मथुरा

ऐतिहासिक मीनाक्षी सुन्दरेश्वर मन्दिर या मीनाक्षी मन्दिर तमिलनाडु राज्य के मदुरै नगर में स्थित है।    यह हिन्दू देवता शिव एवं उनकी पत्नी पार्वती (मीनाक्षी या मछली के आकार की आंख वाली देवी के रूप में) को समर्पित है। हिन्दू पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान शिव सुन्दरेश्वर रूप में अपने गणों के साथ पांड्य राजा मलयध्वज की पुत्री राजकुमारी मीनाक्षी से विवाह रचाने मदुरै आए थे, जिन्हें देवी पार्वती का अवतार माना जाता है। इस मन्दिर को देवी पार्वती के सर्वाधिक पवित्र स्थानों में से एक गिना जाता है।   देवी पार्वती के अन्य पवित्र स्थानों में कांचीपुरम का कामाक्षी मन्दिर, तिरुवनैकवल का अकिलन्देश्वरी मन्दिर एवं वाराणसी का विशालाक्षी मन्दिर प्रमुख हैं। मीनाक्षी मन्दिर का स्थापत्य एवं वास्तु आश्चर्यचकित कर देने वाला है, जिस कारण इसे आधुनिक विश्व के सात आश्चर्यों की सूची में पहले स्थान पर रखा जाता है।    इस भवनसमूह में 12 भव्य गोपुरम हैं, जो काफी बड़े हैं। इन पर बहुत महीन चित्रकारी की गई है, जो देखते ही बनती है। यह मन्दिर तमिल लोगों का एक अति महत्वपूर्ण स्थान है, एवं इसका वर्णन तमिल साहित्य में पुरातन काल से ही होता रहा है, हालांकि वर्तमान निर्माण आरम्भिक सत्रहवीं शताब्दी का बताया जाता है।

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मुंबई : देश के शेयर बाजारों में मंगलवार को गिरावट दर्ज की गई। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 108 अंक की गिरावट के साथ 22,532.46 पर और निफ्टी 33 अंक की गिरावट के साथ 6,727.25 पर बंद हुआ। वहीं, भेल, इंफोसिस, विप्रो और सिप्ला, के शेयर में उल्लेखनीय बढ़त तथा वहीं, गेल, हिरो होंडा, एचडीएफसी, एयरटेल, के शेयर में गिरावट दर्ज की गई।   

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नई दिल्ली : पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अंतर्गत पेट्रोलियम नियोजन और विश्लेषण प्रकोष्ठ द्वारा संकलित प्रकाशित सूचना के अनुसार कच्चे तेल की अंतर्राष्ट्रीय कीमत 25 अप्रैल को मामूली वृद्धि के साथ 107.59 अमरीकी डॉलर प्रति बैरल हो गई। यह पिछले कारोबारी दिवस 24 अप्रैल को 107.13 अमरीकी डॉलर प्रति बैरल थी।   रुपये के संदर्भ में 24 अप्रैल के 6542.43 अमरीकी डॉलर प्रति बैरल की तुलना में 25 अप्रैल को यह कीमत मामूली बढ़कर 6575.90 अमरीकी डॉलर प्रति बैरल हो गई। ऐसा डॉलर के संदर्भ में कीमत में बढ़ोतरी के कारण हुआ। 24 अप्रैल के रुपये 61.07 अमेरीकी डॉलर प्रति बैरल की तुलना में 25 अप्रैल को रुपये कमजोर होकर 61.12 अमेरीकी डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। 

