मथुरा

मथुरा। भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने भारत के विभिन्न राज्यों व पड़ोसी देश नेपाल में आये आकस्मिक भूकंप के कारण मारे गये हजारों लोगों की आत्म शांति के लिए विश्राम घाट पर दीप जलाकर व दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की। जिला महामंत्री दीपक ठाकुर ने कहा कि दैवीय आपदा के कारण मारे गये लोगों की युवा मोर्चा हरसंभव मदद करेगा। मेरूकांत पाण्डेय ने कहा कि युवा मोर्चा कार्यकर्ता घर घर जाकर सहायता राशि एकत्रित करेगा। श्रद्धांजलि देने वालों में अमन ठाकुर, प्रवीण चैधरी, दिनेश चैधरी, दीपेश गौतम, श्रीकांत रावत, मानवेन्द्र चैधरी, लोकेश, पंकज, केशव सारस्वत, भारत चैहान, मोहित यादव, रिंकू अग्रवाल, विजय चंकी, सरोज, लोकेश कश्यप, रोहन, विपिन यादव, सुध्ीर चैधरी, प्रवीन चैधरी, अजित पहलवान व सैंकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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मथुरा। थाना हाईवे क्षेत्र अंतर्गत सड़क दुर्घटना में दो लोगों की मौत हो गयी। जानकारी के अनुसार ललित कुमार 28 वर्ष पुत्र मुरारी लाल निवासी मीना नगर कोसीकलां तथा आनंद पुत्र इन्द्रजीत निवासी डूंगरा जाट जहांगीराबाद बुलन्दशहर मैजिक गाड़ी में सवार होकर कोसी की ओर जा रहे थे तभी नरहौली थाने के सामने तेज गति से आते ट्रक ने मैजिक में जोरदार टक्कर मार दी जिससे मैजिक में सवार ललित और आनंद की मौके पर ही मौत हो गयी तथा तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गये जिन्हें उपचार के लिए आगरा में भर्ती कराया गया है। घटना की सूचना पर पंहुची पुलिस ने ट्रक और मैजिक को कब्जे में ले लिया है। वहीं मृतकों के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। बताते हैं कि घायलों में से एक व्यक्ति की भी आगरा में उपचार के दौरान मौत होने की खबर है।

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मथुरा। समाजवादी पार्टी मथुरा द्वारा सांसद हेमा मालिनी द्वारा आयोजित मथुरा महोत्सव के विरोध को भाजपा ने औचित्य हीन बताया है कितना दुखद है कि रात में महोत्सव में शामिल होने वाले सपा के लोग दिन में महोत्सव का विरोध करते है यह उनके दोहरे चरित्र को उजागर करता है बगैर उद्देश्य के आयोजित होने बाले सैफई महोत्सव के विपरीत किसानो के सहायतार्थ होने बाले मथुरा महोत्सव का विरोध करने वाले सपाई किसान हितैषी नही है वरन् किसान विरोधी है महज राजनितिक दिखावा करते है भाजपा मथुरा व सांसद हेमामालिनी किसानो के हित में पहले दिन से ही सक्रिय है भाजपा सांसद व पदाधिकारी लगभग 200 गावो में जाकर किसानो से संपर्क कर चुके है जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन ज्ञापन व् जागरण शंखनाद आदि कार्यक्रम किये उनकी समस्या मोदी जी व् अरुण जेटली जी तक पहुँचा चुके है जिसके फलस्वरूप किसानो को डेढ़ गुना मुआवजा व् 33 प्रतिशत क्षति मानक का निर्देश पत्र सर्वे हेतु केंद्र सरकार के द्वारा मथुरा प्रशासन को भेजा जा चूका है साथ ही साथ सांसद व् भाजपा के प्रयासो से वीमा कम्पनियो को 45 दिन में फसल बीमा दावो के निस्तारण का निर्देश भारत सरकार के वित्तमंत्री अरुण जेटली द्वारा दिया जा चुका है। किसानो के हित