मथुरा। उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक के आमंत्रण पर उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष और वरिष्ठ पत्रकार मोहन स्वरूप भाटिया ने राजभवन लखनऊ में उनसे भेंट की। भेंट में हुई साहित्यिक-सांस्कृतिक चर्चा के मध्य जब उन्होंने कहा कि ब्रज संस्कृति कृष्ण संस्कृति है तो महामहिम राम नाईक ने सहमति व्यक्त करते हुए कहा कि ब्रज संस्कृति ही भारतीय संस्कृति का मूल आधार है।उन्होंने कहा कि कृष्ण की राधा और गोपियों से निष्छल प्रीति से हर प्रदेश की संस्कृति प्रभावित हुई है। उनके प्रदेश महाराष्ट्र की और व्यक्तिगत रूप से उनकी ब्रज और भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अनन्य श्रद्धा भक्ति है। मोहन स्वरूप भाटिया द्वारा ब्रजभाशा के समृद्ध काव्य भण्डार और माधुर्य की चर्चा करने पर राज्यपाल ने बताया कि महाराश्ट्र के साहित्य पर लोक साहित्य और संस्कृति पर लोक संस्कृति की गहरी छाप है। यहाँ जन्म से लेकर विवाह तक के सभी संस्कार प्राचीन परम्परा के अनुसार सम्पन्न होते हैं। ब्रज की वर्तमान स्थिति पर प्रष्न किए जाने पर मोहन स्वरूप भाटिया ने बताया कि अब वृन्दावन में न तो वृन्दा का वन है और न गिरिराज गोवर्धन का पुराण वर्णित सौन्दर्य है, न गोकुल में गायों के समूह हैं और न महावन में महा वन है। न कदम्ब खंडी हैं, न अमराइयाँ। यमुना के तट पर तमाल वृक्ष नहीं है, यमुना भी प्रदूषित है। मोहन स्वरूप भाटिया ने इसी क्रम में बताया कि पिछले दो दशक मेें वृन्दावन तथा गोवर्धन के प्रति आस्था बढ़ने से इस स्थानों पर पैदल चलना भी कठिन हो गया है। गोवर्धन में मुड़िया पूनों पर पचासों लाख परिक्रमाथी आते हैं। इनके ठहरने की समस्या रहती है। भाटिया ने कहा कि मथुरा, वृन्दावन, गोवर्धन, बरसाना, गोकुल, नन्दगाँव, बलदेव आदि तीर्थस्थलों में मन्दिर मार्गों पर सार्वजनिक शौचालयों की व्यवस्था नहीं है। बस तथा ओटो में अंधाधुन्ध सवारियाँ भरी रहती हैं। बाजार अतिक्रमण से ग्रस्त हैं। पर्यटकों को रेलवे स्टेशनों आदि पर पर्यटन साहित्य भी उपलब्ध नहीं है, पर्यटन बंगलों की खस्ता हालत है। पर्यटकों के लिए पर्यटन विभाग की सेवाएँ लगभग षून्य हैं। मोहन स्वरूप भाटिया ने टूरिस्ट, पुलिस, रिवर पुलिस, कैंसर हाॅस्पिटल, प्रमुख मार्गौं पर शीतल जल व्यवस्था आदि के सुझाव भी दिये।
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