मथुरा

मथुरा। थाना व कस्बा बरसाना क्षेत्र में बीतीरात अज्ञात चोरों ने एक दुकान का शटर तोड़कर लाखों रूपये का माल चोरी कर लिया। घटना की जानकारी सुबह तब हुयी जब पास के लोगों ने दुकानदारों को फोन कर घटना की जानकारी दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने दुकान का निरीक्षण कर दुकानदार से तहरीर ले ली है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है।  मिली जानकारी के अनुसार बीतीरात बरसाना कस्बा स्थित बरेली भवन मार्केट में चोर ने फोटोग्राफर की दुकान का शटर तोड़कर लाखों रूपये का सामान चोरी कर लिया। स्टूडियो संचालक धर्मेन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि रात आठ बजे वह दुकान बंदकर घर चला गया। सुबह पड़ोसी दुकानदार ने फोन कर बताया कि दुकान पर ताला नहीं है शटर टूटा हुआ है। दुकान पहुंचे तो ताला टूटा हुआ था। दुकान से स्टील कैमरा, वीडियो कैमरा, कंप्यूटर, दो प्रिंटर, लेमिनेशन मशीन, इन्वर्टर, बैटरी व गल्ले से 15 हजार रूपये गायब थे। घटना को लेकर पुलिस को जानकारी दे दी गयी है। सूचना पर पहुंची पुलिस ने दुकानदार से तहरीर ले मामले की जांच में जुट गई है। 

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डीएम-एसएसपी का निलंबन कर हो जांचः माथुर मथुरा। जवाहरबाग की घटना प्रदेश सरकार के लिये बड़ा सबक है। यह तत्कालीन डीएम और एसएसपी की चूक का नतीजा है। आज मंगलवार लखनऊ में पत्रकारों से बात करते कांग्रेस विधानमण्डल दल के नेता और मथुरा-वृन्दावन के विधायक प्रदीप माथुर ने सीएम अखिलेश यादव पर आरोप लगाते कहा कि इस घटना में डीएम-एसएसपी का स्थानान्तरण कोई दण्ड नहीं है, मात्र दिखावा है। जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों को निलंबित करके जांच करनी चाहिये थी। सरकार को हाईकोर्ट के पदासीन न्यायाधीश से जांच करानी चाहिये ताकि पता चल सके कि जवाहरबाग में रामवृक्ष यादव और उसके साथ रह रहे चार हजार लोगों को किसका संरक्षण प्राप्त था। जब चार जून को बाग खाली कराये जाने का आदेश था तो दो जून को बिना तैयारी के एसपी सिटी को वहां क्यों भेजा गया? भारी मात्रा में वहां हथियार और गोला बारूद इकटठा होना खुफिया विभाग की विफलता उजागर करता है। उन्होंने कहा कि केवल डीएम-एसएसपी के तबादल से कुछ होने वाला नहीं है। मथुरा में व्यापक स्तर पर पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों में फेरबदल की जरूरत है। जवाहरबाग में रह रहे लोगों के वोटर आईडी कार्ड और आधार कार्ड कैसे बन गये? यह जांच की बात है।    बॉक्स  राष्ट्रीय लोकराज पार्टी के संयोजक मनोज चौधरी ने जवाहरबाग प्रकरण की जांच करने आये अलीगढ के कमिश्नर द्वारा पार्टी की ओर से दिये गये न्यायिक जांच की मांग के आवेदन को लेने से मना कर दिया।  इस आवेदन में डीएम-एसएसपी की भूमिका पर सवाल उठाये गये और उनकी बर्खास्तगी की मांग की गयी थी। जांच अधिकारी का ऐसा व्यवहार देख राष्ट्रीय लोकराज पार्टी का प्रतिनिधिमण्डल सन्न रह गया। उन्होंने कहा कि अन्य माध्यमों से इस मांग को राष्ट्रपति तक पंहुचायेंगे। उन्होंने कहा कि एसपी सिटी के सुरक्षा गार्डों को तुरंत बर्खास्त किया जाये। डीएम-एसएसपी घटना के समय देरी से क्यों पहुंचे? पूरे प्रकरण की वीडियोग्राफी क्यों नहीं करायी गयी? एसपी सिटी को अकेले क्यों भेजा गया? आदि दस सूत्रीय मांगपत्र शासन को भेजा है। बॉक्स  भुलाया नहीं जा सकता बलिदान इण्टक नेता ताराचन्द्र गोस्वामी ने जवाहरबाग में शहीद हुये मुकुल द्विवेदी और संतोष यादव के बलिदान को न भुलाने वाला बताते कहा कि मथुरावासी उनका ऋण कभी नहीं चुका पायेंगे। जवाहरबाग में उनकी प्रतिमा लगायी जाये जिससे उन्हें हमेशा याद किया जा सके और घटना की सीबीआई से जांच करायी जाये। इस अवसर पर अन्नू शर्मा, लोकेश शर्मा, गोपाल कुंतल, मनोज शर्मा आदि उपस्थित थे। बॉक्स  जयगुरूदेव मंदिर की जांच हो मथुरा। ब्रज मण्डलीय क्षत्रिय राजपूत महासभा के अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह की अध्यक्षता में शोक सभा हुयी जिसमें जवाहरबा में हुये खूनी संघर्ष में मारे गये एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और एसओ संतोष यादव की शहादत पर उन्हें नमन किया गया और संपूर्ण प्रकरण की सीबीआई से जांच की मांग की तथा जयगुरूदेव मंदिर की भी जांच कराने की मांग की। इस मंदिर को खाली कराकर सरकार वहां कब्जा ले। अंत में दो मिनट का मृतात्माओं की शांति हेतु मौन रखा गया। शोकसभा में भजन सिंह सिंसादिया, रमेश सिंह, लतासिंह चौहान, थान सिंह, कुशकुमार सिंह, समय सिंह, अटल सिंह, दिवाकर सिंह, महावीर सिंह मौजूद थे।

