मथुरा

राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर केंद्रीय मंत्रियों की परिषद के सदस्‍यों को निम्‍नलिखित विभाग सौंपे हैं : नरेंद्र मोदी : प्रधानमंत्री, मंत्रालय: कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग, सभी महत्‍वपूर्ण नीतिगत मामले तथा किसी अन्‍य मंत्री को नहीं दिए गए अन्‍य सभी विभाग कैबिनेट मंत्री 1. राजनाथ सिंह - गृह मंत्रालय 2. सुषमा स्‍वराज - विदेश मंत्रालय 3. अरुण जेटली - वित्‍त, कॉरपोरेट मामले, रक्षा   4. एम वेंकैया नायडू - शहरी विकास, आवास तथा शहरी गरीबी उन्‍मूलन, संसदीय मामले 5. नितिन जयराम गडकरी- सड़क परिवहन तथा राजमार्ग, शिपिंग 6. डीवी सदानंद गौड़ा - रेलवे 7. उमा भारती - जल संसाधन, नदी विकास तथा गंगा पुनरुद्धार 8. डॉ. नजमा ए. हेपतुल्‍ला - अल्‍पसंख्‍यक मामले 9. गोपीनाथ राव मुंडे - ग्रामीण विकास, पंचायती राज, पेयजल एवं स्‍वच्‍छता 10. रामविलास पासवान - उपभोक्‍ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण 11. कलराज मिश्र - सूक्ष्‍म, लघु तथा मझोले उद्योग 12. मेनका संजय गांधी - महिला एवं बाल विकास 13. अनंत कुमार - रसायन एवं उर्वरक 14. रविशंकर प्रसाद - संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी, कानून एवं न्‍याय 15. अशोक गजपति राजू पूसापति - नागरिक उड्डयन 16. अनंत गीते - भारी उद्योग तथा सार्वजनिक उद्यमिता 17. हरसिमरत कौर बादल - खाद्य प्रसंस्‍करण उद्योग 18. नरेंद्र सिंह तोमर – खनन, इस्‍पात, श्रम एवं रोजगार 19. जुएल उरांव - जनजातीय मामले 20. राधा मोहन सिंह - कृषि 21. थावरचंद गहलोत - सामाजिक न्‍याय तथा अधिकारिता  22. स्‍मृति जुबिन ईरानी - मानव संसाधन विकास 23. डॉ. हर्षवर्धन - स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण राज्‍य मंत्री 1. जनरल वीके सिंह - पूर्वोत्‍तर क्षेत्र विकास (स्‍वतंत्र प्रभार), विदेशी मामले, प्रवासी मामले 2. इंद्रजीत सिंह राव - आयोजना (स्‍वतंत्र प्रभार), सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्‍वयन (स्‍वतंत्र प्रभार), रक्षा 3. संतोष कुमार गंगवार - कपड़ा (स्‍वतंत्र प्रभार), संसदीय मामले, जल संसाधन, नदी विकास तथा गंगा पुनरुद्धार   4. श्रीपद येस्‍सो नाइक - संस्‍कृ‍ति (स्‍वतंत्र प्रभार), पर्यटन (स्‍वतंत्र प्रभार) 5. धर्मेंद्र प्रधान - पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस (स्‍वतंत्र प्रभार) 6. सर्बानंदा सोनवाल - कौशल विकास, उद्यमिता, युवा मामले और खेल (स्‍वतंत्र प्रभार) 7. प्रकाश जावड़ेकर - सूचना और प्रसारण (स्‍वतंत्र प्रभार), पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन (स्‍वतंत्र प्रभार), संसदीय मामले 8. पीयूष गोयल - ऊर्जा (स्‍वतंत्र प्रभार), कोयला (स्‍वतंत्र प्रभार), नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा (स्‍वतंत्र प्रभार) 9. डॉ. जितेंद्र सिंह - विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (स्‍वतंत्र प्रभार), पृथ्‍वी विज्ञान (स्‍वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग 10. निर्मला सीतारमन - वाणिज्‍य एवं उद्योग (स्‍वतंत्र प्रभार), वित्‍त, कॉरपोरेट मामले 11. जीएम सिद्देश्‍वरा - नागरिक उड्डयन 12. मनोज सिन्‍हा – रेलवे 13. निहालचंद - रसायन एवं उर्वरक 14. उपेंद्र कुशवाहा - ग्रामीण विकास, पंचायती राज, पेयजल एवं स्‍वच्‍छता 15. राधाकृष्‍णन पी - भारी उद्योग एवं सार्वजनिक उद्यमियता 16. किरण रिजिजू - गृह मामले 17. कृष्‍णपाल गुर्जर- सड़क परिवहन एवं राजमार्ग, शिपिंग 18. डॉ. संजीव कुमार बालयान – कृषि, खाद्य प्रसंस्‍करण उद्योग 19. मनसुखभाई धानजीभाई वसावा - जनजातीय मामले 20. राव साहेब दादाराव दानवे - उपभोक्‍ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण 21. विष्‍णु देव साई – खनन, इस्‍पात, श्रम एवं रोजगार 22. सुदर्शन भगत - सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता

