मथुरा

मथुरा। जनपद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डाॅ0 राकेश सिंह द्वारा आज सभी थाना प्रभारियों को अपने अपने थाना क्षेत्र में बैंक और बैंक के पास संदिग्ध व्यक्तियों की चैकिंग, बस स्टैण्ड व उनके पास संदिग्ध व्यक्तियों की चैकिंग, एवं अन्य कई भीड भाड वाले स्थानों पर चैकिंग, तीन सवारी, बिना हेल्मेट व संदिग्ध व्यक्तियों की चैकिंग के सम्बन्ध में निर्देश दिये गये। उक्त चैकिंग अभियान के दौरान जिले में 670 संदिग्ध व्यक्ति, 452 वाहन, 5 वाहन सीज, 87 चालान किये तथा 12350 रू0 शमन शुल्क वसूल किया गया तथा थाना कोसीकलाॅ में उक्त अभियान के दौरान दो संदिग्ध व्यक्तियों को 02 नाजायज चाकू सहित गिरफ्तार किया गया। जनता व जन प्रतिनिधियों द्वारा थाना प्रभारियों को सीयूजी नम्बर पर काॅल करने पर फोन नहीं उठाये जाने के कारण मिली शिकायतों में के सम्बन्ध में सभी थाना प्रभारियों को काठोर व दण्डात्मक कार्यवाही के चेतावनी दी तथा साथ ही चेतावनी दी कि भविष्य में कभी भी एसएसपी मथुरा द्वारा सीयूजी पर काॅल करके चैक किया जा सकता है। तथा फोन रिसीव न होने पर सम्बन्धित थाना प्रभारी के खिलाफ कठोर व दण्डात्मक कार्यवाही की जायेगी।

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क्या आप किसी वैसे शहर की कल्पना कर सकते हैं जिसकी सड़कों पर स्थित हर खम्भे पर कैमरे लगे हों, रात में पैदल यात्री के उपस्थित होने पर बल्व स्वत: जल जाए अन्यथा डिम हो जाए, सूर्य की रोशनी के अनुरूप घरों की लाइट घटाई-बढ़ाई जा सकें और शिक्षक की गैर-हाजिरी पर किसी दूसरे स्कूल का शिक्षक वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये पढ़ा सके। जी हां, मोदी सरकार की स्मार्ट सिटी परियोजना इसी कल्पना को साकार करने में जुटी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार ने शहरी भारत को रहन-सहन, परिवहन और अन्य अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस करने के इरादे से तीन महत्वाकांक्षी योजनाओं- स्मार्ट सिटीज, अटल मिशन फॉर रिजुवनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन (अमृत) और सभी को आवास योजना - का हाल ही में शुभारम्भ किया है। इन परियोजनाओं से देशवासियों की उम्मीदों को नयी उड़ानें मिलती नजर आ रही है और सपनों को संजीवनी। शहरी जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने, स्वच्छ पर्यावरण उपलब्ध कराने, परिवहन व्यवस्था को सुधारने, शहरों की छवि खराब करती झुग्गी झोपड़ियों को हटाने तथा उनमें रहने वाले लोगों को वैकल्पिक सुविधा मुहैया कराने के लिए शहरी संसाधनों, स्रोतों और बुनियादी संरचनाओं का सक्षम ढंग से विकास करना स्मार्ट सिटी परियोजना का प्रमुख मकसद है। इन परियोजनाओं के तहत 2022 तक सभी को आवास उपलबध कराने का लक्ष्य भी है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत की वर्तमान जनसंख्या का लगभग 31 फीसदी आबादी शहरों में बसती है और इनका सकल घरेलू उत्पाद में 63 फीसदी का योगदान