श्री कृष्ण कृपा धाम में गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानन्द जी महाराज की अध्यक्षता में वृन्दावन के प्रमुख सन्त भागवताचार्य, तीर्थपुरोहित एवं समाजसेवियों की विशेष बैठक आयोजित की गई। बैठक में विशेष रूप से मानमन्दिर के विरक्त संत पूज्य रमेश बाबा महाराज भी पधारे। बैठक में विभिन्न वक्ताओं ने यमुना मुक्तिकरण अभियान में पूर्व में हुये अनुभवों एवं कुछ लोगो द्वारा किये गये उपेक्षित व्यवहार के लिये पीड़ाये व्यक्त की । साथ ही इस बात का भी संकल्प दोहराया कि यमुना मैया से अपना जीवन मरण का साथ है इसकी वर्तमान स्थिति से हम सभी को भारी वेदना है सभी ब्रजवासी यमुना की अविरल और निर्मल धारा ब्रज वृन्दावन में पधारे इसके लिये पहले भी प्रयास करते रहे है और आगे भी प्रयास करते रहेगे। पूज्य श्री रमेश बाबा महाराज जी के द्वारा पिछली बार जो यात्रा निकाली गयी थी। उसमें भी हमने तनम न धन से सहयोग किया किन्तु उस यात्रा में जयकृष्ण दास द्वारा तमाम प्रमुख सन्तों भागवताचार्यो एवं यमुना भक्तों के साथ बार बार दुव्र्यवहार किया गया। इसी लिये ब्रजवासियों के मन में उनके प्रति भारी क्षोब है। पूज्य रमेश बाबा जी महाराज ने ब्रजवासियों व सन्तों के वेदना सुनकर इसके प्रति दुख प्रकट किया उन्होने कहा कि मेरे शरीर का कण कण सन्तो, ब्रज एवं ब्रजवासियों की सेवा के लिये समर्पित है मैं उनके तिरस्कार एवं उपेक्षा की कल्पना नहीं कर सकता। यदि किन्ही के द्वारा पिछले आन्दोलन में ऐसा कृत्य किया गया है। तो मुझे भारी कष्ट है । उन्होने यह भी कहा कि वर्तमान में 15 मार्च को कोसीकलाँ से प्रारम्भ यमुना मुक्तिकरण अभियान की पदयात्रा को ही मेरा समर्थन है । 11 मार्च को निकाली जा रही वाहन यात्रा को मेरा कोई समर्थन नहीं है। बैठक में पधारे सभी सन्तों, भागवताचार्यो, तीर्थपुरोहितों एवं सभी यमुना भक्तों से आगामी 15 मार्च को कोसीकलाँ से प्रारम्भ होने वाली यमुना मुक्तिकरण पदयात्रा में बढचढ कर सयोग करने का अनुरोध किया। पूज्य रमेश बाबा ने यह भी स्पष्ट किया कि पिछली बार जो समझौता हुआ उसमें उनकी सहमति नहीं थी।
बैठक की अध्यक्षता करते हुये गीता मनीषी पूज्य ज्ञानानन्द जी महाराज ने कहा कि अब सभी बातें स्पष्ट हो गयी है और पूज्य रमेश बाबा महाराज के द्वारा जो 15 मार्च से चलने वाले आन्दोलन में हम सभी बढचढ कर सहयोग करने के लिये तत्पर है आन्दोलन में सभी पक्षों का सम्मान रहे एवं तालमेल बना रहे। इसके लिये समिति का गठन किया जाये। जिसमें सन्तों, भागवताचायों, तीर्थपुरोहितों एवं यमुना सेवियों का प्रतिनिधित्व रहे और इनके परामर्श से आन्दोलन की रूपरेखा आगे बढाई जाये। जिसका पूज्य रमेश बाबा समेत सभी लोगो ने समर्थन किया।
सभी की ओर से अन्त में धन्यवाद ज्ञापन करते हुये डाॅ मनोज मोहन शास्त्री ने कहा कि आज की बैठक बडी सुखद रही जिसके बाद हम सभी सन्त महन्त, मण्डलेश्वर , भागवताचार्य, पण्डा समाज व ब्राहम्ण समाज सभी एकजुट होकर पूरी शक्ति सामर्थ से पूज्य रमेश बाबा महाराज द्वारा संचालित यमुना मुक्तिकरण अभियान को तन मन धन से गति प्रदान करेगे।
बैठक में मुख्य रूप से स्वामी रामदेवानन्द जी सरस्वती, स्वामी हरिबोल जी महाराज, काष्र्णि जगदानन्द जी महाराज, स्वामी आदित्यानन्द जी महाराज, आचार्य बद्रीश जी, श्री मनोजमोहन जी शास्त्री, श्री मृदुलकान्त जी शास्त्री, गोपेश्वर चतुर्वेदी, श्री कृष्ण सरस, श्याम सुन्दर गौतम, देवेन्द्र शास्त्री, श्री राधाकान्त शास्त्री, सुनील सिंह, हरेश ठेनुआ, उद्यन शर्मा, रासाचार्य देवकीनन्दन जी, सौरभ गौड़ , सत्यभान शर्मा, पं बिहारी लाल शास्त्री, डा वी पी शुक्ला, श्याम चतुर्वेदी, आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किये।
इस अवसर पर महन्त नारायण दास , महन्त सच्चिदानन्द दास जी, महन्त गौर गोपाल दास, पं जयनारायण जमदाग्नि, राजीव मिततल, मुकेश पचैरी, आचार्य विजय किशोर मिश्र, पंकज चतुर्वेदी, भगवान दास चैधरी, ओमप्रकाश पचैरी, मोहन सोनी, लकी पंडित, नीरज शर्मा, श्रीकृष्ण शर्मा, देवेन्द्र शर्मा, तुलसी स्वामी, लेखराज शर्मा, मदनगोपाल बनर्जी, विपिन बापू, अभय वशिष्ठ, करूणा शंकर, विनोद शंकर, जगदीश शर्मा,, नन्द किशोर चतुर्वेदी आदि उपस्थित रहे।
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