बृज खंडेलवाल

बृज खंडेलवाल वरिष्ठ पत्रकार हैं और पिछले ढाई दशक से मीडियाभारती के लिए लगातार लेखन कार्य कर रहे हैं।

कभी गरुड़-सा ऊंचा उड़ने वाला भारत आज अपनी ही टूटी-फूटी सीमाओं में कैद होकर रह गया है। यह वही धरती है जिसने अफगानिस्तान से लेकर बर्मा तक राज किया, लेकिन आज पाकिस्तान और चीन हमारी ज़मीन निगल रहे हैं और हम संयुक्त राष्ट्र की फाइलों में न्याय खोज रहे हैं।

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आईटी टेकी सुरेश भाई को अपनी मंगेतकर शीला की सालगिरह पार्टी में गिफ्ट के साथ बसंत विहार से दिल्ली के दरियागंज इलाके के एक रेस्टोरेंट में पहुंचना था। जोशभरे उत्साह के साथ जब वह रेस्टोरेंट में दाखिल हुए तो महफिल पर पर्दा गिर चुका था। सुरेश ने ट्रैफिक जाम को दोषी ठहराया लेकिन शीला ने एक न सुनी और पुराने दोस्त अभिनव के साथ निकल गई। सच में, ट्रैफिक जाम ने तरह तरह के खट्टे-मीठे अनुभव लोगों को दिए हैं...

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विपक्षी दलों के नेताओं की मानें तो भारत गर्त में जा रहा है। राहुल गांधी हर दिन मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाते रहे हैं कि अर्थव्यवस्था चौपट हो चुकी है। सही स्थिति क्या है, यह जानने के लिए साल 2015 से पूर्व और 2025 तक के आंकड़ों का विश्लेषण करने से पता लगता है कि तमाम दिक्कतों के बावजूद भारत की विकास यात्रा सही गति से सही दिशा की तरफ अग्रसर है...

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वाशिंगटन की राजनीतिक हवाएं एक बार फिर अप्रत्याशित रूप से बदल गई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जो भारत को अपना विश्वसनीय साझेदार बताने में पीछे नहीं हटते थे, ने अचानक भारतीय आयातों पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी और भारत की अर्थव्यवस्था को ‘डेड इकॉनमी’ तक कह डाला।

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आज नदियां गंदी हो रही हैं, जंगल कट रहे हैं और जानवरों की कई नस्लें खत्म हो रही हैं। ऐसे में कृष्ण की शिक्षा हमें बताती है कि प्रकृति की देखभाल करना हमारी ज़िम्मेदारी है। जो पेड़, नदी और जानवरों की रक्षा करता है, वही असली भक्त है...

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साफ संकेत मिल रहे हैं कि ट्रंप टैरिफ झटकों ने भारत को नींद से जगा दिया है। आत्मसम्मान पर चोट लगी है और दोस्ती से विश्वास उठ गया है। सकारात्मक बात यह है कि स्वाबलंबन से एक नया भारत निर्माण होगा। जल्दी ही तमाम अमेरिकन ब्रांड और सेवाओं के विकल्प खोजे जाएंगे। जनता पार्टी के जॉर्ज फर्नांडिस ने कोका कोला को लात मारकर डबल सेवन कोल्ड ड्रिंक के लिए मार्केट खोला था। देश के हिंदूवादी संगठन और स्वदेशी आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ता तुरंत सक्रिय हों और अमेरिका पर निर्भरता घटाने के अभियान में लग जाएं।

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