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फिर देश को नहीं मिला नेहरू सा नेतृत्व हिटलर समेत मुसोलिनी का ठुकराया आमंत्रण मथुरा, मानवीय मूल्यों और प्रजातंत्र की बुनियाद पर विश्व शांति के ध्वजवाहक भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पण्डित जवाहरलाल नेहरू सा नेतृत्व देश को दुबारा नसीब न हो सका। ये विचार मंगलवार को पण्डित जवाहरलाल नेहरू की 50 वीं पुण्यतिथि पर डाॅ0 रमेश चन्द्र शर्मा स्मारक शोध एवं सेवा संस्थान के तत्वावधान में संस्थापक अध्यक्ष डाॅ0 सुरेश चन्द्र शर्मा ने ‘मथुरा और कश्मीर’ शोध परियोजना के तहत प्रकाश में आये नेहरूओं के माथुरी संबंधों को लेकर विश्रामघाट क्षेत्र में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में व्यक्त किये।  डाॅ0 शर्मा ने कहा कि गांधी - नेहरू युग में वैश्विक नेतृत्व को लेकर पूरे विश्व में रह - रहकर यह सवाल उठाया जा रहा था कि भारत में गांधी के बाद कौन और नेहरू के बाद कौन ? वह सवाल आज भी अपनी जगह पर क़ायम है। और विश्व के मार्गदर्शन के लिए दुनिया की निगाहें अभी भी भारत पर लगी हैं।  बताया कि यद्यपि इन्दिरा जी के दौर में कभी-कभी ऐसा जरूर लगने लगा था कि जैसे गांधी, नेहरू युग की पुनर्वापसी हो रही हो। और बांग्लादेश के अभ्युदय 16 दिसम्बर 1971, ने उन्हें एक बार गांधी, नेहरू के समकक्ष खड़े होने का मौका भी दे दिया था। मगर 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 के बीच 21 महीने तक चले आपातकाल और 1977 में छठी लोकसभा के चुनाव में करारी हार ने उनकी विश्वस्तरीय छवि को गहरा आघात पहुंचाया। उसके बाद समय ने एक बार फिर करवट ली और 1980 में सातवीं लोकसभा में ऐतिहासिक विजय के बाद इन्दिरा जी के स्वर्णिम युग की पुनः शुरूआत हुई। मगर इससे पहले कि वह विश्वपटल पर गांधी नेहरू के समकक्ष अपना नाम दर्ज करा पाती, 31 अक्तूबर 1984 को उनकी नृशंस हत्या ने विश्व के सवालों का जवाब नहीं देने दिया। इन्दिरा जी के भीष्मी बलिदान ने एक माने में उन्हें विश्व में बेहद लोकप्रिय तो बना दिया, मगर उनके जरिये विश्व को गांधी, नेहरू की तरह मिलने वाले बहुमुखी योगदान अछूते रह गये। उसके बाद देश के राजनीतिक क्षेत्र में जो शून्यता आई, फिर उसने निकलने का नाम नहीं लिया और भारत संकीर्णताओं की राजनीति में उलझकर वैश्विक साख गवांता चला गया।       डाॅ0 शर्मा ने दस्तावेजों के हवाले बताया कि पण्डित जी का व्यक्तित्व और कृतित्व एक दूसरे के पूरक थे। कई बार तो मुश्किलें उनके होने मात्र से आसान हो जाती थीं, तो कई बार कुछ करने से। ग़ौरतलब है कि प्रधानमंत्री बनने से पूर्व जब पण्डित जी देश की आजादी के लिए संघर्ष कर रहे थे। उसी दौर में 26 मई 1938 को उनके यूरोप जाने से पूर्व जर्मनी की नाजी सरकार ने उन्हें म्युनिख में बतौर विशिष्ट अतिथि आमंत्रित किया था। मगर प्रजातांत्रिक मूल्यों के मद्दे नज़र उन्होंने हिटलर व मुसोलिनी के संयुक्त आमंत्रण को ठुकरा कर भारत के गौरव और लोकतांत्रिक मर्यादा की रक्षा की थी। नेहरू के इस स्वाभिमान ने दोनों तानाशाहों को हैरत में डाल दिया और इस निर्णय का असर पूरे विश्व पर देखा गया। महात्मा गांधी ने तो ख्ौर बहुत पहले ही 1931 में द्वितीय गोलमेज वार्ता से लौटते वक्त रोम में प्रवास के दौरान मिलने आये मुसोलिनी से साफ कह दिया था कि तुम्हारे मंसूबे सिर्फ ताश के पŸाों का महल साबित होंगे।    डाॅ0 शर्मा ने पण्डित जी के कृतित्व का ख़ुलासा करते हुए बताया कि पण्डित जवाहरलाल नेहरू ने कभी जनता के शोषक पूंजीपतियों के आगे घुटने नहीं टेके। कारण कि समाजवाद के प्रभाव में उनकी यह धारणा मज़बूत हो चुकी थी कि पूंजीवाद मेहनत तो कुछ नहींे करता लेकिन वह पूंजी का मकड़जाल फैलाकर सरकार और जनता दोनों को मूर्ख बनाकर उनका शोषण करता है। यहां तक कि 1936 में जब उन्हें बीमार पत्नी कमला नेहरू के विदेश में इलाज के लिए धन की बहुत जरूरत थी। उनके निकट के सहयोगियों ने बिड़ला और दूसरे पूंजीपतियों से धन मांगने का परामर्श दिया। पण्डित जी ने उस कठिन समय में भी पूंजीपतियोें से धन नहीं मांगा और जैसे-तैसे कमला नेहरू के इलाज की व्यवस्था की थी।  इसी म में डाॅ0 शर्मा ने बताया कि एक बार पण्डित जी को जब मोहम्मद यूनुस के जरिये यह पता चला कि बिड़ला के खाते से राजनीतिज्ञों को दी जाने वाली आर्थिक मदद में विजयलक्ष्मी पण्डित का भी नाम है , तो उन्होंने उसी दिन से उनसे दूरियां बना लीं जिसका कारण विजयलक्ष्मी भी समझ न सकीं।  अगले क्रम में उन्होंने पण्डित जी की देशभक्ति का दृष्टान्त देकर बताया कि एक बार टाटा ने किसी तर्कीब से देश को मिलने वाले 75 लाख रूपये का टैक्स बचा लिया। इसकी सूचना टाटा के ही किसी सेवाकर्मी ने पण्डित जी को दे दी। पण्डित जी ने इस बात का इतना बुरा माना कि टाटा ने कार्रवाई के डर से सारा टैक्स सरकारी ख्ाजाने में जमा करा दिया।  इससे पूर्व उपस्थितों ने मां यमुना और पण्डित जवाहरलाल नेहरू के चित्रपटों पर माल्यार्पण एवं दीपोपहार से सभा की शुरूआत की। तत्पश्चात् पण्डित भारत माता की जय, जवाहरलाल नेहरू अमर रहें, के नारों से क्षेत्र आयोजन स्थल गूंज उठा।   इस अवसर पर मंसोला जी, भानू चैबे, कमली, बसन्तलाल मुखिया, ढोले, राजकुमार, विश्वनाथ पण्डित, राजेन्द्र प्रसाद चतु0, ब्रजेन्द्रनाथ एड0, शुभम् चतु0 आदि उपस्थित थे।      

