मथुरा

मथुरा। बरसाना में धार्मिक महत्व को देखते हुए व आये दिन श्रद्धालु महिलाओं से छेड़खानी की घटनाओं को लेकर ग्रामीणों व सन्तों ने बैठक कर कस्बे से शराब की चारों दुकानों को बन्द कराये जाने का निर्णय लिया गया था। इसी के चलते जिला प्रशासन को कुछ समय देकर दुकानें बन्द कराने की चेतावनी दी गई थी लेकिन जिला प्रशासन द्वारा ग्रामीणों की मांगों पर गंभीरता से नहीं लिया और इसी के चलते शराब की दुकानें अनवरत चलती रही। इससे कुपित होकर बरसाना व आसपास के ग्रामीणों ने एक बैठक की तथा बैठक में एक स्वर से दुकान बन्द कराये जाने का निर्णय लेते हुए स्वयं दुकानों पर पहुंच कर शराब के ठेके बन्द कराये जाने का निर्णय लिया। इसी के चलते सैकडों ग्रामीण व साधु सन्त एकत्रित हुए और कस्बे में चल रही शराब की दुकानों पर पहुंच गये और दुकानों के शटर बन्द कर जबरन उनमें ताले डाल दिये।   

Read More

मथुरा। महावन क्षेत्र के ग्राम बन्दी में खाना बनाते समय अचानक गैस लीक होने से लगी आग में झुलस कर गंभीर रूप से घायल हो गई जिसने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। पुलिस ने महिला के शव का पंचनामा भर पोस्टमार्टम के लिए भेजा हैं।  मिली जानकारी के अनुसार 32 वर्षीय आरती पत्नी जगदीश पुत्री अमर सिंह निवासी बन्दी थाना महावन विगत दिवस घर में खाना बना रही थी कि गैस का पाइप लीक होने के चलते अचानक गैस में आग लग गई। आग की चपेट में आकर आरती गंभीर रूप से घायल हो गई। जिसें ईलाज के लिए परिजनों ने स्वर्ण जयन्ती अस्पताल में भर्ती कराया जहाॅ कुछ घंटें उपचार के बाद आरती ने दम तोड़ दिया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घटना स्थल का निरीक्षण कर शव का पंचनामा भर पोस्टमार्टम के लिए भेजा हैं।

Read More

मथुरा। थाना बलदेव क्षेत्र अंतर्गत बलदेव के चेयरमैन प्रतिनिधि एवं उनके पिता के साथ हुई मारपीट में लोगों के खिलाफ तहरीर थाना बलदेव में दी गई थी। इस संबंध मंे एसओ बलदेव ने बताया कि चेयरमैन रामकिशन वर्मा उर्फ चिंटू सैनी के प्रतिनिधि नवीन वर्मा और उनके पिता रघुवीर वर्मा के साथ रतन सिंह एवं अन्य द्वारा मारपीट की गई थी, जिसमें रतन सिंह एवं अन्य चार के खिलाफ चेयरमैन द्वारा तहरीर दी गई थी, उन्होंने बताया कि दोनेां पक्षों के बीच समझौता हो गया है। 

Read More

मथुरा। चैकी कृष्णानगर अंतर्गत ब्रजबिहार वाटिका में एक व्यापारी के गोदाम के ताले की डुप्लीकेट चाबी बनाकर रिफाइण्ड के पीपे चोरी करते तुषार पुत्र देवेन्द्र निवासी महाविद्या काॅलौनी और उसके दो साथी को माल सहित पकड़ा है। बताया गया कि अनुराग अग्रवाल के गोदाम से ये रिफाइण्ड चोरी कर रहे थे।

Read More

मथुरा। थाना शेरगढ़ के गाॅव दतौना में नामजदों ने एक युवती के साथ अश्लील हरकत की तथा इसका विरोध करने पर नामजदों ने युवती के घर में घुसकर मारपीट करने की रिपोर्ट पीडि़ता के भाई ने पुलिस में दर्ज कराई हैं।  मिली जानकारी के अनुसार देवजीत पुत्र भगवान सिंह निवासी दनौता थाना शेरगढ़ ने रिपोर्ट दर्ज कराई है कि ग्राम के ही धू्रव पुत्र कन्हैयालाल ने अपने तीन अन्य साथियों के साथ मिलकर उसकी बहन पूनम के साथ अश्लील हरकत की तथा इसका विरोध करने पर नामजदों ने उसके घर में घुसकर युवती से मारपीट कर जान सें मारने की धमकी दी। पुलिस ने मामला दर्ज कर कार्यवाही शुरू कर दी हैं।  

