नई दिल्ली । विवादास्पद धर्म प्रचारक जाकिर नाईक की मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रही है। जाकिर नाईक देश में युवाओं का धर्म परिवर्तन कराता था। यह चौंकाने वाला खुलासा जांच में जुटीं पुलिस ने किया है। खबर है कि 50 हजार रुपए लेकर धर्म परिवर्तन कराया जाता था। बताया जा रहा है कि अब तक 800 से ज्यादा लोगों का धर्म परिवर्तन करवाया गया है। सूत्रों के मुताबिक जाकिर के करीबी आर्शी कुरैशी और रिजवान मिलकर धर्मान्तरण का काम करते थे। नाईक के भाषणों से प्रभावित लोग जब आईआरएफ से धर्मपरिवर्तन के लिए संपर्क करते थे, उस वक्त आर्शी कुरैशी उन्हें मुंबई बुलाता था। रिजवान उन्हें मुंबई से पहले पनवेल स्टेशन पर उतार लेता था। उनके ठहरने-खाने-पीने का इंतजाम करता था। साथ ही उनकी शादी और धर्मान्तरण से जुड़े कागजातों के इंतजाम का जिम्मा भी रिजवान पर था। इसके एवज में रिजवान जाकिर नाईक की संस्था आईआरएफ से वाउचर देकर बिल के तौर पर पैसे लेता था। अब पुलिस इस मामले की जांच में जुटी हुई है कि क्या धर्मान्तरण के बाद इन लोगों को आईएस में शामिल होने सीरिया भेजा जाता था। उधर, जाकिर नाईक अपने ऊपर लग रहे आरोपों से लगातार पल्ला झाड रहा है। नाईक ने खुद को मीडिया ट्रायल का शिकार होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भारत लौटने और सरकारी एजेंसियों के सभी सवालों का जवाब देने के लिए मैं तैयार हूं। लेकिन में यहां सिर्फ इसलिए नहीं लौटूंगा, क्योंकि मीडिया चाहता है कि मुझसे पूछताछ की जाए। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार नाईक ने अपने ऊपर लगे आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि मैंने कभी आतंकवाद का समर्थन नहीं किया और कभी करूंगा। कुरान का हवाला देते हुए बोले कि जो किसी बेगुनाह की हत्या करता है, वह पूरी मानवता की हत्या करता है।
ये भी आरोप
बताया जा रहा है कि ढाका आतंकी हमले में शामिल दो युवक डॉ जाकिर नाईक के विचारों और भाषणों से प्रभावित थे। सवाल उठा है कि क्या ढाका हमले के लिए तैयार बारूद का फॉर्मूला मुंबई में बना? जाकिर आतंकी कनेक्शन को लेकर पहले भी चर्चा में रहे हैं। 7/11 बम धमाकों में एक आरोपी राहिल रिसर्च फाउंडेशन में आता था। हालांकि जांच में फाउंडेशन के खिलाफ कुछ नहीं मिला और रिसर्च सेंटर बदस्तूर जारी है।
कौन है जाकिर नाईक
प्रभावी सलाफी विचारक हैं। मुंबई स्थित मझगांव के सेंट पीटर स्कूल, केसी कॉलेज में पढ़ाई करने के बाद डॉक्टरी की पढ़ाई टोपीवाला नेशनल मेडिकल कॉलेज और बीवाईएल नायर चेरिटेबल हॉस्पिटल से की। 1991 में धार्मिक तकरीर देने का काम शुरू किया और इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन की स्थापना कर इसके प्रेजीडेंट बने। उनकी तकरीर पीस टीवी चैनल पर प्रसारित होती है। यह चैनल इनको अपना ब्रांड अंबेसडर कहता है। गैरकानूनी तरीके से कई केबल ऑपरेटरों द्वारा इसका प्रसारण किया जाता है। उन्होंने इस्लाम पर लेक्चर की अपनी कुई बुकलेट प्रकाशित की हैं। वह मझगांव में इस्लामिक इंटरनेशनल स्कूल चलाता है।
साभार-khaskhabar.com
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