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मथुरा। जनपद के अलग अलग थाना क्षेत्रों में दहेज लोभी ससुरालीजनों ने दहेज की खातिर विवाहिताओं को मारपीट कर घर से निकाल दिया। घटना की रिपोर्ट पीडि़ताओं के परिजनों ने दहेज लोभी ससुरालीजनों के विरूद्व सम्बन्धित थाने में दर्ज कराई हैं।  मिली जानकारी विष्णुदत्त पुत्र बसन्त लाल निवासी ओम नगर जन्मभूमि मार्ग ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई है कि उसके पुत्री गिन्नी के पति हरप्रसाद उर्फ शहसांह पुत्र विद्याराम निवासी ओम नगर सौख रोड थाना हाईवें ने अपने पाॅच अन्य परिजनों के साथ मिलकर दहेज में अतिरिक्त दहेज के बतौर वाइक की माॅग की, माॅग पुरी नहीं होने पर गिन्नी का शारीरिक व मानसिक उत्पीड़न किया तथा मारपीट कर घर से निकाल दिया। दूसरी घटना जनपद के महिला थाने में छत्तरपाल पुत्र भूपसिंह निवासी विरजापुर हाईवें ने रिपोर्ट दर्ज कराई है कि उसकी दो पुत्रियां पूजा व कल्पना की शादी सौदान सिंह पुत्र गोपाल सिंह के दो पुत्रों से हुई थी। शादी के बाद से ही ससुरालीजनों द्वारा दहेज के लिए उत्पीड़न करना तथा माॅग पुरी नहीं होने पर मारपीट कर घर से निकाल दिया। तथा जान से मारने की धमकी दी हैं। घटना की रिपोर्ट पीडि़त पुत्री के पिता छत्तर सिंह ने सौदान सिंह सहित सात अन्य के विरूद्व पुलिस में दर्ज कराई हैं। तीसरी घटना थाना महावन में जवाहर सिंह पुत्र लाखन सिंह निवासी इटौरा मलपुरा आगरा ने रिपोर्ट दर्ज कराई है कि उसकी पुत्री बौबी व सुधा की शादी एक ही परिवार में दो भाईयों के साथ की थी। शादी के बाद से ही ससुरालीजन योगेन्द्र पुत्र सरनाम सिंह निवासी नगला लोका महावन ने अपने सात अन्य परिजनों के साथ मिलकर वौवी व सुधा से दहेज में बाइक लाने की माॅग की, माॅग पुरी नहीं जोने पर ससुरालीजनों ने एकराय होकर दोनो वाहनों का शारीरिक व मानसिक उत्पीड़न करने लगें इसके बाद भी माॅग पुरी नहीं होने पर ससुरालीजनों ने दोनो पुत्रियों के पिता को बुलाकर उनसें दहेज में बाइक की माॅग की माॅग पुरी नहीं करने पर योगेन्द्र ने अपने परिजनों के साथ मिलकर उनकी पुत्रियों के साथ मारपीट की तथा जान से मारने की धमकी देते हुए पिता सहित दोनो पुत्रियों को घर से वाहर निकाल दिया वहीं दुधमुही बच्चियों को भी घर से निकाल दिया जबकि वड़ें पुत्र को अपने पास रख लिया। पुलिस ने तीनों घटनाओं को दर्ज कर आरोपी ससुरालीजनों के विरूद्व कार्यवाही शुरू कर दी हैं। 

