यमुना भक्तों के जन समुद्र को बढता देख केन्द्र सरकार में खलबली मच गयी है। जिन साधु-सन्तों, ब्रजवासी, किसानो और यमुना भक्तों को इन्द्र का कोप भी नहीं रोक सका ऐसे अपने लक्ष्य से अटल यमुना भक्तों को अपने आश्वासन के बांध से रोकने के लिये केन्द्र सरकार की जल संसाधन मंत्री उमाभारती जी दिनांक 16 मार्च को पदयात्रा के मध्य में पहुॅची। 16 मार्च को सूर्य देवता यमुना भक्तों अपनी गुनगुनी किरणों उठाते नजर आये जिससे मानों ऐसा लगा हो दो दिन से इन्द्र के कोप से व्यथित यमुना भक्तों से वह कह रहे हो इम्तिहान खत्म हुआ अब यमुना को लाने आगे बढो। यमुना मुक्तिकरण पदयात्रा प्रातः 9 बजे अपने पडाव होडल से आगे बढी। हरिनाम संकीर्तन की धुन पर थिरकते हजारों कदम दिल्ली की दूरी कम करते जा रहे थे। जय यमुना मैया के नारे और हजारों पदयात्रियों और वाहनों का काफिला एक अद्भुत वातावरण प्रस्तुत कर रहा था। नृत्य करती बलाये, मंत्रोच्चारण करते वेदपाठी बालक वातावरण में सात्विक ऊर्जा का संचार कर रहे थे। पदयात्रा के बीच में इस्कान मन्दिर के श्याम सुन्दरदास जी अपने इस्कान भक्तों के साथ पदयात्रा में पहुॅचे। इस्कान के भक्तों द्वारा महामंत्र का संकीर्तन भी किया गया। पदयात्रा में विरक्त संत श्री रमेश बाबा महाराज ने स्वयं पदयात्रा की और ब्रज की सीमा तक आये। पदयात्रा में मलूक पीठाधिश्वर द्वाराचार्य श्री राजेन्द्र दास जी महाराज, गोलोक धाम आश्रम के पूज्य श्री गोपालशरण देवाचार्य जी महाराज, चतुःसम्प्रयदाय के श्री महन्त श्री फुलडोल बिहारी दास, पुष्टिमार्गिय आचार्य श्री पंकज बाबा महाराज, महामण्डलेश्वर श्री चितप्रकाशानन्द जी महाराज, महामण्डलेश्वर श्री नवलगिरि जी महाराज, महन्त श्री मदनमोहन दास जी, रसिया बाबा, पुष्टिमार्गिय श्री अनिरूद्ध बाबा माण्डवी वाले, पूज्य लाला बाबा, श्री हरिबोल बाबा, पनकी मन्दिर के महन्त श्री जितेन दास जी महाराज, पूर्व कृषि मंत्री चै. लक्ष्मीनारायण, योगेश द्विवेदी, पूज्य संजीवकृष्ण ठाकुर जी, श्री मृदुलकान्त शास्त्री जी, श्री बद्रीश जी, श्री देवकी नन्दन ठाकुर जी श्री अनुभव तैलंग आदि मुख्य रूप से पदयात्रा में उपस्थित रहे। पूज्य श्री राजेन्द्र दास जी महाराज द्वारा श्री रमेश बाबा महाराज से वार्ता कर उनके द्वारा भी पदयात्रा की गयी। ब्रज की सीमा तक आने के बाद पूज्य बाबा महाराज द्वारा सभी पदयात्रियों को सम्बोधित किया गया। उन्होने पदयात्रियों को सम्बोधित करते हुये बार बार पूछे जा रहे प्रश्न का उत्तर देते हुये कहा कि पिछली यात्रा का कोई सार्थक परिणाम नहीं निकलने के बाद दुबारा यात्रा इसलिये निकाली गयी क्योकि यमुना जी अभी ब्रज में नहीं आयी है और जब तक यमुना जी नहीं आयेगी यात्रायें होती रहेगी। उन्होने उदाहरण देते हुये गहवर और ब्रज की पहाडियों का उदाहरण दिया और कहा कि लगभग 4 दशकों से अधिक लड़ाई लडने के बाद सफलता मिली। इसलिये जब तक शरीर में प्राण है हम यमुना मुक्ति के लिये प्रयास करते रहेगें उन्होने यह भी बताया कि हम किसी जनबल, धनबल, या तपबल के बल से नहीं लड़ रहे हमारे साथ तो हारे को हरिनाम का बल है जो सभी को बल प्रदान करने वाला है। इसलिये यमुना की अविरलता और निर्मलता बनाये रखने के लिये प्रयास करते रहो। श्री रमेश बाबा महाराज द्वारा सभी पदयात्रियों को यमुना मुक्ति की मांग पूरी न होने तक दिल्ली से वापस न आने की बात कही। श्री राजेन्द्र दास जी महाराज ने कहा कि आप सभी की यात्रा जरूर सफल होगी इसमें कोई सन्देह नहीं है। यदि यदि अविरल यमुना प्रवाहित न कर सके तो ब्रज संस्कृति और ब्रज भूमि को नहीं बचा पायेगा और यदि हम संस्कृति और ब्रज भूमि की रक्षा नहीं कर पाये तो विश्व को प्रेम का सन्देश देने वाली ब्रजभूमि प्रेम और शान्ति का सन्देश कैसे देगीं। हम यमुना मैया से प्रार्थना करे कि वह ब्रजवासियों को ऐसा बल प्रदान करे यमुना मुक्ति का श्रेय अपने भक्तों को प्रदान करें।