हैं। ऐसी उम्मीद है कि वर्ष 2030 तक भारत की आबादी का 40 फीसदी हिस्सा शहरों में रहेगा और सकल घरेलू उत्पाद में इसका योगदान 75 प्रतिशत का होगा। इसके लिए भौतिक, संस्थागत, सामाजिक और आर्थिक बुनियादी ढांचे के व्यापक विकास की आवश्यकता है। ये सभी जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने एवं लोगों और निवेश को आकर्षित करने, विकास एवं प्रगति के एक बेहतर चक्र की स्थापना करने में महत्वपूर्ण हैं। स्मार्ट सिटी का विकास इसी दिशा में एक कदम है। इस मिशन में 100 शहरों को शामिल किया जाएगा और इसकी अवधि पांच साल (2015-16 से 2019-20) की होगी। उसके बाद शहरी विकास मंत्रालय द्वारा मूल्यांकन किए जाने एवं प्राप्त अनुभवों को शामिल किए जाने के साथ मिशन को जारी रखा जा सकता है। एक सौ स्मार्ट शहरों की कुल संख्या एक समान मापदंड के आधार पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच वितरित किया गया है। इस वितरण फार्मूला का इस्तेमाल कायाकल्प और शहरी परिवर्तन के लिए अमृत के तहत धनराशि के आवंटन के लिए भी किया गया है। शहरी विकास मंत्रालय ने यह तय कर दिया है कि देश के किस राज्य से कितने शहर स्मार्ट सिटीज प्रोजेक्ट के लिए चुने जाएंगे। जिसमें से सबसे ज्यादा 13 स्मार्ट सिटीज उत्तर प्रदेश में होंगी। तमिलनाडु के 12 और महाराष्ट्र के 10 शहरों को स्मार्ट सिटीज के तौर पर विकसित किया जाएगा। मध्य प्रदेश के सात और गुजरात और कर्नाटक के छह-छह शहर स्मार्ट सिटी बनेंगे। कुल मिलाकर देश भर में 100 स्मार्ट सिटीज विकसित करने की योजना है, लेकिन प्राथमिकता किसे मिलेगी, ये इंटर-सिटी कंपिटिशन में शहरों के स्मार्ट सिटी प्लान पर निर्भर करेगा। इस साल के आखिर तक 20 शहरों को स्मार्ट सिटीज के लिए चुना जाएगा, जबकि बाकी 80 शहरों के चयन का काम 2017-18 तक पूरा कर लिया जाएगा। रैंकिंग में सबसे ऊपर आए 20 स्मार्ट सिटीज के बाद बाकी 80 शहरों को खुद के प्लान में सुधार का मौका दिया जाएगा। 100 स्मार्ट सिटीज के अलावा देशभर से अब तक 476 शहरों की पहचान अमृत योजना के लिए की गई है। ये सारे शहर कम से कम एक लाख की आबादी वाले होंगे। इन शहरों को बुनियादी सुविधाएं विकसित करने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से मदद मिलेगी। स्मार्ट सिटी के वितरण की समीक्षा मिशन के कार्यान्वयन के दो साल बाद की जाएगी। चुनौती में राज्यों / शहरी स्थानीय निकायों के प्रदर्शन के आकलन के आधार पर राज्यों के बीच शेष संभावित स्मार्ट शहरों में से कुछ का पुनःआवंटन शहरी विकास मंत्रालय द्वारा किया जा सकेगा। स्मार्ट सिटी मिशन एक केन्द्र प्रायोजित योजना के रूप में संचालित किया जाएगा और केंद्र सरकार द्वारा मिशन को पांच साल में 48,000 करोड़ रुपये, करीब प्रति वर्ष प्रति शहर 100 करोड़ रुपये औसत वित्तीय सहायता देने का प्रस्ताव है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि व्यापक विकास भौतिक, संस्थागत, सामाजिक और आर्थिक बुनियादी ढांचे को एकीकृत करके ही होता