नई दिल्ली । संसद का शीतकालीन सत्र बुधवार से शुरू हो गया है। आज पहले दिन लोकसभा दिवंगत सांसदों को श्रद्धांजलि देने के बाद गुरुवार तक के लिए स्थगित हो गई जबकि राज्यसभा में नोटबंदी पर चर्चा शुरू हो गई है। इस दौरान विपक्ष ने जमकर किया। विपक्ष समेत सर्वदलीय मांग पर राज्यसभा स्पीकर ने दो दिन के लिए इस मुद्दे पर चर्चा के लिए समय नियत किया है। सबसे पहले कांग्रेस की ओर आनंद शर्मा ने नोटबंदी के मुद्दे पर सरकार को घेरा। उन्होंने सीधे-सीधे सरकार पर आरोप लगाया कि न तो नोटबंदी को लागू करने का तरीका ठीक है और न ही यह पूरा मिशन गोपनीय रखा गया। इससे जुड़ी तमाम सूचनाएं कई अखबारों में पहले ही छप गईं थीं। वहीं, बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि भाजपा ने अपना कालाधन सफेद कर लिया है।
कांग्रेस के आनंद शर्मा ने कहा कि नोटबंदी के फैसले से देश का किसान, मजदूर और आम आदमी परेशान हैं। किसान को बीज के लिए पैसे चाहिए। आज किसान बैंक में 2000 रुपये के लिए लाइन में खड़ा है। किसान धोती में क्रेडिट कार्ड नहीं रखता है। सरकार ने सभी को अपराधा बना दिया। भारत को कालाबाजारियों का देश बना दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक, सोनिया गांधी ने अपने लोकसभा सांसदों से कहा है कि नोटबंदी के चलते लोगों को हो रही परेशानियों के खिलाफ मजबूती से लड़ें और सरकार की नोटंकी नहीं चलने दें। कांग्रेस में लोकसभा में इस मुद्दे पर कार्यस्थगन का प्रस्ताव भी लागएगी।
आनंद शर्मा ने कहा, बाजार में मौजूद नोट का 86 फीसदी हिस्सा 500-1000 रुपये के नोटों का था, सरकार की एक घोषणा ने इनका चलना बंद कर दिया। क्या यह सारा पैसा कालाधन था? नोटबंदी से देश के किसानों का बुरा हाल है और लोगों का काम ठप हो गया है। पूरी दुनिया में एक संदेश गया कि हिन्दुस्तान की इकोनॉमी कालेधन पर चलती है।
आनंद शर्मा ने कहा कि 2000 का नया नोट रंग छोड़ता है। बचपन में चूरन की पुडियां में आसा नोट मिलता था। नोटबंदी पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा यूनियनों को फैसला लीक किया गया। बैंक से कैश निकासी पर रोक क्यों है? नोटबंदी से बेटियों की शादियां तक रुकी हैं। गरीब की लाश अस्पताल में फंसी है। भाजपा ने घाव दिए और घाव पर नमक भी लगाया। मजदूर, किसान नोटबंदी से बेकार हो गए। क्या गाजीपुर की रैली का भुगतान क्रेडिट कार्ड से हुआ? एसबीआई को मार्च से नोटबंद होने की जानकारी थी। मायावती ने कहा कि राज्यसभा में प्रधानमंत्री को आकर नोटबंदी पर जवाब देना चाहिए। मैंने देखा कि वित्तमंत्री अरुण जेटली दुखी दिख रहे हैं।
आतंकी नहीं जाते नोट लेकर बैंक
आनंद शर्मा ने कहा, कोई भी आतंकवादी बोरा भरकर नोट बैंक लेकर नहीं जाता, वही जाता है जिसके पास सही पैसा होता है। विदेशी सैलानियों को दिक्कत हुई। वह सिर्फ 6000 रुपये ही का नोट बदल सकते थे। उन्होंने आक्रामक अंदाज में आरोप लगाते हुए कहा, पैसा हमारा है और ऐसा कौन सा कानून है जो हमारा ही पैसा निकालने से रोक रहा है। आपने देश में वित्तीय अस्थिरता ला कर रख दी है। कालेधन से लड़ाई का यह कैसा तरीका है?