इस अवसर पर अभियान के युवा शाखा के राष्ट्रीय संयोजक पुष्टिमार्गिय श्री अनुभव तैलंग ,अभियान के महासचिव हरेश ठेनुआ एवं प्रदेश संयोजक श्याम चतुर्वेदी ने भी पदयात्रियों को सम्बोधित करते हुये अपने लक्ष्य पर दृढ रहने को कहा।
उमा भारती के आश्वासन ठुकराया
दिल्ली की ओर यमुना भक्तों के बड रहे जन सैलाब को रोकने के लिये केन्द्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती अपने आश्वासन ले यमुना भक्तों के बीच पहुॅची। उमा भारती ने आते ही कहा कि मैं यमुना भक्तों की मांगो को सही से जानना चाहती हूँ इसलिये मैं अभियान के राष्ट्रीय संयोजक राधाकान्त शास्त्री से मांगे जानना चाहती हूँ। अभियान के संयोजक राधाकान्त शास्त्री ने कहा कि आप मंत्री से पहले एक साधु है आपने पूर्व के आन्दोलन के समय यमुना को मां बताया उसका सगा न होने वाले शख्स को किसी के सगे न होने की बात कही। उन्होने उनके वादे को याद दिलाते हुये यमुना की अविरलता और निर्मलता सुनिश्चित करने की मांग करते हुये नदियों पर से राज्य का अधिकार खत्म करने के लिये पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत् अध्यादेश लाने की बात कही। इसके साथ यमुनोत्री से इलाहाबाद तक बिना किसी गन्दगी के मिश्रण के शुद्ध प्राकृतिक प्रवाह यमुना तल पर प्रवाहित करने मांग की।
इसके बाद उमा भारती द्वारा यमुना मुक्ति एवं शुद्धि के लिये तीन चरण में योजना बताई। जिसमें पहले चरण में पूर्व यूपीये सरकार के पदचिन्हों पर चलते हुये पहले चरण में रेणुका, किशाऊ और लखवार व्यास पर बांध बना यमुना में जलापूर्ति का साधन बताया, दूसरे चरण में उन्होने हरियाणा में यमुना नहर पर आश्रित किसानों को इजरायल की कृषि तकनीक जिसमें कम पानी में ज्यादा पैदावार होती है उसका विकल्प बताया और तीसरे चरण में आइ आइ टी, चतुर्वेदी कमेटी और रवि चैपड़ा द्वारा किसी भी नदी में जीवित रखने के लिये कितने जल की आवश्कता होती है जिसके आधार पर महीनो के आधार पर नदियों में जल छोड़ा जायें।
उन्होने यह भी बताया कि 20 मार्च को यमुना बोर्ड की बैठक में दिल्ली हरियाणा उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान पांचो राज्यो के मुख्यमंत्रियों को बुलाया गया है। जिसमें राज्यों के बीच जल बंटबारे को लेकर चर्चा की जायेगी।
उमा भारती जी ने यह भी कहा कि मैं यह नहीं चाहती थी कि पूज्य रमेश बाबा महाराज पैदल करें मैं खुद चलकर उनके पास आना चाहती थी। मैं 20 मार्च की बैठक बाद स्वयं बाबा पास आकर यमुना की अविरलता के लिये चर्चा करती।
मैने मंत्री बनने के बाद सबसे पहले यमुना के लिये हुये समझौते की फाइलों को चेक किया और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री से मिल समस्या को सुलझाने के लिये चर्चा की।
उन्होने कहा कि यमुना की शुद्धि के बिना गंगा की शुद्धि कठिन है इसलिये गगा के सफाई अभियान में यमुना भी सम्मिलित है।
पूज्य श्री विजय कौशल जी महाराज ने कहा कि मैं ब्रजवासी, वृन्दावनवासी और यमुना किनारे का वासी हूँ ब्रजवासियों और यमुना भक्तों को आश्वासन नहीं चाहिये। पिछली सरकार ने धोखा दिया था अब न दिया जाये। यदि इस बार धोखा दिया तो आवश्यकता पड़ने पर भूख हड़ताल करूँगा। उन्होने कहा कि हरियाणा के हथिनी कुण्ड स ेजल छोड़ा जाना चाहिये क्या हम ब्रजवासी जिन्दगी भर मल मूत्र ही पियेगें । इसलिये आज सरकार को यमुना भक्तों की मांगो को मानना होगा।
