गांव में एक 'कुत्ता' होता था। मोहल्ले के हर घर से एक-एक रोटी निकलती थी जिसे खाकर वह अपना जीवन-यापन करता था। और, उसके एवज में वह रात-दिन घरों की रखवाली करता था। मोहल्ले के लोगों पर भौंकता नहीं था और किसी अनजान को मोहल्ले के अंदर आने नहीं देता था। अनजान व्यक्ति घर में तब तक नहीं घुस सकता था जब तक कि उस कुत्ते को 'चुप' रहने के लिए डांट न पड़ जाए।
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