Read More

दृश्य- एक : नई दिल्ली में चहल-पहल भरी एक सुबह। घर में गजल गायक जगजीत सिंह की गाई गजल का रिकॉर्ड बज रहा है, "सूरज ठेकेदार सा सबको बांटे काम" भाई को कॉलेज के लिए तैयार होते देख निशा लगातार सोच रही है, आखिर मैं क्यों नही जाती कॉलेज? मां उसे जल्दी से भाई का कॉलेज बैग लाने के लिए कहती है, अनमनी सी वह थके कदमों से जाती है और एक फीकी सी मुस्कान के साथ बैग भाई को थमा देती है, और इस सारे मंजर को झाड़ू लगाते-लगाते ध्यान से देख रही है, घर में सफाई का काम करने वाली छोटी, यह सब देख उसे अपने घर की सुबह याद आ रही है जब मां ने छोटे भाई को तो तैयार हो स्कूल जाने के लिए कहा और उसे जल्दी से घर का काम निबटा कर मेम साब के यहां सफाई के लिए भेज दिया।  निशा और छोटी दोनों समाज के अलग-अलग तबकों की बेटियां, लेकिन दोनों के मन में सवाल एक से- इस सूरज ने उन्हें अपने भाइयों के तरह पढ़ने का काम क्यों नही दिया। निशा को कॉलेज की पढ़ाई की इजाजत नहीं दी गई और छोटी के नन्हे कदमों को स्कूल की तरफ कदम बढ़ाने ही नहीं दिए गए और वो लाचार और वह बस लालची नजरों से आते-जाते स्कूल जाते बच्चों को देखती रही... दृश्य- दो : हरियाणा का एक छोटा सा गांव, दूर केरल से इस गांव में "ब्याह" के नाम पर लाई गई उषा अपनी अजन्मी बिटिया की जिंदगी को लेकर पथराई सी आखों से काम तो खेत में कर रही है लेकिन मन में बवंडर मचा हुआ है, सास और पति ने धमकी दी है अगर इस बार भी लड़की हुई तो इस बार भी वही हश्र होगा जो पिछली बार हुआ था। उस वक्त एक टेस्ट में उसके गर्भ में बिटिया का पता लगते ही सास और पति ने उसे गर्भ में ही मरवा दिया था, लेकिन उषा इस बार किसी भी कीमत पर अजन्मी बिटिया की जान बचाना चाहती है, चाहती है, सास और पति से चीख-चीखकर पूछना कि इस बार तो "शादी" के नाम पर लड़की लाने केरल जाना पड़ा, लेकिन अगर लड़कियों की जिंदगियों को यूं ही खत्म करते रहे तो कहीं भी लड़की नहीं मिलेगी, लड़की नहीं रही तो संसार कैसे चलेगा, लेकिन सवालों का बवंडर उसके मन में ही उमड़-घुमड़ रहा है, हिरणी सी भयभीत वह लगातर सोच तो रही है लेकिन शब्द जबान पर आ ही नहीं पा रहे हैं... जी, ये भद्दी और घृणित सच्चाई आज की है और हमारे आस पास की ही है। भले ही हम सब यह सुनते हुए बड़े हुए हों कि स्त्री देवी है, बेटियां पूजनीय हैं, लेकिन अब भी काफी जगह चाहे महानगर हो या सुदूरवर्ती गांव, सच्चाई कुछ और ही है। बेटियों को पूजने की बात कहने वाले हमारे समाज में आज भी बड़ी संख्या में बेटियां मां के गर्भ में ही मारी जाने लगीं हैं। कितने ही लड़कियां स्कूल जाने को तरसती हैं, स्कूल की इमारत में जाना उनकी हसरत ही रह जाती है। अब केन्द्र सरकार ने इस बदनुमा दाग से अधिक आक्रमकता से निबटने का फैसला करते हुए ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ को एक आंदोलन की तरह चलाने का मन बनाते हुए इसे अपने अन्य महत्वाकांक्षी अभियान के तरह चलाने की घोषणा की है। यह योजना प्रारंभ में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ऐसे 100 चुनिंदा जिलों में एक राष्ट्रीय अभियान के जरिए कार्यान्वित की जाएगी, जहां बालक-बालिकाओं का अनुपात बेहद कम है। खास बात यह है कि ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना का शुभारंभ हरियाणा से ही इसलिए किया गया है क्योंकि इसी राज्य में बालक-बालिका अनुपात सबसे कम यानी सर्वाधि‍क खराब है। ‘कन्या भ्रूण हत्या’ जैसी घटनाएं बदस्तूर जारी हैं और इस पाप के लिए कोई और नहीं, बल्कि‍ इन अजन्मी बेटियों के नासमझ माता-पिता, इनके अपने ही जिम्मेदार हैं। कुछ चंद सिक्कों की खातिर डॉक्टरी के नाम पर कसाई का काम कर रहे शिक्षित, झोला छाप डॉक्टर, घरेलू तरीकों से इन अजन्मी बच्चियों की जान ली जा रही है। कानून के बावजूद गांव, देहात और छोटे कस्बों, जगह-जगह ऐसे विज्ञापन आम नजर आते हैं कि हमारी मशीनें फट से बता देंगी कि गर्भ में लड़का है या लड़की और हम सब जानते ही हैं कि गर्भ में बिटिया का पता लगने पर उस काम-तमाम करने के इंतजाम भी वहां हैं। झांसी की रानी, इंदिरा गांधी, कल्पना चावला, किरण बेदी, बच्छेन्द्री पॉल, महादेवी वर्मा, इसरो की महिला वैज्ञानिक, ऐश्वर्या रॉय बच्चन, किरण शॉ मज़ुमदार, फातिमा बीबी, सानिया मिर्जा, सानिया नेहवाल, चंदा कोचर और लता मंगेशकर जैसी भारतीय समाज को गर्व से भर देने वाली महिलाओं के बावजूद यह स्थिति बेहद दुखद...। इस बात को शायद लोग भूल जाते हैं कि बेटियां भी अपने माता-पिता का नाम रोशन करती हैं और वक्त आने पर, खासकर बुढ़ापे में उनका सहारा भी बन सकती हैं। निष्ठुर सोच वाले ये भी नहीं समझ पा रहे हैं कि अगर बेटियां कम हो गईं तो वे अपने बेटों के लिए बहनें और बहुएं कहां से लाएंगे। सरकारी, गैर सरकारी तौर पर इस घृणित बुराई को रोकने के प्रयासो के बावजूद कन्या भ्रूण हत्याएं हो रही हैं। अब केन्द्र सरकार ने इस बदनुमा दाग से अधिक आक्रमकता से निबटने का फैसला करते हुए ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ को अपने अन्य महत्वाकांक्षी अभियान के तरह चलाने की घोषणा की है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य ‘बालक-बालिका’ अनुपात बढ़ाना है। बालक-बालिका अनुपात (सीएसआर) से यह पता चलता है कि किसी भी राज्य या शहर अथवा देश में हर 1000 बालकों के अनुपात में कितनी बालिकाएं हैं। एक दुखद सच यह है कि कन्या भ्रूण हत्या की निर्मम घटनाओं के चलते भारत में यह अनुपात लगातार घटता जा रहा है। वर्ष 1991 में हर 1000 बालकों पर 945 बालिकाएं थीं, लेकिन वर्ष 2011 में हर 1000 बालकों पर 918 बालिकाएं ही थीं। आंकड़े बयान करते है कि इस दौरान हरियाणा में सबसे कम यानि 877 महिलाएं जबकि केरल में सर्वाधिक यानि 1000 के पीछे 1084 महिलाएं हैं।  यह योजना महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, मानव संसाधन विकास मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय की संयुक्त पहल है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अनुसार यह योजना लड़कियों और महिलाओं के अधिकारों का सम्मान करने और उन्हें सुरक्षा मयस्सर करने पर भी केंद्रित होगी। इस दुनिया में अपना पहला कदम रखने के लिए तैयार बच्चि‍यों के जीवन की रक्षा करना और उन्हें शिक्षि‍त कर अपनी जिंदगी में आने वाली तमाम चुनौतियों का सामना करने लायक बनाना ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना इस योजना का उद्देश्य है। देशभर में जन अभियान के माध्यम से सामाजिक मानसिकता को बदल कर और इस विषम विषय पर जागरूकता पैदा करके इस योजना को सफल बनाने की कोशि‍श की जाएगी। इसमें लड़कियों एवं महिलाओं से किए जा रहे भेदभाव को समाप्त करने पर भी जोर दिया जाएगा। बालक-बालिका अनुपात में बेहतरी को सुशासन के एक प्रमुख विकास संकेतक के तौर पर शामिल करना भी इसका एक उद्देश्य है। इस योजना की मुख्य रणनीतियों में सामाजिक लामबंदी एवं संवाद अभियान को बढ़ावा देना भी शामिल है ताकि सामाजिक मानदंडों में बदलाव लाने के साथ-साथ बालिकाओं को समान महत्व दिलाया जा सके।  