मथुरा

मथुरा। थाना गोवर्धन क्षेत्र के कुसुम सरोबर में स्नान करते समय दो श्रद्धालु गहरें पानी में चले जाने से पानी में डूब गये। घटना की सूचना पर पहुंची पुलिस ने घटना स्थल का निरीक्षण कर गोतोखोरों की मदद से दोनो शवों को वाहर निकलवाकर शव का पंचनामा भर पोस्टमार्टम के लिए भेजा हैं।  मिली जानकारी के अनुसार आगरा निवासी 18 वर्षीय भूपेन्द्र व 24 देवेन्द्र अपने साथियों के साथ ब्रज भम्रण पर आये थे इसी के चलते उन्होंने पहलें गोवर्धन की परिक्रमा लगाई और इसी दौरानसभी लोग कुसुम सरोवर में स्नान करने लगें स्नान करते समय देवेन्द्र व भूपेन्द्र गहरें पानी में चले गये और डूबनें लगें भूपेन्द्र व देवेन्द्र ने बचाव के लिए शोर मचाया तो साथियों ने शोरगुल कर बचाने का प्रयास किये इसी दौरान दो युवकों को कुण्ड में डूबता देख गोतोखोरों ने भी कुंड में छलाग लगा दी। लेकिन काफी देर तक गोताखोर दोनो युवकों को तलाशरते रहें इसी दौरान स्थानीय पुलिस भी आ गई पुलिस ने गोतोखोरों की मदद से डूबें दोनो देवेन्द्र व भूपेन्द्र को वाहर निकलवाया लेकिन तब तक दोनो की मौत हो चुकी थी। पुलिस ने उनके साथियों से पुछताछ कर घटना की जानकारी मृतक के परिजनों को दी। सूचना पर परिजन भी मौके पर आ गये। पुलिस ने दोनो शवों का पंचनामा भर पोस्टमार्टम के लिए भेजा हैं।

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मथुरा। थाना फरह पुलिस ने मुठभेंड़ के बाद शाहरूख पुत्र सावू निवासी खासपुर सराया ख्वाजा शाहंगज आगरा, आबिद पुत्र अन्सार, सलीम पुत्र समीम, इमरान पुत्र इलयास निवासी उपरोक्त को गिरफ्तार कर उनके कब्जें से अवैध असलाह व कारतूस बरामद करने में सफलता हासिल की हैं।  

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नई दिल्ली : पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अंतर्गत पेट्रोलियम नियोजन और विश्‍लेषण प्रकोष्‍ठ द्वारा संगणित/प्रकाशित सूचना के अनुसार कच्‍चे तेल की अंतर्राष्‍ट्रीय कीमत 12 जून को बढ़कर 108.52 अमरीकी डॉलर प्रति बैरल हो गई। यह पिछले कारोबारी 11 जून की कीमत 107.13 अमरीकी डॉलर प्रति बैरल से अधिक है।   रुपये के संदर्भ में कच्‍चे तेल की कीमत 12 जून को मामूली बढ़कर 6438.49 रुपये प्रति बैरल हो गई, जबकि 11 जून को यह 6356.02 रुपये प्रति बैरल थी। रुपये 12 जून को 59.33 रुपये प्रति अमरीकी डॉलर पर स्थिर रहा। 11 जून को भी यह 59.33 रुपये प्रति अमरीकी डॉलर पर बंद हुआ था। 

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नई दिल्ली : सभी हि‍तधारकों से सुझाव प्राप्‍त करने के बाद कंपनी (मीटिंग एंड पावर आफ बोर्ड) नियम, 2014 के नियम 6 में संशोधन का फैसला किया गया है।   इससे कंपनियों को लेखा परीक्षक समि‍ति आडिट कमेटी, नामांकन एवं परि‍श्रमि‍क समि‍ति के गठन के लिए 31 मार्च 2015 तक का समय मिल जाएगा।   इसी तरह, कंपनी (लाभांश की घोषणा और भुगतान) नियम, 2014 के नियम 3 के उप नियम (5) में संशोधन किया जाएगा ताकि इस मसले पर बेहतर स्‍पष्‍टता हो।   मंत्रालय की बेवसाइट पर इस बारे में स्‍पष्‍टीकरण जारी किया जा चुका है कि 1.4.2014 से पहले के ऋण/प्रति‍भूति‍‍/प्रति‍भूति अधि‍ग्रहण आफ सिक्‍युरिटीज से संबंधित रजिस्‍ट्रर को नए प्रारूप में नहीं तैयार करना होगा।   इस बारे में अधिसूचना एवं वि‍ज्ञप्‍ति‍यां मंत्रालय की बेवबसाइट पर उपलब्‍ध हैं। 

