भारत के चारों तरफ़ इस वक़्त एक अशुभ ‘आर्क ऑफ इंस्टैबिलिटी’ यानी अस्थिरता का घेरा बन गया है। एक-एक कर पड़ोसी मुल्क आर्थिक तबाही, सियासी उथल-पुथल और जनाक्रोश की आग में जल रहे हैं। नेपाल की ‘सोडा वाटर क्रांति’ से लेकर श्रीलंका के ‘राजपक्षा विद्रोह’ तक, नौजवानों की आवाज़ें ज़ोर से गूंजीं, लेकिन सत्ता के क़िलों को हिला पाने में नाकाम रहीं। ये अलग-थलग वाक़ये नहीं हैं, बल्कि पूरी दक्षिण एशिया की साझा त्रासदी है।
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