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नई दिल्ली : बॉलीवुड अभिनेता इंदर कुमार सर्राफ को 23 वर्षीय मॉडल के साथ रेप के मामले में बांद्रा की अदालत ने 30 तक पुलिस कस्टडी में भेज दिया हैं। इस चार दिनों के दौरान पुलिस सर्राफ और पीड़िता से पूछताछ करेगी। इंदर ने कहा कि उन्हे किसी साजिश के तहत फसाया जा रहा है। इंदर का कहना है कि वह अपनी पत्नी के साथ 24 को वर्सोवा पुलिस स्टेशन गए थे क्योकि उनकी पत्नी पल्लवी ने मेरे उपर किसी अन्य महिला के साथ संबंध रखने का आरोप लगाया था। इसके दुसरे दिन ही मॉडस ने उन पर रेप का आरोप लगा दिया। सर्राफ ने कहा कि किसी साजिस के तहत मुझे फंसाया जा रहा है। इस अभिनेता ने मासूम, बागी, खिलाड़ियों का खिलाड़ी, मां तुझे सलाम और वांटेड जैसी फिल्मों में काम किया है

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अबुधाबी : आईपीएल मैचों में मुंबई इंडियंस की हार का सिलसिला लगातार जारी है मुंबई इंडियंस और चेन्नई सुपर किंग्स के बीच खेले गए मैच में चेन्नई सुपर किंग्स ने मुंबई इंडियंस को सात विकेट से हरा कर अपने विजय अभियान को जारी रखा।   मुंबई इंडियंस की पूरी टीम चेन्नई सुपर किंग्स के गेंदबाज मोहित शर्मा (16-4) की शानदार गेंदबाजी के सामने संघर्ष करती नजर आई और फिर टीम निर्धारित 20 ओवर में 141 रन ही बना सकी जबकि चेन्नई सुपर किंग्स के ब्रेंडन मैकुलम की नाबाद 71 रनों की पारी के दम पर चेन्नई सुपर किंग्स ने निर्धारित लक्ष्य 19 ओवरों में 3 विकेट खो कर प्राप्त कर लिया। मुंबई इंडियंस की तरफ से कप्तान रोहित शर्मा (50) और कोरी एंडरसन (39) रनों की पारी खेली।    एक अन्य मैच में आरोन फिंच और डेविड वार्नर के नाबाद अर्धशतकों की मदद से आईपीएल में अपना सर्वश्रेष्ठ स्कोर खड़ा करने वाले सनराइजर्स हैदराबाद ने दिल्ली डेयरडेविल्स को चार रन से हराकर आईपीएल सात में पहली जीत दर्ज की।   सनराइजर्स ने फिंच (नाबाद 88) और वार्नर (नाबाद 58) के अर्धशतकों और दोनों के बीच दूसरे विकेट की 128 रन की अटूट साझेदारी की मदद से एक विकेट पर 184 रन बनाए. फिंच ने 53 गेंद की अपनी पारी में आठ चौके और चार छक्के मारे जबकि वार्नर ने 45 गेंद का सामना करते हुए तीन चौके और तीन छक्के जड़े।   इसके जवाब में दिल्ली की टीम सलामी बल्लेबाजों मुरली विजय (52) और क्विंटन डि काक (48) की उम्दा पारियों के बावजूद चार विकेट पर 180 रन ही बना सकी। मनोज तिवारी (13 गेंद में नाबाद 23) और जेपी डुमिनी (सात गेंद में नाबाद 20) ने सिर्फ 3.1 ओवर में 45 रन की अटूट साझेदारी की लेकिन हार को टाल नहीं सके। हैदराबाद ही यह तीन मैचों में पहली जीत जबकि दिल्ली की चार मैचों में तीसरी हार है। लक्ष्य का पीछा करने उतरी दिल्ली की टीम को विजय और डि काक ने 11.2 ओवर में 99 रन जोड़कर शानदार शुरुआत दिलाई।

