मथुरा

मथुरा। मथुरा के जवाहर बाग में अतिक्रमण हटाने के दौरान भडक़ी हिंसा पर उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) जावीद अहमद ने कहा कि फिलहाल जवाहर बाग पूरी तरह खाली करा लिया गया है। उन्होंने कहा कि जवाहर बाग में पुलिस पर हथियारों और लाठियों से हमला हुआ, इसके बावजूद पुलिस ने उपद्रवियों को कड़ी चुनौती दी। उपद्रवियों ने विस्फोटक और गोला-बारूद का इस्तेमाल किया। झोपडिय़ों में गैस सिलेंडर और विस्फोटक छुपा कर रखे गए थे। डीजीपी ने कहा कि पुलिस ने पहले शांतिपूर्ण हालात पर काबू पाने की कोशिश की लेकिन जब स्थिति बेकाबू हुई तो बल प्रयोग करना पड़ा। उन्होंने घटना में शहीद हुए एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और थाना प्रभारी संतोष यादव को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने शहीदों के परिवारों को सहायता देने की भी घोषणा की। उन्होंने बताया कि कार्रवाई के दौरान 22 उपद्रवियों की मौत हुई है। कई पुलिसकर्मी घायल भी हैं। तलाशी के दौरान 47 पिस्तौल और 5 राइफलें बरामद हुईं, जबकि करीब 150 जिंदा कारतूत बरामद किए गए हैं। उकसावे के बिना किया पुलिस पर हमला एडीजी लॉ एंड ऑर्डर दलजीत चौधरी ने बताया कि पुलिस ने जवाहर बाग से भारी मात्रा में कारतूस, राइफल और पिस्तौल बरामद किया गया है. इतना ही नहीं घटनास्थल से ग्रेनेड और बारूद भी बरामद हुए हैं। एडीजी ने बताया प्रदर्शनकारी गैर कानूनी गतिविधियों में शामिल थे। उन्होंने पुलिस के जवानों पर ही गोलियां चला दी। उपद्रवियों के खिलाफ जांच रिपोर्ट आते ही कड़ी कार्रवाई की जाएगी। 200 हमलावरों की पहचान हुई एडीजी लॉ एंड ऑर्डर ने यह जानकारी भी दी कि पुलिसकर्मियों पर हमला करने वाले 200 लोगों की पहचान की गई है जिन्हें जल्द ही गिरफ्तार कर उनके खिलाफ उचित कानूनी कार्यवाही की जाएगी। सीएम ने दिए जांच के आदेश  वहीं उत्तर प्रदेश के गृह सचिव मणि प्रसाद मिश्रा स्थिति का जायजा लेने के लिए मथुरा पहुंच गए हैं। दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। 11 जनवरी, 2014 से दे रहे हैं धरना बता दें कि सत्याग्रही संगठन धरने के नाम पर जवाहर बाग की जमीन पर कब्जा जमाए हुए है। वह महज बेतुकी मांगों को लेकर 11 जनवरी 2014 से वहां धरना दे रहा है।    साभार-khaskhabar.com    

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ऐसे समय में जब बॉलीवुड की कई सेलेब्रिटीज के रिश्ते बिखर रहे हैं, डेनियल वेबर के साथ जनवरी 2009 से विवाह बंधन में बंधी अभिनेत्री सनी लियोन का कहना है कि खुशहाल और सफल शादी का मंत्र समझौता है। इस साल फरहान अख्तर-अधुना भबानी और अरबाज खान-मलायका-अरोड़ा खान समेत कई बॉलीवुड सेलेब्रिटीज ने अपने रास्ते अलग करने का फैसला कर लिया।   