मथुरा

पिछले दो साल से जवाहर बाग में जबरन कब्जा जमाए और कथित सत्याग्रहियों को हटाने के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा की गई हीला-हवाली  और ढील का परिणाम आज सबके सामने है। इसके लिए सीधे तौर पर कौन-कौन जिम्मेदार है, यह अब सब 'जान' गए हैं।  जहां एक ओर राज्य की सपा सरकार इस मामले को स्थानीय प्रशासन की चूक बताकर अपना पल्ला झाड़ रही है वहीं पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों की कमिश्नरी जांच की बात कहकर उसे चुप्पी साधने का अचूक बहाना भी मिल गया है।  भले ही उनका यह बहाना अचूक है परंतु उनकी अंतर्आत्मा हर पल इसी बात पर उनको झकझोरती जरूर होगी कि यह एक चूक तो है, और  यदि यह चूक न होती तो दो लोकप्रिय, ईमानदार जांबाज पुलिस अधिकारियों को अपनी जान न गंवानी पड़ती। इस घटना के बाद मीडिया  सहित कई समूह स्थानीय गुप्तचर शाखा के सिर पर ठीकरा फोड़ने में लग गए जबकि सत्यता यह है कि स्थानीय खुफिया इकाई ने अपनी  रिपोर्ट में स्पष्ट कर दिया था कि अंदर जो कुछ चल रहा है वह ठीक नहीं लेकिन लखनवी कॉल के चलते किस तरह इस खुफिया रिपोर्ट को नजरंदाज किया गया, यह कई सवाल खड़े करता है। इस घटना के लिए स्थानीय खुफिया इकाई को दोषी ठहराने वाले शायद यह भी भूल गए हैं कि पुलिस विभाग में सर्विलांस सेल और आईटी  सेल भी नाम की कोई शाखा भी है। सर्विलांस सेल वो शाखा है जो बड़े से बड़े शातिरों के मोबाइल नंबर हासिल करने के बाद उनकी लोकेशन  और विभिन्न नंबरों से बातचीत का ब्यौरा भी हासिल कर लेती है। सही मायनों में यदि रामवृक्ष यादव और उसके खास सिपासलारों के नंबर  ट्रेस करती तो निश्चित रूप से खुलासा होता कि वह किन लोगों के संपर्क में था। ऐसे लोग जो हजारों लोगों की प्रतिदिन रसद के लिए मोटी धनराशि उपलब्ध करा रहे थे। पुलिस चाहती तो रामवृक्ष के नंबरों को ट्रेस कर यह भी पता लगा सकती थी कि किन-किन नक्सलियों के  संपर्क रामवृक्ष से थे, जो जवाहर बाग के अंदर कथित सत्याग्रहियों को हथियार बनाने और मुकाबला करने की ट्रेनिंग दे रहे थे। पुलिस प्रशासन का इस ओर ध्यान न देना या जानबूझकर अनदेखी करना भी इस बात का बड़ा संकेत है कि रामवृक्ष यादव का राजनीतिक रसूख कितना गहरा था। अब बात करते हैं आईटी सेल की..., सभी अधिकारी रामवृक्ष यादव के मोबाइल नंबर से भली भांति वाकिफ थे, स्थानीय खुफिया इकाई द्वारा दी गई रिपोर्ट में उन्हें भली-भांति पता था कि जवाहर बाग में चंदन बोस और उसकी पत्नी द्वारा आईटी सेल का संचालन किया जा रहा था और दोनों ही फेसबुक और व्हाटसप के माध्यम से न सिर्फ लोगों को जोड़ रहे थे बल्कि 'विधिक सत्याग्रह' का प्रचार भी किया जा रहा था। आला अधिकारियों द्वारा आईटी सेल के माध्यम से यह जानने की कोशिश भी नहीं गई कि आखिर तथाकथित सत्याग्रहियों की मंशा  और 'मूवमेन्ट' क्या है...। यदि इस ओर गहनता से ध्यान दिया जाता तो शायद दोनों पुलिस अधिकारियों की जान बच सकती थी। इसका  एक उदाहरण है, 'फ्लैग सत्याग्रह जवाहर बाग' (https://www.facebook.com/flagsatyagrah.jawaharbagh.5) नाम से बनाया गया  फेसबुक पेज। इस फेसबुक पेज से सूचनाओं का आदान प्रदान किया जा रहा थ। इस फेसबुक पेज में एसपी सिटी पर हुए जानलेवा हमले से  लगभग आधा घण्टा पूर्व यानी 2 जून को 4 बजकर 28 मिनट पर तथाकथित सत्याग्रहियों द्वारा आक्रामक पोस्ट डाली गई जिसमें कहा गया  कि 'ब्रिटिश इंडियन गवरमेन्ट के कुत्तों, भारत भूमि नेता सुभाष चंद्र बोस की है', इस पोस्ट में मीडियाकर्मियों के 'डीएनए की जांच' की  बात के साथ-साथ उन्हें 'जयचंद की औलाद' भी कहा गया। इस पोस्ट में सभी को 'ब्रिटिश महारानी के पालतू कुत्ते' होने की संज्ञा भी दी  गई। 