मथुरा

नई दिल्ली : केन्‍द्रीय स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने मीडिया में आ रही उन खबरों की पुष्टि की है कि उन्‍होंने कहा है कि सीट बैल्‍ट का इस्‍तेमाल गोपीनाथ मुंडे की जान बचा सकता था। डॉ. हर्षवर्धन ने दिवंगत ग्रामीण विकास मंत्री की अंत्‍येष्टि में शामिल होने के लिए बीड, महाराष्‍ट्र रवाना होने से पहले कहा 'मैंने सिर्फ एक गलत फहमी के चलते अपना दोस्‍त खो दिया है कि अधिकांश लोग मानते हैं कि कार में पिछली सीट पर लगाई गई बेल्‍ट केवल सजावट के उद्देश्‍य से लगाई जाती है। वास्‍तव में अगली सीटों की बैल्‍ट की तरह पिछली सीट पर बैल्‍ट लगाना भी अनिवार्य होता है। किसी अप्रिय स्थिति में यह जीवन बचाने का कारण हो सकती है।' गोपीनाथ मुंडे का निधन एक दुर्घटना के कारण हो गया था। लाल बत्‍ती को पार कर एक कार ने मुंडे की कार को टक्‍कर मार दी थी। इस दुर्घटना से उनकी कार को तो अधिक क्षति नहीं पहुंची लेकिन कार को लगे तेज धक्‍के की वजह से मुंडे की गर्दन के जोड़ और उनकी रीढ़ की हड्डी को गंभीर चोट पहुंची, इसके कारण मस्तिष्‍क को खून की आपूर्ति बाधित हुई और तत्‍काल उनकी हृदय गति और सांस रुक गई। इसके अलावा उनका लीवर भी फट गया था और इसमें से खून बह रहा था। डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि 'मैं इस तथ्‍य से बेहद दुखी हूं कि देश ने एक महत्‍वपूर्ण जननेता और समर्थ मंत्री खो दिया है, जिनका महाराष्‍ट्र की राजनीति में बहुत अच्‍छा प्रदर्शन रहा। आज मैं उन अनेक लोगों के दु:ख को अनुभव कर पा रहा हूं जो कार दुर्घटना में अपने प्रिय जनों को खो देते हैं। ऐसा केवल इसलिए कि सीट बैल्‍ट की आवश्‍यकता को नजरअन्‍दाज किया जाता है।' स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने कहा कि ऐसे बहुत सी दुर्घटनाएं हुई हैं, जो छोटी थीं, लेकिन लापरवाही के कारण घातक सिद्ध हुईं। अगस्‍त, 1997 में ऐसी ही एक दुर्घटना में ब्रिटेन की प्रिंसेस डायना की जान चली गई। उनकी तेज रफतार कार पेरिस में एक भूमिगत सुरंग में खम्‍भे से टकरा गई थी। इस दुर्घटना में कार में सवार उनके चार साथियों में से केवल अंगरक्षक ट्रेवर जॉन्‍स ही बच सके और  उन्‍होंने स्‍पष्‍ट किया था कि कार में सिर्फ उन्‍होंने ही सीट बैल्‍ट लगा रखी थी, इसके कारण उनकी जान बच गई। प्रिसेंस डायना, उनके मित्र डोडी अल फायद और वाहन चालक हेनरी पॉल ने सीट बैल्‍ट को नजर अंदाज किया और जान गंवा बैठे। 2007 में ऐसी ही एक दुर्घटना में दिल्‍ली के पूर्व मुख्‍यमंत्री साहिब सिंह वर्मा का एक सड़क दुर्घटना में ट्रक से हुई टक्‍कर के कारण निधन हो गया था। डॉ. हर्ष वर्धन ने कहा कि वर्मा ने यदि सीट बैल्‍ट लगाई होती तो उनकी जान बच सकती थी। स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने कहा कि यह मानना भ्रांति ही होगी कि मुंडे की जान बच सकती थी, क्‍योंकि वह दुर्घटना के बाद अपनी कार में ही थे, बाहर नहीं गिरे। वास्‍तव में कभी-कभी ऐसा होता है कि जब व्‍यक्ति दुर्घटना के कारण बाहर नहीं गिरता, तब भी उसके शरीर को गंभीर चोट पहुंचती है। मुंडे के आंतरिक अंग बुरी तरह से क्षतिग्रस्‍त हो गए थे। यदि सीट बैल्‍ट लगाई गई होती तो उनका जीवन बचाया जा सकता था। डॉ. हर्षवर्धन ने कहा, 'सही ढ़ग से सीट बैल्‍ट बांधने से जीवन की रक्षा होती है। अमरीका में अनुसंधान से पता चला है कि सीट बैल्‍ट बांधने से कार की अगली सीट पर बैठे यात्री को जान का जोखिम 45 प्रतिशत कम हो जाता है जबकि सामान्‍य से गंभीर किस्‍म की चोट लगने का जोखिम 50 प्रतिशत घट जाता है। वैन और स्‍पोर्ट युटिलिटी वाहनों की पिछली सीट पर बैठे लोगों ने यदि सीट बैल्‍ट लगा रखी हो तो कार दुर्घटना के दौरान जान का जोखिम 75 प्रतिशत मामलों में बेहतर ढ़ग से टाला जा सकता है। यही नहीं यदि व्‍यस्‍क कार में सीट बैल्‍ट लगाकर बैठें तो बच्‍चों के बचने की संभावना 92 प्रतिशत रहती है, ज‍बकि सीट बैल्‍ट लगाए बिना बैठे व्‍यस्‍कों के मामलों में बच्‍चों को जोखिम से बचाने की संभावना सिर्फ 72 प्रतिशत होती है'। स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने कहा कि सुरक्षा बैल्‍ट की अनदेखी करना चिंताजनक है। उन्‍होंने कहा 'कई कार मालिक अपनी कार की पिछली सीट को आराम के लिए आकर्षक कपड़े या अन्‍य चीजों से ढक देते है। इस प्रक्रिया में सीट बैल्‍ट उसके नीचे छुप जाती है। नि:संदेह इस तरह की लापरवाही के कारण दुर्घटना में मौत होने के मामले बढ़ जाते हैं'। डॉ. हर्षवर्धन ने बताया कि 1955 तक अधिकतर विकसित देशों ने कार में सीट बैल्‍ट अनिवार्य करने की घोषणा कर दी थी। उनकी सरकारों ने सीट बैल्‍ट के निर्माण के मानकीकरण के नियम बना लिए इसकी तुलना में भारत में सीट बैल्‍ट मोटर वाहन अधिनियम 1989 के पारित होने के बाद ही अनिवार्य की गई। उन्‍होंने कहा कि इसे अब भी गंभीरतापूर्वक लागू नहीं किया गया है। डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्‍याण मंत्रालय गाड़ी चलाते समय सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने वाले लोगों को जागरूक करने की पहल करेगा। स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने कहा कि सुरक्षा के बारे में स्‍वयं सेवी संगठनों के सहयोग से मल्‍टी मीडिया अभियान चलाने पर विचार किया जा रहा है। डॉ. हर्षवर्धन ने कहा 'मुख्‍य ध्‍यान प्रत्‍यक्ष रूप से दुर्घटना के शिकार अथवा उन बच्‍चों पर दिया जाएगा जिन्‍हें अभिभावक पिछली सीट पर बैठाते है अथवा जिनकी पर्याप्‍त देखभाल नहीं की जाती। बच्‍चे गलत लोगों का अनुकरण भी कर सकते हैं। उन्‍होंने कहा, 'मंत्री की त्रासदी और असमय मृ‍त्‍यु को सभी वाहन चालकों को चेतावनी के रूप में लेना चाहिए। एक जिंदगी बचाना, एक जिंदगी बनाने के समान है और समाज में संभावित बदलाव लाने वाला ही भविष्‍य को सुरक्षित कर सकता है।'

