मथुरा

मथुरा। नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के साथ ही जनता में हर्ष की लहर है जहाॅ तक की सड़कों के किनारे खुले आसमां व रेलवें स्टेशनों पर जीवन यापन करने वाले बच्चे भी नरेन्द्र मोदी से अभी नहीं मिलनें के बाद भी हर्षित नजर आ रहे हैं। इन बच्चों में भी देश के नवनिवार्चित प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिलनें की भावना है बच्चों की भावनाओं को जानकर सामाजिक संस्था चेतना ने इसे पुरा करने का कदम उठाया हैं। इसके चलते उक्त कामकाजी 10 हजार बच्चों की ओर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को शुभकामना फैक्स भैजा गया हैं। जिसमें बच्चों द्वारा प्रधानमंत्री से व्यक्तिगत मुलाकात किये जाने की इच्छा जताई हैं। सामाजिक संस्था चेतना और बच्चों को प्रधानमंत्री की ओर से जबावी फैक्स का इन्तजार है जिसके बाद उन्हें देश के प्रधानमंत्री से मिलनें का अवसर मिलेगा। चेतना के निदेशक संजय गुप्ता ने कहा कि आने वाले समय में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जनता की कसौटी पर खरा उतरने के लिए बहुत सारी चुनौतियों का सामना करना है लेकिन उन्हें उम्मीद है कि वह आम लोगों की तरह सडक व कामकाजी बच्चों की भावनाओं पर विचार कर मुलाकात का समय देकर बच्चों के उत्थान के लिए कार्य करेगे।

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मथुरा। दशहरा के पावन पर्व पर पालिका द्वारा सभी जन सुविधाएं उपलब्ध कराने हेतु पालिकाध्यक्ष श्रीमती मनीषा गुप्ता द्वारा कैम्प कार्यालय पर बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में हिन्दूवादी नेता गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी, अधिशासी अधिकारी के0पी0 ंिसंह, निर्माण विभाग के सभी अभियन्ता, जलकल विभाग के सभी अभियन्ता, स्वास्थ्य विभाग के समस्त स्वच्छता एवं खाद्य निरीक्षक, प्रकाश निरीक्षक, राजस्व निरीक्षक उपस्थित रहे। बैठक में पालिकाध्यक्ष मनीषा गुप्ता द्वारा निर्देश दिये गये कि सुरक्षा की दृष्टि से घाटों पर बैरिकेटिंग करायी जाये, 20 नाव व 10 गोताखोरों की व्यवस्था करायी जाये। घाटों के किनारे समुचित प्रकाश की व्यवस्था करायी जाये। जनता को नियंत्रित करने के लिए 08 माइकों की व्यवस्था की जाये, 04 शिविर कार्यालयों की स्थापना घाटों पर की जाये तथा महिलाओं को कपड़े बदलने के लिए 08 टेन्टों की व्यवस्था की जाये। इसके अतिरिक्त निर्देश दिया गया कि क्षेत्र में कहीं सीवर ओवर फ्लो न हो तथा घाटों से काई हटाने का कार्य एवं पालीथिन हटाने का कार्य तत्काल शुरू करा दिया जाय तथा दशहरा वाले दिन सफाई स्टाफ को प्रातः 4 बजे बुलाकर सभी सम्बन्धित क्षेत्रों में व्यापक सफाई कराकर चूना आदि डलवाया जाय। पालिकाध्यक्ष द्वारा सभी सम्बन्धित को कड़े निर्देश दिये गये कि उपरोक्त कार्यो को समय से पूर्व पूरा कर लें, इन कार्यो में किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नही की जायेगी।

