ॐ के रहस्य में छुपा है जीवन जीने का सूत्र...!


माना जाता है कि जीवन जीने की शक्ति और संसार की चुनौतियों का सामना करने का अदम्य साहस देने वाले ॐ के उच्चारण करने मात्र से विभिन्न प्रकार की समस्याओं व व्याधियों का नाश हो जाता है।

ॐ ईश्वर का मुख्य नाम है और यह तीन अक्षरों से मिलकर बना है। अ, उ और म। प्रत्येक अक्षर ईश्वर के अलग-अलग नामों को अपने में समेटे हुए है। जैसे “अ” से व्यापक, सर्वदेशीय, और उपासना करने योग्य, “उ” से बुद्धिमान, सूक्ष्म, सब अच्छाइयों का मूल, और नियम करने वाला है। “म” का अर्थ अनंत, अमर, ज्ञानवान, और पालन करने वाला है। ये तो बहुत थोड़े से उदाहरण हैं, जो ॐ के प्रत्येक अक्षर से समझे जा सकते हैं। वास्तव में, अनंत ईश्वर के अनगिनत नाम अकेले इस ॐ में ही आ सकते हैं।

पुराणों में एक कथा मिलती है जिसके अनुसार सृष्टि के आरंभ में एक ध्वनि ॐ गूंजी और पूरे ब्रह्माण्ड में इसकी गूंज फैल गई। इसी ध्वनि से भगवान शिव, विष्णु और ब्रह्मा प्रकट हुए और इसी के चलते ॐ को सभी मंत्रों का बीज और ध्वनियों एवं शब्दों की जननी कहा जाता है।

माना जाता है कि ॐ के नियमित उच्चारण मात्र से शरीर में मौजूद आत्मा जागृत हो जाती है और रोग एवं तनाव से मुक्ति मिलती है। धर्मगुरु ॐ का जप करने की सलाह देते हैं।

वास्तुविदों का मानना है कि ॐ के प्रयोग से घर में मौजूद वास्तु दोषों को दूर किया जा सकता है। धार्मिक दृष्टि से माना जाता है कि ॐ में त्रिदेवों का वास होता है। यही कारण है कि सभी मंत्रों से पहले इसका उच्चारण किया जाता है।

आध्यात्मिक दृष्टि से यह माना जाता है कि नियमित ॐ का जप किया जाए तो व्यक्ति का तन और मन शुद्ध रहता है और मानसिक शांति मिलती है। ॐ के जाप से मनुष्य ईश्वर के करीब पहुंचता है और मुक्ति पाने का अधिकारी बन जाता है।

ॐ संपूर्ण ब्रह्मांड का प्रतीक है। ब्रह्म का अर्थ होता है विस्तार, फैलाव और फैलना। ॐ ध्वनि के 100 से भी अधिक अर्थ दिए गए हैं। यह अनादि और अनंत तथा निर्वाण की अवस्था का प्रतीक है।

ॐ को ‘ओम’ बोला जाता है। उसमें भी बोलते वक्त 'ओ' पर ज्यादा जोर दिया जाता है। इसे ‘प्रणव’ भी कहते हैं। शिव पुराण में ‘प्रणव’ के अलग-अलग शाब्दिक अर्थ और भाव बताए गए हैं। 'प्र' यानी प्रपंच, 'ण' यानी नहीं और 'व' यानी तुम लोगों के लिए। सार यही है कि प्रणव सांसारिक जीवन में प्रपंच यानी कलह और दु:ख दूर कर जीवन के अहम लक्ष्य यानी मोक्ष तक पहुंचा देता है।

दूसरे अर्थों में प्रणव को 'प्र' यानी प्रकृति से बने संसार रूपी सागर को पार कराने वाली 'ण' यानी नाव बताया गया है। इसी तरह ऋषि-मुनियों की दृष्टि से 'प्र' अर्थात प्रकर्षेण, 'ण' अर्थात नयेत् और 'व' अर्थात युष्मान् मोक्षम् इति वा प्रणव: बताया गया है। जिसका सरल शब्दों में मतलब है हर भक्त को शक्ति देकर जन्म-मरण के बंधन से मुक्त करने वाला होने से यह प्रणव है।

तपस्वी और ध्यानियों ने जब ध्यान की गहरी अवस्था में एक ऐसी ध्वनि को सुना जो लगातार गूंजती रहती है। हर कहीं, वही ध्वनि निरंतर जारी है और उसे सुनते रहने से मन और आत्मा शांति महसूस करते हैं।

साधारण मनुष्य उस ध्वनि को सुन नहीं सकता, लेकिन जो भी ॐ का उच्चारण करता रहता है उसके आसपास सकारात्मक ऊर्जा का विकास होने लगता है। इस ध्वनि को सुनने के लिए पूर्णत: मौन और ध्यान में होना जरूरी है। जो भी उस ध्वनि को सुनने लगता है वह परमात्मा से सीधा जुड़ने लगता है। परमात्मा से जुड़ने का साधारण तरीका है ॐ का उच्चारण करते रहना।

प्रातः उठकर पवित्र होकर ॐ का उच्चारण पद्मासन, अर्द्धपद्मासन, सुखासन या वज्रासन में बैठकर कर सकते हैं। इसका उच्चारण 5, 7, 10 या 21 बार अपने उपलब्ध समयानुसार कर सकते हैं। ॐ जोर से बोल सकते हैं या धीरे-धीरे बोल सकते हैं। ॐ जप माला से भी कर सकते हैं।

इससे शरीर और मन को एकाग्र करने में मदद मिलेगी। दिल की धड़कन और रक्तसंचार व्यवस्थित होगा। इससे मानसिक बीमारियां दूर होती हैं। काम करने की शक्ति बढ़ जाती है। इसका उच्चारण करने वाला और इसे सुनने वाला दोनों ही लाभांवित होते हैं। इसके उच्चारण में पवित्रता का ध्यान रखा जाता है।

कम से कम 108 बार ॐ का उच्चारण करने से पूरा शरीर तनावरहित हो जाता है। कुछ ही दिनों पश्चात शरीर में एक नई उर्जा का संचरण होने लगता है। ॐ का उच्चारण करने से प्रकृति के साथ बेहतर तालमेल और नियन्त्रण स्थापित होता है। इसके कारण हमें प्राकृतिक उर्जा मिलती रहती है। ॐ का उच्चारण करने से परिस्थितियों का पूर्वानुमान होने लगता है।

ॐ का उच्चारण करने से आपके व्यवहार में शालीनता आएगी जिससे आपके शत्रु भी मित्र बन जाते है। ॐ का उच्चारण करने से आपके मन में निराशा के भाव उत्पन्न नहीं होते है।

आत्महत्या जैसे विचार भी मन में नहीं आते है। जो बच्चे पढ़ाई में मन नहीं लगाते है या फिर उनकी स्मरण शक्ति कमजोर है। उन्हें यदि नियमित ॐ का उच्चारण कराया जाए तो उनकी स्मरण शक्ति भी अच्छी हो जाएगी और पढ़ाई में मन भी लगने लगेगा।



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