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लेखक. पवन तिवारी इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली एक घटना फिर से सामने आई है और यह घटना अति सभ्य होने का दंभ भरने वाले हमारे भारत देश की है। कहने को तो यहां महिलाओं को पुरुषों के बराबर अधिकार दिए जा रहे हैं लेकिन एक के बाद एक हो रही बलात्कार की घटनाओं से ऐसा लगता है कि इस देश में न तो नारी का मान-सम्मान है ही नहीं, अगर कुछ है तो सिर्फ और सिर्फ अपमान। बदायुं की घटना ने फिर से एक बार देश के सभ्य समाज को लज्जित किया है। वास्तव में यह किसी नारी का नहीं बल्कि पूरे समाज का अपमान है। देश में हो रहीं इस तरह की घटनाओं को देखकर ऐसा लगता है कि हमारे देश का कानून पूरी तरह नपुंसक है और उससे किसी को कोई डर नहीं है। हमारा समाज पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ता रहा है और हम तरक्की की रफ्तार पर सवार होकर आगे बढ़ भी रहे है लेकिन अगर कुछ नहीं बदला तो वह है हमारे समाज में नारियों का स्थान। बेशक आज की महिला हर क्षेत्र में अग्रणी है पर आज भी हमारे समाज में कुछ ऐसे तत्व मौजूद हैं जिनके कारण हमारे देश की नारी सुरक्षित नहीं है। हमारे समाज में नारियां सदियों से परीक्षा देती आ रही हैं और आज भी दे रही हैं। इस तरह की घटनाएं समाज के लिए एक कलंक है और समाज को इस कंलक से बार-बार अपमानित होने से बचाने के लिए कुछ न कुछ तो प्रयास करना होगा। जन्मदात्री को अपमानित करने वाले तत्वों को ऐसी कठोर सजा दी जानी चाहिए कि फिर महिलाओं को अपमानित करने को बारे में कोई सोच भी न सके।कब थमेगा इंसानियत को शर्मसार करने का सिलसिला...   लेखक. पवन तिवारी इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली एक घटना फिर से सामने आई है और यह घटना अति सभ्य होने का दंभ भरने वाले हमारे भारत देश की है। कहने को तो यहां महिलाओं को पुरुषों के बराबर अधिकार दिए जा रहे हैं लेकिन एक के बाद एक हो रही बलात्कार की घटनाओं से ऐसा लगता है कि इस देश में न तो नारी का मान-सम्मान है ही नहीं, अगर कुछ है तो सिर्फ और सिर्फ अपमान। बदायुं की घटना ने फिर से एक बार देश के सभ्य समाज को लज्जित किया है। वास्तव में यह किसी नारी का नहीं बल्कि पूरे समाज का अपमान है। देश में हो रहीं इस तरह की घटनाओं को देखकर ऐसा लगता है कि हमारे देश का कानून पूरी तरह नपुंसक है और उससे किसी को कोई डर नहीं है। हमारा समाज पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ता रहा है और हम तरक्की की रफ्तार पर सवार होकर आगे बढ़ भी रहे है लेकिन अगर कुछ नहीं बदला तो वह है हमारे समाज में नारियों का स्थान। बेशक आज की महिला हर क्षेत्र में अग्रणी है पर आज भी हमारे समाज में कुछ ऐसे तत्व मौजूद हैं जिनके कारण हमारे देश की नारी सुरक्षित नहीं है। हमारे समाज में नारियां सदियों से परीक्षा देती आ रही हैं और आज भी दे रही हैं। इस तरह की घटनाएं समाज के लिए एक कलंक है और समाज को इस कंलक से बार-बार अपमानित होने से बचाने के लिए कुछ न कुछ तो प्रयास करना होगा। जन्मदात्री को अपमानित करने वाले तत्वों को ऐसी कठोर सजा दी जानी चाहिए कि फिर महिलाओं को अपमानित करने को बारे में कोई सोच भी न सके।

