नई दिल्ली । दिल्ली के उपराज्यपाल पद से अचानक इस्तीफा दे चुके नजीब जंग शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करने पहुंच गए हैं। गृह मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार एलजी का इस्तीफा अभी मंज़ूर नहीं हुआ है। अभी कानूनी प्रक्रिया चल रही है और तब तक वह पद पर बने रहेंगे। राष्ट्रपति दिल्ली से दस दिन के लिए बाहर हैं इसलिए जब तक उनका इस्तीफा आधिकारिक तौर पर मंजूर नहीं होता है, नजीब जंग पद पर बने रहेंगे। हालांकि सरकार इस मामले पर उनसे चर्चा कर सकती है।
इससे पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने राजीनिवास जाकर नजीब जंग से मुलाकात की। शुक्रवार सुबह हुई मुलाकात के बाद केजरीवाल ने इसे सिर्फ औपचारिक मुलाकात बताया। दोनों की मुलाकात एक घंटे तक चली। केजरीवाल से जब सवाल किया गया कि एक घंटे क्या बात हुई, तो उन्होंने कहा कि यह नाश्ते पर हुई मुलाकात थी। जंग के इस्तीफा के बारे में पूछे जाने पर केजरीवाल ने कहा, उन्होंने निजी कारणों से इस्तीफा दिया है। जंग के अचानक इस्तीफे के बारे में कोई विस्तृत जानकारी दिए बगैर उपराज्यपाल के कार्यालय ने गुरुवार को कहा था, वह शिक्षण की ओर लौटना चाहते हैं। हालांकि जंग के निर्णय को राजनीतिक गलियारों में हैरानी के रूप में देखा गया। उनके करीबी सूत्रों ने गुरुवार को कहा था कि आप सरकार के साथ अधिकार को लेकर अपने कटु रिश्ते के कारण उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया है और वह पिछले कुछ महीनों से पद छोडऩे पर विचार कर रहे थे।
गुरुवार को जब जंग के इस्तीफे की खबर सामने आई उस समय मुख्यमंत्री केेजरीवाल रांची में थे। केजरीवाल ने ट्वीट किया था, श्री जंग के इस्तीफे से मैं अचरज में हूं। उनके भविष्य की योजनाओं के लिए मेरी शुभकामनाएं। केजरीवाल ने शुक्रवार को राजनिवास के दूसरे गेट से अंदर गए जबकि अक्सर बैक गेट का इस्तेमाल करते हैं। सीएम केजरीवाल के बाद डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया नजीब जंग से मिले। मुलाकात के बाद सिसोदिया ने बताया कि उपराज्यपाल के पद से अचानक इस्तीफा देने पर उन्होंने कोई नाराजगी नहीं जताई है। उन्होंने यही कारण बताया है कि वह परिवार को समय देना चाहते हैं। एकेडमिक्स में वापस जाना चाहते हैं। पिछले एक साल से इस्तीफा देने की सोच रहे थे, लेकिन दिल्ली में चिकनगुनिया आदि, कुछ इस तरह के मामले होते रहे, जिसकी वजह से वह इस्तीफा नहीं दे पाए। वहीं, नजीब जंग के इस्तीफे के बाद से इस पर राजनीति भी तेज है। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन ने कहा कि भाजपा और केजरीवाल की वजह से एलजी को इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा। भाजपा दिल्ली में म्युनिसिपल चुनाव में तीसरे नंबर पर आने को पचा नहीं पाई या आरएसएस की तरफ से कोई दबाव आया कि उनको इस्तीफा देना पड़ा। अभी तक सब ठीक चल रहा था, तो एकदम से कैसे उनको इस्तीफा देने को कहा गया? वहीं, गृह राज्यमंत्री किरन रिजिजू ने कहा कि जंग जी ने इस्तीफा क्यों दिया है, यह वही बताएंगे। इसको लेकर अटकलें लगाना सही नहीं है। आप और कांग्रेस के लोग जब वह काम कर रहे थे, तो कहते थे कि उनको इस्तीफा देना चाहिए था, जब दे दिया तो कह रहे हैं क्यों दिया, पता नहीं वे लोग क्यों कूद पड़ते हैं। दिल्ली भाजपा के वरिष्ठ नेता विजेंदर गुप्ता ने कहा कि इतने आरोप-प्रत्यारोप लगे पर वह कभी अपसेट नहीं हुए थे। हम लोगों का एक डेलीगेशन उनसे मिला था तो लग नहीं रहा था कि वह इस्तीफा देंगे। उनको अभी इस्तीफा नहीं देना चाहिए था, दिल्ली को उनकी जरूरत थी। उन्होंने दिल्ली में बहुत सूझबूझ से काम किया है।
नए एलजी के लिए ये नाम हैं चर्चा में
गृह मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से खबर है कि एलजी पद के लिए नए नामों पर विचार जारी है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि 1969 बैच के आईएएस अधिकारी रहे अनिल बैजल को दिल्ली का अगला उपराज्यपाल बनाया जा सकता है। बैजल 2006 में शहरी विकास मंत्रालय के सचिव पद से रिटायर हुए थे। वह विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन के कार्यकारिणी समिति के सदस्य रह चुके हैं। केंद्र सरकार इस संस्थान के कई सदस्यों को वरिष्ठ पदों पर नियुक्त करती रही है, जिनमें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्य सचिव नृपेंद्र मिश्र प्रमुख हैं। बैजल के अलावा दिल्ली के अगले एलजी के लिए दिल्ली के पूर्व पुलिस कमिश्नर बीएस बस्सी और पुडुचेरी की मौजूदा उपराज्यपाल किरन बेदी के नाम की भी सुगबुगाहट है।
साभार-khaskhabar.com
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