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नई दिल्ली : केंद्रीय सड़क यातायात, राजमार्ग और जहाजरानी मंत्री नि‍ति‍न गडकरी ने कहा है कि‍ उनका मंत्रालय गंगा नदी के कि‍नारे परि‍वहन और पर्यटन की सुवि‍धाओं का वि‍कास करने के लि‍ए पर्यावरण और वन, पर्यटन, ऊर्जा और जल संसाधन, नदी वि‍कास और गंगा पुनरुद्धार आदि‍ मंत्रालयों के साथ सहयोग करेगा।  गडकरी ने कहा कि‍ इस उद्देश्‍य के लि‍ए इन मंत्रालयों के सचि‍व एक संयुक्‍त कार्यक्रम बना सकते हैं।  अपने मंत्रालय के वरि‍ष्‍ठ अधि‍कारि‍यों से वि‍चार-वि‍मर्श के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए गडकरी ने कहा कि‍ सभी परि‍योजनाओं को पूरी पारदर्शि‍ता के साथ ई-गवर्नेंस प्रणाली के जरि‍ए मंजूरी दी जाएगी। उन्‍होंने बताया कि‍ इस समय कुछ पश्‍चि‍मी देशों में वाहनों में इस्‍तेमाल हो रहे ई-85 इंजनों को हमारे देश में भी लाने की संभावना तलाशी जा रही है। इन इंजनों में 85 प्रति‍शत इथेनॉल और 15 प्रति‍शत पेट्रोल का इस्‍तेमाल होता है।  गडकरी ने सस्‍ते और पर्यावरण अनुकूल परि‍वहन के लि‍ए देश के वि‍भि‍न्‍न जलमार्गों और तटीय जल मार्गों के इस्‍तेमाल की आवश्‍यकता पर जोर दि‍या। उन्‍होंने उदाहरण देते हुए कहा कि‍ दि‍ल्‍ली में बने वाहनों को तटीय जलमार्ग से गुजरात से चेन्‍नई ले जाया जा सकता है और चेन्‍नई में बने वाहनों को उसी मार्ग से वापस उत्‍तरी क्षेत्रों में भेजा जा सकता है। उनका मंत्रालय तटीय परि‍वहन को 7 से 20 प्रति‍शत बढ़ाने की संभावनाओं को तलाशेगा। अपने मंत्रालय का पदभार संभालने के बाद गडकरी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बि‍हारी वाजपेयी से मुलाकात करने गए। बाद में वह पूर्व गृहमंत्री एलके आडवाणी से मि‍लने गए जहां मुलाकात के दौरान गंगा में परि‍वहन व्‍यवस्‍था को वि‍कसि‍त करने पर भी चर्चा हुई। ‘

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हिंदी पत्रकारिता दिवस पर लेख हिंदी समाचार संभाषण में ऑनलाइन माध्यम की भूमिका युवा सोच के सहारे तेजी से बढ़ रही है हिंदी ऑनलाइऩ पत्रकारिता हर एक को ‘संपादक’ बनने का अवसर देती ऑनलाइन पत्रकारिता  ‘पेड न्यूज’ जैसी दुश्वारियों से निजात दिला सकती है ऑनलाइन पत्रकारिता धर्मेंद्र कुमार  ठीक 188 साल पहले पं. जुगल किशोर शुक्ल ने वर्ष 1826 में जब पहला हिन्दी अखबार ‘उदन्त मार्तण्ड’ निकाला तो हिंदी पत्रकारिता का मतलब सिर्फ ‘अखबार’ ही रहा होगा... ऐसा शायद किसी ने न सोचा होगा कि आने वाले युग में अखबार के अलावा दूसरे कई माध्यम संवाद संप्रेषण करने के लिए अपनी जगह बनाएंगे। अखबार के बाद रेडियो और उसके बाद टेलीविजन के आगमन ने लोगों के सामने समाचार जानने के लिए नए माध्यम मुहैया कराए। बीते करीब 20 सालों में ऑनलाइन माध्यम तेजी से उभरा है। साथ ही हिंदी समाचार प्रस्तुत करने वाली कई समाचार वेबसाइट भी...। एक ऐसा माध्यम जिसने अखबार, टीवी और रेडियो आदि सभी माध्यमों के गुणों को अपने में समाहित कर लिया। इंटरनेट पर उपलब्ध वेबसाइट के जरिए रेडियो को सुना जा सकता है, अखबार पढ़ा जा सकता है और लाइव टीवी देखा जा सकता है। हालांकि, यह अतिशयोक्ति होगा लेकिन पत्रकारिता में एक वर्ग तो यह भी मानता है कि ऑनलाइन माध्यम के बाद दूसरे मीडिया साधनों की जरूरत ही नहीं रहेगी। सभी पाठक वर्ग एक इसी माध्यम के जरिए ही सभी साधनों के समाचार प्राप्त कर सकेंगे। ऑनलाइन पत्रकारिता की मदद से सबसे बड़ा लाभ यह हो रहा है कि समाचार जानने के लिए दो ढाई हजार अखबार, चार-पांच सौ टीवी चैनल या दो-तीन सौ रेडियो केंद्रों पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। यह माध्यम हर नागरिक को हिंदी सहित लगभग सभी भाषाओं में ‘संपादक’ के रूप में काम करने का मौका देता है। समाचार वेबसाइट पर मौजूद सामग्री पर टिप्पणी करके, यहां मौजूद सामूहिक वाद-विवाद में भाग लेकर या सोशल मीडिया के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान कर समाचार संवहन किया जा रहा है... ‘मत’ बनाए जा रहे हैं। इससे हाल के दिनों में पनपी ‘पेड न्यूज’ जैसी दुश्वारियों से भी निजात मिलना आसान होगा। आदर्श स्थित में जब हर व्यक्ति ‘संपादक’ होगा तो कौन किसको ‘खरीदेगा’ या खरीदने का प्रयास कर सकेगा। हर नागरिक के लिए खुले माहौल में पूरी स्वतंत्रता के साथ विचार अभिव्यक्ति के लिए इससे बेहतर माध्यम हाल-फिलहाल में कोई नहीं दिखता।  हिंदी टीवी चैनल और अखबारों की ‘प्राकृतिक’ और ‘भाषागत’ आक्रामकता को देखते हुए गाहे-बगाहे मीडिया के गला घोंटने की बातें चलती रहती हैं। सेंसरशिप के बहाने तथ्यों को सही तरह से पेश किए जाने से रोकने के प्रयासों के आरोप लगते रहते हैं। लेकिन, ऑनलाइन माध्यम में यह बहुत दुष्कर कार्य है। पिछली सरकार में कई ऐसे प्रयास हुए जब लगा कि अभिव्यक्ति के इस माध्यम को सेंसर करने की कोशिश की जा रही है। लेकिन, तकनीक के अजीब चरित्र के चलते वे कोशिशें न केवल असफल रहीं बल्कि हास्यास्पद भी दिखीं।   देश में हिंदी भाषी लोगों की बहुतायत और शिक्षा के स्तर में तेजी से हुई बढ़ोतरी के चलते इंटरनेट एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा चुनावों में विजयी गठबंधन की जीत में इस माध्यम ने अहम भूमिका निभाई और इस घटनाक्रम के चलते ‘परास्त’ दलों को अपनी रणनीति में ऑनलाइन माध्यम का ‘समुचित’ प्रयोग न कर पाने के कारणों को तलाश करने के लिए विवश कर दिया। इससे पहले, दिल्ली के विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी के उल्लेखनीय प्रदर्शन की एक वजह इस माध्यम के जरिए संवाद करना भी था। करीब 10 साल पहले निश्चित रूप से ऑनलाइन माध्यम को इतनी गंभीरता से नहीं लिया जाता था... यहां मौजूद तथ्यों की प्रामाणिकता पर सवाल उठाए जाते थे... लेकिन आज हालात बदल गए हैं। अब आप इसकी अवहेलना नहीं कर सकते।  देश और दुनिया का युवा वर्ग इस माध्यम से अपनी भाषा में राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक संभाषणों में हिस्सा ले रहा है... अपनी बात कह रहा है... और युवाओं की हिस्सेदारी ही सामुदायिक भविष्य को तय करती है...। 

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विशेष कार्यकर्ता बैठक की गतिविधि (दि. २८ मई २०१४)  मथुरा में ‘यमुना मुक्तिकरण आन्दोलन’ की विशेष कार्यकर्ता बैठक का आयोजन किया गया | इसमें श्री गोपेश्वर नाथ जी (प्रमुख समाज सेवी एवं पर्यावरणविद्) को सभा का अध्यक्ष चुना गया एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति भी शामिल हुये | श्री रामजी लाल शास्त्री ने दीप प्रज्वालित कर सभा को आरम्भ किया |    श्री राधाकान्त शास्त्री जी (कार्यकारी अध्यक्ष मानमन्दिर,बरसाना) – ने सभी के चरणों में नमन कहते हुये कहा – कि ब्रजबासी तो ब्रह्म को भी पवित्र कर देते हैं | ऐसे ब्रजबासी जिनके दरबाजे ब्रह्म भी भिक्षा माँगता है | जो भगवान् कृष्ण को भी ‘ये नन्दके’ कहकर