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मथुरा। जवाहरबाग काण्ड के वहां आज रविवार यहां का जायजा लेने पंहुची केन्द्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति को जवाहरबाग में नहीं जाने दिया गया। एसपी सिटी के घर जाने के बाद वह जवाहरबाग की ओर निकलीं लेकिन जैसे ही उनका काफिला जवाहरबाग के गेट पर पंहुचा तो पुलिस ने उनको वहीं रोक दिया। वह काफी देर तक अंदर जाने के प्रयास में लगी रहीं लेकिन पुलिस के अधिकारियों ने उन्हें अंदर जाने नहीं दिया। इस दौरान उनकी पुलिस के अधिकारियों से काफी देर तक बहस भी हुयी लेकिन उन्हें बैरंग लौटना पड़ा। जवाहरबाग के अंदर नहीं जाने पर सांसद निरंजन ज्योति ने पुलिस अधिकारियों से कहा कि अगर इतनी सख्ती वो पहले ही दिखा देते तो यह घटना आज नहीं होती। हमें अंदर जाने के लिये जो सख्ती दिखाकर तहकीकात की जा रही है वह सही नहीं है। अगर पहले ही ध्यान दे देते तो घटना से बचा जा सकता था। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने इस मामले में जरा भी रूचि नहीं ली। अराजक तत्वों को इस घटना को अंजाम देने में सरकार ने पूरी मदद की है। दो वर्ष तक सरकार ने इस ओर देखा भी नहीं। यहां लग्जरी गाड़ियां आती जाती थी उन्हें कभी रोकने का प्रयास नहीं किया गया। अब तो यह भी साबित हो गया है कि यहां हथियार लाये जाते थे। उन्होंने घटना की उच्च स्तरीय जांच की मांग की।

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डीएम, एसएसपी के लिये बयान मथुरा। जवाहरबाग की घटना की जांच सौंपे जाने के बाद आज अलीगढ मण्डल के आयुक्त चन्द्रकांत मथुरा आये और उन्होंने पीडब्ल्यू डी गैस्ट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते कहा कि मुझे यहां की जांच सौंपी गयी है और मैं पूरी निष्पक्षता के साथ ये जांच कर शासन को इसकी रिपोर्ट पेश करूंगा। चूंकि अभी मुझे इसके बारे में प्राथमिक जानकारी ही है, यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा कि इसमें कौन दोषी है। हां इतना जरूर है कि पुलिस-प्रशासन की इसमें चूक रही है। बताया कि हमने डीएम और एसएसपी तथा एडीएम से बातें की हैं और उनके बयानों को दर्ज किया है। साथ ही कुछ पत्रकारों द्वारा भी अपने बयान दर्ज कराये गये हैं और कुछ साधारण लोग भी हमारे पास आये और इस संबंध में अपनी जानकारी हमें बतायी है। 15 दिन के अंदर जांच की रिपोर्ट शासन को भेज दी जायेगी। सरकार ने ऐसी घटनाओं को रोकने के लिये सुझाव मांगे हैं। पत्रकारों ने जब उनसे यह पूछा कि प्रशासन द्वारा एसपी के साथ पूरी फोर्स क्यों नहीं भेजी? तो वे इस बात को टाल गये और कहा कि इसका जबाव तो जिला प्रशासन ही देगा। 

