मथुरा

नई दिल्ली । समाजवादी पार्टी (सपा) में जारी सियासी संकट के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पार्टी विधायकों और मंत्रियों के साथ बैठक लखनऊ में शुरू हो गई है। चुनाव आयोग के बुधवार को यूपी समेत पांच राज्यों में चुनाव की तारीखों का ऐलान करने के बाद अखिलेश यादव बैठक में चुनाव की रणनीति पर चर्चा कर सकते हैं। इसी के साथ चुनाव आयोग में असली सपा होने का दावा साबित करने के लिए अपने समर्थक विधायक, विधान परिषद सदस्यों, सांसदों और पदाधिकारियों की सूची भी तैयारी की जा सकती है। चुनाव आयोग ने इस संबंध में दोनों गुटों को नोटिस जारी कर अपने समर्थकों के संबंध में हलफनामा दाखिल करने को कहा है। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 11 फरवरी से लेकर 8 मार्च तक सात चरणों में होगा। नतीजे 11 मार्च को आएंगे। अखिलेश यादव ने अपने लोगों से कह दिया है कि अब वह पूरी तरह चुनाव प्रचार में लग जाएं और किसी तरह के भ्रम में न रहें। सीएम ने अपने विधायकों व बड़े नेताओं की आज बैठक बुलाई है जो 10 बजे शुरू हो गई है। इसमें अखिलेश पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की हैसियत से विधायकों को चुनावी तैयारियों के संबंध में निर्देश देंगे। सूत्रों का कहना है कि बैठक में पार्टी प्रत्याशियों की नई सूची भी तैयार की जा सकती है। प्रचार अभियान, रथयात्र कार्यक्रम, रैलियों पर भी चर्चा होगी। साफ है कि अखिलेश खेमा किसी समझौते का इंतजार किए बिना अब अपनी ताकत के बूते चुनाव में उतरना चाहता है। रामगोपाल यादव पहले ही कह चुके हैं कि अब सुलह समझौते का कोई मतलब नहीं है। शिवपाल के हटाए अध्यक्षों को अखिलेश ने रखा: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के निर्देश पर प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल ने देवरिया, कुशीनगर, आजमगढ़ एवं मिर्जापुर जिलों के सभी पूर्व नामित अध्यक्षों क्रमश: राम इकबाल यादव, राम अवध यादव, हवलदार यादव तथा आशीष यादव को बहाल कर दिया है और जिला कमेटियां फिर से काम करती रहेंगी। नरेश उत्तम ने उपर्युक्त सभी अध्यक्षों से तत्काल कार्यभार ग्रहण कर चुनाव तैयारियों में जुट जाने का आग्रह किया है। तीन रोज पहले जब मुख्यमंत्री ने जनेश्वर मिश्र पार्क में राष्ट्रीय अधिवेशन बुलाया था, उसी दिन शिवपाल सिंह यादव ने इन चारों जिलाध्यक्षों को हटाकर अपने लोगों को नामित किया था। इस फैसले के बाद इन जिलों में सरगर्मी बढ़ गई है।  साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली । पांच राज्यों में चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही बीच में पड़ रहे आम बजट को लेकर घमासान शुरू हो गया है। विपक्ष आम बजट को चुनाव बाद पेश करने की मांग कर रहा है। विपक्षी दलों ने चुनाव पूर्व बजट पेश करने की मोदी सरकार की योजना का विरोध किया है। उनका आरोप है कि इसके माध्यम से लोक लुभावनी घोषणाएं करके भाजपा मतदाताओं को लुभा सकती है। विपक्ष की इस मांग का केंद्र में राजग की सहयोगी शिवसेना ने भी समर्थन किया है। गुरुवार सुबह 11 बजे कांग्रेस, बसपा, तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक, जदयू, सपा, रालोद के नेता चुनाव आयोग पहुंचे और इस