मान मंदिर , श्रीमद पुष्टि मार्ग एव भारतीय किसान यूनियन (भानु) के सयुंक्त तात्वधान में
यमुना मुक्तिकरण अभियान :- यमुनोत्री के प्राकृतिक प्रवाह को पावन नगरी मथुरा-वृंदावन वापस लाने का निर्णायक अभियान है जो 2011से निरन्तर चल रहा है । ब्रज निधि पूजनीय श्री रमेश बाबा महाराज , बरसाना हमारे मूल , प्रेरणा,शक्ति, बल एवं विचारशक्ति हैं. वह एक सच्चे त्यागी ही नहीं अपितु ब्रज और ब्रजवासियो के अति प्रिय संत हैं।
यमुना मुक्तीकरण पदयात्रा 15 मार्च 2015 कोसी (ब्रज) से दिल्ली : पूरे ब्रज क्षेत्र ३८०० स्क्वायर किलोमीटर के लाखों ब्रजवासी यमुना जी को ब्रज वापस लाने के लिए तन, मन और धन से जुटने के लिए तत्पर है । जैसे :
•ब्रज के 1200 गांवों के लाखों ब्रजवासी जो श्री रमेश बाबा महाराज से जूड़े हें।
•पूरे भारत भर से पुष्टि मार्ग सम्प्रदाय (जिसके भारत में लगभग 2 करोड़ अनुयायी हैं व यमुना जी जिनकी परम आराध्या हैं) |
•मजबूत एवं प्रसिद्ध भारतीय किसान यूनियन (भानु) – जिसके कई लाख सदस्य हैं ।
•मथुरा-वृन्दावन के लघभग सभी पूजनीय साधू-संत व कथा वाचक I
•ब्रज के प्रथिष्ठित व विख्यात धार्मिक संस्थाएं एवं संप्रदाय जो २०१३ की यात्रा में पूर्ण रूप में साथ थे I
•ब्रज क्षेत्र के विभिन्न सामाजिक व सेवान्मुखी समूह- बार काउंसिल, प्रेस काउंसिल, छात्र संघ, सामाजिक कार्यकर्ता आदि I
दिल्ली, फरीदाबाद, पलवल, आगरा आदि शहरों के विभिन्न सामाजिक, धार्मिक, छात्र व पर्यावरण संबधी संस्थाएं |
इस पदयात्रा में तन मन और धन से पूर्ण रूप से सम्मिलित कुछ प्रमुख विभूतिया जो पदयात्रा में स्वयं चलेंगे :
पूजनीय श्री रमेश बाबा महाराज , साध्वी ऋतंबरा दीदी जी , पूजनीय ग्यानानंद जी महाराज , श्रधेय पंकज बाबा , पूजनीय राजिन्द्र दास जी , श्रधेय देवकीनन्दन ठाकुर जी , श्रधेय कृष्णा चन्द्र ठाकुर जी , पूजनीय विजयकौशल जी , पुष्टि मार्ग के प्रथम पीठाधीश्वर श्री वल्लभ राय जी एवं चतुर्थ सम्प्रदाय के महंत , श्रधेय मृदुल कांत शास्त्री जी , श्रधेय संजीव कृष्णा ठाकुर जी , , श्री चितप्रकाशानंद जी , श्री आदित्यनाथ जी , अखंडानंद आश्रम से श्री महेशानंद गिरी जी , श्री फूलडोल जी , श्री राधाकान्त शास्त्री जी , श्री हरीश थेनुआ जी I
यात्रा उत्थान समय : 15 मार्च, 2015 , सुबह 8 बजे , स्थान: हिन्दू इंटर कॉलेज, कोसी कलां
महापंचायत : 14 मार्च, 2015 , मीडिया के लिए समय: दोपहर 1 बजे से शाम 4 बजे
स्थान: हिन्दू इंटर कॉलेज, कोसी कलां
यात्रा में समील्लित सभी संत महापंचायत में उपस्थित होंगे एव श्री श्री रवि शंकर जी भी पधारेंगे
तथ्य