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मथुरा। जनपद में चरमराती विद्युत व्यवस्था को लेकर भाजयुमो के नगर अध्यक्ष सुमित शर्मा के नेतृत्व में डीएम को ज्ञापन दिया गया। जिसमें कहा गया कि ताज टेªपेजियम क्षेत्र होने के बाद भी अघोषित बिजली कटौती से लोगों का बुराहाल है। सभी वर्ग परेशान है। तत्काल मथुरा को कटौती मुक्त करें अन्यथा युवा मोर्चा उग्र आंदोलन करेंगा। ज्ञापन में संजय शर्मा नगर अध्यक्ष भाजपा, यतीश चैधरी, बृजमोहन सैनी, हरीओम शर्मा, दीपक गौड, असरफ कुरैशी आदि उपस्थित थे। 

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मथुरा। शनि जयंती के उपलक्ष में आज 28 मई को पुराने डाक खाने के सामने स्थापित शनिदेव के मंदिर पर भव्य फूल बंगला व भण्डारा होगा। रसिया दंगल का भी मुकाबला होगा। क्षेत्रीय दुकानदारों द्वारा शनि जयंती पर सांय भव्य फूल बंगला सजवाया जायेगा। सांय भण्डारा भी होगा। रात्रि में ओमवीर अखाडा अलीगढ़ व रामवीर अखाड़ा हाथरस के बीच रसिया दंगल का मुकाबला होगा। यह जानकारी देते हुये बनवारी यादव ने शनि भक्तों से सभी कार्यक्रमों में भाग लेने की अपील की है। इसके अलावा रंगेश्वर स्थित शनिदेव सहित अन्य शनिदेव मंदिरों में भी आकर्षक सजावट के बीच धार्मिक कार्यक्रम होंगे।

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मथुरा। छटीकरा स्थित मां वैष्णो देवी का चतुर्थ वार्षिकोत्सव समारोह भव्यता से पूजा कार्य कर मनाया गया। इस मौके पर मंदिर के सर्वेसर्वा जेसी चैधरी एवं उनकी पत्नी एवं परिवारीजनों ने भी इस मौके पर मां की पूजा अर्चना की। वहां रात्रि में भजन संध्या का आयोजन भी किया गया। जिसमें उपस्थित होकर भारी संख्या में भक्तों ने भजनों का आनंद लिया।

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