नई दिल्ली । दिल्ली में कांग्रेस कार्यकारिणी की बैठक खत्म हो गई है। इसी के साथ बैठक से अहम जानकारी यह सामने आई है कि अभी सोनिया गांधी ही पार्टी अध्यक्ष बनी रहेंगी। कांग्रेस ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर पार्टी के आंतरिक चुनाव के लिए एक साल का वक्त मांगा है।
संसद के शीतकालीन सत्र के पहले कांग्रेस की वर्किंग कमिटी (सीडब्लूसी) की मौजूदा राजनीतिक हालातों पर चर्चा के लिए सोमवार को बुलाई गई बैठक में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने केंद्र की मोदी सरकार को जमकर आड़े हाथों लिया। बैठक की अध्यक्षता करते हुए राहुल गांधी ने कहा मोदी सरकार सत्ता के नशे में चूर है और असहमति की आवाज को दबाना चाहती है। राष्ट्रीय सुरक्षा के बहाने सिविल सोसायटी को सवाल पूछने से रोका जा रहा है। टीवी चैनलों को बंद किया जा रहा है और विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार किया जा रहा है। राहुल ने एक बार फिर एक रैंक एक पेंशन का मुद्दा उठाया। तबीयत खराब होने के चलते कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी इस बैठक में हिस्सा नहीं ले रही हैं, इसलिए उनकी जगह राहुल गांधी ने बैठक की अध्यक्षता की।
वर्किंग कमिटी की इस बैठक में कांग्रेस मनमोहन सिंह, ऐके एंटनी, अहमद पटेल, दिग्विजय सिंह, मल्लिकार्जुन खडग़े, अंबिका सोनी, बीके हरिप्रसाद और ग़ुलाम नबी आजाद समेत लगभग 21 सदस्य हिस्सा ले रहे हैं। बैठक में कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा, मौजूदा सरकार के तहत यह लोकतंत्र के लिए सबसे अंधकारमय समय है। सवाल पूछने से यह सरकार असहज होती है। इनके पास जवाब नहीं है। हमें आने वाले संसद सत्र में सरकार की नाकामियों को उजागर करना है। जम्मू-कश्मीर की चर्चा करते हुए राहुल ने कहा, जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान से जुड़े मुद्दे पर सरकार एक किनारे से दूसरे किनारे जा रही है। हमारे जवानों को ओआरओपी पर धोखा दिया जा रहा है और पेंशन घटा दी है। राहुल ने कार्यकारिणी बैठक में केंद्र पर किए ये वार-
- मोदी सरकार को चढ़ा सत्ता नशा, असहमति रखने वालों को किया जाता है चुप।
- आम नागरिकों को राष्ट्रीय सुरक्षा की आड़ में सवाल पूछने के लिए धमकाया जा रहा है।
- टीवी चैनलों को सजा देते हुए बंद करवाया जा रहा है।
- काले दौर से गुजर रहा है लोकतंत्र।
- देश में अभिव्यक्ति का अधिकार छीना जा रहा है। हम इसका आने वाले संसद के सत्र में विरोध करेंगे।
- दलितों और आदिवासियों पर अत्याचार जारी है।
- सरकार ने जम्मू कश्मीर और पाकिस्तान के मुद्दे पर सभी हदें की पार, दशकों बाद हुई इतनी मौतें।
- जाति और धर्म के आधार पर चुनाव लड़ती है बीजेपी।
कार्यकारिणी समिति के सदस्यों को भेजे गए एजेंडा के मुताबिक कमेटी मौजूदा सियासी हालातों पर प्रस्ताव पारित करेगी। मिली जानकारी के अनुसार कांग्रेस जो प्रस्ताव पारित करेगी उसमें सबसे अहम भारत-पाक सीमा पर तनाव, पाकिस्तान की नापाक कोशिशों और शहीद हुए जवानों के प्रति श्रद्धांजलि का जिक्र होगा। साथ ही मोदी सरकार की पाक को काबू में रखने की नाकामी का खंडन भी किया जाएगा।
इस बैठक में 5 राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव पर भी चर्चा होने की संभावना है। कांग्रेस की कोशिश है कि वह कैसे लोकसभा चुनाव की करारी हार को पीछे छोड़ नई कहानी रचे। ऐसे में साम्प्रदायिक ताकतों को रोकने के लिए चुनावों में जी जान से मेहनत करने पर चर्चा होगी।
सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में राहुल गांधी को पार्टी अध्यक्ष बनाए जाने पर कोई फैसला नहीं होगा। कांग्रेस आलाकमान के संगठनात्मक चुनाव और टालने की संभावना है, जिसे पहले एक वर्ष की अवधि के लिए इस दिसंबर के अंत के लिए टाला गया था। पार्टी के भीतर एक वर्ग का मानना है कि ऐसा उत्तर प्रदेश और पंजाब में विधानसभा चुनाव के बाद ही किया जाना चाहिए। पार्टी सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस कार्यकारिणी इस बैठक में सर्वसम्मति से संगठन के चुनावों को एक साल के लिए टालने पर भी रजामंदी दी जाएगी, क्योंकि चुनाव कराने के लिए बहुत ही कम समय है और पार्टी को अगले वर्ष होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों पर ध्यान केंद्रित करना है। यानी सोनिया गांधी एक साल और कांग्रेस अध्यक्ष बनी रहेंगी। चर्चा जोरों पर है कि राहुल के करीबी नेता राहुल गांधी को अध्यक्ष या ‘वर्किंग प्रेजिडेंट’ बनाने की बात रख सकते हैं, हालांकि इस पर कोई औपचारिक जानकारी नहीं है।
सीडब्लूसी की बैठक इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि संसद का शीतकालीन सत्र 16 नवंबर से शुरू हो रहा है और कांग्रेस इस बैठक में सत्र के लिए अपनी रणनीति को अंतिम रूप देगी। सू्त्रों ने बताया कि बैठक में संगठनात्मक चुनाव और संसद सत्र के लिए एक रणनीति अपनाने के अलावा वर्तमान राजनीतिक स्थिति का जायजा लिया जाएगा। कांग्रेस संसद सत्र के दौरान भाजपा को घेरने के लिए राजनीतिक मुद्दों को उठाने की रणनीति बना रही है, उनमें सर्जिकल स्ट्राइक से राजनीतिक लाभ लेना, मध्यप्रदेश में एक ‘मुठभेड़’ में सिमी के आठ सदस्यों के मारे जाने के साथ ही तीन तलाक और समान नागरिक संहिता जैसे विवादास्पद मुद्दे शामिल हो सकते हैं।
यह बैठक उस वक्त हो रही है जब राहुल गांधी आरोप को लेकर सडक़ पर उतर आये हैं। आरके ग्रेवाल के परिजनों के साथ हुई बदसलूकी पर राहुल के तीखे तेवर से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में एक नया उत्साह है। सूत्रों की मानें तो राहुल के नेतृत्व पर उठ रहे सवालों पर इस घटना के बाद थोड़ा विराम लगा है।
साभार-khaskhabar.com
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