•यमुना नदी, जो हमारी अनादि सभ्यता का अभिन्न अंग है, न केवल एक पेय जल का संसाधन है, एक सांस्कृतिक धरोहर है, अपितु एक देवी हैं जिन्हें पूजा जाता है । इन्हीं के किनारे बसे हैं कई तीर्थ स्थल और तीर्थ नगरियाँ जैसे मथुरा, वृन्दावन, आगरा और प्रयागराज (इलाहाबाद) । इन तीर्थ नगरों का अस्तित्व ही हमेशा से यमुना नदी रही है । मथुरा, वृन्दावन और गोकुल जैसे तीर्थों में तो मंदिरों के विग्रहों को स्नान ही यमुना के जल से कराया जाता है ।
•दुर्भाग्यवश, यहाँ के वासी और आने वाले करोड़ों तीर्थ यात्रियों को अब तक नहीं पता था कि जिस यमुना नदी से वह जल पी रहे हैं अथवा स्नान कर रहे हैं, उसमें एक बूँद भी यमुनोत्री का जल नहीं है । उसके स्थान पर यमुना तल पर बह रहा है केवल दिल्ली का मल-मूत्र और औद्योगिक अवशिष्ट, जो अर्ध-शोधित है I इस तरह उनके श्रद्धा और विश्वास का मजाक उड़ाया जा रहा है । दिल्ली शहर के बाद यमुना नदी में यमुनोत्री का एक बूँद जल भी नहीं होता ।
•यमुनोत्री से कुछ दूर ही हरियाणा में हथिनी कुंड बैराज द्वारा सारा जल खींच लिया जाता है । फिर सूखे नदी तल पर दिल्ली अपना अर्ध-शोधित मल-मूत्र डालता है, जो (यमुना के स्थान पर) मथुरा, वृन्दावन और आगरा में बहता है । यही मल-मूत्र वहाँ अपर्याप्त शोधन के बाद पेय जल के रूप में दिया जाता है I
•"यमुना नदी के तटों पर रहने वाले २३% बच्चों में लेड धातु की मात्रा अधिक पायी गयी है । यह सर्वे यूनिसेफ द्वारा कराया गया जिसे टेरी जैसी विश्वसनीय संस्था ने किया I
हमारे मुद्दों और मांगे :
1.हम कहते हैं, और सभी नदी विशेषज्ञ मानते कि सभी नदियों को स्वस्थ बनाए रखने के लिए उनमे अति आवश्यक होता हैं पर्याप्त प्राकृतिक जल परवाह। यही बात यमुना नदी पर भी लागो होती है। आवश्यकता है तत्काल हथिनी कुंड बैराज से पर्याप्त प्राकृतिक जल परवाह छोड़ने की। इस परवाह को यमुना जी के पूरे विस्तार में बहने दिया जाए। चित्र 2 देखें) . इसके बिना नदी को शुद्ध करने का कोई उपाय / शोधन क्रिया काम नहीं करेगी. विडंबना यह है कि पर्याप्त प्राकृत जल परवाह की बात आज तक सभी कर चुके है पर लागू कोई नहीं कर पाया। भारत के लघभग सभी नदी सम्भंदित विभाग यह कह चुके है जैसे :हाई पावर कमेटी - भारत के सुप्रीम कोर्ट, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, इंटर मंत्रालयी समूह, WQAA - भारत की जल गुणवत्ता मूल्यांकन प्राधिकरण, पर्यावरण एवं वन मंत्रिय, इलाहाबाद उच्च न्यायालय, दिल्ली जल बोर्ड, सचिव (यूडी) MoUD तहत समिति,दिल्ली में प्रदूषण पर श्वेत पत्र, प्रो अबसार अहमद काजमी (आई आई टी - विशेषज्ञ)
2.मल मूत्र और औद्योगिक रसायनो का कितना भी उपचार हो, उनसे नदी में प्राकृतिक जल के गुण नहीं आ सकते . नई दिल्ली( जो की यमुना के ७० % पदूषण का जिम्मेदार है ) में बहुप्रचारित और महंगा इंटरसेप्टर सीवेज परियोजना पूरे होने पर भी "सी वर्ग" यानी स्नान गुणवत्ता (बायोकेमिकल ऑक्सीजन मांग (बीओडी) 3mg / एल) जल नहीं मिलेगा।