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लोकसभा 2014 में पहली बार ऐसा होगा जब चुनावी माहौल के मंच पर और माईक के साथ सोशल साइट्स का प्रयोग भी प्रभावी रोल अदा कर रहें हैं। क्योंकि जिस रफ्तार से सोशल साइट्स के जरिए चुनाव प्रचार किया जा रहा है, उससे एक बात तो तय है कि हमारा देश की चुनाव प्रणाली अब हाइटेक दौर में प्रवेश कर चुकी हैं। 2009 लोकसभा चुनाव तक सोशल साइट्स का इतना महत्व था यह कहना संभव तो नही पर इस लोकसभा चुनाव में इसके महत्व को नकारा भी नहीं जा सकता है। इस लोकसभा इलेक्शन में करीब 80 करोड़ से ज्यादा वोटर्स हैं। देश में लगभग 9 करोड़ से कहीं ज्यादा लोग सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं। इस कारण यह 9 करोड़ लोग इस चुनाव में अहम भूमिका अदा कर सकते हैं या कर रहें है। यह भी माना जा रहा है कि चुनाव के 48 घंटे पहले जब चुनाव प्रचार पर रोक लग जाती है, तब सोशल मीडिया की भूमिका बढ़ जाती है। इस कारण सभी दल सोशल मीडिया के लिए अपनी टीम जुटा कर रखी है। भाजपा के पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी खुद टिवटर पर एक्टिव हैं और करीब 9 भाषाओं में ट्वीट करते हैं। इतना ही नहीं, कांग्रेस ने अधिक से अधिक युवाओं को पार्टी से जोड़ने के लिए सोशल मीडिया वेबसाइट पर कट्टर सोच नहीं युवा जोश अभियान चलाया हुआ है। इस अभियान के जरिए पार्टी न सिर्फ अपने उपाध्यक्ष राहुल गांधी की छवि को चमकाने में लगी है, बल्कि भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी पर करारा कटाक्ष भी कर रही है। भाजपा ने लोकसभा चुनाव 2014 के लिए देश भर में 272 से अधिक सीटें जीतने का लक्ष्य बना रखा है। इसके मद्देनजर वह सोशल मीडिया साइट्स पर जोरदार अभियान चला रही है। भाजपा से जुड़े लोग नरेंद्र मोदी को नमो नाम से भी संबोधित करते हैं। इसलिए इस नाम से भी भाजपा का अभियान चल रहा है। इस अभियान के तहत नरेंद्र मोदी के गुजरात के विकास मॉडल को जनता को समझाया और बताया जा रहा है। वही, आप के केजरीवाल भी अपनी नाकामियों को छुपाने और प्रभुत्व बढ़ाने में लगे हैं। 2014 के चुनाव को लेकर सोशल मीडिया के बढ़ते उपयोग और इसके प्रभाव पर चुनाव आयोग भी अपनी नजर रखने का फैसला लिया है। आयोग के मुताबिक सोशल मीडिया पर होने वाला खर्च भी संबंधित राजनीतिक दलों के खर्च में जोड़ा जाएगा। अत: यह कहा जा सकता है कि इस चुनाव में सोशल मीडिया अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह कर रहा है और चुनावी दौर में न तो सोशल मीडिया की अनदेखी की जा सकती है और न ही नजरअंदाज किया जा सकता है।

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नई दिल्ली : पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अंतर्गत पेट्रोलियम नियोजन और विश्लेषण प्रकोष्ठ द्वारा संकलित प्रकाशित सूचना के अनुसार कच्चे तेल की अंतर्राष्ट्रीय कीमत 23 अप्रैल को मामूली गिरावट के साथ 106.81 अमरीकी डॉलर प्रति बैरल हो गई। यह पिछले कारोबारी दिवस 22 अप्रैल को 107.08 अमरीकी डॉलर प्रति बैरल थी।   रुपये के संदर्भ में 22 अप्रैल के 6449.14 अमरीकी डॉलर प्रति बैरल की तुलना में 23 अप्रैल को यह कीमत बढ़कर 6522.89 अमरीकी डॉलर प्रति बैरल हो गई। ऐसा डॉलर के रूप में मूल्‍य में गिरावट और रुपये के अवमूल्‍यन के कारण हुआ। 22 अप्रैल को जहां एक अमरीकी डॉलर 60.71 रुपये का था, वहां यह 23 अप्रैल को कमजोर होकर 61.07 रुपये का हो गया।