बुलाते, पिछली बार जो आन्दोलन हुआ था, वो सफलता के करीब पहुँच गया था परन्तु हम लोगों की पूर्ण रूप से निष्ठा न हो पाने के कारण असफल हुआ | अगर हम लोग निष्काम होकर आन्दोलन करें तो अवश्य सफलता मिलेगी | क्योंकि निष्कामता से कोई कार्य असम्भव नहीं है |         श्री सुनील जी (संयोजक, मानमंदिर,बरसाना) – उन्होंने मंचासीन अथितियों को का वन्दन करते हुये कहा – आज पूज्य बाबा महाराज के आशीर्वाद से नए सिरे से आन्दोलन को शुरुआत किया गया | पूर्व के आन्दोलन में हुये असफलता की कमी को भी संक्षिप्त में बताया |         श्री रमेशचन्द्र शास्त्री (कोसी) – पूज्य रमेश बाबा महाराज ने जो ब्रज के लिए, यमुना  आन्दोलन के लिए जो संकल्प लिया है, उसको पूरा करने के लिए हम हमेशा तत्पर हैं, जिन बाबा ने हमें जाग्रत किया कि वृन्दावन, मथुरा में यमुना का एक बूँद भी पानी नहीं वह रहा है |         श्री हरेश ठेनुआ जी – पूर्व में हुये यमुना आन्दोलन में ‘भारतीय किशान यूनियन’ ने बड़ा अद्भुत सहयोग दिया | सभी लोगों को यमुना मुक्तिकरण अभिमान में जुड़ने के लिए निवेदित किया | पिछली बार जो गलतियाँ हुयी थी वो गलत नेतृत्व के कारण हुई | यमुना मुक्तिकरण अभियान  राजकुमार जी (राया) – सभी लोगों को अपने-अपने कार्य पर पूरी निष्ठा के साथ जुड़ जाना चाहिए | विश्वास से सबकुछ सम्भव है | हम विश्वास के बल पर बड़े-बड़े कार्य में सफल हो सकते हैं |  पचौरी जी (भा.कि.यू.) – उन्होंने अपना जयकृष्णदास पर रोष प्रगट किया |         पंकज चतुर्वेदी जी - ये आन्दोलन रमेश बाबा द्वारा चालू किया गया और उन्ही के द्वारा यह पूर्ण किया जायेगा | हम लोगों का एक ही लक्ष्य है कि यमनोत्री से यमुना जी को छोड़ा जाये, ताकि दुबारा आन्दोलन की आवश्यकता ही न पड़े |         शुशील गोस्वामी (नंदगाँव) – जिस प्रकार बाबा के नेतृत्व में ब्रज के पर्वतों का खनन बन्द हुआ | उसी प्रकार यमुना जी भी जल्दी ही शुद्ध होंगी |                   देवेन्द्र (दाऊ जी) – अपनी यमुना मैया के प्रति श्रद्धा रखते हुये, यमुना महारानी के चरणों में समर्पित होते हुये लग जाइये,          महेंद्र राजपूत – उन्होंने कहा कि हम सबके साथ विस्वासघात करने वाले जयकृष्ण दास बाबा का में साथ छोड़कर पूज्य रमेश बाबा द्वारा चलाए गए यमुना ‘मुक्तिकरण आन्दोलन’ में पूर्ण रूप से सेवा देने के लिए तत्पर हूँ |           गोपालाचार्य जी – बाबा महाराज ने यमुना आन्दोलन की और ध्यान देते हुये, यमुना का एक भक्त सुनील जी को खड़ा किया | हम सब उनका भरपूर सहयोग दें |         रवि – भारत सरकार के १९७२ में लागू एक नियम के अनुसार हमने प्राकृतिक प्रवाह मिल सकता है |         भगवान् दास चौधरी (नगर अध्यक्ष, भ.कि.यू.) – सारे ब्रजवासी बाबा महाराज के हमेशा तत्पर हैं, इस आन्दोलन में पूर्वकृत आन्दोलन से लोग ज्यादा जुड़ेंगे और यमुना महारानी अवश्य आयेंगी |          अनुभव गोस्वामी – वल्लभ कुल हमेशा से यमुना आन्दोलन से जुड़ा है, इस बार हमसब वल्लभकुल  के सभी आचार्य का पहले की अपेक्षा पूर्ण सहयोग है |          पंकज शास्त्री – कहा - चतुर्वेदी समाज पहले भी पूर्ण रूप इस आन्दोलन में साथ था और रहेगा | इस यमुना आन्दोलन में ब्रजवासी ही नही बल्कि सारे देश के हर प्रदेश लोग जुड़ेंगे |         रमाकान्त