भारतीय किसान यूनियन (भानू) भानूप्रताप सिंह ने कहा कि हमें प्रस्ताव नहीं काम चाहिये हमें यमुना का अविरल निर्मल जल चाहिये। पिछली सरकार ने यमुना भक्तों की मांगो नहीं मानी तो वह जैसे गधें के सिंह सीग की तरह दिल्ली के तख्त से गायब हो गयी इसलिये मोदी सरकार से हम यही चाहते कि यूपीए मत दोहरा देना।
जब यमुना भक्त जल संसाधन मंत्री उमा भारती के आश्वासन से सहमत नहीं हुये तो अभियान के संरक्षक श्री पंकज बाबा ने यमुना भक्तों की ओर से फैसला सुनाते हुये कहा कि यमुना भक्तों को उमा भारती का प्रस्ताव मंजूर नहीं उसी के साथ उन्होने उत्साह जोश और उमंग से भरे पदयात्रियों को आगे कूच करने का आदेश दिया। आदेश पाते ही यमुना भक्तों की सुनामी केन्द्रीय मंत्री उमा भारती को सड़क पर खडा छोड आगे बढ गयी । और केन्द्रीय मंत्री यमुना भक्तों की पदयात्रा को एक टक देखती रह गयी।
यमुना मुक्तिकरण अभियान के सह संयोजक सुनील सिंह ने इस पूरे प्रकरण पर कहा कि मोदी सरकार के प्रतिनिधि के रूप में आयी उमा भारती यमुना भक्तों के साथ छलावा करने आयी थी मगर उनके कोरे और लुभावने वादों को ब्रजवासियों ने कोई तबब्जों नही दी। इसी के साथ उन्होने यह भी ऐलान किया कि केन्द्र सरकार ने यमुना भक्तों को धोखा देने का प्रयास किया तो यूपीए सरकार जैसा हश्र होगा।
उमा भारती जी यमुना भक्तों के बीच लगभग 1ः30 घंटे तक रही। जैसे ही वो पदयात्रियों के बीच पहुूची तो यमुना भक्तों ने उनका गगन भेदी नारो के साथ स्वागत किया। फूल माला पटका पहनाये मगर जैसे ही उमा भारती ने यूपीए सरकार जैसे आश्वासन देने शुरू किये सड़क पर 7 किलोमीटर फैले भक्त भड़क गये और उन्होने उमा भारती और मोदी सरकार विरोधी नारे शुरू कर दी। इतना ही नहीं किसान यूनियन भानू के कार्यकर्ताओं ने उमा भारती के सामने दिल्ली आगरा हाइवे जाम कर दिया जिसे भारी मससक्त के बाद हरियाणा पुलिस ने खुलवाया।
प्रमुख उपस्थित व्यक्तियों के नाम
भाकियू भानू के मुख्य महासचिव राजेन्द्र प्रसाद शास्त्री, भाकियू भानू के हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष केशव देवं
पंकज शास्त्री , पंकज चतुर्वेदी, पूज्य श्री गौर गोपाल दास, एम एल सी लेखराज सिंह, जडखोर गौशाला के संचालक गोपेश बाबा,
डा रामजी लाल शास्त्री, बारह घाट के महन्त राम बिहारी दास, जाट समाज के 21 पालों के अध्यक्ष नरदेव चैधरी, डाॅ अमर सिंह पोनिया, सुरेन्द्र प्रधान, ।
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नीली टोपियों का कांरवा देख प्रशासन की फूली सांस
यमुना मुक्तिकरण अभियान की टोपी लगाये हजारों यमुना भक्तों के कारवां को देख हरियाणा पुलिस और प्रशासन के हाथ पैर फूलने लगे। 6-7 किमी लम्बे यमुना भक्तों कारवां को देख पुलिस प्रशासन हाथ पैर फूलते दिखाई दिये। पुलिस प्रशासन द्वारा यमुना मुक्तिकरण पदयात्रा के चलते पुलिस प्रशासन द्वारा रूट डायवर्ट कर दिये गये। अप्रत्याशित भीड़ को देख हरियाणा पुलिस प्रशासन द्वारा चुस्ती दिखाई और हाइवे एक लेन को बन्द कर यातायात को मोड़ा गया।
पुलिस कर्मियों के अभद्रता के चलते दोनो रोड किये जाम
यमुना मुक्तिकरण पदयात्रा में चल रहे पदयात्री के साथ एक पुलिस कर्मी द्वारा अभद्रता की गई। जिसके चलते गुस्साये पदयात्रियों द्वारा हाइवे लेन की दोनो को जाम कर दिये जिसके चलते कुछ ही मिनटों में वाहनों की किलोंमीटरों लम्बी कतार लग गयी। जिसके बाद दोषी पुलिसकर्मी द्वारा मुख्य मंच पर सभी से माफी मांगी गयी। उसके बाद पदयात्री आगे बढे।
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