पर रोक लगाने की मांग की। चुनाव आयोग ने इससे पहले बुधवार को कहा था कि एक फरवरी को बजट पेश करने की योजना के खिलाफ राजनीतिक दलों के दिए गए एक आवेदन की वह जांच करेगा। इस बीच, वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस कदम का बचाव करते हुए सवाल किया कि अगर राजनीतिक दल दावा करते हैं कि नोटबंदी एक अलोकप्रिय फैसला है तो उन्हें बजट से डर क्यों होना चाहिए। सभी राजनीतिक दलों का दावा है कि उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में वह बेहतर प्रदर्शन करेंगे। कांग्रेस, वाम, सपा और बसपा सहित विभिन्न दलों ने चुनाव आयोग और राष्ट्रपति को पत्र लिख कर चुनाव से पहले बजट पेश किए जाने का विरोध किया है। विपक्षी दलों के अलावा केंद्र में राजग की सहयोगी शिवसेना के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने गुरुवार को राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी से अपील की कि वह केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को पांच राज्यों के आगामी विधानसभा चुनावों से पहले बजट पेश करने की इजाजत नहीं दें। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार बजट का इस्तेमाल वोटरों को लुभाने के लिए कर सकती है। इन दलों का कहना है कि चुनाव से ठीक पहले बजट पेश करने से भाजपा और उसके सहयोगियों को अनावश्यक तरीके से लाभ होगा, क्योंकि केंद्र सरकार मतदाताओं को लुभाने के लिए आकर्षक घोषणाएं कर सकती है। राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त नसीम जैदी को लिखे एक पत्र में कहा है, ‘यह विपक्षी दलों की सामूहिक और गंभीर चिंता है कि एक फरवरी को बजट पेश किए जाने से सरकार को मतदाताओं को लुभाने के लिए लोकप्रिय घोषणाएं करने का अवसर मिल जाएगा।’ आजाद ने कहा, ‘इससे न केवल सत्तारूढ़ दल को अनावश्यक लाभ मिलेगा बल्कि इससे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की प्रक्रिया भी कमजोर होगी। इसलिए यह मांग है कि आगामी चुनाव को देखते हुए और वर्ष 2012 के उदाहरण के अनुसार, बजट को पहले पेश करने की अनुमति न दी जाए।’संवाददाताओं के पूछने पर आजाद ने कहा, ‘आयोग को कुछ राजनीतिक दलों की ओर से अभ्यावेदन मिले हैं जो कि बजट पेश करने से संबंधित हैं। आयोग उन पर गौर कर रहा है।’ माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि एक फरवरी को बजट पेश करना सही नहीं है, क्योंकि इससे तीन के बजाय केवल दो तिमाही की जीडीपी को ही बजट में शामिल किया जा सकेगा। येचुरी ने आरोप लगाया कि चुनाव से ठीक पहले बजट पेश करने का लक्ष्य मतदाताओं को लुभाना है। फेसबुक पोस्ट में येचुरी ने राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी और चुनाव आयोग से बजट को पहले पेश करने के फैसले को पलटने का अनुरोध किया।  साभार-khaskhabar.com  