2 जून की शाम 4 बजकर 28 मिनट पर डाली गई यह पोस्ट आखिरी थी। यदि आईटी सेल इस ओर गंभीरता से ध्यान देता और बराबर  इसपर नजर रखता तो तथाकथित सत्याग्रहियों के इरादों और उनकी आक्रामकता के बारे में वे और ज्यादा जान सकते थे।  अब सवाल यह उठ रहा है कि इन संसाधनों के माध्यम से अपराधियों को पकड़कर अपनी पीठ ठोकने वाले पुलिस विभाग ने आतंक का पर्याय बन चुके रामवृक्ष यादव और उनके गुर्गो के घेरने के लिए इन उपलब्ध संसाधनों का प्रयोग तक क्यों नहीं किया..? ऐसी क्या मजबूरी  थी जो इस ओर से पुलिस विभाग आंख मूंदे रहा..? ये वे सवाल हैं जो कुछ और ही इशारा करते नजर आते हैं और इन इशारों को समझने  वाले भी चुप्पी साधे हुए हैं।

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गेलसेनर्किचेन (जर्मनी)। विश्व विजेता जर्मनी ने यूरो कप 2016 से ठीक पहले खेले गए अभ्यास मैच में हंगरी को 2-0 से हरा दिया। जर्मन टीम के लिए इस मुकाबले में एडम लांग और थॉमस मुलर ने गोल किए। यह यूरो कप से पहले जर्मनी का अंतिम अभ्यास मैच था। यूरो कप (यूरोपीयन चैंपियनशिप) का आयोजन 10 जून से 10 जुलाई के बीच फ्रांस में होगा।    उसे ग्रुप-सी के अपने पहले मैच में 12 जून को यूक्रेन से भिडऩा है। हंगरी को ग्रुप एफ में रखा गया है और उसे 14 जून को अपने पहले मैच में ऑस्ट्रिया से भिडऩा है। जर्मनी ने पिछले सप्ताह आगसबर्ग में स्लोवाकिया को एक अन्य दोस्ताना मैच में 3-1 से मात दी थी।    जर्मनी के कोच जोआकिम लोउ ने कहा कि हमें अभी कुछ चीजों पर काम करने की जरूरत है। टीम में उतनी ताजगी नहीं थी। अगले सप्ताह स्थिति अलग होगी। जर्मनी के मिडफिल्डर मारियो गोत्जे ने जीत के साथ अपना 24 वां जन्म दिन मनाया। जर्मन टीम अब मंगलवार को एवियन लेस बैंस के लिए रवाना हो जाएगी।   स्वीडन ने वेल्स को 3-0 से हरायास्टॉकहोम में खेले गए एक अन्य मैत्री मुकाबले में मेजबान स्वीडन ने वेल्स को 3-0 से हराया। स्वीडन की ओर से एमिल फोर्सबर्ग, माइकल लस्टिग व जॉन गुईडेटी ने गोल दागे। स्टार खिलाड़ी ज्लाटन इब्राहोमिविक ने भी जोरदार खेल दिखाया। पिछले सात मुकाबलों में स्वीडन की यह पहली जीत है।   इससे पहले स्वीडन ने अक्टूबर में फाइनल क्वालीफाइंग मुकाबले में अंडोरा को 2-0 से हराया था। स्वीडन को यूरो कप में ग्रुप बी के अपने पहले मैच में स्लोवाकिया से टक्कर लेनी है। दूसरी ओर वेल्स ने वर्ष 1958 के फीफा विश्व कप के बाद पहली बार किसी मेजर टूर्नामेंट के लिए क्वालीफाई किया है।  साभार-khaskhabar.com

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जयपुर । फलोदी, बाप व लोहावट के सिंचित क्षेत्रों में इन दिनों कृषि फार्मों पर करोड़ों रुपए कीमत के प्याज का स्टॉक पड़ा है लेकिन पर्याप्त भाव नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में भीषण गर्मी व बारिश के मौसम में यह प्याज खराब होने की आशंका को लेकर किसान काफी परेशान व मायूस नजर आ रहे हैं। फलोदी, बाप व लोहावट के सिंचित क्षेत्रों में करीब 15 हजार से भी ज्यादा कृषि फार्म हैं, जहां इस बार प्याज की बम्पर पैदावार हुई है। किसानों को इस बार काफी ऊंचे भावों की उम्मीद थी लेकिन यह उपज बाजार में आते ही प्याज के दामों में भारी गिरावट आ गई है। मंडी में इन दिनों प्याज प्रति मण (40 किलो) के 120 