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मथुरा : मथुरा लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी हेमा मालिनी से पत्रकार वार्ता में जब उनकी योग्यता और धर्म परिवर्तन कर शादी के संबंध प्रश्न पूछा गया तो वह टाल-मटोल करती हुई नजर आई।

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    सोचो कहीं ऐसा हो तो क्या हो ? हेमा जी कभी रोड शो में वृन्दावन जायें, बन्दर चश्मा ले जाये और छत पर चढ़ जाये । बात लगभग 15-20 वर्ष पुरानी है, बहुत पुरानी भी नहीं है किन्तु बहुत ही गंभीर समस्या से सम्बन्धित है। इस समस्या की ओर न तब जन-प्रतिनिधियों और शासन-प्रशासन की रुचि थी और न आज है। वृन्दावन के विद्वान आचार्य प्रवर श्रीवत्स गोस्वामी इसके साक्षी हैं। इन्डियाना यूनिवर्सिटी ब्लूमिन्टन      ( अमेरिका ) के प्रोफेसर डेविड हैबरमैन की विभिन्न धार्मिक आचार्यों विशेष रूप से चैतन्य सम्प्रदाय के रूप गोस्वामी के ग्रन्थों के प्रति खोज पूर्ण दृष्टि थी। वह अमेरिका से वृन्दावन आकर आचार्य श्रीवत्स जी के निर्देशन में कार्य करते थे। उन्होंने रूप गोस्वामी के भक्ति रसामृत सिन्धु का अंगे्रजी में अनुवाद किया था। उनके ब्रज चैरासी कोस की यात्रा, ब्रज के वृक्षों, प्रदूषित यमुना ( पोल्यूट यमुना ) आदि ब्रज सम्बन्धी ग्रन्थों ने अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर ब्रज को प्रतिष्ठा प्रदान की थी। प्रो. डेविड हैवरमैन शोध कार्य के लिए प्रायः अमेरिका से वृन्दावन आते थे और आचार्य श्रीवत्स गोस्वामी जी के श्री चैतन्य प्रेम संस्थान में बैठकर अध्ययन किया करते थे। इस साधना में उन्हें सबसे अधिक कष्ट बन्दरों से होता था जो उनके मंदिरों के दर्शन करने जाते समय उनका चश्मा खींच ले जाते थे और तोड़ देते थे। उनका मुँह बन्दरों की खरौंच से भरा रहता था। वह एक दिन इतने दःुखी हुए कि मथुरा के तत्कालीन जिलाधिकारी श्री सदाकान्त से अपनी व्यथा बताते हुए रो पड़े थे। इन्हीं दिनों श्री स्वामी अखण्डानन्द सरस्वती जी सहित 600 धर्मगुरुओं के हस्ताक्षरों से जिलाधिकारी मथुरा को ज्ञापन देकर बन्दरों के आतंक से मुक्ति दिलाने की माँग की गई थी। जिलाधिकारी महोदय ने वृन्दावन के हर आदमी से जुड़ी इस समस्या के निराकरण के गम्भीरता पूर्वक प्रयास किए और दिल्ली की पर्यावरण की एक संस्था से जुड़ी इकबाल मलिक नामक महिला के निर्देशन में 700-800 बन्दरों को पकड़ा गया। इन्होंने ही केन्द्रीय सचिवालय को बन्दरों के आतंक से मुक्त कराया था। बाद मंें कुछ स्थानीय लोगों के विरोध के कारण बन्दरों का पकड़ा जाना रुक गया । ज्ञानदीप के सचिव कक्ष में कुछ प्रबुद्ध जनों के मध्य यह चर्चा कर रहा था कि मेरे एक अतिथि ने बदहबाश सी स्थिति में प्रवेश किया। उन्होंने रुआँसा होकर बताया कि वह वृन्दावन में सेवा कुँज के दर्शन करके आ रहे थे कि बन्दर ने उनका चश्मा खींच लिया और दाँतों से चबाकर यह स्थिति कर दी, बेटी के हाथ से बिहारी जी के प्रसाद का डिब्बा भी खींच लिया।         