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बॉलीवुड की अभिनेत्री विद्या की पिछली फिल्म कहानी 2 थी। इस फिल्म ने बॉक्स आॅफिस पर कुछ खास कमाल नहीं दिखा सकी। फिलहाल विद्या ने इस फिल्म की ओर ध्यान हटाकर आपनी आने वाली फिल्म पर पूरा फोकस कर लिया। विद्या बालन अपनी एक और फिल्म लेकर आ रही है जिसकी पहली झलक सामने आ चुकी है। इस फिल्म का नाम है बेगम जान। इस फिल्म में विद्या बालन के अलावा नसीरूद्दीन शाह, गौहर खान भी अहम भूमिका में नजर आएंगे। बेगम जान की पहली झलक में विद्या खाट पर लेटी हुक्का पीती नजर आ रही हैं। उसी खाट पर गौहर खान भी बैठी दिख रही हैं। इस फिल्म की कहानी आजादी से पहले हुए बंटवारे के वक्त की है। यह एक वेश्यालय की कहानी है जिसकी मालकिन के किरदार में विद्या बालन है। फिल्म का कंटेंट बोल्ड है इसलिए इसी तरह के संवाद और दृश्य भी फिल्म में हैं। सेंसर ने फिल्म को ए सर्टिफिकेट दिया है, यानी कि उम्र 18 वर्ष से ज्यादा के ही लोग इसे देख पाएंगे। बेगम जान साल 2015 में आई बंगाली फिल्म राजकाहिनी की कहानी पर आधारित है। इस फिल्म में कुल 11 अभिनेत्रियां काम कर रही हैं। बेगम जान का निर्देशन नेशनल अवॉर्ड जीत चुके फिल्ममेकर श्रीजीत मुखर्जी कर रहे हैं। फिल्म के बंगाली वर्जन को भी श्रीजीत ने ही डायरेक्ट किया था। यह फिल्म इसी साल 17 मार्च को रिलीज होगी। आपको बता दें कि पहले यह फिल्म जनवरी में प्रदर्शित होने वाली थी लेकिन बॉक्स आॅफिस पर दंगल का जोर देखते हुए इस फिल्म की रिलीज डेट को बढ़ा दी गई। साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली । देश की प्रमुख दूरसंचार कंपनी भारती एयरटेल ने अपनी मौजूदा असीमित कॉलिंग योजना का विस्तार करते हुए इसमें 3जीबी का मुफ्त 4-जी मासिक डेटा जोड दिया है। एयरटेल यह सुविधा उन ग्राहकों को देगी जो अभी उसकी 4-जी सेवाओं का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं।  भारती एयरटेल ने बयान में कहा कि ग्राहकों को 31 दिसंबर, 2017 तक हर महीने 3जीबी डेटा मुफ्त मिलेगा। यह पेशकश चुनींदा प्रीपेड और पोस्टपेड पैक के साथ मिलेगी। यह मुफ्त डेटा पैक या प्लान के लाभ से अलग होगा। योजना के तहत एयरटेल 12 महीने तक 9000 रूपये के मुफ्त डेटा की पेशकश करेगी। यह सुविधा उन ग्राहकों के लिए होगी जो एयरटेल के 4जी नेटवर्क की ओर स्थानांतरित होंगे।  बयान में कहा गया है कि यह 12 महीने की पेशकश 4जी मोबाइल हैंडसेट वाले उन सभी ग्राहकों के लिए होगी जो भी एयरटेल के नेटवर्क पर नहीं हैं। कोई भी उपभोक्ता, एयरटेल के मौजूदा ग्राहक सहित, 4जी हैंडसेट की ओर उन्नयन पर इस पेशकश का लाभ ले सकते हैं।  साभार-khaskhabar.com  

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मुझे याद नहीं आता कि 88 वर्षों के इतिहास में कभी भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के अध्यक्ष और सचिव को सर्वोच्च न्यायालय ने बर्खास्त किया हो, लेकिन यह कदम चौंकाता नहीं। यह तो होना ही था। पिछली जुलाई में अदालत द्वारा लोढ़ा समिति की बोर्ड में पुनर्सुधार संस्तुतियों को स्वीकार किए जाने के बाद यह तय था कि दिन बहुरेंगे। मगर तब से लगातार बीसीसीआई यही कोशिश करती रही कि कहीं कोई बच निकलने का रास्ता मिल जाए।  