है। सरकार की कई क्षेत्रीय योजनाएँ इस लक्ष्य की पूर्ति के लिए शामिल होती हैं, भले ही उनके रास्ते अलग हैं। शहरी योजनाओं के स्वरूप में बदलाव करके उन्हें अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस शहर में तब्दील करने में अमृत और स्मार्ट सिटी मिशन एक-दूसरे के पूरक साबित होने वाले हैँ। हर कोई चाहता है कि वे स्मार्ट सिटी के निवासी कहलाएं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक शहर आखिर स्मार्ट कब कहलाता है? इस सवाल का जवाब कुछ शब्दों में बांधा नहीं जा सकता, क्योंकि सरकार से लेकर इन योजनाओं पर काम करने वाली बहुराष्ट्रीय कम्पनियां और आम लोग सबका जवाब अलग-अलग होगा। हर शहर की अपनी संस्कृति और अपना चरित्र होता है। हर शहर की अपनी कुछ विशेषताएं होती हैं। कई शहर बसावट में ही काफी जटिल और दुर्गम होते हैं और कुछ शहर काफी सहज होते हैं। स्मार्ट सिटी शब्द सुनते ही सबसे पहले जो तस्वीर उभरती है वह कुछ ऐसी होती है—एक शहर जहां की जलवायु शुद्ध हो, लोग खुली हवा में सांस ले सकें। बिजली-पानी की सप्लाई 24 घंटे सुचारू हो, दिनभर लोगों को ट्रैफिक में न जूझना पड़े, सार्वजनिक यातायात उपलब्ध हो जो विश्व स्तरीय हो, बुनियादी सुविधाएं व्यापक हों। सड़कें, इमारतें, शापिंग माल, सिनेप्लैक्स सब कुछ योजनाबद्ध तरीके से बने हों। अनाधिकृत कालोनियों की सड़ांध मारती गलियां न हों। झुग्गी-बस्तियां न हों। कुछ ऐसा शहर दिखे जहां लोगों के रहन-सहन में समानता दिखे। भारत जैसे शहरों जिनकी सही मैपिंग तक उपलब्ध नहीं, जिनमें अवैध कब्जों की भरमार हो, शहरों का बेतरतीब निर्माण हो चुका हो, ऐसे शहरों को स्मार्ट बनाना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं। भविष्य के शहर में बिजली के ग्रिड से लेकर सीवर पाइप, सड़कें, कारें और इमारतें हर चीज़ एक एक नेटवर्क से जुड़ी होगी। इमारत अपने आप बिजली बंद करेगी, स्वचालित कारें खुद अपने लिए पार्किंग ढूंढेंगी और यहां तक कि कूड़ादान भी स्मार्ट होगा, लेकिन सवाल यह है कि हम इस स्मार्ट भविष्य में कैसे पहुंच सकते हैं? शहर में हर इमारत, बिजली के खंभे और पाइप पर लगे सेंसरों पर कौन निगरानी रखेगा और कौन उन्हें नियंत्रित करेगा। इसमें कोई संदेह नहीं है कि शहरों को स्मार्ट बनने की ज़रूरत है। एक अनुमान के मुताबिक साल 2050 तक दुनिया की 75 प्रतिशत आबादी शहरों में निवास करेगी, जिससे यातायात व्यवस्था, आपातकालीन सेवाओं और अन्य व्यवस्थाओं पर ज़बर्दस्त दबाव होगा। सच्चाई यह है कि दुनियाभर में इस समय जो स्मार्ट शहर बन रहे हैं वे बहुत छोटे हैं। इन शहरों के बारे में काफी चर्चा हो रही है लेकिन उनके पास ऐसी कोई तकनीक नहीं है जिससे वास्तव में लोगों की जिंदगी में बदलाव आ रहा है। हालांकि अगले पांच सालों में चीजें स्मार्ट हो जाएंगी, तब उन शहर का डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर ट्रेनों और सड़कों की तरह अहम हो जाएगा। ऐसा नहीं कि भारत स्मार्ट सिटी की ओर अग्रसर होने वाला पहला देश है, इससे पहले से कई देशों में स्मार्ट सिटी परियोजनाएं बेहतरीन तरीके से क्रियान्वित की जा चुकी हैं। भारत में भी यदि इसे संजीदगी से अमल किया जाए तो इसे मोदी सरकार की बेहतरीन पहल कही जा सकती है, बशर्ते सरकार सामंजस्य बिठाने के लिए गांवों को भी स्मार्ट बनाने का प्रयास करे। (लेखक पत्रकार हैं)