इस अभियान में सभी प्रदेश और केंद्र शासित राज्यों के चुनिंदा शहरों को शामिल किया जाएगा।  महिला पुरुष अनुपात दर की निराशाजनक तस्वीर के बाद अब जरा जानें महिला साक्षरता की तस्वीर, वहां भी तस्वीर निराशाजनक है। 2011 मे महिला साक्षरता दर 65.46% तथा पुरुष साक्षरता दर 82.14% दर्ज की गई है। बिहार में यह दर सबसे कम यानि 46.40% उत्तर प्रदेश में 51.36%, हरियाणा में 56.91% तथा राजस्थान में 47.76% है। खुशी की बात यह है कि केरल में महिला साक्षरता दर 100 यानि शत-प्रतिशत है। सूत्रों के अनुसार इस योजना की मुख्य रणनीतियों में सामाजिक लामबंदी एवं संवाद अभियान को बढ़ावा देना भी शामिल है ताकि सामाजिक मानदंडों में बदलाव लाने के साथ-साथ बालिकाओं को समान महत्व दिलाया जा सके।  ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ यानी बेटियों का उनका हक दिलाने वाला अभि‍यान निश्चि‍त रूप से एक जनहित और राष्ट्रहित क्रांति है। बालिका के सशक्तिकरण पर केंद्रित महत्वपूर्ण योजना 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' पर केंद्र सरकार 100 करोड़ रुपये खर्च करेगी। इसका उल्लेख वित्त वर्ष 2014-15 के बजट में किया गया है।  हालांकि,  'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' योजना के आलोचकों की भी कोई कमी नहीं है। इन लोगों का कहना है कि इस योजना को सफल बनाने के लिए मामूली रकम के बजाय भारी-भरकम धन का आवंटन किया जाना चाहिए। इसके साथ ही कन्या भ्रूण हत्या करने वालों पर ज्यादा-से-ज्यादा सख्ती बरतने की भी जरूरत है ताकि अन्य लोगों के मन में भय पैदा हो। जाहिर है, इसके लिए एक कड़ा कानून बनाना होगा। इसी तरह गर्भधारण पूर्व और जन्म पूर्व जांच तकनीकों का धड़ल्ले से इस्तेमाल करने वाले डॉक्टरों पर भी कड़ाई से लगाम कसने की जरूरत है। इसके अलावा स्कूली शि‍क्षा के दौरान ही बालिकाओं के साथ समानता का भाव बालकों के जेहन में पैदा करने की कोशि‍श की जानी चाहिए, तभी आगे चलकर वे उनके साथ भेदभाव करने से बच सकेंगे। यही नहीं, इसका फायदा उनकी नई पीढ़ी को भी मिलेगा।  इनका कहना है कि बालिकाओं के खि‍लाफ हिंसा की बढ़ती घटनाओं के मद्देनजर निश्चि‍त तौर पर सुनियोजित तरीके से कदम उठाने पड़ेंगे। पैसे की भारी किल्लत के साथ अन्य कष्ट उठाकर भी अपनी बेटियों की पढ़ाई के साथ-साथ उन्हें आर्थि‍क दृष्टि‍ से सक्षम बनाने वाले माता-पिता को सार्वजनिक तौर पर सम्मानित करने की भी आवश्यकता है, ताकि वे समाज के अन्य लोगों के लिए नजीर बन सकें और संकुचित सोच वाले लोग उनसे प्रेरणा ले सकें। इसके साथ ही बहादुरी के कारनामे दिखाने वाली लड़कियों को भी सार्वजनिक तौर पर सम्मानित करने की आवश्यकता है। इसके साथ ही बालिकाओं एवं महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर गौर करने और उनके लिए विशेष सरकारी एवं निजी अस्पताल खोले जाने की भी जरूरत है। इसी तरह नई पीढ़ी का मार्गदर्शन भी अभी से ही करना जरूरी है। इन सब का भी सकारात्मक असर हमारे समाज पर अवश्य पड़ेगा और आगे चलकर लड़कियों एवं महिलाओं के साथ समानता का भाव लोगों के मन में पैदा होगा। उम्मीद की जानी चाहिए कि 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' के प्रभावी अभियान से सूरज ठेकेदार सा निशा और छोटी को भी पढ़ने का काम सौंपेगा और उषा की अजन्मी बिटिया सूरज की रोशनी देखने इस दुनिया में कदम रखेगी और पढ़-लिखकर सूरज ठेकेदार उसे भी कोई अच्छा काम काज सौंपेगा। आमीन...

Read More



Mediabharti