गाड़ी पंक्चर करने पर सिपाही सस्पैण्ड करने वाली एसएसपी ने खुद करायी गाड़ी पंक्चर, आखिर अब कौन किसको करेगा सस्पैण्ड एसएसपी मंजिल सैनी के आदेश पर एक दानघाटी मन्दिर के सामने श्रद्धालु की गाडी पंचर करता पुलिसकर्मी गोवर्धन। सूबे की सपा सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल गिरिराज धाम गोवर्धन और यहां संसार भर के कोने कोने से आने वाले करोड़ों श्रद्धालु सरकारी नौकरशाही के शिकार बन रहे है। आस्था, श्रद्धा व भक्ति भावनाओं से ओत प्रोत हजारों किलोमीटर से भी पैदल या गाडि़यों से यहां खिंचे चले आने वाले भक्त जब यहां भारी परेशानियों के बीच कानून के रखवालों के ही शिकार बनते है तो वे यहां से आहत छवि लिये वापिस लौटते है। पुलिस व्यवस्थाओं के नाम पर यहां वर्ष भर होने वाले आयोजनों और त्यौहारों पर हर बार पुलिसकर्मियों को हिदायत दी जाती है कि यहां आने वाले लोग भक्त है और आस्थामय भावनाओं से यहां आते है इसलिये कहीं भी उनके साथ न तो कड़ाई बरती जाये और न ही उन्हें किसी भी बात पर प्रताडि़त किया जाये। जब तक कि वह कोई गम्भीर अपराधी नहीं हो। पूर्व में थाने के एक सिपाही द्वारा एक ऐसे ही श्रद्धालु भक्त की गाड़ी को पंक्चर कर दिया गया था तो उस पर एसएसपी मंजिल सैनी ने उसे तत्काल प्रभाव से निलम्बित कर दिया था। लेकिन आज खुद एसएसपी मंजिल सैनी ने ही कस्बे के दानघाटी मन्दिर के सामने खड़ी एक श्रद्धालु की गाड़ी को अपने साथ मौजूद सिपाही द्वारा पंक्चर करा दिया। जबकि खुद एसएसपी की गाडि़यों का काफिला मन्दिर के सामने ही मुख्य रास्ते पर खड़ा हो कर जाम का कारण बना रहा। अब सवाल ये है कि जब उक्त सिपाही द्वारा श्रद्धालु की गाड़ी को पंक्चर किया गया था तो एसएसपी ने उस सिपाही को सस्पैण्ड कर दिया था अब खुद एसएसपी भी एक श्रद्धालु की गाड़ी को पंक्चर करा रही है तो अब कौन किसको सस्पैण्ड करेगा। जबकि गिरिराज धाम में लगने वाले जाम के कारण के बारे में हर किसी को पता है कि इस जाम के लगने को मुख्य कारण थाना पुलिस ही है। थाना पुलिस ने ही कस्बे के डग्गेमार निजी वाहन चालकों से हर माह अवैध चैथ वसूली कर उन्हें कस्बे के कहीं भी किसी भी भीड़ भाड़ वाले मेला क्षेत्र में खड़े होकर सवारियां भरने की इजाजत दे रखी है। इसी का फायदा उठाकर ये डग्गेमार निजी वाहन संचालक बेखौफ होकर कस्बे के प्रमुख मार्गो के बीचों बीच गाडि़यां खड़ी कर सवारियों भरते है यहां तक कि सड़कों पर इन वाहनों की एक लम्बी लाइन स्थायी रूप से मुख्य मार्गों पर खड़े होकर यातायात को पूरी तरह अवरूद्ध कर देती है। कोई भी वाहन राहगीर वाहन चालक यदि इन्हें हटने को कहता है तो ये डग्गेमार चालक एकत्रित होकर उससे लड़ने मरने को आमादा हो जाते है। एसएसपी महोदया ने श्रद्धालु के उस निजी वाहन को तो अपना निशाना बना कर भेद दिया लेकिन कभी भी उन्होनंे इन डग्गेमार वाहनों के खिलाफ कोई भी कदम क्यों नहीं उठाया क्या थाना पुलिस द्वारा वसूले जाने वाली रकम का कोई हिस्सा ऊपर तक भी पहुंचाया जाता है या फिर उन्होंने यहां के जाम का कोई ठोस निरीक्षण किये बिना ही श्रद्धालु को जाम का दोषी मानकर कानून अपने हाथों में ले लिया। या फिर एसएसपी महोदसा आईपीसी या सीआरपीसी की किसी किताब मंे जाम के कारण बने वाहन को पंक्चर करने का कोई खास कानून पढ़ कर आयी है। गिरिराज महाराज के दर्शनों को आने वाला हर वीआईपी अपनी गाडियों का काफिला मंदिर के मुख्य द्वारा के मुख्य मार्ग के बीचों बीच खड़ा भगवान के दर्शन करते है क्या ये नियम वीआईपी को रास्ते की सहूलियत तक बरतने को भी कायम नहीं है। विगत रविवार को कस्बे के दानघाटी मंदिर के सामने घटित हुआ ये मामला दिल्ली से दर्शन करने आये श्रद्धालु भक्त की कार का है जो कार मंदिर के निकट खडी कर दर्शन कर रहे थे। इसी बीच वहां पहुंचा एसएसपी का काफिला मंदिर के ठीक सामने रोड पर ही आकर रूका। अपनी गाड़ी में से उतर कर एसएसपी ने निकट खडी कार को पीआरओ से कह कर कार को पंचर करा दिया। गिरिराज धाम में आने वाले श्रद्धालुओं के साथ पुलिस जब चाहे तक सख्ती और जब मन चाहे तक नरमी का रूख अपना कर अपनी मनमानी का परिचय देती रहती है। ऐसा तब होता है जब यहां अधिकारी बदलते रहते है। लेकिन कोई भी पुलिस या प्रशासन का अधिकारी यहां के श्रद्धालुओं की सहूलियत और सुविधा के लिय कोई ठोस कदम नहीं उठाते है। जबकि यहां संसार भर के लोग आते है और किसी भी शहर में वाहन चालकों की गलती के उनके साथ ऐसा बर्ताव नहीं किया जाता है। बल्कि उनकी किसी वाहन सम्बन्धी गलती पर उन्हें चालान काट कर उन्हें थमा दिया जाता है। आखिर अब तक किसी भी अधिकारी ने ऐसी व्यवस्था यहां क्यों लाग नहीं की। क्या वे इस पवित्र धाम में आने वाले भक्तों को सिर्फ ऐसे उत्पीड़न की व्यवस्था देते रहने में खुश है। जबकि यदि अधिकारी चाहे तो यहां भी ऐसी किसी वाहन चालक की गलती पर उनका चालान कर उन्हें सभ्य तरीके से दण्डित कर सकते है और व्यवस्थाऐं बनाने में सहयोग कर सकते है।
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