सफल विवाह का राज पूछने पर सनी ने बताया, ‘‘सफल विवाह का राज विश्वास और समझौता है। मैं ‘हैप्पी वाईफ, हैप्पी लाईफ’ की कहावत में यकीन रखती हूं। लेकिन सफल शादी का मतलब समझौता, बिना शर्त प्यार, एक दूसरे के साथ संवाद और विश्वास है।’’ और पढ़े...    ‘एक पहेली लीला’ की अभिनेत्री ने जोर देकर कहा कि अच्छी और लंबे समय तक चलने वाली शादी के लिए समझौता बेहद जरूरी है। सनी का असली नाम करणजीत कौर वोहरा है।  सनी ने कहा, ‘‘समझौता सबसे ज्यादा जरूरी है क्योंकि आप हर बात पर सहमत होने के लिए बाध्य नहीं हैं। रिश्ता ऐसे ही निभता है।’’ सनी ने 2012 में कामुक थ्रिलर फिल्म ‘जिस्म 2’ से बॉलीवुड में अभिनय की पारी की शुरुआत की थी। उन्होंने एक बार कहा था कि उन्हें लगता है कि वह बॉलीवुड में बाहरी हैं।   हिंदी सिनेमा में नाम कमाने के बाद क्या अब भी उन्हें ऐसा लगता है? इस सवाल पर उन्होंने कहा, ‘‘मैं बॉलीवुड में कई अच्छे लोगों से मिली हूं और मैं इस बात के लिए खुश हूं।’’ सनी को शाहरुख खान अभिनीत ‘रईस’ के एक गीत के लिए भी लिया गया है। कहा जा रहा है कि सनी और शाहरुख पर फिल्माया गया यह गीत 1980 के हिट गीत ‘लैला ओ लैला’ का नया रूप है। मूल गीत फिरोज खान और जीनत अमान पर फिल्माया गया था।  सनी ने कहा कि शाहरुख के साथ काम करना उनके लिए सपना पूरा होने जैसा है। अभिनेत्री ने कहा, ‘‘यह बेहद शानदार और सपना पूरा होने जैसा था। उनके साथ काम करने को लेकर मैं बेहद उत्साहित हूं।’’ सनी ने कहा, ‘‘मुझे उनके साथ काम करके अच्छा लगा। यह मेरी खुशकिस्मती है।’’ कनाडाई अभिनेत्री की चार साल की बॉलीवुड यात्रा मिली-जुली रही।  फिल्म की असफलता के प्रभाव के बारे में सनी ने कहा, ‘‘बेशक, जब आप किसी फिल्म में काम करते हैं और उसके लिए पूरी मेहनत करते हैं, लेकिन वह सफल नहीं होती तो फर्क पड़ता है।’’ सनी युवाओं पर आधारित टीवी कार्यक्रम ‘एमटीवी स्पिलट्सविला सीजन 9’ की मेजबानी करती दिखाई देंगी। कार्यक्रम का प्रसारण 11 जून को होगा। उन्होंने कहा कि टीवी शो के नौंवे संस्करण में कुछ नई और रोचक स्थितियां हैं। सनी ने कहा कि रियेलिटी शो ‘एमटीवी स्प्लिट्सविला’ जिंदगी की सच्चाई दिखाता है। शो में पहले कई बार प्रतिभागियों के बीच जुबानी लड़ाई दिखाई गई थी। इस बारे में अभिनेत्री ने कहा कि ‘लोग परेशान हो जाते हैं और कई बार वे अपनी भावनाओं पर नियंत्रण नहीं रख पाते।’  साभार-khaskhabar.com

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मथुरा। मथुरा के कलेक्ट्रेट परिसर की दीवारों पर लिखी इबारत प्रशासन की विवशता की कहानी बयां कर रही है। जनवरी 2014 में डेढ़ हजार लोगों को मथुरा के प्रशासन ने दो दिन के लिए धरने की इजाजत दी थी, लेकिन दो साल बाद वही इजाजत और अनदेखी 24 लोगों की मौत का कारण बन गई।   