अतिथि महोदय की व्यथा-कथा सुनकर मैंने कहा कि सभी लोकसभा प्रत्याशी यमुना को प्रदूषण मुक्त कराने, भ्रष्टाचार मिटाने, हाईकोर्ट बैन्च स्थापित करने, हवाई अड्डा बनवाने आदि की हवाई बातें तो कर रहे हैं किन्तु जनता को हर दिन होने वाली इस कठिनाई को दूर करने की ओर ध्यान नहीं है । बन्दरों के आतंक की समस्या वृन्दावन में विशेष है किन्तु पूरे जनपद में यह भीषण समस्या व्यापत है। बन्दरों के भय से छत से गिर जाने से मृत्यु, कपड़े फाड़ देना आदि अनेक कष्ट स्थानीय निवासी रोज सहते हैं और असहाय स्थिति में हैं।          इसी समय वहाँं उपस्थित कवि राधा गोविन्द पाठक ने कहा कि यदि उनकी लोकसभा प्रत्याशी हेमा मालिनी से भेंट हुई तो वह उनसे अनुरोध करते हुए कहेंगें-               सोचो कहीं ऐसा हो तो क्या हो ?               हेमा जी कभी रोड शो में वृन्दावन जायें,               बन्दर चश्मा ले जाये और छत पर चढ़ जाये ।               मुँह को बनाये, हेमा जी को चिढ़ाये,               कोई बिस्कुट दिखाये कोई लड्डू खिलाये ।               फिर भी टूटा-फूटा चश्मा छोड़कर के जाये । हास्य-व्यंग के दिग्गज और राहु, केतु, शनि के प्रथम अक्षर नामधारी कवि डाॅ. राकेश शरद ने कहा कि यदि उन्हें हेमा जी की ’लिफ्ट‘ मिली तो वह उनसे अनुरोध करेंगे कि वृन्दावन के बन्दरों को मुम्बई की चैपाटी पर ले जायें-                हे माँ, आप बाजार से गुजरें, और बन्दर आ जायें ।               वोटों की भीख माँगने में, कहीं आपका चश्मा ले जायें ।               नीचे हो मुम्बई की बाला, ऊपर से गुर्राबें हनुमत लाला ।               अब वोट कैसे माँगे जायें, पहलेे चश्मा नीचे तो आये ।               फिर ले जाऊँगी मुम्बई चैपाटी ।  और इस हिम्मत से मेरी विरोधी भाग-भाग जायें । श्रीमती वन्दना सिंह कवयित्री नहीं, संगीत कलाकार हैं किन्तु डाॅ. राकेश शरद की कविता सुनकर उनका गीत फूट पड़ा-         वोट तो देंगे जभी हम, काम जो करोगी हमारा तुम ।         वादा ये करके जाना, वादे को पूरा निभाना ।।         वृन्दावन के बन्दर शैतान हैं, पर थोड़े से ये नादान हैं ।         यमुना प्रदूषित हुई है, इन्हें समुद्र नहाने की बेचैनी हुई है ।।         चैपाटी इन्हें ले जाना, ऐक्टर भी हैं, जरा फिल्माना         पर चश्मा सँभाल कर रखना, कहीं बन्दर ले न जायें ।          कन्धे पर लपक के चढ़ के, कहीं छाता ले न जायें ।।  वहीं बैठे डाॅ. जगदीश लवानिया हाथरसी अन्दाज में बोले-          हेमा निधिवन से चलीं, गली-बाजार आ जायें ।         