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राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद की कार्यकारिणी का चुनाव मथुरा। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद की कार्यकारिणी का चुनाव आम सहमति से निर्विरोध सम्पन्न हुआ। इसमें चंद्रपाल सिंह पौनिया को जिलाध्यक्ष चुना गया। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद की कार्यकारिणी का चुनाव मुकुन्द उत्सव में आयोजित समारोह के मध्य किया गया। प्रदेश कार्यकारिणी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष भूपेश अवस्थी, महामंत्री शिव वरुण यादव, मंडलीय अध्यक्ष आरके शर्मा, मंडलीय मंत्री छत्तर सिंह की देखरेख में शुरु हुआ। चुनाव को लेकर प्रातः से ही समारोह स्थल पर जिले के विभिन्न सरकारी कई दर्जन विभागों के सैंकडों कर्मचारी नेता व सदस्यगण मौजूद रहे। चुनाव के लिये नामांकन की प्रक्रिया शुरु होते ही सभी ने आम सहमति से जिला कार्यकारिणी का निर्विरोध रूप से चुनाव कराया गया। इसमें बीडी जोशी, चैधरी दलवीर सिंह को संरक्षक, चंद्रपाल सिंह पौनियां को अध्यक्ष, देवेन्द्र प्रसाद को वरिष्ठ उपाध्यक्ष, हीरालाल निषाद को मंत्री, रघुवीर सिंह छौंकर को आडीटर चुना गया। विदित हो श्री पौनियां इससे पूर्व वाणिज्य कर विभाग की ऐसोसिएश्एन के प्रांतीय मंत्री पद पर भी रह चुके हैं। नवीन कार्यकारिणी गठित होने पर जगवीर सिंह नेत्रपाल सिंह, छेदालाल पाठक, निर्भय कुमार जैन, लोकंिसह, दिनेश गुप्ता, दिनेश शर्मा, संजय कुलश्रेष्ठ, महेन्द्र सिंह, दौलत राम, कृष्ण कुमार रावत, विजेन्द्र सिंह, लक्ष्मीकांत, गोविंदराम पांडेय, कैलाश लोधी आदि मौजूद थे।   