एक के बाद एक तिकड़म लगाई जाती रही। कांग्रेसी राजनेता और देश के सबसे महंगे वकील कपिल सिब्बल की सेवाएं ली गईं। बोर्ड सदर ने पारदर्शिता लाने के लिहाज से कैग से ऑडिट करने की संस्तुतियों के मामले में आईसीसी को भी घसीटने की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राजनेता सांसद और बोर्ड के सदर अनुराग ठाकुर की कोशिश और उनका झूठा हलफनामा गले की फांस बन गया। तय था कि दो जनवरी को जो आदेश आएगा, वह देश में क्रिकेट संचालित करने वाली संस्था की चूलें हिला कर रख देगा और यही हुआ भी। सदर और सचिव ही नहीं, बल्कि जिन राज्य संघों में संस्तुतियां लागू करने में आनाकानी की गई, वहीं के भी अधिकारी बर्खास्त हो गए। ठाकुर की हालत यह है कि अदालत की अवमानना के आरोप में उन्हें जेल जाना पड़ सकता है। राजनीति में शुचिता और ईमानदारी की बात करने वाली भाजपा के ठाकुर ने जिस प्रकार सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का पालन करने में लगातार अड़ंगा लगाया, वह वाकई शर्मनाक रहा।  अहंकार, पदलोलुपता, हठधर्मिता क्या कुछ नहीं देखा देश ने ठाकुर एंड कंपनी में। ऊपर से तुर्रा यह कि बर्खास्तगी के बाद हिमाचल क्रिकेट संघ के भी अध्यक्ष ठाकुर ने जिस अंदाज में यह कहा कि उनका संघर्ष बोर्ड की स्वायत्तता के लिए है और वह जारी रहेगा, वह बता रहा था कि पूंछ जल गई लेकिन ऐंठन नहीं गई। ठाकुर किस स्वायत्तता की बात कर रहे हैं कि कोई पदाधिकारी दो पद नहीं संभाल सकता, 70 वर्ष उम्र की समयसीमा, किसी पदाधिकारी का नौ वर्ष से अधिक कार्यकाल नहीं, बोर्ड में खिलाडिय़ों का प्रतिनिधित्व, खिलाड़ी संघ को मान्यता, एक राज्य एक वोट आदि। कहां से गलत हैं? ठाकुर ने अपने वीडियो में बखान किया कि बोर्ड ने क्रिकेट को ऊंचे पायदान तक पहुंचाया है। एक से बढक़र एक का श्रेय पुराने खिलाडिय़ों की चयन समिति और खिलाडिय़ों को है न कि खेल की समझ रखने वाले बोर्ड अधिकारियों को।  वैसे माननीय ठाकुर यह भूल चुके हैं कि देश में इस खेल को पहले स्थान पर पहुंचाने के लिए क्रिकेट प्रेमियों को श्रेय जाता है, जो यह जानते हुए भी कि टेस्ट मैच अनीर्णित होगा, चार दशक पूर्व मैच के अंतिम दिन भी मैदान ठसाठस रखते थे। श्रेय उस मीडिया खासकर भाषायी मीडिया को जाता है, जिन्होंने आम जन को क्रिकेट पढऩा सिखाया। सबसे ऊपर तो बोर्ड को आभार मानना चाहिए, रेडियो की हिंदी कमेंट्री का जिसने हल जोत रहे बैल के गले में लटके ट्रांजिस्टर पर विविध भारती के गानों से दूर कर किसान को चौके-छक्के की ओर मोड़ दिया। इस लोकप्रियता को दोनों हाथों से बोर्ड ने भुनाया। वो बोर्ड, जो 1987 के विश्व कप की मेजबानी के लिए रिलायंस के आगे हाथ फैलाने पर मजबूर हुआ कि उसके पास एक करोड़ विदेशी मुद्रा तक नहीं थी, वहीं सरकार से प्रसारण अधिकार की बपौती खत्म कर बोर्ड को जगमोहन डालमिया ने 1996 विश्व कप के सफल आयोजन से जो मालामाल किया कि फिर मुड़ कर नहीं देखा।  बोर्ड यदि दुनिया का सबसे समृद्ध क्रिकेट संघ है, तो इसके लिए स्वर्गीय डालमिया और फिर आईपीएल की अवधारणा लेकर आए ललित मोदी को श्रेय देना चाहिए। ठाकुर बताएं कि पारदर्शिता का कब पक्षधर रहा है बोर्ड। खिलाड़ी नौकर और बोर्ड मालिक की भूमिका में ही रहे हैं। ठाकुर जी जांघिए में ही होंगे जब अस्सी के दशक में खिलाड़ी संघ की पहल करने का खामियाजा दिलीप वेंगसरकर और श्रीकांत को देश की कप्तानी से हाथ धोकर भुगतना पड़ा था। अगला दशक मैच फिक्सिंग जैसे धतकर्मों से भरा रहा। बोर्ड में श्रीनिवासन युग ने तो इस खेल की ऐसी-तैसी करके रख दी और सर्वोच्च न्यायालय का दखल इसी दौरान तब हुआ जब स्पॉट फिक्सिंग घोटाले ने बोर्ड