वोटर की भूल-भूलैया में, बन्दर चश्मा ले जाय ।         बिना चश्मा बसन्ती घबड़ाये, क्या करे कुछ भी समझ न आये ।। हिन्दी के युवा गीतकार श्री जितेन्द्र विमल ने अपनी कल्पना को ब्रजभाषा में कुछ इस प्रकार साकार किया-          वृन्दावन के बन्दर हैं शैतान बड़े ।         करें हैं अच्छे- अच्छन के कान खड़े ।।         बन्दर.........हेमा जी कौ सुन्दर, इक चश्मा लै गयौ,         बदले में हेमा के हाथन सौं केला ज्यैं गयौ ।          जि बन्दर का जाने ? कि हेमा कौ नाम बड़ौ है ।         चूँकि इनकौ उनते कोई न काम पड़ौ है ।।         तोय मालुम नाँय बन्दर के बच्चा, तेरौ हल्ला है गयौ ।         बन्दर............हेमा जी कौ सुन्दर, इक चश्मा लै गयौ ।। इसी मध्य इस ‘‘ हा-हा-हू-हू‘‘ गोष्ठी में एक नहीं अनेक रस वृष्टि करते हुए श्री सबरस मुरसानी प्रकट हुए और उन्होंने-       बिहारी जी धर्मेन्द्र न जा सके, और हेमा को भी दर्शन न मिल सके ।      हम तुम निधिवन में संग हों, बन्दर चश्मा ले जाय ।       सोचो कभी ऐसा हो तो क्या हो ?      बन्दर से कहूँ चश्मा ले जाय, पर वोट मुझे दे जाय ।      आगे हों वोटर की टोलियाँ, पीछे खों-खों बंदर की बोलियाॅं ।      जयकारे भूलकर वोटर, दबायेंगे कंकड़-गुलोलियाँ      बन्दर से कहूँ तू छोड़ चश्मा,       रूपया-मिठाई मुझसे ले जाये पर वोट मुझे दे जाय ।। मुरसानी जी थमे तो उन्हीं की कद-काठी के हास्य-व्यंग कवि पदम अलबेला जी आ जमे और उन्होंने अपने नाम पदम ( कमल ) के अनुरूप हेमा मालिनी का कमल खिलाने की शुभ कामना व्यक्त की-      जैसे ही हेमा मालिनी गईं मन्दिर के द्वार ।      एक बन्दर ने तुरंत ही, चश्मा लिया उतार ।।      चश्मा लिया उतार, देख ये नया करिश्मा ।।      कहैं बसन्ती बन्दर से दिलवादो चश्मा ।ं        कोई उसको बिस्कुट-टाॅफी खिला रहा था ।      और कोई तो ‘कोल्ड डिंªक‘ भी पिला रहा था ।।      एक कार्यकर्ता ने, उनसे कही यह बात ।      यही हादसे यहाॅं पर होते हैं दिन-रात ।      इन्हें पकड़वा कर पहले मुम्बई पहुॅंचाओ ।      इन दुष्ट बन्दरों से हम सबका पिन्ड छुड़वायें ।     फिर देंगे तुम को वोट, आपका कमल खिलायें  ।। और हास्य-व्यंग के सशक्त हस्ताक्षर श्री वरूण चतुर्वेदी ने भी हेमा मालिनी से यही कहा कि आपको वोट तभी मिलेंगे जब आप बन्दरों को अपने साथ मुम्बई ले जायें -       अरे हाय-हाय वृन्दावन के बन्दर, लगते हैं ये जैसे कलन्दर ।       सोचो कभी दौड़कर ये आयें, छीन के जो चश्मा लेकर जायें । ़       तब तुम ‘फील’ कैसा करोगे ? कोई इनसे बचाये ।       हेमा मालिनी यहाँ पर आईं, वोटों की जो दे रही दुहाई ।       सोचो कभी ऐसा हो तो क्या हो ?        हेमा जब मुम्बई को जायें, इन्हें साथ अपने ले जायें ।   पैरोडी से श्रोताओं को लुभाने वाली कवयित्री चेतना शर्मा की चेतना जागी तो वह गा उठीं-         चालू हंै ये वृन्दावन के बन्दर, राम जी की सेना के कलन्दर ।         