गोस्वामी – सभी को मिलकर संघर्ष करना पड़ेगा, तभी यमुना का मुक्तिकरण होगा |          अनिल परशुराम (परशुराम सभा अध्यक्ष) – ने कहा - हमारी आस्था पूज्य सन्त रमेश बाबा के साथ है, हम से जुडी हुयी सभी संस्थायें बाबा का तनमन धन से सहयोग करेंगी |           श्री रामजीलाल शास्त्री – हमारे अन्दर महत्वाकांक्षा आ जाती है, तो फिर श्री जी हमारी सेवा को स्वीकार नहीं करती, दूसरों की निन्दा की अपेक्षा हमें ये कोशिश करना है कि हमारे अन्दर महत्वाकांक्षा न आ जाये | मनुष्य जब महत्वाकांक्षा का शिकार हो जाता है, तो अपने आप उसका पतन हो जाता है | जब हम इसको छोड़कर कार्य करते हैं, तो अवश्य सफलता मिलती है | हम सौभाग्यशाली हैं जो यमुना जी हमारी सेवा स्वीकार कर रहीं हैं | इसलिए यमुना को लाने का जो महापुरुषों का संकल्प है, अवश्य पूरा होगा |          डॉ. श्री राधामाधव – महापुरुषों का संकल्प तो अमोघ होता है, यमुना जी तो अवश्य आयेंगी | (पूज्य रमेश बाबा) बाबा महाराज के संकल्प से अवश्य आयेंगी, ये यमुना साक्षात् भगवान् राधाकृष्ण का स्वरुप है, ठाकुर जी हमारी सेवा स्वीकार कर रहे हैं यही हमारा सौभाग्य है | कुछ लोगों की महत्वाकांक्षा के कारण या अहं को चूर करने के लिए ये ठाकुर जी की ही लीला थी जो पूर्व का आन्दोलन असफल हुआ, ताकि सभी देश-विदेश के भक्त पुनः एक क्षत्र के नीचे आ एकत्रित हो जाएँ |                   श्री गोपेश्वर चतुर्वेदी – बाबा महाराज के चरणों में प्रणाम करते हुये, उन्होंने कहा – हम किस बात के यमुना पुत्र हैं, किस लिए मंदिर ? किस लिए कथा ? जब हमारी माँ की ये दुर्दशा और हम अपने को यमुना पुत्र कहलाते हैं, जब हम लोग यमुना जी से लगाव रखना बन्द कर देंगे | तो फिर यमुना माँ की रक्षा कौन करेगा ? पूज्य रमेश बाबा महाराज का आशीर्वाद है हमारे साथ है, हमें भगवान ने शौभाग्य दिया है यमुना जी की सेवा का, जब तक यमुना माँ का पहले की तरह वर्णन न हो, तबतक हमलोग पूर्ण रूप से लगे रहें |                                         आभार व्यक्त श्री राधाकान्त शास्त्री (कार्यकारी अध्यक्ष, मानमंदिर सेवा संस्थान, बरसाना) जी द्वारा  किया गया |  कार्यक्रम में प्रमुख लोग उपस्थित थे – ठाकुर रितराम सिंह(भानु) जिलाध्यक्ष भा.कि.यू., श्री सुनील सिंह (संयोजक –मानमंदिर, बरसाना) जगदीश रावत, श्री चन्द्र चौधरी, देवेन्द्र पाल सिंह, राम गोपाल, अजय सिकरवार, देवेन्द्र पहलबान, चौधरी जगदीश, कनैहा चौधरी, मूलचन्द पचैरा, राधे श्याम, हरिशंकर शास्त्री आदि यमुना भक्त उपस्थित थे |        

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नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रेल मंत्रालय को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि गोरखधाम रेल दुर्घटना के बाद राहत कार्य अच्छी तरह चलाए जाएं।  प्रधानमंत्री ने दुर्घटना में मारे गए प्रत्येक व्यक्ति के निकट संबंधी को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से दो लाख रुपये और गंभीर रूप से घायलों को 50-50 हजार रुपये की अनुग्रह राशि देने को मंजूरी दी है। मोदी ने कहा कि यह अवश्य देखा जाना चाहिए कि सभी घायलों को बेहतरीन संभव चिकित्सा देखभाल उपलब्ध कराई जाए।

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