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काष्र्णिगुरू शरणानन्द जी महाराज सैकड़ो साधु-सन्तों के संग कुम्भ के लिये किया प्रस्थान प्रातः काल की वेला में हरिनाम संकीर्तन की तान के साथ पूज्य काष्र्णिगुरू शरणानन्द जी महाराज सैकड़ो साधु एवं भक्तों के साथ नासिक कुम्भ के लिये प्रस्थान किया। इस कार्यक्रम में यमुना मिशन के सैकड़ो कार्यकर्ता उपस्थित रहे। यमुना मिशन के कार्यकर्ताओं ने पूज्य गुरू शरणानन्द जी महाराज से आशीर्वाद लिया। कुम्भ में जाने वाले सभी भक्तों को विदा किया। यमुना मिशन के कार्यकर्ताओं ने गुरू शरणानन्द जी महाराज से मिशन के प्रचार प्रसार के लिये कुम्भ में जाने का आशीर्वाद लिया। नासिक कुम्भ में जायेगें यमुना मिशन के कार्यकर्ता यमुना मिशन के कार्यकर्ताओं द्वारा नासिक कुम्भ में जाने का कार्यक्रम तय किया गया। यमुना मिशन द्वारा मिशन से देशभर के लोगो को जोड़ने के लिये नासिक कुम्भ में जाकर लोगो को मिशन से जोड़ा जायेगा।  पं. अनिल शर्मा ने बताया कि मिशन द्वारा कुम्भ में जगह जगह केनोपी लगा लोगो को मिशन के विषय में अवगत कराया जायेगा। इसके साथ ही कुम्भ में मिशन से जुड़ने वाले नये कार्यकर्ताओं का रजिस्ट्रेशन भी किया जायेगा। इस अवसर पर स्वामी हरदेवानन्द जी, हरिओम, सुनील शर्मा, गीता शर्मा, राजेश तिवारी, मुकेश ठाकुर, लपूटी गुरू, रिचा शर्मा आदि उपस्थित रहे।

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आचार्य प्रवर स्वामी ए.एस. विज्ञानाचार्य जी महाराज के पावन सान्निध्य में तथा यमुना रक्षक दल व चेतना बोध मिशन के संयुक्त तत्वाधान में 5 अगस्त से 31 अगस्त 2015 तक गोविन्द मठ वृन्दावन में 27 दिवसीय ब्रज महोत्सव के अन्तर्गत आज दिनांक 24 अगस्त को चैमुहां ब्लाॅक के ग्राम सैनवा में ब्रज महोत्सव मनाया गया। ब्रज महोत्सव के उपरान्त यमुना रक्षक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष संत जयकृष्ण दास ने ग्रामवासियों के सहयोग से सैनवा गाँव के श्याम कुण्ड की सफाई की। यह कुण्ड गाँव का सबसे प्राचीन व कृष्णकालीन कुण्ड माना जाता है जबकि इस कुण्ड में ढेर सारा मलवा, कीचड़, जलकुंभी इत्यादि जमा हुआ था। सफाई के दौरान यह सभी हटाये गये। यमुना रक्षक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष संत जयकृष्ण दास ने कहा कि कुण्ड-सरोवर ब्रज की धरोहर है। ब्रज में कुण्ड-सरोवर एवं यमुना का विशेष महत्व रहा है। इन सब के बिना ब्रज अधूरा है। कुण्ड-सरोवर का जल यदि स्वच्छ रहेगा तभी ब्रज में खारे पानी की समस्या दूर हो सकती है। ब्रज में जल की समस्या सबसे अधिक है। ब्रज में अधिकतर जगह खारा पानी व दूषित पानी