टूट पड़ते हैं आसमान से, चश्मा लेकर उडं़े हनुमान से ।         सोचो कभी ऐसा हो तो क्या हो ?         अब तुम ठगे सोचते रहोगे, चश्मा वापस कौन लाये ?          हेमा जी चुनाव में खड़ी हैं, वोट माँगने पै ये अड़ी हैं ।          वोट भी तभी तो ये पायेंगी, जान बन्दरों से जो ये बचायेंगी,          सोचा कभी ऐसा हो तो क्या हो ?         एम.पी. जब हेमा बन जायें, सब को बन्दर से भी बचाये ।         सोचो कभी ऐसा हो तो क्या हो ? आगरा के युवा व्यंगकार पवन आगरी ने ‘वानर‘ के माध्यम से यह भावना व्यक्त की है कि हेमा मालिनी ब्रज मे ंरहकर विकास की यमुना प्रवाहित करें -          बसन्ती सवार होकर धन्नों पर चली, पर ब्रज की गलियों में उसकी एक न चली ।          एक चंचल वानर उसका चश्मा ले जाये ।          गोरे मुखड़े वाली चतुर नार खूब गुहार लगायें ।          पर अब तो वो वानर भी अपनी आँख दिखाये ।          बसन्ती तुम अब मेरी ब्रजभूमि में रहोगी, ये वचन निभाना होगा ।          वीरू के साथ मिल के विकास की, यमुना को बहाना होगा । जने-माने हास्य कवि- ‘लाफ्टर चैम्पियन‘ , ‘असरदार-सरदार प्रताप फौजदार ने चुटीला व्यंग सुनाया-  चश्मे के लिए दिल न दुखाओ और ला देंगे हम   बन्दर ले गया तो ले जाने दो -2   चश्मे के लिए दिल न दुखाओ और ला देंगे हम  चश्मा तो क्या चश्मे वाला भी ला देंगे हम  कुछ भी हो जाए तेरे लिए सब कुछ लुटा देंगे हम  एक नहीं कई जुटा देंगे हम  मैडम सोचो न कुछ बिल्कुल   आगा-पीछा भी देखो न बिल्कुल   बन्दर ले गया तो ले जाने दो   बन्दर से मैडम चूँ न घबराओ मार भगा देंगे हम  चश्मे के लिए दिल न दुखाओ और ला देंगे हम   दसियों बन्दर लगायेंगे नारे, आगे पीछे चलेंगे सारे  विरोधियों को घुड़की से भगा देंगे हम   चश्मे के लिए दिल न दुखाओ और ला देंगे हम।। सभी कविगण ने मोहन स्वरूप भाटिया से कहा कि आप भी कुछ सुनाइये । उन्होंने कहा कि कविता तो उनसे कोसों दूर रही है । कुछ तुकबन्दी सुन लीजिये-           हेमा जी निधिवन से निकलीं, बन्दर चश्मा ले जाये ।           इधर, कभी उधर को देखें, कुछ समझ न आये ।           तभी बन्दर यौं चिल्लाया- बिना तोड़े जो चश्मा चाहो तो           एक वायदा होगा निभाना, हमें नहीं कभी भी पकड़वाना ।           एम.पी. बन जाओ तो साथ ले चलना, आप वहाँं खूब बँगले में रहना ।           हम बँगले के पिछवाड़े रह लेगे, आप जो खायें वही खा लेंगे ।           गार्ड हटा देना, रखवाली कर लेंगे ।           आप हमारे गुन गायें, हम आपके गुन गायेंगे । अन्त में सभी कविगण ने एक स्वर से कहा कि कवि समाज के प्रहरी हैं। बन्दरों के आतंक से जन-जन दुःखी है। हेमा मालिनी ही नहीं सभी लोकसभा प्रत्याशियों को इस सम्बन्ध में गम्भीरतापूर्वक समस्या के निराकरण के लिए पहल करनी चाहिए।   ( मोहन स्वरूप भाटिया )   संलग्न: चित्र क्रमश: राधा गोविन्द पाठक, डा. राकेश शरद, वन्दना सिंह, जितेन्द्र विमल, सबरस मुरसानी, पदम अलबेला, वरुण चतुर्वेदी, मोहन स्वरूप भाटिया  