रामवृक्ष यादव नाम के एक शख्स ने डेढ़ से दो हजार लोगों को इक_ा करके सुभाष चंद्र बोस और सत्याग्रह के नाम पर करोड़ों की जमीन कब्जा करने की सुनियोजित योजना बनाई। उसकी योजना में तडक़े का काम किया मथुरा के कुछ स्थानीय नेताओं और भूमाफियाओं ने। जानकार बताते हैं कि भू-माफियाओं की फंडिंग के चलते रामवृक्ष यादव ने जवाहर बाग के प्रवेश पर बाकायदा एक नाका लगाया और बाग में टहलने आने वालों से भारतीय नागरिक के प्रमाण मांगने शुरू कर दिए, जिसने विरोध किया उसको मारा-पीटा गया।   आजाद हिन्द बैंक से लेन-देन के नारे   यही नहीं, ‘आजाद हिन्द बैंक’ से लेन-देन के नारे लिखे गए। रामवृक्ष ने खुद को स्वाधीन सम्राट घोषित कर सिक्के चलाने की कोशिश की। कब्जा करने वाले इस मुख्य आरोपी पर दर्जनभर से ज्यादा मामले दर्ज होने के बावजूद इसे हटाने की ईमानदार कोशिश इन दो साल में नहीं की गई। स्टेट के रिट को चुनौती दी गई और प्रशासन वक्त बरबाद करता रहा।   आखिरकार मथुरा के लोगों ने अदालत का सहारा लिया। निचली अदालत के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे रामवृक्ष की याचिका को कोर्ट ने मई महीने में खारिज कर दिया और साथ ही निर्देश दिए कि इस अतिक्रमण को तुरंत हटाया जाए और पचास हजार रुपए रामवृक्ष से हर्जाने के रूप में वसूल किए जाएं। हाईकोर्ट की इस सख्ती के बाद यह कार्रवाई हुई। मगर पुलिस और स्थानीय खुफिया विभाग ने स्पष्ट रणनीति बनाकर काम नहीं किया। यदि पूरी रणनीति और तैयारी के साथ कार्रवाई की गई होती, तो शायद हमारे दो जांबाज पुलिस अधिकारियों और अन्य लोगों की जान नहीं जाती।   इतने हथियार कहां से आए?   सूत्र कहते हैं कि दो साल में कई डीएम आए लेकिन सब यही कोशिश करते रहे कि उनके कार्यकाल में किसी तरह यह मामला चलता रहे। गलतियों की यही चिंगारी शोले के रूप में हमारे सामने आ गई। एडीजीपी दलजीत चौधरी बताते हैं कि जवाहर बाग में तलाशी के दौरान तमाम असलहा और देसी बम तक बरामद हुए हैं, लेकिन इस बात का कई जवाब नहीं है कि कलेक्ट्रेट परिसर के बगल में और सेना की छावनी से मुश्किल से एक किमी की दूरी पर अपराधी और असलहा कैसे इक_ा हो गया। -   साभार-khaskhabar.com

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मथुरा। मथुरा के जवाहरबाग में गुरुवार को अतिक्रमण हटाने गई पुलिस और दंगाइयों के बीच हुई हिंसक झड़प में दो पुलिस अफसरों की मौत हो गई और कई पुलिस वाले जख्मी हो गए। इस दौरान 19 दंगाई भी मारे गए। इस झड़प में दंगाइयों ने पुलिस के खिलाफ राइफल, हथगोला आदि का खुलकर इस्तेमाल किया, जिससे पता चलता है कि दंगाई पूरी तैयारी के साथ बैठे थे। आपको यहां हम बताते हैं इस पूरे मामले के सरगना के बारे में, जिसके एक इशारे पर इतना बडा बवाल हो गया। यह सरगना है रामवृक्ष यादव नाम का एक शख्स, जो गाजीपुर का रहना वाला है।   