है। जिसके पीने से लोग अनेकों बीमारियों से ग्रसित हो रहें है। उन्होने कहा कि हमें इन सभी को बचाना है। यह हमारी जीवनदायनी है। यमुना, कुण्ड-सरोवर व गाय इन्ही से ब्रज की पहचान है। हमें यह पहचान वापस लाना है। ब्रज का प्राचीन स्वरूप वापस लाना है। इस दौरान सभी ने कुण्ड की सफाई एवं उसके बचाव का संकल्प लिया। साथ ही ग्राम सैनवा से 25 नवयुवकों की टीम तैयार की गई। जो ग्राम सुधार-ग्राम विकास व आदर्श गाँव बनाने में कार्य करेगी। इस अवसर पर चेतना बोध मिशन प्रभारी स्वामी रामानन्द जी, समाजसेवी पं0 उदयन शर्मा, कल्याण दास बाबा, लाल बाबा, कन्हैया लाल शर्मा, राजेश पहलवान, प्रेमचन्द्र, भगवत दयाल, गौरी शंकर शर्मा, तुलाराम शर्मा, गिरधार शर्मा, बाबूराम शर्मा, नानक चन्द्र, उमेश कुमार, महेश चन्द्र, मोहन लाल शर्मा, किशोरी लाल, दुर्गा पंडित, केशव दुबे, दिनेश कुमार गोपाल पुजारी आदि ग्रामवासी उपिस्थत थे।   

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रुद्रपुर : रुद्रपुर अस्पताल लापरवाही मामले में नए तथ्य सामने आए हैं। प्रसव के दौरान चिकित्सक द्वारा आपाधापी में बच्चे का एक हाथ खींच दिए जाने के बाद से बच्चे का हाथ काम नहीं कर रहा है। इलाज कर रहे मौजूदा डॉक्टरों का कहना है कि बच्चे को उपचार दिया जा रहा है लेकिन उसके पूरी तरह सही होने के बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता।   ध्यान रहे, 15 अगस्त को स्थानीय निवासी महेंद्र सिंह नेगी की पत्नी सोनाक्षी को प्रसव के लिए सिविल लाइंस स्थित कैलाश नर्सिग होम में भर्ती कराया गया था। उसी दिन डिलीवरी भी हो गई। रविवार को अचानक बच्चे को सांस लेने में तकलीफ होने लगी और देखते ही देखते बच्चे की हालत बिगड़ गई। बाल रोग चिकित्सकों ने बच्चे को हल्द्वानी स्थित एसटीएच रेफर कर दिया जहां पर चिकित्सकों ने परीक्षण के बाद बताया कि बच्चा चूंकि ओवरवेट है और डिलीवरी के वक्त चिकित्सक ने जबर्दस्ती कर उसका एक हाथ खींच दिया है। इससे बच्चे को सांस लेने में दिक्कत हो रही है। फिलहाल बच्चे का हाथ लगभग लटका हुआ सा प्रतीत हो रहा है।   इससे पहले, मामले को लेकर विरोध दर्ज कराने के लिए जिलाध्यक्ष कुंवर सिंह नेगी अपने समर्थकों व परिवार के साथ जब सिविल लाइंस स्थित नर्सिंग होम पहुंचे तो वहां मौजूद कथित बदमाशों ने विरोध कर रहे इन लोगों को लाठी-डंडों से जमकर धुना और फायरिंग भी की। घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हमले में घायल विश्व हिंदू परिषद के जिलाध्यक्ष कुंवर सिंह नेगी परिवार के साथ नजदीकी भदईपुरा में रहते हैं।  फिलहाल, दोनों पक्षों ने एक दूसरे के खिलाफ पुलिस में मुकदमा दर्ज कराया है। विहिप नेता ने जहां दो लोगों को नामजद करने के साथ ही डेढ़ दर्जन अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। वहीं, अस्पताल के प्रबंधक ने विहिप नेता पर अस्पताल में जबरन घुसकर तोड़फोड़ करने का आरोप लगाया है।   