की छवि तार-तार करके रख दी। अपने दामाद के पापों को छुपाने के लिए श्रीनिवासन ने जिस बेशर्मी के साथ अपने खास उच्च न्यायालय के दो सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की जांच समिति गठित करने के नाम पर लीपापोती की कोशिश की और जिस तरह से दामाद मयप्पन सहित आरोपियों को बरी किया, उसके खिलाफ अदालत में जो मामला गया उसकी ही यह परिणति हुई दो जनवरी को। ठाकुर और अरुण जेटली यदि मुखर होते तो श्रीनिवासन को, जिसके दुबई-कराची से गहरे संपर्क रहे हैं, इस्तीफा देना पड़ जाता और जो फिर बाद में जो घटा, न घटता। यही कारण है कि इस मामले में भाजपा की भी कम किरकिरी नहीं हुई है। पाकिस्तान के साथ 2022 तक सीरीज को लेकर एमओयू पर श्रीनिवासन ने ही हस्ताक्षर किए थे। इसमें राष्ट्रवादी पार्टी के इन नेताओं की भी सहमति न रहती तो ऐसा कभी नहीं होता।  क्या ठाकुर बोर्ड से संबद्ध इकाइयों के भ्रष्टाचारों पर पर्दा डालने को स्वायत्तता मानते हैं? क्रिकेट प्रेमी पूछ रहे हैं कि हैदराबाद, गोवा, जम्मू एवं कश्मीर, झारखंड आदि के स्टेडियम निर्माण में किए गए घोटालों का उन्होंने कभी संज्ञान लिया? क्या कार्रवाई हुई उन पर? स्वयं अनुराग घिरे हैं धर्मशाला स्टेडियम और होटल निर्माण को लेकर विवादों में। राज्य संघों को भेजी गई विपुल राशि का बोर्ड ने हिसाब मांगने की कभी जहमत उठाई? ठाकुर यह भी बताएं कि देश के राज्य क्रिकेट संघों से उनके कितने जिले जुड़े हैं? बोर्ड यह भी बताए कि आईपीएल प्रसारण अधिकार दिलाने की एवज में करोड़ों की राशि शरद पवार के दामाद सुले को बतौर स्वेट (पसीना) मनी कैसे दी गई? शशि थरूर को मंत्रीमंडल से क्यों इस्तीफा देना पड़ा था? उनकी महरूम पत्नी सुनंदा पुष्कर मौत से पहले कौन सा राज खोलने वाली थीं आईपीएल का? उसको भी उपकृत करने के लिए करोड़ों की रकम कैसे दी गई? ये तमाम सवाल अभी तक अनुत्तरित हैं। मुद्गल समिति की जांच रिपोर्ट में संदिग्ध 15 खिलाडिय़ों और प्रशासकों की जो सूची बंद लिफाफे में कोर्ट को सौंपी थी, उसका क्या हुआ? देश यह जानने के लिए बैचेन है। 19 जनवरी को सर्वोच्च न्यायालय की ओर से बोर्ड के कामकाज के संचालन हेतु जो समिति गठित होगी, उम्मीद है कि उसमें सभी काबिल ही नामित होंगे और बोर्ड का पुनर्सुधार देश के अन्य सभी खेल संघों के लिए लाइट हाउस का काम करेगा और केंद्र सरकार जो भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग छेड़े हुए है, सफाई अभियान में पूरा सहयोग और समर्थन देगी। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की चुप्पी कम खलने वाली नहीं है। उनको भी कोर्ट के आदेशानुसार गुजरात क्रिकेट संघ के सदर पद से तत्काल इस्तीफा देना चाहिए, समय की यही मांग भी है।   साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली । निर्वाचन आयोग ने 5 राज्यों में चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। चीफ इलेक्शन कमिश्नर नसीम जैदी ने बुधवार दोपहर प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसका ऐलान किया। उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव होने हैं। उत्तर प्रदेश में सात चरणों में चुनाव होंगे। मणिपुर में दो चरणों में चुनाव होंगे। वहीं पंजाब, गोवा और उत्तराखंड और एक-एक चरण में चुनाव होंगे। सभी राज्यों के नतीजे 11 मार्च को आएंगे। चुनाव की घोषणा के साथ ही इन पांचों राज्यों में आचार संहिता लागू हो गई है।  