सतत ऊर्जा आपूर्ति की जरूरत के लिए उपलब्ध ऊर्जा संसाधन का दोहन आवश्यक हो जाता है। इन संसाधनों में नवीकरणीय ऊर्जा संसाधन अग्रणी एवं महत्वपूर्ण हैं। यह अब एक स्थापित तथ्य है कि नवीकरणीय ऊर्जा सतत विकास का अभिन्न अंग बन सकती है, क्योंकि यह अनंत है और इसके पर्यावरण हितैषी पहलू है।
नवीकरणीय ऊर्जा काफी हद तक शहरी क्षेत्रों में ऊर्जा संकट के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। अब तक देश में लगभग 33 हजार 200 मेगावाट औसतन क्षमता की नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएं संस्थापित है, जिनमें 22,168 मेगावाट क्षमता की पवन ऊर्जा, 2,870 मेगावाट की सौर ऊर्जा, 4,225 मेगावाट की जैव ऊर्जा और 3,939 मेगावाट की लघु पनबिजली ऊर्जा परियोजनाएं शामिल हैं।
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय विभिन्न शैक्षिक और अनुसंधान संस्थानों, स्वायत संगठनों और उद्योग के जरिये प्रौद्योगिकी विकास और प्रदर्शन के लिए अनुसंधान और विकास के लिए सहायता प्रदान करता है।
इसके अलावा मंत्रालय ने तीन अनुसंधान संस्थान-राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान, गुडगांव, राष्ट्रीय पवन ऊर्जा संस्थान-चेन्नई और सरदार स्वर्ण सिंह राष्ट्रीय संस्थान-कपूरथला, पंजाब में क्रमश: सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और जैव ऊर्जा में अनुसंधान और विकास के लिए स्थापित किए हैं।
11वीं योजना में नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में अनुसंधान और विकास के लिए बजट से 500 करोड़ रुपये के आवंटन से सौर ऊर्जा, जैव ऊर्जा, हाइड्रोजन और ईंधन सैल के क्षेत्रों के लिए 525 करोड़ रुपये के परिव्यय से अनुसंधान और विकास की 169 परियोजनाओं को स्वीकृत किया गया और 239.56 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई। शुरू की गई अनुसंधान और विकास की परियोजनाओं में सौर सैलों में उच्चतर कुशलता, मेगावाट स्तर का सौर ताप विद्युत उत्पादन, बायोमास ऊर्जा में उन्नत अनुसंधान, हाईड्रोजन उत्पादन, भंडारण और उपयोग तथा ईंधन सैलों के विकास की परियोजनाएं शामिल हैं। बायोगैस क्षेत्रों में विभिन्न अनुप्रयोगों के लिए बायोगैस शुद्ध करने और बोटलिंग करने की प्रदर्शन परियोजनाएं शुरू की गई। चालू योजना अवधि के विगत ढाई वर्षों में नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा में अनुसंधान और विकास पर 208.12 करोड़ रुपये व्यय किया गया।
मंत्रालय ने वर्तमान 12वीं योजना के लिए अनुसंधान और विकास के लिए बजट प्रावधान बढ़ाकर इसे 910 करोड़ रुपये कर दिया है। नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों; सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बायोमास, बायोगैस, जैव तरल ईंधन और हाईड्रोजन/ईंधन सैल प्रौद्योगिकियों समेत अनुसंधान और विकास के प्रमुख क्षेत्रों में लागत में कमी लाने और कुशलता में सुधार पर विेशेष ध्यान केन्द्रित किया जाना है।
नवीकरण ऊर्जा क्षेत्र में सक्रिय संस्थान
राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान
संस्थान का मुख्य उद्देश्य जवाहर लाल नेहरू राष्ट्रीय सौर मिशन (जेएनएनएसएम) के क्रियान्वयन में मंत्रालय को सहायता देना और सौर ऊर्जा के क्षेत्र में अनुसंधान, परीक्षण और प्रौद्योगिकी विकास के लिए सर्वोच्च राष्ट्रीय केन्द्र के रूप में काम करना है। अनुसंधान के क्षेत्रों में सौर फोटोवोल्टिक, सौर ताप ऊर्जा भंडारण और सौर संसाधन आकलन शामिल हैं।
राष्ट्रीय पवन ऊर्जा संस्थान, चेन्नई (एनआईडब्लूई)
एनआईडब्लूई पवन ऊर्जा विकास के लिए तकनीकी केन्द्रीय सम्पर्क के रूप में काम करता है और देश में पवन ऊर्जा क्षेत्र के विस्तार में सहायता देता है। संस्थान द्वारा की जा रही गतिविधियों में तट पर और तट क्षेत्र में पवन संसाधन आकलन, पवन टर्बाइन काम काज परीक्षण, ग्रिड कनेक्शन और ऊर्जा गुणवत्ता, प्रचालन और रखरखाव, पवन ऊर्जा विकास, मानव संसाधन विकास, अनुसंधान और डिजाइन विकास के लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग शामिल हैं। संस्थान ने 73 स्थानों पर 100 मीटर मेट-मास्ट वाले पवन संसाधन आकलन के लिए वास्तविक समय का नेटवर्क और देशभर में सौर रेडिएशन संसाधन आकलन के लिए 121 स्वचालित केन्द्र स्थापित किए हैं। संस्थान गुणवत्तापूर्ण पवन टर्बाइनों के व्यवस्थित विकास के अलावा पवन टर्बाइनों के भारतीय मानकों को तैयार करने पर भी कार्य कर रहा है।
सरदार स्वर्ण सिंह राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा संस्थान
इस संस्थान का मुख्य उद्देश्य जैव ऊर्जा में अनुसंधान, डिजाइन, विकास, परीक्षण, मानकीकरण और प्रौद्योगिकी प्रदर्शन से संबंधित कार्य करना और इसमें मददगार बनना है। अनुसंधान और विकास गतिविधियों में जैव ऊर्जा, जैव ईंधनों और ठोस सिन्थेटिक ईंधनों, परिवहन के लिए तरल और गैस के स्वरूप, एक स्थान से दूसरे स्थान पर लाये जाने वाले तथा स्थिर अनुप्रयोग का विकास और विभिन्न प्रकार के बायोमास के प्रभावी इस्तेमाल के लिए नई प्रौद्योगिकियों का विकास शामिल हैं।
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