से 150 रुपए के भाव चल रहे है, जबकि इसकी लागत प्रति मण (40 किलो) की 200-250 रुपए आ रही है। सिंचित क्षेत्रों में तैयार प्याज की लागत कीमत भी नहीं मिलने से किसान काफी परेशान है। अगले एक-दो माह में भावों में बढ़ोतरी होने की उम्मीद लगाकर किसानों ने प्याज की उपज बाजार में बेचने की बजाए कृषि फार्मों पर ही स्टॉक कर रखी है। सभी कृषि फार्मों पर घास-फूस की सिरकियों से ढकी प्याज की ढेरियां नजर आती हैं। इन दिनों भीषण गर्मी का दौर चल रहा है और यदि बारिश हो जाती है तो कृषि फार्मों पर खुले आसमां के नीचे घास-फूस में रखा यह प्याज खराब होने की आशंका बनी हुई है।  साभार-khaskhabar.com

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पूर्व मिस यूनिवर्स व जानी-मानी अभिनेत्री लारा दत्ता यामाहा फसीनो मिस दीवा-मिस यूनिवर्स इंडिया 2016 का चेहरा व मेंटर (परामर्शदाता) होंगी। लारा ने यहां शनिवार रात बॉलीवुड ‘क्वीन’ कंगना रनौत संग इस सौंदर्य प्रतिस्पर्धा के चौथे संस्करण का आगाज किया।  यामाहा फसीनो मिस दीवा-मिस यूनिवर्स इंडिया 2016 का प्रसारण कलर्स इन्फिनटी चैनल पर सात-हिस्सों वाली रियलिटी टेली-सीरीज के रूप में होगा, जिसका उद्देश्य एक ऐसी विजेता को ढूंढना है, जो मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता में देश का प्रतिनिधित्व करे।   लारा ने प्रतियोगिता से जुडऩे के बारे में कहा, ‘‘मैं यामाहा फसीनो मिस दीवा 2016 के नए संस्करण के साथ वापसी कर बहुत उत्साहित हूं, जिसका लुक इस साल एकदम नया है।’’    भारत की ओर से पिछली बार मिस यूनिवर्स का खिताब वर्ष 2000 में लारा ने जीता था। उसके बाद से भारत की किसी प्रतिभागी के सिर यह ताज नहीं सजा।   सौंदर्य प्रतियोगिता के लिए लखनऊ, इंदौर, अहमदाबाद, कोलकाता, चंडीगढ़, पुणे, हैदराबाद, दिल्ली व बेंगलुरू जैसे शहरों में 17 जून से ऑडिशन शुरू हो रहे हैं और मुंबई में ऑडिशन के अंतिम चरण में संपन्न होंगे। सौंदर्य प्रतियोगिता के मुख्य प्रायोजक ‘यामाहा मोटर इंडिया सेल्स प्राइवेट लिमिटेड’ में बिक्री एवं विपणन के उपाध्यक्ष रॉय कुरियन ने कहा, ‘‘यामाहा फसीनो मिस दीवा-मिस यूनिवर्स इंडिया 2016 आधुनिक भारतीय महिलाओं के लिए अपने जुनून व आकांक्षाओं को पहचान दिलाने का उपयुक्त मंच है।’’   साभार-khaskhabar.com

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मथुरा। यूपी में मथुरा के जवाहर बाग में हुई हिंसा का मास्टरमाइंड रामवृक्ष यादव मारा जा चुका है। उसकी मौत के बाद कई चौंकाने वाले खुलासे हो रहे है। जवाहर बाग पर कब्जा जमाने यादव ने वहां अपनी अदालतें और जेल के बैरक तक बना लिए थे। जो लोग उसका कानून नहीं मानते थे, उन्हें वह सजा सुनाकर यातनाएं देता था।  यही नहीं रामवृक्ष आलाअधिकारियों को हडक़ाता भी था। रामवृक्ष की मौत के बाद सामने आए एक विडियो में वह समझौता कराने गए एडीएम पर बरसते नजर आ रहा है। सूत्रों के मुताबिक रामवृक्ष यादव की अगुआई में जवाहर बाग में एक समानांतर सरकार चलाई जा रही थी। ये लोग भारत के संविधान और कानून को नहीं मानते थे।   ट्रेनिंग के लिए बना रखी थी टीम   रामवृक्ष यादव के कैम्प में हथियार चलाने की ट्रेनिंग देने के लिए 20 लोगों की टीम थी। लोगों को फुसलाकर लाने के लिए 100 से ज्यादा ट्रेन्ड लोग थे। लोगों को एक वक्त का खाना मिलता था। यहां रामवृक्ष ने बैंक भी बना रखा था। जवाहरबाग में सस्ती दुकानें लगती थी और इसमें मथुरा शहर और गांव के लोग खरीदने आते थे।   