इसलिए, यमुना नदी तल में किसी भी सीवेज (प्रदूषण शोधित या अशोधित ) कोई प्रवाह होना चाहिए. वर्तमान में दिल्ली में यमुना नदी तल को केवल मल मूत्र को आगरा नहर तक पहुचाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है.हमारी दूसरी मांग है की दिल्ली में यमुना के सहारे सहारे एक नाला का निर्माण हो जिसमे सारे नाले गिरे जो अभी यमुनाजी में गिरते है. यह, परियोजनाय सरकार द्वारा ही बनाई गयी थी। इससे यमुनाजी का अधिकाँश पदूषण दूर हो जाएगा। जो काम अभी यमुना ताल से किया जारहा है, वह काम यह नया नाला करेगा।
2013 में एक यमुना मुक्तिकरण पदयात्रा वृन्दावन से दिल्ली 10 दिनों में आई थी जिसमें लगभग 100,000 ब्रजवासियों और भक्तों ने भाग लिया था और सभी प्रमुख नेशनल अंग्रेजी और हिन्दी टीवी समाचार चैनलों और प्रिंट मीडिया में कई दिन छाई रही थी | यात्रा की मांगो को विपक्षी दल - भारतीय जनता पार्टी का पूर्न समर्थन मिला था | श्रीमती सुषमा स्वराज जी ने लोक सभा में और श्री रवि शंकर प्रसाद जी ने राज्य सभा में इन्हीं मांगो को बहुत जोर से उठाया था | सुश्री उमा भारती जी, जो आज जल संसाधन मंत्री हैं, ने यात्रा में आकर उसकी मांगों को दोहराया था |
आज 2015 मे यह अभियान बहुत बडा स्वरूप ले चुका हें I लगभग रोज उत्तर प्रदेश, गुजरत और मध्य प्रदेश में सभाएं हो रही हैं | यह अभियान उत्तर प्रदेश के अधिकतर जिलों में प्रभावशाली हो गया है और नोजवानों को आकर्षित कर रहा है | उत्तर प्रदेश में यमुना का मुद्दा जल का नहीं अपितु धर्म और संस्कृति का है | यमुना मुक्तिकरण अभियान केवल देश ही नहीं, यूरोप, अमेरिका और अरब देशों में भी फैला हुआ है। विदेश में रह रहे भरतीय मूल के नागरिकों द्वारा यमुना मुक्तिकरण अभियान के 1,25,000 याचिकाओं पर हस्ताक्षर किये जा चुके है।
इस अभियान को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के स्थानीय मीडिया का समर्थन भी सक्रिय रूप से मिल रहा है । राष्ट्रीय मीडिया इस बार विशेष रूचि लेगा क्योंकि इस बार भारतीय जनता पार्टी के हाथ में निर्णय है ।
यह पदयात्रा इस दृढ निश्चय के साथ की जा रही है कि जब तक यमुना जी का शुद्ध जल संपूर्ण यमुना तल पर प्रवाहित नहीं होगा तब तक पदयात्रियों का कीर्तन व धरना अनवरत जारी रहेगा ।
यमुना जी को वापस मथुरा, वृन्दावन लाने के लिये कोई तकनिकी प्रक्रिया की नहीं अपितु एक प्रबल राजनीतिक संकल्प की आवश्यकता है| केन्द्रीय सरकार यमुना के जल की निर्मलता, पुष्टिकर्ता एवं पर्यावरणिक गुणवत्ता बनाय रखने के लिये निश्चित ऑर्डर / डायरेक्शन जारी कर सकती है और भारतीय संविधान इसका समर्थन करता है |
आप भी इस पावन कार्य में सहयोग कीजिये और यमुना जी को पुनः ब्रज में वापिस लाईय जो उनकी एह्चान है।
ब्रज से ही यमुना है। यमुना से ही ब्रज है।
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