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शहीद पुलिस अधिकारियों को मौके पर छोड़ने वाले भी आने चाहिये सामने मथुरा। जवाहरबाग प्रकरण में साहस का परिचय देकर शहादत देने वाले दोनों पुलिस अधिकारियों की मौत को लेकर अब जनपद में तरह-तरह के सवाल लोग खड़ा करने लगे हैं। लोगों का कहना है कि इस पूरे प्रकरण में डीएम और एसएसपी की भूमिका की भी जांच होनी चाहिये और तब तक उन्हें यहां से हटा देना चाहिये ताकि वे जांच को प्रभावित न कर सकें। वहीं जवाहरबाग ऑपरेशन में साहसी दोनों पुलिस अधिकारियों को अकेला छोड़ने वाले कुछ पुलिस के अधिकारियों और उनके साथ गयी पुलिस टीम से भी पूछताछ होने पर पता चलेगा कि आखिर ये लोग कैसे उन दोनों को अकेला छोड़कर चले आये। वरिष्ठ अधिकारियों ने क्यों एसपी सिटी को अकेले वहां जाने दिया? यह ऐसे सवाल हैं जो आज जनमानस उठा रहा है। योजना को अमलीजामा पहनाने से पूर्व सुरक्षा व्यवस्था और हथियारों के माकूल बंदोबस्त न होने का परिणाम था कि दोनों की जान चली गयी। अब वरिष्ठ अधिकारी भले ही अपने आप को कितना भी सही बतायें लेकिन इन दोनों पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों की जरूर इस प्रकरण में चूक रही है। मुख्यमंत्री से लेकर तमाम जानकार भी इस तथ्य को सही मान रहे हैं। अगर बढिया योजना और पूरी ताकत से ऐसे दुष्टों पर हमला होता तो कम से कम दो लोकप्रिय अधिकारियों की जान नहीं जाती। कमिश्नर अलीगढ को जांच सौंपी गयी है और इस जांच में अभी तक ज्यादा पूछताछ भी नहीं हुयी है। इतनी बड़ी घटना के बाद भी प्रदेश सरकार और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस पहलू को गंभीरता से नहीं लिया। दोषियों के खिलाफ अभी तक कोई कार्यवाही न होने से भी लोग क्षुब्ध हैं। जनपद के लोग इस बात को जोरशोर से उठा रहे हैं कि जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी इस मामले में पूरी तरह असफल साबित हुये। भले ही रामवृक्ष जैसा आताताई और उसके प्रमुख कमाण्डर इस घटना में मारे गये हों लेकिन बड़े अधिकारियों को अब तक इसमें सजा आखिर क्यों नहीं दी गयी? रोज-रोज यह सवाल तेजी से उठ रहा है।

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मथुरा। राष्ट्रीय लोकदल के नेता कुँ. नरेन्द्र सिंह जिन्होने जवाहरबाग प्रकरण को लेकर लेखपाल और वकीलों के साथ मिलकर आताताईयों के विरूद्ध धरने-प्रदर्शन और आवाज बुलंद की थी। आज वे भी इस बात को मानते हैं कि इस घटना में डीएम-एसएसपी की भूमिका संदिग्ध रही है। वरना दो पुलिस के अधिकारियों की मौत नहीं होती। ताज्जुब इस बात का है कि आज तक इन दोनों अधिकारियों का तबादला सरकार ने क्यों नहीं किया? वहीं शहर कांग्रेस के अध्यक्ष आबिद हुसैन कहते हैं कि इस घटना में दोनों वरिष्ठ अधिकारियों ने बिना आपसी तालमेल के कैसे मुकुल द्विवेदी और अन्य लोगों को हल्के पुलिस बल के साथ भेजा? इन दोनों वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की जांच होनी चाहिये और तब तक इन्हें यहां से पद से हटा देना चाहिये। वरना ये लोग जांच को प्रभावित करेंगे, क्योंकि संपूर्ण प्रकरण की जांच अलीगढ कमिश्नर द्वारा की जा रही है। पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों का अब यहां रहना भी उचित नहीं है।

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मथुरा। केन्द्रीय मंत्री निरंजन ज्योति ने आज पीडब्ल्यू डी गैस्ट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुये कहा कि करीब 28 माह से जवाहरबाग पर कब्जा करे सपा के गुण्डों के साथ यदि सख्ती बरती जाती तो आज इस तरह की घटना न घटती। हमारे दो होनहार अधिकारी इन उपद्रवियों के हाथों मारे गये। इसका हमें भारी दुख है। जवाहरबाग में रसद और सोलर प्रोजेक्ट के लगाये जाने के पीछे सरकार के किसी बड़े मंत्री का हाथ है। यदि सरकार का संरक्षण न होता तो जवाहरबाग कब का खाली हो गया होता। 4 मार्च 1994 को एक दिन की परमीशन लेकर जवाहरबाग में ये उपद्रवी रूके थे लेकिन परमीशन खत्म होने के बाद जिला प्रशासन का दायित्व बनता था कि वे जवाहरबाग को खाली करायें लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया, क्योंकि इसके पीछे उन्हें प्रदेश सरकार का डर था। जवाहरबाग की जमीन हथियाने में सरकार शामिल है। कोर्ट के आदेश के बाद प्रदेश सरकार हरकत में आयी है। उन्होंने कहा कि घटना को चार दिन होने के बाद भी सरकार का एक भी नुमाइंदा यहां नहीं आया। घटना के आरोपी रामवृक्ष यादव को मरा हुआ दर्शाया गया है लेकिन उसका कोई शव आज तक पुलिस प्रशासन द्वारा बरामद नहीं कराया गया है। इससे सिद्ध होता है कि सरकार के इशारे पर प्रशासन कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से सरकार द्वारा कमिश्नर को जांच सौंपी गयी है, उसी तरह से यदि इस जांच में संसदीय कमेटी भी शामिल की जाती तो अच्छा रहता। हम इसकी जानकारी केन्द्र सरकार को देंगे और संसदीय समिति को जांच में शामिल कराने के लिये कहेंगे जिससे जांच निष्पक्ष रूप से हो सके।