पीड़ित महेंद्र का कहना है कि वह कैलाश अस्पताल में अपने नवजात शिशु के उपचार में हुई लापरवाही की शिकायत करने गए थे जिसे चिकित्सक सुनने के लिए कतई तैयार नहीं हुए। उल्टे अस्पताल में गुंडे बुलाकर उनके परिजनों पर जानलेवा हमला कर दिया। अस्पताल के प्रबंधक विनोद राय ने आरोप लगाया है कि विहिप नेता के परिजनों ने चिकित्सकों की बात सुनने के बजाय उनसे अभद्रता की और अस्पतालकर्मियों से मारपीट करने के साथ ही तोड़फोड़ की। चौकी प्रभारी जयपाल सिंह ने बताया कि दोनों पक्षों की तहरीर दर्ज कर पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।   दूसरी ओर, इस मामले को लेकर विहिप कार्यकर्ता व विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों ने कलक्ट्रेट में प्रदर्शन किया और हमलावरों की गिरफ्तारी तथा नवजात का इलाज कराने की मांग की।

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यमुना मिशन के कार्यकर्ताओं द्वारा दिनांक 23 अगस्त रविवार को मथुरा शहर के चैकबाजार क्षेत्र से स्वामीघाट, विश्रामघाट और छत्ताबाजार क्षेत्र में यमुना मिशन का प्रचार-प्रसार किया। यमुना मिशन के कार्यकर्ताओं द्वारा मिशन की गतिविधियों से लोगो को अवगत करा मिशन से जोड़ा गया। जनसंपर्क के माध्यम से यमुना मिशन द्वारा लोगो से यमुना की रक्षा, ब्रज में हरियाली एवं स्वच्छता तथा ब्रज के कुण्ड एवं सरोवरों की रक्षार्थ सहयोग एवं समर्थन की मांग की। नगरवासियों द्वारा यमुना मिशन के प्रयासों को सराहा तथा मिशन में सहयोग करने की बात कही। इसी के साथ जनसंपर्क के माध्यम से कार्यकर्ताओं द्वारा लोगो को सोशल मीडिया के माध्यम से यमुना मिशन के पेज से जोड़ा गया। अब तक यमुना मिशन के पेज पर 14 हजार से ज्यादा लाइक हो चुके है। पं अनिल शर्मा ने कहा कि यमुना मिशन सच्चाई, ईमानदारी और धर्म पर चलकर कार्य कर रहा है इसलिये यमुना जी अदृश्य रूप में हमारे साथ है और सहायता कर रही है। मिशन का उद्देश्य ब्रज के साथ साथ पूरे देश में हरियाली आये, स्वच्छता हो, जलाशय संरक्षित हो आदि उद्देश्यों को लेकर कार्य कर रही है। मिशन के अन्तर्गत वर्तमान में रमणरेती, गोवर्धन, मथुरा में कृष्णगंगा घाट, चक्रतीर्थ घाट, काष्र्णि कुण्ड, चरणामृत कुण्ड, सरस्वती कुण्ड पर पूरूद्र्धार कार्य चल रहा है।  राधाचरण दास जी ने कहा कि यमुना मिशन द्वारा अब तक कई हजार वृक्ष लगाये जा चुके है, कुण्डो को साफ कर उनमें स्वच्छ जल लाया गया है। यमुना जी की कृष्ण गंगा घाट पर आरती प्रारम्भ की आदि कार्य कर मिशन निरन्तर आगे बढ रहा है। श्रीमान तालवन धाम तारसी अलवेली शरण ने कहा कि मिशन सिर्फ ब्रज तक ही सीमित नहीं है बल्कि वह ब्रज से भी बाहर कार्य कर रहा है एवं जल्द ही यमुना मिशन के कार्यकर्ता कुम्भ मेले में जाकर जन जागरण लोगो को मिशन से जोड़ने का कार्य करेगे।  इस अवसर पर  मनोज, संजय शर्मा, भोला पंडित, यशपाल, महेश पंडित, आशिष शर्मा, लपूटी पंडित, मुकेश ठाकुर, गोविन्द ठाकुर, सुभाष, हरीसिंह, रामवीर आदि उपस्थित रहे।   

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