद्ध कर दिखाया। अंग्रेजों ने ऑस्ट्रेलिया नामक विशाल टापू का चयन हमारे अंडमान-निकोबार की तरह कैदियों की जेल बनाने के लिए किया था लेकिन यहां की धरती ने अचानक सोना उगलना शुरू क्या किया गोरों ने इसे जन्नत ही बना दिया...।

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दीवाली 11 नवंबर की है। यहां इस दिन छुट्टी का दिन नहीं है इसलिए चार दिन पहले ही शनिवार के दिन सार्वजनिक रूप से दीवाली धूमधाम से मना ली गई। मेलबर्न के मुख्य स्थान 'फेडरेशन स्वायर' पर हजारों भारतीयों का हुजूम दीवाली की खुशियां बटोरता दिखाई दिया। यहां बसे हज़ारों भारतवासी परदेश में रहने की जो कसक झेलते हैं वे उसकी भरपाई के लिए ख़ुशी का कोई मौका नहीं छोड़ते...।

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ऐसा सुना है कि जहां शिक्षा और सम्पनता होती है वहां अंधविश्वासों का बोलबाला नहीं होता लेकिन मेलबर्न में बच्चे और बूढ़ों को 'हैलोवीन' का त्यौहार मनाते देखा तो यह भ्रम उड़नछू हो गया।

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तारीख 30 जनवरी 1948। महात्मा गांधी अपनी सार्वजनिक सायं प्रार्थना सभा में जाने की तैयारी में थे। उसी सभा में जहां नाथूराम गोडसे घात लगाए उनकी प्रतीक्षा कर रहा था। महात्मा गांधी अपनी होने वाली हत्या के षडयंत्र से अनभिज्ञ, एक गंभीर मंत्रणा में व्यस्त थे। जीवन की इस अंतिम निजी बैठक में अपने अनुज-तुल्य और निष्ठावान अनुयायी सरदार वल्लभभाई पटेल के साथ।

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देश के स्वतंत्रता आंदोलन के एक सुदृढ़ स्तंभ और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अग्रणी नेता वल्लभभाई पटेल ने स्वतंत्र भारत के प्रथम उपप्रधानमंत्री एवं गृहमंत्री के रूप में कुशल प्रशासक तथा दक्ष रणनीतिकार की ख्याति अर्जित की। किन्तु, उनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि 565 देसी रियासतों का भारतीय संघ में विलय मानी जाती है। 

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‘हम आजाद लोग हैं, गोरे हम पर राज नहीं कर सकते....’ यह लम्‍बे स्‍वतंत्रता संग्राम के दौरान देश के मुख्‍य भाग से किसी स्‍वतंत्रता सेनानी द्वारा किया जाना वाला घोष नहीं है, यह पूर्वोत्तर क्षेत्र के दूर दराज के पहाड़ों के नगा कबीलों को रानी गायडिनल्‍यू की पुकार थी, वह भी तब जब वह केवल 13 वर्ष की थीं। (Read in English: Rani Gaidinliu: Daughter Of The Hills…)

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