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रालोद कांग्रेस गठबन्धन प्रत्याशी जयन्त चैधरी व भाजपा प्रत्याशी हेमा मालिनी मथुरा। लोकसभा चुनावों को लेकर भारतीय जनता पार्टी कांग्रेंस गठबन्धन के साथ साथ सपा, बसपा, आप पार्टी के उम्मीदवारों का चुनाव प्रचार अब पुरी प्रगति की ओर अग्रसर है। फिल्म स्टार हेमा मालिनी के भाजपा उम्मीदवार बनने से अब यह संसंदीय क्षेत्र वीआईपी हो गया हैं। इस सीट को लेकर राजनैतिक दिग्गजों की नजर इस पर लगी हुई हैं। सवाल यह उठता है कि क्या भाजपा प्रत्याशी हेमा मालिनी चुनाव समर में आने के बाद रालोद के स्टार प्रचारक व प्रत्याशी अपने गढ़ को बचाने में सफल हो पायेगे या हेमा मालिनी अपने ग्लेमर के बल पर भाजपा को इस सीट पर पुनः काबिज कराने में सफल होगी। हालांकि की अभी लोग विभिन्न दलों के स्टार प्रचारकों की सभाओं का इन्तजार कर माहौल को समझने में लगें है। लोगों का मानना है कि अभी भाजपा, रालोद-काग्रेंस गठबन्धन के बीच माना जा रहा मुकावला बसपा सुप्रीमों और सपा के स्टार प्रचारकों के आने के बाद त्रिकोणात्मक या चतुर्कोणीय व बन सकता हैं। राजनैतिक विशेषज्ञों की नजर शहरी क्षेत्र के बढ़ी संख्या में अल्पसंख्यक वर्ग मुस्लिम मतों पर है कि यह मत इस बार किसके साथ जायेगा। क्योंकि पिछलें समय में इस वर्ग का नतीजा लगभग यह रहा है कि चाहे सपा हो बसपा हो या कांग्रेंस जो भी दल भाजपा को हराने में सक्षम नजर आता है मुस्लिम मतदाता एकजुट होकर उसी की तरफ लामबन्द होता रहा हैं। इसी के चलते यह देखना आवश्यक है कि बसपा सुप्रीमों जिनका जनपद में एक मजबूत आधार है उसके साथ साथ अपना प्रत्याशी के पक्ष में सभाकर क्या मुस्लिम मत को बसपा के समर्थन में मोड़ पाने में सफल हो पाती है अगर ऐसा होता है तो जनपद का चुनाव त्रिकोणात्मक हो सकता हैं और परिणाम भी नया आ सकता हैं और वर्तमान सांसद जयन्त चैधरी को अपना गढ़ बचाने में परेशानी पैदा हो सकती हैं। हालांकि भारतीय जनता पार्टी का अन्तरीय संघर्ष अभी हाईकमान के हस्तक्षेप के बाद भी समाप्त नहीं हुआ हैं। इसके वावजूद भाजपा का उच्च नेतृत्व केवल हेमा के ग्लेमर के पीछें दौड़ रहें जनसमुदाय को अपना वोट बैंक समझ जीत सुनिश्चित मान रहा हैं। वहीं रालोद कांग्रेेस के गठबन्धन उम्मीदवार पुरी ताकत के साथ अपने गढ़ को बचाने में लगें हुए है उनकी पत्नी चारू चैधरी एक मजें हुए राजनैता के तरह गाॅव गाॅव और नगर के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर अपनी पति जयन्त चैधरी के समर्थन में जनता का आशीर्वाद प्राप्त करने में जुटी है। होने वाले मतदान के बाद हेमा का ग्लेमर कामयाव होगा या रालोद काग्रेंस गठबन्धन उम्मीदरवार अपने गढ़ को बचाने में सफल होगे। यह तो केवल 16 मई को आने वाला चुनाव परिणाम ही सिद्ध करेगा।

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