विविधा

गांव में एक 'कुत्ता' होता था। मोहल्ले के हर घर से एक-एक रोटी निकलती थी जिसे खाकर वह अपना जीवन-यापन करता था। और, उसके एवज में वह रात-दिन घरों की रखवाली करता था। मोहल्ले के लोगों पर भौंकता नहीं था और किसी अनजान को मोहल्ले के अंदर आने नहीं देता था। अनजान व्यक्ति घर में तब तक नहीं घुस सकता था जब तक कि उस कुत्ते को 'चुप' रहने के लिए डांट न पड़ जाए। 

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आदिवासी समाज में महिला पुरुष की साथी है। वह उसकी सहकर्मी है। उसकी समाज और परिवार में बराबर की भागीदारी है। 

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मिट्टी की उर्वरता स्थिति में लगातार गिरावट हरित क्रांति की दूसरी पीढ़ी की सबसे गंभीर समस्याओं में एक मानी जाती है। मिट्टी की उर्वरता स्थिति में गिरावट मुख्य रूप से सघन फसल प्रणालियों द्वारा पोषक तत्वों को हटाए जाने से आई है जो पिछले कई दशकों के दौरान उर्वरकों एवं खादों के जरिए इतनी अधिक हो गई है कि उनको फिर से भर पाना मुश्किल है। 

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देश में साल दर साल बढ़ते कृषि उत्पादन और सतत् खाद्य सुरक्षा में फसलों के पोषण की अहम भूमिका है। संतुलित पोषण से ऊर्जावान खेत किसान को अधिकाधिक उपज की भेंट देते हैं। नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश मुख्य पोषक तत्व हैं, जो अधिकांश खेतों में लगभग अनिवार्य रूप से लगाए जाते हैं। इसके अलावा सल्फर, जिंक और बोरोन कुछ महत्वपूर्ण सूक्ष्म पोषक तत्व हैं, जिन्हें भूमि की जरूरत के हिसाब से किसान खेतों में डालते हैं। इन सबके बीच यदि सबसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व की बात करें तो नाइट्रोजन का नाम सबसे ऊपर आता है।

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प्रकृति के गर्भ से निकली बस्‍तर की हस्‍तकला देश और दुनिया के हर मेले की शान हैं। देश का पूरा कला जगत इन्‍हें बेहद सराहता है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि बस्‍तर के शिल्‍प कुदरती हैं और अनेक पीढ़ियों से अपने मूल रूप में चले आ रहे हैं। 

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हमारी सभ्‍यता की नियति को संवारने में महिलाओं की भूमिका अहम है। फिर भी ज्‍यादातर महिलाओं की अनदेखी होती है और उन्‍हें असमानता व अभाव से भी जूझना पड़ता है। यदा-कदा उन्‍हें क्रूर हिंसा / अपराध का सामना करना पड़ता है। भारत में परंपराएं / रीति-रिवाज बेटियों के अस्‍तित्‍व को नकारते रहे हैं। (Read in English: Save The Girl Child: She Is An Asset, Not A Liability!)

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