मथुरा

अच्छे दिन आएंगे...' की उम्मीदों के साथ नया निजाम बदल चुका है। लेकिन, अन्य जगहों की तरह कृष्ण की नगरी मथुरा में बचपन आज भी कचरा ढोने के लिए मजबूर है। तपते सूरज के नीचे इनके बचपन का झुलसना अभी भी जारी है। मोदी ने 300 कमल मांगे थे... जनता ने 336 दिए... अब इनका 'कमल' कब खिलेगा यह यक्ष प्रश्न है।

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मुंबई। मुंबई के सी प्रिसेंसेस होटल में भारतीय जनता पार्टी के नव निर्वाचित सांसद और भोजपुरी गायक -अभिनेता मनोज तिवारी के एक अभिनन्दन कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। जहाँ पर ग्लोबल एडवर्टाइज़र के मैनेजिंग डायरेक्टर संजीव गुप्ता ने पहुंचकर मनोज तिवारी को सांसद बनने के लिए संजीव गुप्ता ने मुबारकबाद दिया। इस अवसर पर संजीव गुप्ता ने कहा, " हमारे बीच का इंसान जब कुछ अच्छा करता है तो बहुत अच्छा लगता है। मनोज बहुत अच्छे और मेहनती इंसान हैं। मैं आशा करता हूँ कि मनोज तिवारी जनता के लिए और फिल्म इंडस्ट्री के लिए कुछ अच्छा करेंगे। "   Sanjay Sharma Raj   (P.R.O.)

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नई दिल्ली : पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अंतर्गत पेट्रोलियम नियोजन और विश्‍लेषण प्रकोष्‍ठ द्वारा संगणित प्रकाशित सूचना के अनुसार कच्‍चे तेल की अंतर्राष्‍ट्रीय कीमत 5 जून को घटकर 105.69 अमरीकी डॉलर प्रति बैरल हो गई। पिछले कारोबारी दिवस 4 जून को यह कीमत 106.75 अमरीकी डॉलर प्रति बैरल थी।   रुपये के संदर्भ में कच्‍चे तेल की कीमत 5 जून को घटकर 6267.47 रुपये प्रति बैरल हुई। यह राशि 4 जून को 6334.55 रुपये प्रति बैरल थी। रुपये 4 जून को 59.34 रुपये प्रति अमरीकी डॉलर की तुलना में 5 जून को 59.30 प्रति अमरीकी डॉलर पर बंद हुआ।

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नई दिल्ली : पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अंतर्गत पेट्रोलियम नियोजन और विश्‍लेषण प्रकोष्‍ठ द्वारा संगणित प्रकाशित सूचना के अनुसार कच्‍चे तेल की अंतर्राष्‍ट्रीय कीमत 5 जून को घटकर 105.69 अमरीकी डॉलर प्रति बैरल हो गई। पिछले कारोबारी दिवस 4 जून को यह कीमत 106.75 अमरीकी डॉलर प्रति बैरल थी।   रुपये के संदर्भ में कच्‍चे तेल की कीमत 5 जून को घटकर 6267.47 रुपये प्रति बैरल हुई। यह राशि 4 जून को 6334.55 रुपये प्रति बैरल थी। रुपये 4 जून को 59.34 रुपये प्रति अमरीकी डॉलर की तुलना में 5 जून को 59.30 प्रति अमरीकी डॉलर पर बंद हुआ।

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नई दिल्ली। सड़क हादसे में कैबिनेट साथी गोपीनाथ मुंडे को खोने के बाद मोदी सरकार सड़क सुरक्षा नियमों के बदलाव में जुट गई है। नया मोटर वाहन कानून पहले से अधिक सख्त होगा।   केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने सड़क परिवहन कानूनों के बुनियादी ढांचे में बदलाव का बीड़ा उठा लिया है। गडकरी ने एक सवाल के जवाब में कहा कि जब एक, दो बार गुनाह पर जुर्माना, तीसरे उल्लंघन पर ड्राइविंग लाइसेंस छह महीने के लिए और चौथे उल्लंघन पर हमेशा के लिए जब्त होगा तो लोग खुद नियम पालन करने लगेंगे।   योजना है कि दस लाख से अधिक आबादी वाले नगरों में चौराहों पर सीसीटीवी और व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम लगाकर यातायात नियम तोड़ने वालों के आटोमैटिक चालान का इंतजाम किया जाएगा। तीसरा कदम वाहन निर्माताओं को वाहनों के इंजन और बॉडी के डिजाइन में सुधार के लिए विवश करने के लिए ट्रक-बस बॉडी कोड में बदलाव का होगा। नया कानून 15 दिनों में तैयार किया जाएगा।   इसके बाद मीडिया कांफ्रेंस में उन्होंने कई अहम घोषणाएं कीं। अंतरराष्ट्रीय स्तर के मोटर वाहन कानून लाने का निर्णय किया गया है। इसके लिए छह देशों अमेरिका, कनाडा, सिंगापुर, जर्मनी, जापान और ब्रिटेन के संबंधित कानूनों का अध्ययन कराया जाएगा।