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मथुरा। कोतवाली सुरीर अंतर्गत तेहरा पुल के पास तेजगति से आते एक ट्रक के चालक ने लापरवाही से वाहन चलाते दो लोगों में टक्कर मार दी जिससे दोनों गंभीर रूप से घायल हो गये और उपचार के दौरान उनकी मौत हो गयी। बताया गया कि ट्रक संख्या जीजे 12 1582 के अज्ञात चालक ने लापरवाही से वाहन चलाते तेहरा पुल के पास खड़े 41 वर्षीय राकेश और उसके साथी 32 वर्षीय हेमराज को टक्कर मारी जिससे  दोनों की मौत हो गयी। मृतक राकेश के भतीजे अनीश पुत्र रनवीर निवासी गढी बालकिशन मांट ने ट्रक चालक के खिलाफ रिपोर्ट लिखाई है।

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मथुरा। केन्द्रीय खाद्य एवं प्रसंस्करण मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने आज शहीद एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी के आवास पर जाकर उनके परिवार के लोगों से मुलाकात की। करीब एक घंटे तक यहां रहीं केंद्रीय मंत्री ने एसपी आवास पर शहीद के परिजनों को सांत्वना दी। वे जवाहरबाग को खाली कराने में अपनी जान की आहूती देने वाले शहीद एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी के मथुरा स्थित सरकारी निवास पर पंहुची और परिवार के लोगों को ढांढस बंधाते हुये सांत्वना दी कि केन्द्र सरकार उनके परिवार की मदद के लिये पूरी तरह तैयार है। इसके बारे में वे चर्चायें करेंगी और जितना संभव होगा मदद की जायेगी। उन्होंने पूरी घटना के पीछे प्रदेश सरकार को कठघरे में खड़ा करते कहा कि अगर सरकार पहले से ही चेत जाती तो यह घटना नहीं होती।

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मथुरा। भारतीय जनता पार्टी के सांसदों का छह सदस्यीय प्रतिनिधि मण्डल आज जवाहरबाग प्रकरण की पूरी जानकारी करने के लिये पंहुचा लेकिन जवाहरबाग के मुख्य द्वार पर पुलिस प्रशासन ने जब उन्हें रोका तो आपस में काफी जद्दोजहद हुयी। यहां तक कि पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह कह दिया कि आप मरे हुये लोगों पर राजनैतिक रोटियां सेंकने के लिये आये हैं। इस पर सांसद प्रतिनिधिमण्डल के लोग उग्र हो गये और उन्होंने कहा कि आज से ढाई साल पहले प्रशासन द्वारा इन लोगों को यहां से क्यों नहीं निकाला? आज जब एक सम्मानित प्रतिनिधि मण्डल यहां जाने के लिये आया है तो पुलिसबल द्वारा उसे रोका जा रहा है। प्रतिनिधि मण्डल में आये भाजपा के वरिष्ठ नेता कल्याण सिंह के पुत्र और एटा के सांसद राजवीर सिंह राजू भैया ने कहा कि जवाहरबाग प्रकरण की निष्पक्ष तरीके से जांच होनी चाहिये। हम केवल सौ कदम तक ही अंदर जाना चाहते थे जिससे वस्तु स्थिति हमारे सामने आ सके लेकिन प्रशासन न जाने क्यों हमें वहां जाने से रोक रहा है। सांसदों के प्रतिनिधिमण्डल में राजेश दिवाकर, राजेन्द्र अग्रवाल, विधायक मनीष सिसौदिया, राजवीर सिंह, वीएल वर्मा ब्रजप्रांत अध्यक्ष, धर्मपाल सिंह विधायक शामिल थे। मथुरा से पूर्व सांसद तेजवीर सिंह, पूर्व विधायक प्रणतपाल, पूर्व मंत्री रविकांत गर्ग, अजय पोईया आदि भी प्रतिनिधिमण्डल के साथ थे।

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