संपादकीय

बीते पखवाड़े से दिल्ली में औसतन हर रोज एक पुलिसकर्मी आम आदमी के हाथों पिट रहा है... क्यों...?

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दो दिन पहले, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में अटल पेंशन योजना (एपीवाई), प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई) और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना को कैबिनेट की मंजूरी प्रदान कर दी। पूर्व में, प्रधानमंत्री जन-धन योजना के तहत एक बड़ी संख्या में लोगों को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ने की भी एक सफल कोशिश की गई थी। इस तरह की योजनाएं नि:संदेह नागरिकों को लाभ पहुंचाएंगी। लेकिन, इन तमाम योजनाओं के साथ-साथ एक सस्ती और टिकाऊ स्वास्थ्य बीमा स्कीम की भी जरूरत है। दुनिया में यह अपने जैसा अलग उदाहरण होगा। 

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जनता परिवार का बिखरा हुआ कुनबा फिर से एक बार ‘एकसाथ’ हो गया है। जनता परिवार के छह दल देश में ‘सांप्रदायिक’ ताकतों को रोकने के लिए एकसाथ आने का दावा किया है। यह बिखरा हुआ कुनबा किसी दल के लिए ‘मुसीबत’ बनता है या फिर दलों को यह मिलन खुद ‘दलदल’ बन जाता है यह बिहार में होने वाले विधानसभा चुनावों में साफ होगा।

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ग्यारह वर्ष पहले उषा चौमर अलवर में मैला ढोया करती थी आज वह कई राष्ट्रीय और अंर्तराष्ट्रीय मंचों पर  छूआछूत के खिलाफ़ और महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दों को उठा रही हैं। 

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प्राचीन काल से ही सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए कई अनेक रोचक एवं अनोखे तरीके अपनाए जाते रहे हैं। आज वह एक कहानी की तरह लगती है। बीते दशकों में संचार टेक्नोलॉजी में आए चमत्कारिक परिवर्तन का सर्वाधिक फायदा सूचना जगत को हुआ है और मीडिया की इसपर निर्भरता बढ़ गई है। 

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14 अप्रैल 2015 को बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की 125वीं जयंती मनाई जाएगी। वैसे तो डॉ. अंबेडकर का कद और छवि समय के साथ और बढ़ी है लेकिन दलित सशक्तिकरण के लिए देश के सर्वोत्तम अधिवक्ता के रूप में उनकी प्रसिद्धि के पीछे कई बार उनके बहु-आयामी व्यक्तित्व के कई विशिष्ट पहलू छिप जाते हैं। (Read in English: Dr. BR Ambedkar: Man Behind The Idea Of Modern India)

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