रामवृक्ष 15 मार्च 2014 में करीब 200 लोगों के साथ मथुरा आया था और इसने प्रशासन से यहां रहने के लिए दो दिन की इजाजत ली थी, लेकिन दो दिन बाद भी वह यहां से हटा नहीं। शुरुआत में वह यहां एक छोटी सी झोपड़ी बना कर रहता था, धीरे-धीरे यहां पर और झोपडिय़ां बनीं, इसके बाद उसने 280 एकड़ भूमि पर अपनी सत्ता चलाने लगा। वह इतना ताकतवर हो गया कि प्रशासन भी उसका कुछ नहीं कर पा रहा था।       मथुरा में उसके खिलाफ 2014 से लेकर 2016 तक 10 से ज्यादा मुकदमें दर्ज हैं, जिसमें पुलिस अफसरों पर हमला, सराकरी संपत्ति पर अवैध कब्जा शामिल है। विजयपाल तोमर नाम के एक याचिकाकर्ता जब इस कब्जे के खिलाफ कोर्ट गए तो इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इसे खाली कराने का आदेश दिया। इसके बाद मई में रामवृक्ष यादव इस आदेश के खिलाफ कोर्ट पहुंचा तो कोर्ट ने उसकी याचिका खारिज करते हुए 50 हजार का जुर्माना भी लगा दिया। लगातार तीन दिन से पुलिस इस जगह को खाली करने की मुनादी कर रही थी।  इस दौरान रामवृक्ष यादव ने अपने कैंप में शूटरों और अपराधियों को रखना शुरू कर दिया। हैंड ग्रेनेड, हथगोला, रायफल, कट्टे, कारतूस छिपाकर जुटाए लिए गए।   जयगुरुदेव का शिष्य रह चुका है रामवृक्ष   रामवृक्ष यादव बाबा जयगुरुदेव का शिष्य रह चुका है। उसने जयगुरुदेव के विरासत के लिए भी दावेदारी की कोशिश की थी। जानकारी के मुताबिक, जयगुरुदेव के निधन के बाद विरासत के लिए तीन गुटों में टकराव हुआ। पंकज यादव और उमाकांत तिवारी के बीच टकराव हुआ और पंकज यादव उत्ताराधिकारी बना। वहां समर्थन न मिलने पर रामवृक्ष अलग गुट बनाकर मथुरा के जवाहरबाग में 280 एकड़ सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा जमाकर बैठ गया। कहा जाता है कि 5 हजार लोग उसके लिए काम करते थे। उसी कहने के पर इस पूरी झड़प को हिंसक रूप में अंजाम दिया गया।        साभार-khaskhabar.com

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नई दिल्ली। अपने संसदीय क्षेत्र मथुरा में जब गोलियां चल रही थी और सिटी एसपी और एसओ समेत 21 लोग इसमें मारे गए, सांसद हेमा मालिनी इन सबसे बेखबर रहीं और मुंबई में फिल्म शूटिंग में व्यस्त रहीं। हेमा मालिनी ने खुद ट्वीट कर शूटिंग की जानकारी दी है। इससे पता चलता है कि उन्हें मथुरा में चल रही हिसंक झड़प की खबर भी नहीं है।   शुक्रवार को हेमा मालिनी ने एक के बाद एक 6 ट्वीट कर फिल्म की शूटिंग के बारे में लोगों को बताया, लेकिन जैसे ही लोगों ने ट्विटर पर हेमा मालिनी पर निशाना साधना शुरू किया तो हेमा मालिनी की नींद टूटी और उन्होंने शूटिंग से जुड़े सारे ट्वीट डिलिट कर मथुरा में हुई हिंसा पर दुख जताया।       बता दें कि गुरुवार शाम को मथुरा के जवाहर बाग में पुलिस और जमीन पर अवैध कब्जा जमाए बैठे लोगों के बीच हिंसक भिड़ंत हुई। अतिक्रमण हटाने के दौरान दोनों तरफ से जबर्दस्त गोलीबारी हुई जिसमें थानेदार संतोष यादव और एसपी मुकुल द्विवेदी की मौत हो गई जबकि 40 से 50 पुलिस वाले जख्मी हो गए। 19 दंगाइयों की भी मौत की खबर है।   साभार-khaskhabar.com    