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नारायणमूर्ति हटैेंगे, सिक्का इंफोसिस के नए सीईओ होंगे   बेंगलूरू : इंफोसिस के नए एमडी और सीईओ होंगे विशाल सिक्का। यह 1 अगस्त से इंफोसिस के सीईओ और एमडी का पद संभालेंगे। सिक्का एसएपी एजी में एक्जिक्यूटिव बोर्ड के सदस्य रह चुके हैं। नारायणमूर्ति इंफोसिस के एक्जिक्यूटिव चेयरमैन पद से 14 जून को इस्तीफा देंगे और वो 11 अक्टूबर से कंपनी के चेयरमैन एमेरिटस होंगे। इसी तारीख से के वी कामथ नॉन-एक्जिक्यूटिव चेयरमैन होंगे। एस गोपालकृष्णन एक्जिक्यूटिव वाइस चेयरमैन पद से इस्तीफा देंगे। 14 जून को नारायणमूर्ति के बेटे रोहन मूर्ति एक्जिक्यूटिव रोल से हटेंगे। वहीं श्रीनाथ बाटनी इंफोसिस के होल टाइम डायरेक्टर के पद से 31 जुलाई को इस्तीफा देंगे। इसके साथ ही इंफोसिस के बोर्ड ने यूबी प्रवीण राव को प्रमोट करके सीओओ बनाया है। इंफोसिस के पूर्व सीएफओ, वी बालाकृष्णन के मुताबिक विशाल सिक्का के सीईओ और एमडी बनने से निश्चितता आएगी। विशाल सिक्का के पास सर्विस सेक्टर का अनुभव नहीं है इसलिए उनके लिए यह चुनौती होगी।

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पवन तिवारी लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद हुई बहस का जवाब देते हुए दिया गया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण कई मायनों में अहम था। इस भाषण को सुनने के बाद ऐसा लगा कि देश की राजनीति में शायद 'अच्छे दिन' आने वाले है। मोदी एक चतुर राजनेता है। अभी मोदी सरकार के लगभग दो ही हफ्ते हुए हैं और इस दौरान उन्होंने परिवर्तन की कई नई आशाओं को जगाया है। देश की भ्रष्ट हो रही राजनीति को सुधारने के लिए मोदी ने अपने सभी मंत्रियों से उनकी संपति का ब्यौरा मांगा है और मंत्रियों से किसी भी प्रकार के व्यवसाय से दूर रहने की बात की है। पर, क्या संपति का ब्यौरा और व्यवसाय से दू रहने की नसीहत देने से देश की रंगों में खून की तरह बहने वाला भष्टाचार दूर हो जाएगा...? अपने भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने ग्रामीण विकास और गुजरात मॉडल समेत कई मसलों पर अपने गृह राज्य गुजरात का हवाला दिया। कृषि विकास का मामला हो या स्किल डेवलपमेंट..., कई मुद्दों पर प्रधानमंत्री ने कहा कि गुजरात में उन्होंने कई सफल कार्यक्रम चलाए हैं। लेकिन, क्या देश के एक छोटे से राज्य गुजरात की तुलना भारत जैसे विकासशील देश से करना सही है। प्रधानमंत्री के भाषण को नि:संदेह 'अच्छा' था लेकिन अब वक्त आ गया है कि कुछ काम जमीन पर भी दिखे। कई वर्षों के बाद देश की जनता ने स्थिर सरकार के लिए जनादेश दिया है। अब देश के प्रधानमंत्री को देश की जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने की चिंता होनी चाहिए ताकि 'अच्छे' दिनों की शुरुआत हो सके।

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