सरकार में बिना डॉक्टरी सब सर्जन
आनंद शर्मा ने तंज कसते हुए कहा, मोदी जी की सरकार में बिना डॉक्टरी के बहुत सारे सर्जन बन गए हैं। हर चीज पर सर्जिकल स्ट्राइक हो रहा है। कालेधन पर सर्जिकल स्ट्राइक हो गया। उन्होंने कहा, आपके पास जानकारी है कि स्विस बैंक में किसका काला धन है, यह जानकारी आपके पास है। आपके पास सूची है ऐसे लोगों की। उन्होंने मांग उठाई कि ऐसे लोगों के नाम देश को बताएं। अगर कालेधन पर कार्रवाई करनी है तो सूची जारी करें। दो साल में कितने हजार करोड़ के कर्जे माफ किये। ऐसे लोगों के नाम भी आम जनता को बताएं जिनके कर्ज माफ किये गए।
नहीं चल रहा 2000 का नोट
माकपा के सीताराम येचुरी ने राज्यसभा में 2000 का नया नोट दिखाया और कहा कि इस नोट को कोई नहीं ले रहा है। वहीं सपा से निष्किासत रामगोपाल यादव ने कहा कि इसमें बड़ा घपला है। कोई भी अमीर लाइन में नहीं दिख रहा है। छोटे शहरों में कोई भी 2000 का नोट नहीं ले रहा है। ऐसा तो आपातकाल के दौरान भी नहीं हुआ। आम आदमी भिखारी बन गया है।
सत्तापक्ष ने कहा, फैसला गुप्त रखने से बेईमान लोग दुखी
राज्यसभा में आनंद शर्मा के सवाल का जवाब देते हुए बिजली मंत्री पीयूष गोयल ने
कहा कि सारा देश सरकार के फैसले का स्वागत कर रहा है। कुछ लोगों को दिक्कत हो रही है। ईमानदारी का सम्मान हुआ है। गोपनीयता से बेइमानों को दिक्कत हुई। उन्होंने कहा, ‘नोटबंदी का फैसला गुप्त रखने से बेईमान लोग दुखी, आज ईमानदार लोग खुश हैं। पहली बार देश में ईमानदार का सम्मान हुआ है और बेईमान को नुकसान हुआ है। मुझे लगता था नोटबंदी के मुद्दे पर सभी दल सरकार के साथ आएंगे, पर समझ नहीं आ रहा कि पार्टियां इसका विरोध क्यों कर रही हैं? कहीं दल डर तो नहीं गए कि इस मुद्दे पर सरकार का फैसला लोगों को पसंद आ रहा है।’
आम आदमी भिखारी बन गया: रामगोपाल यादव
सपा से निकाले गए राज्यसभा सांसद रामगोपाल यादव ने नोटबंदी की तुलना आपातकाल से करते हुए कहा लोग भिखारी बन गए। उन्होंने कहा कि अगर पैसे से चुनाव जीता जाता तो सत्ताधारी कभी नहीं हारते इसलिए नोट बैन को चुनावों से जोडऩा गलत है। हां, लेकिन नोट बैन का फैसला सही समय पर नहीं लिया गया। फसलों की बुआई चल रही है, किसान खाद और बीज नहीं ले पा रहा। आलू बिक नहीं पा रहा. कोल्ड स्टोरेज में आलू सड़ रहे हैं। आपके इस कदम से घाटा हो गया। यही नहीं नोटबंदी से पहले ही 2000 के नोट ट्वीट किए गए। गोपनीयता टूटने से नोटबंदी की मंशा फेल हो गई। सुबह ही उन्होंने कहा था कि नोटबंदी पर मैं किसान के साथ खुद भुक्तभोगी हूं, 10 हजार बोरा आलू बर्बाद हो रहा है।
शरद यादव (जदयू), डी राजा (भाकपा), आनंद शर्मा (कांग्रेस), सीताराम येचुरी (माकपा), नरेश अग्रवाल (सपा), प्रेमचंद्र गुप्ता (राजद) ने नोटबंदी पर चर्चा के लिए नोटिस दिया था। टीएमसी सांसदों ने संसद भवन परिसर में प्रदर्शन किया विदेश से कालाधन वापस लाने की मांग की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद की शीतकालीन सत्र से होने से पूर्व उम्मीद जताई थी कि इस बार सत्र में अच्छी चर्चा होगी। हम चर्चा के लिए तैयार हैं। सबके साथ रहने से काम अच्छा होता है। खुलकर चर्चा हो इसके लिए भी हम तैयार हैं। जनता की उम्मीदनों पर चर्चा होगी। पीएम ने कहा कि पिछले सत्र में जीएसटी जैसा अहम बिल पास हुआ, यह बड़ा कदम था। मैंने सभी दलों को धन्यवाद कहा था।
साभार-khaskhabar.com
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