समाज में तीन तरह के समाज सेवी पाए जाते है। पहले वो जो रोज अखबार की सुर्खी और छायांकन का आनंद लेते हैं... इनकी स्थिति वैसे ही है जैसे प्रतिदिन वेतन पर कार्यरत कोई सेवादार। दूसरे वो जो 15 दिन तक अखबार में अपनी फोटो न देखें तो तबीयत खराब कर लेते हैं... जैसे कोई संविदाकर्मी हो। तीसरे वो जो महीने-दो-महीने मे संडे को समाजसेवा न करें तो चिड़चिड़ाहट होने लगती है।






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