धर्म, कला और संस्कृति

अहिंसा जीवन की आधार भूमि है। अहिंसा के अभाव में त्राहि-त्राहि है और अहिंसा के सद्भाव में ही त्राण है। वस्तुत: व्यक्ति, परिवार, समाज, देश और राष्ट्र इसके अभाव में टिक ही नहीं सकते। इसलिए, सभी धर्मों ने इसे एक स्वर से स्वीकार किया है।

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धर्म के विस्तार एवं विविधता की खोज अनावश्यक है। यदि कुछ आवश्यक है तो वह है धर्म के तत्व की खोज, इसकी अनेकता में एकता की खोज और इसके परम सार की खोज।

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प्रदर्शनकारी कलाओं में महिलाओं की पहचान, मुद्दे एवं विवेचन विषय पर पिछले दिनों मुंबई में एक दो दिवसीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन का आयोजन मणिबेन नानावती महिला महाविद्यालय के महिला अध्ययन केंद्र एवं हिंदी विभाग तथा भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद के संयुक्त तत्वाधान में किया गया था।

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गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती नदियों के संगम पर मकर संक्रांति के पहले स्नान पर्व पर संगम में पवित्र डुबकी लगाने के लिए दुनियाभर से बड़ी संख्या में साधु-संत, श्रद्धालु और पर्यटक प्रयागराज पहुंच रहे हैं। यहां अखाड़ों का पहला शाही स्नान तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के लिए एक बड़ा आकर्षण होता है।

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पौष महीने में मनाए जाने वाली सकट चतुर्थी के त्योहार को संतान की लंबी आयु प्राप्ति के लिए मनाया जाता है। इस दिन भगवान गणेश जी की पूजा होती है।

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देवउत्थान या देवउठान एकादशी का त्योहार कार्तिक महीने में शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। आठ महीने पहले सोए हुए देवता इस दिन जगाए जाते हैं। इसी दिन से शादी आदि शुभ कामों को शुरू करने का सिलसिला चल निकलता है।

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