उत्तर प्रदेश में सात चरणों में चुनाव उत्तर प्रदेश में सात चरणों में चुनाव होंगे। प्रथम चरण में 15 जिलों की 73 सीटों के लिए 11 फरवरी को मतदान होगा। दूसरे चरण के लिए 11 जिलों की 67 सीट पर 15 फरवरी को मतदान होगा। तीसरे चरण में 12 जिलों की 69 सीट 19 फरवरी को मतदान होगा। चौथे चरण में 12 जिलों की 53 सीट पर 23 फरवरी को मतदान होगा। पांचवें चरण में 11 जिलों की 62 सीट पर 27 फरवरी को मतदान होगा। छठवें चरण में 7 जिलों की 49 सीट पर 4 मार्च को मतदान होगा। वहीं सातवें और अंतिम चरण के लिए 7 जिलों की 40 सीट पर 8 मार्च को मतदान होगा। पंजाब- गोवा में एक चरण में मतदान पंजाब में 4 फरवरी को एक चरण में मतदान होगा। उत्तराखंड में भी एक चरण में 15 फरवरी को मतदान होगा। गोवा में भी एक चरण में 4 फरवरी को मतदान होगा। वहीं मणिपुर में दो चरणों में मतदान होगा। यहां 4 मार्च और 8 मार्च को मतदान होगा।  चुनाव आयोग साफ तौर पर चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि 16 करोड़ से ज्यादा लोग चुनावों में हिस्सा ले रहे हैं। मतदाताओं को कलरफुल वोटर गाइड भी उपलब्ध कराई जाएगी। पोलिंग बूथ के बाहर सभी जानकारियों पोस्टर पर दी जाएंगी। इसपर नियमों का उल्लेख होगा। मतदाताओं के सहयोग के लिए भी बूथ बनाए जाएंगे। चुनाव आयोग ने कहा कि गोपनीयता बनाए रखने के लिए 30 इंच ऊंची स्टील और अन्य सामग्री से बनी छोटी केबिन का इस्तेमाल किया जाएगा। मतदान को दिव्यांगों के अनुकूल बनाया जाएगा। उन्होंने कहा है कि सभी क्षेत्रों में मतदान जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा। गोवा में वोट डालने के बाद एक पर्ची दी जाएगी।  चुनाव आयोग की इस बार अनूठी पहल की है। डिफेंस, पैरा मिलिट्री फोर्सेस में तैनात जवान इलेक्ट्रॉनिक पोस्टल बैलट से वोट डाल सकेंगे। उन्होंने कहा कि उम्मीदवारों को नॉमिनेशन पेपर पर फोटो लगाना होगा और उनको भारत का नागरिक होना चाहिए। कुछ जगहों पर महिलाओं के लिए अलग से पोलिंग बूथ बनाए जाएंगे। चुनाव प्रचार के दौरान ध्वनि प्रदूषण और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली सामग्रियों पर प्रतिबंध होगा। चुनाव आयोग ने कहा कि रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउड स्पीकर पर रोक रहेगी। केंद्र की पैरामिलिट्री फोर्स को तैनात किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में 28 लाख चुनाव में खर्च की सीमा होगी। मणिपुर में उम्मीदवार 20 लाख रुपये खर्च कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि उम्मीदवारों को बैंक में अकाउंट खोलवाना होगा और चंदे को यहां जमा कराना होगा। चुनाव आयोग सोशल मीडिया को सपॉर्ट करेगी। इसका इस्तेमाल प्रशासनिक स्तर पर किया जाएगा। मीडिया मॉनिटरिंग कमिटी ध्यान रखेगी कि किसी उम्मीदवार की पब्लिसिटी तो नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि कई जगहों पर ईवीएम पर नाम के साथ उम्मीदवारों का फोटो भी दिखेगा।    साभार-khaskhabar.com  

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