भाजपा व् सांसद हेमामालिनी की प्राथमिकता के बिंदु है अन्य दलो को भी राजनीति से ऊपर उठकर किसानो के हित मे सार्थक सकारात्मक प्रयास करने चाहिए। मथुरा महोत्सव के माध्यम से किसानो को आर्थिक मदद करने के सांसद हेमा मालिनी के प्रयासो की भाजपा सराहना करती है व् अन्य दलो को ऐसे कार्यो का विरोध न करके सकारात्मक सहयोग करना चाहिए किसान आफत में है उनका सहयोग समय की मांग है सपा के लोग महज चैक वितरण के फोटो न खीचा कर प्रशासन पर 33 प्रतिशत के हिसाव से डेढ गुना मुआवजे का सर्वे शीघ्र करने काव् मृतको को मुआवजे का दवाव बनाये जिससे किसानो को और अधिक मदद मिल सके मात्र दिखावा उचित नही है भाजपा मथुरा व् सांसद हेमा मालिनी किसानो को पूर्ण मुआवजा मिलने तक उनके साथ सतत रूप संघर्ष करती रहेगी व् उनको पूर्ण मदद दिलाकर मानेगी।

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क्या जाॅच अधिकारी के खिलाफ कार्यवाही कर पायेगे पुलिस के आला अधिकारी मथुरा। शहर कोतवाली क्षेत्र के अन्तापाड़ा निवासी गोपाल द्वारा जिलाधिकारी कार्यालय के सामने मिट्टी का तेल डालकर आत्महत्या करने के प्रयास के मामलें में शहर कोतवाली पुलिस की भूमिका सदिग्ध नजर आ रही हैं। लोगों का कहना है कि पुलिस ने पत्नी व पत्नी दोनो द्वारा दी गई अलग अलग तहरीर पर अगर ईमानदारी से मौके पर जाॅच करती तो शायद गोपाल को आत्महत्या करने जैसे कोई कदम नहीं उठाना पड़ता।  ज्ञात रहीें कि मंगलवार को शहरा के अन्तापाड़ा निवासी गोपाल ने अपनी ही पत्नी व उसके प्रेमी की प्रताड़नाओं से तंग आकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंच कर वही पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगाकर आत्महत्या करने का प्रयास किया जिसमें गोपाल करीब 80 प्रतिशत तक बुरी तरह जल चुका है और जिन्दगी और मौत से जूझ रहा हैं। इस पूरे प्रकरण में शहर कोतवाली पुलिस की भूमिका सदिग्ध नजर आ रही हैं। लोगों का कहना है कि जब गोपाल यादव व उसकी पत्नी द्वारा एक दूसरें के विरूद्व प्रताडि़त करने तथा जान से मारने की धमकी देने की तहरीर दी गई थी तो पुलिस ने मामलें की बिना जाॅच करें व घटना स्थल का बिना निरीक्षण करेें तथा पडोसियों से बिना कोई वार्तालाप किये एक तरफा कार्यवाही करते हुए गोपाल का शान्तीभंग में चालन कर दिया गया। इतना ही नहीं इसके बाद भी उसकी पत्नी उसें अपने प्रमी के साथ मिलकर मारपीट पर जान से मारने की धमकी देती रही लेकिन शहर कोतवाली पुलिस ने गोपाल की तहरीर पर कोई गौर किये बिना एक तरफा कार्यवाही कर दी गई। जिसका नतीजा यह निकला की पुलिस कार्यवाही व पत्नी के पीडि़त हो गोपाल को जिलाधिकारी कार्यालय के सामने आत्महत्या करने के लिए मजबूर होना पड़ा। हालांकि गोपाल को स्थानीय लोगों की मदद से बचा तो लिया गया लेकिन अब भी जिन्दगी और मौत से जूझ रहा हैं और गोपाल का बचना भी मुश्किल हैं। अब सवाल यह उठता है कि पुलिस के आला अधिकारी अब उस पुलिस  उप निरीक्षक के खिलाफ भी कोई कार्यवाही करेगी जिससें गोपाल के विरूद्व एतरफा कार्यवाही कर उसें आत्महत्या करने के लिए मजबूर कर दिया। वहीं क्षेत्राधिकारी नगर चक्रपाणि त्रिपाठी का कहना है कि गोपाल की पत्नी ने मारपीट की तहरीर दी थी उसी आधार पर गोपाल का शान्तिभंग में चालान