लोगों को बंधक बनाकर रखता था   हिंसा में घायल एक शख्स ने बताया- यहां आने के बाद गलती का अहसास हुआ। मुझ जैसे कई लोगों को बंधक बनाया गया था। कई बार वापस अपने घर जाने की कोशिश की, लेकिन गेट पर तैनात उसके सिक्युरिटी वाले बाहर निकलने नहीं निकलने देते थे।   उम्र के हिसाब से मिलता था काम   हथियारों की ट्रेनिंग के लिए केवल 30 से 35 साल की उम्र के लोगों को ही चुना जाता था। इसके बाद के उम्र के लोगों को लाठी चलाना सिखाया जाता था। लाठी चलाना सिखाए जाने के दौरान ट्रेनर यह बताता था कि शरीर के सिर और पैर पर मारने से सामने वाला तुरंत काबू में आ जाएगा।   बाहरी आदमी या अधिकारी पर होता था हमला    आगरा जोन के आईजी दुर्गा चरण मिश्रा के मुताबिक, जवाहर बाग के अंदर इन लोगों ने अलग सल्तनत खड़ी कर रखी थी। हथियारबंद लोगों के तीन-चार ग्रुप भी बना लिए थे, जिसे वे बटालियन कहते थे। अगर कोई बाहरी आदमी या अधिकारी बाग के भीतर जाता तो ये लोग उस पर हमला कर देते थे। जिन लोगों के पास खाने को रोटी और सिर छुपाने को छत नहीं थी, उन्हें आजाद भारत विधिक वैचारिक क्रांति सत्याग्रही नाम के संदिग्ध संगठन का मुखिया रामवृक्ष यादव अपनी कब्जाई सल्तनत में पनाह देता था। लोगों को सत्याग्रह का पाठ पढ़ाया जाता था। दिलचस्प ये है कि अंदर के लोग एक तरह से नजरबंद रहते थे। आईजी ने बताया कि रामवृक्ष अपने अनुयायियों को भी बाहर नहीं जाने देता था। किसी का करीबी मिलने आता था तो उसे लिखित परमिट के जरिए एक-दो दिन के लिए ही बाहर भेजा जाता था। क्या वहां नक्सली इलाकों से भी लोग आते थे, इस पर आईजी ने कहा कि हां बिल्कुल, वहां छत्तीसगढ़ से भी लोग आते थे। उनका मकसद लोगों को धार्मिक कट्टपंथ या धार्मिक आतंकवाद, आप इसे चाहे जो कह लें, की तरफ ले जाना था। वे अपनी करंसी शुरू करने की योजना भी बना रहे थे।    तीन पुलिसवाले अब भी लापता    जवाहरबाग के खूनी संघर्ष में तीन पुलिसकर्मी अब भी लापता हैं, जिनकी तलाश हो रही है। गुरुवार को 280 एकड़ की जमीन से कब्जा हटाने की कार्रवाई के दौरान एसपी और एसओ समेत 24 लोगों के मरने की पुष्टि हुई है। मृतकों में दो महिलाएं हैं। पुलिस ने 116 महिलाओं समेत 320 लोगों को गिरफ्तार किया है। मुख्य आरोपियों की पहचान कर उन पर एनएसए लगाई जाएगी।    साभार-khaskhabar.com      

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लखनऊ। मथुरा में हुई हिंसा के जिम्मेदार रामवृक्ष यादव के मारे जाने की खबर आ रही है। सीएम कार्यालय के अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक जिस हिंसा में 24 लोगों की मौत हुई थी, उसमें रामवृक्ष के भी मारे जाने की आशंका जताई जा रही है। माना जा रहा है कि अखिलेश सरकार आज इस खबर की अधिकारिक पुष्टि कर सकती है।  हिंसा में दो पुलिस अधिकारियों समेत 24 लोगों की मौत हो गई है। केंद्र सरकार ने प्रदेश की राजधानी से 160 किलोमीटर दूर मथुरा में गुरुवार को हुई हिंसा पर एक रपट मांगी है।   अखिलेश यादव ने संवाददाताओं से कहा, यह एक गंभीर मामला है, जिसकी आयुक्त स्तरीय जांच होगी। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे न्याय के कठघरे में लाया जाएगा। मथुरा में गुरुवार शाम जवाहरबाग में अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान पुलिस और अक्रिमणकारियों के बीच हुई झड़प में पुलिस अधीक्षक मुकुल द्विवेदी समेत 24 लोगों की मौत हो गई है। 