कृषि / व्यापार / बचत

भारतीय रिज़र्व बैंक की नियामक निगरानी में भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम द्वारा 25 अगस्त, 2016 को आरंभ यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस, यानी यूपीआई, के दस साल पूरे हो गए हैं। इस दौरान, यूपीआई भारत के डिजिटल भुगतान तंत्र की रीढ़ और वित्तीय समावेशन का अहम चालक बनकर उभरा है...

Read More

भारत के खेतों ने कृषि विकास को निरंतर जारी रखा है, लेकिन दीर्घकालिक उत्पादकता स्वस्थ मृदा और सुदृढ़ इकोसिस्टम पर निर्भर करती है। ‘पुनर्योजी कृषि’ मृदा की जीवन-शक्ति को बहाल करने, जैव-विविधता को बेहतर बनाने और जलवायु संबंधी दबावों से निपटने की क्षमता को मजबूत करने का एक रास्ता प्रदान करती है।

Read More

भारत का नारियल क्षेत्र ग्रामीण आजीविका, कृषि विकास और सांस्कृतिक परंपराओं को संबल प्रदान करता है। लगभग 10 मिलियन किसानों सहित करीब 30 मिलियन लोग इस क्षेत्र पर निर्भर हैं...

Read More

लैंडमार्क कार्स एक ऐसी कंपनी है जो भारत के ऑटो रिटेल सेक्टर में धीरे-धीरे अपनी मज़बूत पहचान बना रही है। यह सिर्फ़ कार बेचने का कारोबार नहीं, बल्कि एक पूरे इकोसिस्टम को गढ़ने की दिशा में काम कर रही है...

Read More

ईटर्नल का शेयर 600 से ऊपर के पी/ई अनुपात पर ट्रेड करता है, एक वैल्यूएशन जो बेदाग़ निष्पादन की मांग करता है। निवेशक सिर्फ़ कंपनी में नहीं, बल्कि भारत के डिजिटल उपभोक्ता भविष्य के विज़न में निवेश कर रहे हैं।

Read More

ज़ाइडस वेलनेस इस समय बाज़ार में एक ऐसी कहानी लगती है, जहां तेज़ी और सावधानी दोनों साथ‑साथ चल रहे हैं। शेयर लगभग ₹580 तक पहुंच चुका है, 52‑सप्ताह की ऊंचाई को छूते हुए, और यह विस्तार योजनाओं तथा निवेशकों के भरोसे की लहर पर सवार है...

Read More

पूर्वोत्तर राज्य असम के कोयला क्षेत्र से बरामद जीवाश्म पत्तियों से पता चला है कि अपनी सुगंध के लिए प्रसिद्ध केवड़े का पौधा, जिसका उपयोग मिठाइयों, पारंपरिक चिकित्सा और मंदिरों में भी किया जाता है, भारतीय उपमहाद्वीप में कम से कम 24 मिलियन वर्षों से अस्तित्‍व में है और भारत के प्राचीन उष्णकटिबंधीय जंगलों अब भी मौजूद है...

Read More

फारस की खाड़ी का आसमान अब नीला नहीं रहा है। धुएं से सना, बैंगनी और बोझिल दिखता है। चालीस दिन तक चली जंग ने ज़मीन ही नहीं, फिज़ा को भी ज़ख़्मी कर दिया है।

Read More

कुछ समय पहले तक, एक साधारण वित्तीय लेन-देन के लिए समय, मेहनत और धैर्य बेहद जरूरी होता था। बिलों का भुगतान करने के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता था। पैसे भेजने के लिए बैंक जाना, फॉर्म भरना और पुष्टि के लिए कई दिनों तक इंतज़ार करना पड़ता था। भारत में उन लाखों लोगों के लिए जिनके पास बैंकिंग सुविधा नहीं थी, इसका मतलब था वित्तीय प्रणाली से बाहर रहना। ऐसा भारत अब अतीत बन चुका है...

Read More

भारत के जनजातीय समुदाय वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी भूमिका को नए सिरे से परिभाषित कर रहे हैं, वन-आधारित आजीविका को टिकाऊ, उच्च-मूल्य वाले उत्पादों में बदल रहे हैं, जो आधुनिक उपभोक्ताओं को आकर्षित करते हैं...

Read More