गोवर्धन रोड स्थित ज्ञानदीप षिक्षा भारती में ब्रज में वसन्त पंचमी से प्रारम्भ होकर चैत्र कृश्ण नवमी तक मनाई जाने वाली 50 दिनों की होली-परम्परा में होली महा महोत्सव रंगारंग कार्यक्रमों के साथ सम्पन्न हुआ। होली महा महोत्सव के अन्तर्गत ब्रज में 50 दिनों अवधि की होली, होली के पारम्परिक, तथा होली के आदर्ष स्वरूप पर निबन्ध लेखन एवं वाद विवाद प्रतियोगिताएँ, टेसू के फूलों से बनाये रंग के छीटों तथा चन्दन तिलक से होली खेलने, कैमीकल युक्त रंग-गुलाल का प्रयोग न करने, होली खेलने में अषालीन व्यवहार न करने, एक मिनट भी बिजली तथा पानी का दुरुपयोग न करने के संकल्प के साथ होली-रसिया गायन, होली नृत्य, होली-चित्रकला एवं रंगोली आदि की विविध प्रतियोगिताएँ हुईं। होली महोत्सव समापन समारोह में षिक्षक-षिक्षिकाओं ने पानी की फुहार, मनी बैक, पेपर डान्स, ब्हिसिल राउन्ड आदि प्रतियोगिताओं में भाग लिया। श्रीमती रष्मि षिखा, श्रीमती मधुलिका, श्रीमती भावना, अनिल चतुर्वेदी, रवि षर्मा आदि ने गीत-संगीत-नृत्य की प्रभावी प्रस्तुतियों से सभी को मंत्र मुग्ध कर दिया। समापन-समारोह के प्रारम्भ में ज्ञानदीप के सचिव मोहन स्वरूप भाटिया ने वसन्त पंचमी से मन्दिरों में भगवान् के श्रृंगार में गुलाल का प्रयोग तथा रंगभरनी एकादषी से रंग चलने, होली के सर्वप्रथम मानसरोवर मेले, बरसाना-नन्दगाँव की होली, दाऊजी - जाव - बठैन के हुरंगे, मुखराई, अहमल कलाँ, बछगाँव, ऊमरी, नगरी रामपुर सबला का नगला तथा सौंख में होने वाले चरकुला नृत्य के इतिहास से अवगत कराया। षैक्षिक निदेषक के0 जी0 माहेष्वरी ने बताया कि प्राचीन काल में मनाया जाने वाला मदन महोत्सव आज रुपान्तर के साथ होली के रूप में रंग-उमंग-तरंग का प्रतीक पर्व है। मनोरंजक उपहार समापन - समारोह में प्रतियोगिताओं के सफल प्रतियोगियों को मनोरंजक उपहार प्रदान किये गये। एक प्रतियोगी को बड़े से कार्टन में चूहेदानी देते हुए उद्घोशणा की गई कि इससे घर के चूहे पकड़ कर चाहें तो प्रिय पड़ोसी के घर छोड़े जा सकते हैं। एक प्रतियोगी को मंडी में मिलने वाला सबसे बड़े आकार का कट्ठू, दूसरे प्रतियोगी को गोभी का फूल, तीसरे को लौकी तथा चैथे प्रतियोगी को मिर्चों की माला दी गई और दर्षकों ने देखा तो सभी खिलखिला उठे। अन्त में ज्ञानदीप की प्रधानाचार्या निधि भाटिया ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि देष में मनाये जाने वाले पर्व मात्र उत्सव नहीं हैं, उनकी पृश्ठभूमि में प्रेरणात्मक संदेष निहित है। समापन समारोह का संचालन सुचित्रा गुप्ता, प्रियंका अग्रवाल तथा षिखा चाहर द्वारा किया गया।
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