23 लोग घायल हुए हैं, जिनमें कुछ की हालत गंभीर है। झड़प में शामिल 250 लोगों को हिरासत में लिया गया है। शहर में तनाव पसरा है और भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया है कि मामले से निपटने में चूक हुई है।   उन्होंने कहा, अतिक्रमणकारियों से बातचीत के कई बार प्रयास किए गए, उन्हें चेतावनी दी गई, लेकिन जमीन खाली नहीं किया गया। इसमें चूक भी हुई है। गलती यह रही कि पुलिस वहां पूरी तैयारी के साथ नहीं गई। इसमें कई तरह के खतरे शामिल थे। किसी को नहीं पता था कि वहां कितना विस्फोटक है। इससे पहले, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मथुरा में खूनी खेल खेलनेवालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया।   मुख्यमंत्री ने ट्वीट किया, उत्तर प्रदेश सरकार मथुरा में हिंसा करने वालों के खिलाफ कानून सम्मत कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करेगी। आरोपियों की त्वरित सुनवाई होगी। यादव ने जान गंवाने वाले पुलिस अधिकारियों के परिजनों को सहयोग देने का वादा भी किया। उन्होंने ट्वीट किया, इन बहादुरों के परिजनों को मेरी तरफ से गहरी संवेदनाएं। मेरी सरकार उनके परिजनों को हर तरह का सहयोग सुनिश्चित करेगी। मुख्यमंत्री ने दोनों पुलिस अधिकारियों के परिजनों को अनुग्रह राशि के रूप में 50-50 लाख रुपये देने की घोषणा की। इस बीच, केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने मथुरा में हालात का जायजा लिया और राज्य सरकार को सभी तरह की मदद का आश्वासन दिया। सिंह ने ट्वीट किया, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से बात हुई और मथुरा में हालात का जायजा लिया। मैंने उन्हें केंद्र से हर तरह की मदद का भरोसा दिया। वहीं, भाजपा ने जोर देते हुए कहा कि मथुरा में हिंसा उत्तर प्रदेश में ध्वस्त कानून-व्यवस्था का जीता जागता सबूत है। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने नई दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा, उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। मथुरा केवल एक छोटा सा शहर नहीं है। यह क्षेत्र का एक केंद्र है, जहां भारी मात्रा में हथियार तथा विस्फोटकों को इक_ा किया गया। स्थानीय प्रशासन को कैसे इसकी भनक नहीं लगी? इस तरह की गलती कैसे हो सकती है। भाजपा सचिव श्रीकांत शर्मा ने स्थिति नियंत्रण से बाहर जाने देने के लिए अखिलेश सरकार को जिम्मेदार ठहराया। शहर के जवाहरबाग क्षेत्र में हुई घटना के बाद से शर्मा मथुरा में हैं।   शर्मा ने आईएएनएस से कहा, ये समाजवादी पार्टी के बदमाश थे, जिन्होंने तीन साल पहले जवाहरबाग इलाके में अतिक्रमण किया था और पुलिस को कार्रवाई की छूट नहीं दी गई थी। यह बिल्कुल लापरवाही का मामला है। शर्मा ने कहा, हम इस मामले की सीबीआई जांच की मांग करते हैं। इससे पहले, शर्मा ने इस मामले की न्यायिक जांच का मांग की थी। शर्मा स्वयं मथुरा के रहने वाले हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में अखिलेश सरकार के गठन के बाद से ऐसी 900 घटनाएं हुई हैं, जिनमें पुलिस को निशाना बनाया गया। उन्होंने कहा कि यह पहली घटना नहीं है। पहले आजमगढ़ और प्रतापगढ़ में भी इस तरह की घटनाएं हुई थीं। शर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश में महाजंगलराज है, जहां बदमाश पुलिसकर्मियों पर गोलीबारी करने से नहीं हिचकते हैं। मथुरा की सांसद हेमा मालिनी ने भी घटना की सीबीआई जांच की मांग की है।  साभार-khaskhabar.com        

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