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मथुरा। थाना बलदेव क्षेत्र के यमुना एक्सप्रेंस वे पर एक अनियत्रित बाइक डिवाईडर से टकरा गई जिससें बाइक चालक अन्ना निवासी उचांगाॅव थाना सादाबाद की घटना स्थल पर ही दर्दनाक मौत हो गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घटना स्थल का निरीक्षण कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा हैं।

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नई दिल्ली : पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अंतर्गत पेट्रोलियम नियोजन और विश्‍लेषण प्रकोष्‍ठ द्वारा संगणित प्रकाशित सूचना के अनुसार लिए कच्‍चे तेल की अंतर्राष्‍ट्रीय कीमत 2 जून को घटकर 106.88 अमरीकी डॉलर प्रति बैरल हो गई। पिछले कारोबारी दिवस 30 मई को यह कीमत 107.14 अमरीकी डॉलर प्रति बैरल थी।   रुपये के संदर्भ में कच्‍चे तेल की कीमत 30 मई के 6324.47 रुपये प्रति बैरल की तुलना में 2 जून को मामूली घटकर 6320.88 रुपये प्रति बैरल हो गई। रुपये 30 मई के 59.03 रुपये प्रति अमरीकी डॉलर की तुलना में 2 जून को कमजोर होकर 59.14 रुपये प्रति अमरीकी डॉलर पर बंद हुआ।

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नई दिल्ली : नरेंद्र मोदी सरकार में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री गोपीनाथ मुंडे का एक सड़क हादसे में निधन हो गया। उन्हें एम्स के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया था। हादसे के बाद उनकी हालत गंभीर बताई जा रही थी। स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन और बीजेपी के कई बड़े नेता एम्स पहुंच गए हैं। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री हर्षवर्धन ने मुंडे के निधन की जानकारी मीडिया को दी। सूत्रों के मुताबिक गोपनाथ मुंडे मुंबई जाने के लिए एयरपोर्ट के लिए घर से निकले थे। मोती बाग के पास उनकी कार का एक्सिडेंट हो गया। इस हादसे में मुंडे की गाड़ी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। मुंडे भी बुरी तरह घायल हो गए। उन्हें तुरंत एम्स के ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया। जहां डॉक्‍टरों ने उन्‍हें मृत घोषित कर दिया। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री गोपीनाथ मुण्डे के निधन पर उपराष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह और महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने शोक प्रकट किया है।

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गोवर्धन : मुडिया पूर्णिमा मेला से पूर्व परिक्रमा को जोडऩे वाले मानसी गंगा चक्रलेश्वर मार्ग के पेचवर्क कार्य में की जा रही धांधली पर क्षेत्रीय विधायक राजकुमार रावत ने नाराजगी जताई है।

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नई दिल्ली : डीजल कीमतों में निरंतर हो रही बढ़ोतरी के बाद तेल कंपनियों ने बिना सब्सिडी वाले रसोई गैस सिलेंडर और हवाई ईधन (एटीएफ) को सस्ता कर राहत दी है। सिलेंडर की कीमत में 23.50 रुपये की कमी की गई है। डॉलर के मुकाबले रुपये की मजबूती और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल में नरमी के कारण आयात लागत में कमी को देखते हुए यह फैसला किया गया है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने बिना सब्सिडी वाले गैस सिलेंडर की कीमत 23.50 रुपये कम कर दी है। दिल्ली में 14.2 किलो वाला सिलेंडर 928.50 रुपये की जगह अब 905 रुपये का मिलेगा। वहीं, एटीएफ 1.81 फीसद यानी 1,285.89 रुपये सस्ता होकर 69,747.98 रुपये प्रति किलोलीटर हो गया है। मुंबई हवाई अड्डे पर इसकी कीमत 71,940.36 रुपये प्रति किलोलीटर हो गई है। अप्रैल के बाद से एटीएफ कीमतों में यह तीसरी कटौती है।

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राया : कस्बा में दो दिन से आईजी आगरा के निर्देश पर जिले के सभी थाना प्रभारियों को चेकिंग के निर्देश दिए गए थे। इसमें युवा वर्ग को खास टार्गेट मानकर वाहन के कागजात उनकी जामा तलाशी ली जा रही थी।

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मथुरा : जिलाधिकारी विशाल चौहान ने नगर मजिस्ट्रेट, जिला स्तरीय अधिकारियों और सभी अधिशासी अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वह आधार कार्ड बनाने के कार्य में पूर्ण रूप से सहयोग करें।

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