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मथुरा। जवाहर बाग संघर्ष समिति के लोग आज जवाहर बाग खाली कराने के लिए कलक्टेªट परिसर काफी संख्या में पहुंचे। और जिला प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। वहां मौजूद पुलिसबल ने उन्हें अंदर जाने से रोका तो जवाहर बाग संघर्ष समिति के लोग भड़क गए। उन्होंने नारेबाजी और तेज कर दी। सूचना पर पहुंचे एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी द्वारा दो दिन का समय मांगा गया जिस पर संघर्ष समिति के नेताओं ने सहमति जताते हुए प्रदर्शन को विराम दे दिया।  जवाहरबाग प्रकरण को लेकर संयुक्त संघर्ष समिति के लोगांे ने भारी भीड़ व महिला कार्यकर्ताओं के साथ हाथों में डण्डे लिये जवाहरबाग के गेट व कलैक्ट्रेट परिसर के पास बुधवार आज जमकर हंगामा काटा।  भारी भीड़ के साथ पंहुचे कार्यकर्ताओं को पेट्रोल पंप के पास ही पुलिस बैरियर लगाकर रोक दिया गया। वहीं महिला संगठनों से आयी कई कार्यकर्ता जवाहरबाग के गेट तक हाथों में डण्डे लिये कूच कर गयीं जहां उन्होंने नारेबाजी कर जवाहरबाग में घुसने की दिखावटी चेष्टा की। मौके पर मौजूद पुलिस बल ने उन्हें रोक लिया। शुरूआत में तो जवाहरबाग के आंदोलनकारी भी उग्र नजर आये लेकिन जैसे ही जवाहरबाग में मौजूद महिलाओं की टोली आगे आयी तो सभी पीछे हट गये। जवाहरबाग से महिला टोली गेट की तरफ बढने लगी वैसे ही आंदोलन को हवा देने वाली संघर्ष समिति की सदस्यों ने पीछे हटना शुरू कर दिया। मौके पर एक बार तो ऐसा प्रतीत हो रहा था कि जैसे आज बुधवार जवाहरबाग खाली हो जायेगा। पुलिस ने मुख्य मार्ग पर दोनों ओर से वाहनों का आवागमन रोक दिया। एक-दूसरे को बंदर घुड़की देने के बाद सामान्य हालत पैदा होने लगे। संघर्ष समिति के सभाध्यक्ष रामबाबू कटैलिया ने जिला प्रशासन को तुरंत बाग खाली कराने का अल्टीमेटम दिया जिसका करतल ध्वनि से समर्थन किया गया। आज की सभा में जवाहर बाग की आजादी तक खून बहेगा, सड़कों पर जैसे जोशीले नारे गूंजे। आज प्रदर्शन करने वालों में रालोद नेता कुँ. नरेन्द्र सिंह, रविन्द्र नरवार, जिला पंचायत सदस्य पीयूष धनगर, ताराचंद गोस्वामी, मान मंदिर के सुनील सिंह, राधाकांत शास्त्री, हरेश ठेनुआ, अनू शर्मा, अजय गौतम, अनीता सिंह, पे्रमवती, मायादेवी, मीना देवी, रीतराम सिंह, उदयवीर सिंह, ललित मोहन शर्मा, इन्द्रकुमार वशिष्ठ, खंजान सिंह, सुरेश भगत, आदि ने प्रदर्शन को संबोधित किया। जिला प्रशासन की मांग पर रामबाबू कटैलिया ने दो दिन का समय दिया है, जिसके बाद संघर्ष समिति भूख हड़ताल, और उग्र आंदोलन करने को मजबूर होगी। 

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