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श्रीविद्या एम   तमिलनाडु के तंजावुर का बृहदेश्वर मंदिर पूरी तरह से ग्रेनाइट नि‍र्मि‍त है। विश्व में यह अपनी तरह का पहला और एकमात्र मंदिर है जो कि ग्रेनाइट का बना हुआ है। बृहदेश्वर मंदिर अपनी भव्यता, वास्‍तुशिल्‍प और केन्द्रीय गुम्बद से लोगों को आकर्षित करता है। इस मंदिर को यूनेस्को ने विश्व धरोहर घोषित किया है।   राजाराज चोल - I इस मंदिर के प्रवर्तक थे। यह मंदिर उनके शासनकाल की गरिमा का श्रेष्‍ठ उदाहरण है। चोल वंश के शासन के समय की वास्तुकला की यह एक श्रेष्ठतम उपलब्धि है। राजाराज चोल- I के शासनकाल में यानि 1010 एडी में यह मंदिर पूरी तरह तैयार हुआ और वर्ष 2010 में इसके निर्माण के एक हजार वर्ष पूरे हो गए हैं।   अपनी विशिष्ट वास्तुकला के लिए यह मंदिर जाना जाता है। 1,30,000 टन ग्रेनाइट से इसका निर्माण किया गया। ग्रेनाइट इस इलाके के आसपास नहीं पाया जाता और यह बात स्पष्ट नहीं है कि इतनी भारी मात्रा में ग्रेनाइट कहां से लाया गया। ग्रेनाइट की खदान मंदिर के सौ किलोमीटर की दूरी के क्षेत्र में नहीं है; यह भी हैरानी की बात है कि ग्रेनाइट पर नक्‍काशी करना बहुत कठिन है। लेकिन फिर भी चोल राजाओं ने ग्रेनाइट पत्‍थर पर बारीक नक्‍काशी का कार्य खूबसूरती के साथ करवाया।   तंजावुर  का 'पेरिया कोविल' (बड़ा मंदिर) विशाल दीवारों से घिरा हुआ है। संभवतः इनकी नींव 16वीं शताब्दी में रखी गई। मंदिर की ऊंचाई 216 फुट (66 मी.) है और संभवत: यह विश्व का सबसे ऊंचा मंदिर है। मंदिर का कुंभम् (कलश) जोकि सबसे ऊपर स्थापित है केवल एक पत्थर को तराश कर बनाया गया है और इसका वज़न 80 टन का है। केवल एक पत्थर से तराशी गई नंदी सांड की मूर्ति प्रवेश द्वार के पास स्थित है जो कि 16 फुट लंबी और 13 फुट ऊंची है।   रिजर्व बैंक ने 01 अप्रैल 1954 को एक हजार रुपये का नोट जारी किया था। जिस पर बृहदेश्वर मंदिर की भव्य तस्वीर है। संग्राहकों में यह नोट लोकप्रिय हुआ।   इस मंदिर के एक हजार साल पूरे होने के उपलक्ष्‍य में आयोजित मिलेनियम उत्सव के दौरान एक हजार रुपये का स्‍मारक सिक्का भारत सरकार ने जारी किया। 35 ग्राम वज़न का यह सिक्का 80 प्रतिशत चाँदी और 20 प्रतिशत तांबे से बना है। सिक्के की एक ओर सिंह स्‍तंभ के चित्र के साथ हिंदी में 'सत्यमेव जयते' खुदा हुआ है। देश का नाम तथा धनराशि हिंदी तथा अंग्रेजी में लिखी गई है।   सिक्के की दूसरी ओर राजाराज चोल- I की तस्वीर खुदी हुई है इसमें वह हाथ जोड़कर मंदिर में खड़े हुए हैं। मंदिर की स्‍थापना के 1000 वर्ष हिंदी और अंग्रेज़ी में लिखा हुआ है।   बृहदेश्वर मंदिर पेरूवुदईयार कोविल, तंजई पेरिया कोविल, राजाराजेश्वरम् तथा राजाराजेश्वर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। भगवान शिव को समर्पित यह एक हिंदू मंदिर है। हर महीने जब भी सताभिषम का सितारा बुलंदी पर हो, तो मंदिर में उत्सव मनाया जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि राजाराज के जन्म के समय यही सितारा अपनी बुलंदी पर था। एक दूसरा उत्सव कार्तिक के महीने में मनाया जाता है इसका नाम है कृत्तिका। एक नौ दिवसीय उत्सव वैशाख (मई) महीने में मनाया जाता है और इस दौरान राजा राजेश्वर के जीवन पर आधारित नाटक का मंचन किया जाता है।   मंदिर के गर्भ गृह में चारों ओर दीवारों पर भित्ती चित्र बने हुए हैं जिनमें भगवान शिव की विभिन्न मुद्राओं को दर्शाया गया है। इन चित्रों में एक भित्तिचित्र जिसमें भगवान शिव असुरों के किलों का विनाश करके नृत्‍य कर रहे हैं और एक श्रद्धालु को स्वर्ग पहुंचाने के लिए एक सफेद हाथी भेज रहे है, विशेष रूप से उल्‍लेखनीय है। भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण ने विश्‍व में पहली बार 16 नायक चित्रों को डी-स्टक्को विधि का प्रयोग करके इन एक हजार वर्ष पुरानी चोल भित्तिचित्रों को पुन: पहले जैसा बना दिया है। इस मंदिर की एक और विशेषता है कि गोपुरम (पिरामिड की आकृति जो दक्षिण भारत के मंदिर के मुख्य द्वार पर स्थित होता है) की छाया जमीन पर नहीं पड़ती।   इस मंदिर की कई विशेषताएं हैं- इसके निर्माण में 1,30,000 टन ग्रेनाइट का इस्तेमाल किया गया है, इसके दुर्ग की ऊंचाई विश्‍व में सर्वाधिक है और दक्षिण भारत की वास्तुकला की अनोखी मिसाल इस मंदिर को यूनेस्‍को ने विश्‍व धरोहर स्‍थल घेषित किया है।          (लेखक पीआईवी चेन्‍नई में सूचना सहायक है) 

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