किया गया। क्या क्षेत्राधिकारी नगर ने जाॅचकर्ता अधिकारी से पुछ कि उसके पास पत्नी व पति दोनो ने एक दूसरें के विरूद्व मारपीट व जान से मारने की तहरीर आने के बाद जाॅच अधिकारी ने एक ही तहरीर पर कार्यवाही क्यों की। क्या जाॅच अधिकारी ने महिला के प्रेमी के सहयोग से एक पक्ष से सैटिंग गैटिंग कर गोपाल को शान्ति भंग में चालान करवा दिया। क्यां जाॅच अधिकारी ने महिला से पुछा की उसकी पैरवी करने वाला युवक आखिर उसका कौन है। ऐसे बहुत से सवाल शहर कोतवाली पुलिस पर उठ रहें हैं। लोगों का कहना है कि अगर पुलिस शिकायती पत्रों पर सत्यता से कार्यवाही करने लगें तो  शायद जनपद में अपराधों को काफी हद तक रोका जा सकता हैं। लेकिन पुलिस कुछ मामलों में अपनी सैटिंग गैटिंग के चलते कोई कार्यवाही नहीं करती वही कुछ मामलों में राजनैतिक व आला अधिकारियों के दवाव के चलते कोई कार्यवाही नहीं कर पाती नतीजा वहीं गोपाल जैसे लोगों का आपके सामने हैं।

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कार्य में शिथिलता पर चार बाबू सस्पेन्ड मथुरा। मंडल की पुलिस महा निरीक्षक लक्ष्मी सिंह ने जनपद की पुलिस लाइन का वार्षिक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने एकाउन्ट विभाग के चार वावूओं को कार्य में शिथिलता बरतनें पर तत्काल प्रभाव से सस्पेन्ड कर दिया हैं। जिससें पुलिस विभाग में हड़कम्प मच गया।  मिली जानकारी के अनुसार आगरा मंडल की डीआईजी लक्ष्मी सिंह जनपद के पुलिस लाइन के वार्षिक निरीक्षण के लिए मथुरा आयी। डाआईजी श्रीमती सिंह सीधे पुलिस लाइन पहुंची जहाॅ पहलें से ही एसएसपी मंजिल व पुलिस लाइन प्रभारी के आला अन्य पुलिस के आला अधिकारी मौजूद थे। डीआईजी के पहुंचतें ही स्थानीय अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। उसके पश्चात उन्होंने अपने दल बल के साथ पुलिस लाइन के विभिन्न पटलों पर पहुंच कर वारीकी से निरीक्षण किया तथा कमी पाये जाने पर मौके पर ही सम्बन्धित कर्मचारियों को हिदायत दी। इसी दौरान एकाउन्ट विभाग के चार लिपिकों को कार्य में शिथिलता बरतनें तथा फाइलों को बेवजह लटकाये रखनें के आरोप में तत्काल प्रभारी से सस्पेड किये जाने के आदेश एसएसपी को दिये हैं।

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मिट्टी की उर्वरता स्थिति में लगातार गिरावट हरित क्रांति की दूसरी पीढ़ी की सबसे गंभीर समस्याओं में एक मानी जाती है। मिट्टी की उर्वरता स्थिति में गिरावट मुख्य रूप से सघन फसल प्रणालियों द्वारा पोषक तत्वों को हटाए जाने से आई है जो पिछले कई दशकों के दौरान उर्वरकों एवं खादों के जरिए इतनी अधिक हो गई है कि उनको फिर से भर पाना मुश्किल है।  किसान अधिकतर नाइट्रोजन युक्त उर्वरक (ज्यादातर यूरिया) या नाइट्रोजन युक्त और मिश्रित जटिल उर्वरक (ज्यादातर यूरिया या डीएपी) का उपयोग करते हैं तथा पोटाश और अन्य अभाव वाले पोषकों के उपयोग को नज़र अंदाज कर देते हैं। दूसरी तरफ, बहुपोषक तत्व कमियां भी अधिकतर मिट्टियों में पहले ही उभर आई हैं तथा विस्तारित हो चुकी हैं। विभिन्न परियोजनाओं के तहत देश के विभिन्न हिस्सों में किए गए मिट्टी यानी मृदा विश्लेषण से कम से कम छह पोषक तत्वों- नाइट्रोजन (एन), फोसफोरस (पी), पोटाश (के), जिंक (जेडएन) और बोरॉन (बी) की व्यापक कमी प्रदर्शित हुई। उत्तर-पश्चिमी भारत के चावल-गेहूं उगाए जाने वाले क्षेत्रों में किए गए कुछ नैदानिक सर्वे से पता लगा कि किसान उपज स्तर को बनाए रखने के लिए, जिन्हें पहले कम उर्वरक उपयोग के जरिए भी हासिल कर लिया जाता था, अक्सर अनुशंसित दरों से ज्यादा नाइट्रोजन का उपयोग करते हैं। नाइट्रोजन उर्वरकों में सबसे आम यूरिया का अंधाधुंध उपयोग किया जाता है चाहे वैज्ञानिक निर्देश कुछ भी क्यों न हो। यूरिया के अत्यधिक उपयोग का मिट्टी, फसल की गुणवत्ता और कुल पारिस्थितकी प्रणाली पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। यूरिया के अत्यधिक/अंधाधुंध उपयोग के कुछ बड़े नुकसान इस प्रकार हैं : यह मिट्टी के पोषक तत्वों, जिनका उपयोग नहीं किया गया है या पर्याप्त रूप से उपयोग नहीं किया गया है, के खनन को बढ़ाता है जिससे मृदा की उर्वरता में गिरावट आती है। ऐसी मिट्टियों को अधिकतम उपज देने के लिए भविष्य में अधिक उर्वरकों की जरूरत होगी। फसल की मांग से अधिक उपयोग में लाया गया नाइट्रोजन वाष्पीकरण और निक्षालन के जरिए खत्म हो जाता है। नाइट्रोजन का अत्यधिक उपयोग जलवायु परिवर्तन और भूजल प्रदूषण को बढ़ावा देता है। भूजल के नाइट्रेट तत्व में वृद्धि हानिकारक साबित हो सकती है क्योंकि अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में इसे पीने के पानी के उपयोग में लाया जाता है। सलाह से अधिक मात्रा में यूरिया का उपयोग फसल के रसीलेपन को बढ़ा देता है जिससे पौधे बीमारियों और कीट संक्रमण के शिकार हो सकते हैं। यूरिया का असंतुलित उपयोग नाइट्रोजन की कुशलता को घटा देता है जिससे उत्पादन की लागत में वृद्धि हो जाती है और शुद्ध मुनाफे में कमी आती है। नाइट्रोजन एवं अन्य पोषक तत्वों की कुशलता, लाभप्रदत्ता और पर्यावरण सुरक्षा को बढ़ाने के लिए यूरिया के उपयोग को युक्तिसंगत बनाने की जरूरत है। नाइट्रोजन उर्वरकों के युक्तिसंगत उपयोग के लिए कुछ दिशा-निर्देश इस प्रकार हैं : उर्वरक यूरिया उपयोग का संतुलन न केवल फोसफोरस और पोटास के साथ किया जाना चाहिए बल्कि द्वितीयक और सूक्ष्म पोषक तत्वों के साथ भी किया जाना चाहिए। मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक अनुशंसाओं का पालन किया जाना चाहिए। किसानों को सल्फर सूक्ष्म पोषण परीक्षण के लिए जोर देना चाहिए क्योंकि (सल्फर और सूक्ष्म पोषकों के बगैर) केवल नाइट्रोजन, फोसफोरस, पोटाश अब संतुलित उर्वरक नुस्खा नहीं है। नीम तेल लेपित यूरिया को विशेष रूप से बुनियादी मसालों के लिए ज्यादा प्राथमिकता दी जानी चाहिए। जैविक खादों एवं उर्वरकों का संयुक्त उपयोग यूरिया समेत उर्वरकों के उपयोग को कम करने में मददगार हो सकता है। फलियों का समावेश उर्वरक (यूरिया) की जरूरत में 25 से 50 फीसदी तक की कमी ला सकता है। फसल प्रणाली एवं सिंचाई की उपलब्धता के आधार पर फलियों को अंतवर्ती फसल हरित खाद, चारा, फसल या अल्पकालिक अनाज फसल के रूप में उपयोग में लाया जा सकता है। (लेखक भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली के मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायन शास्त्र विभाग के प्रमुख हैं)

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