आगरा : गुर्दे की पथरी कब निकल गई, मरीज को पता भी नहीं चलेगा। ताजनगरी में अत्याधुनिक फ्लेक्सबल मिनी लेप्रोस्कोप से गुर्दे की पथरी निकालने का ट्रायल चल रहा है।
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आगरा : गुर्दे की पथरी कब निकल गई, मरीज को पता भी नहीं चलेगा। ताजनगरी में अत्याधुनिक फ्लेक्सबल मिनी लेप्रोस्कोप से गुर्दे की पथरी निकालने का ट्रायल चल रहा है।
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हमारा देश बीमारी के दोहरे भार से ग्रस्त है। गैर-संचारी रोग एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियां पैदा कर रहे हैं। एक ओर गरीबी, अभाव और पर्यावरण की घटिया स्थिति से जुड़ी हुई पोषक तत्वों की कमी और संक्रामक रोगों की भरमार है जबकी दूसरी ओर भोजन की अधिकता और असंतुलन और चयापचय गड़बड़ियों के कारण होने वाली गैर- संचारी बीमारियां मौजूद हैं।
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आगरा : मोटापा है, सांस फूलती है और मधुमेह भी है तो बेरिएट्रिक सर्जरी करानी होगी, ऐसा न करने पर आपकी जिंदगी 12 साल कम हो सकती है। रविवार को तीन दिवसीय कम्बाइंड नेशनल लेप्रोस्कोपिक सर्जरी कांफ्रेंस के समापन पर होटल क्लार्क शिराज में बेरिएट्रिक सहित गंभीर बीमारियों में लेप्रोस्कोपिक विधि से ऑपरेशन पर चर्चा की गई। एम्स, दिल्ली के निदेशक प्रो. एमसी मिश्रा ने बताया कि मोटापे से 12 साल की जिंदगी कम हो जाती है। ऐसे में जिन लोगों का बॉडी मास इंडेक्स 35 से अधिक है, साथ में मधुमेह और हृदय रोग है तो बेरिएट्रिक सर्जरी करानी चाहिए। वहीं, जिन लोगों की बीएमआई 40 से अधिक है उनके लिए यह सर्जरी जरूरी है। उन्होंने बताया कि बेरिएट्रिक सर्जरी के बाद 85 फीसद तक मधुमेह और हृदय रोग की दवाएं कम हो सकती हैं। सेल्सी के सचिव डॉ. पवनिंदर ने बताया कि मोटापा कम करने के लिए बेरियाट्रिक सर्जरी में अमाशय की क्षमता को एक लीटर से घटाकर 100 से 200 एमएल कर दिया जाता है जिससे कम खाना खाया जाए। वहीं, कुछ मरीजों में छोटी आंत को बाईपास कर दिया जाता है, इससे अमाशय से सीधा खाना बड़ी आंत में पहुंचता है और यह शरीर में अवशोषित नहीं होता है। अमाशय की क्षमता कम होने पर कम भोजना खाया जाता है, इसके चलते बेरियाट्रिक सर्जरी कराने के बाद डेढ़ से दो किलो हर सप्ताह वजन कम होता है, इस तरह एक महीने में छह से आठ किलो वजन कम हो जाता है। कम खाएं, ज्यादा बार खाएं जिंदगी आराम तलब होती जा रही है, शारीरिक श्रम बहुत कम हो गया है। इसके चलते मोटापा बढ़ रहा है। एक सीट पर बैठकर काम करने वाले लोगों को एक दिन में 1200 से 1500 कैलोरी की जरूरत होती है। वहीं, जो लोग शारीरिक परिश्रम करते हैं उन्हें 1500 से 2000 कैलोरी प्रति दिन चाहिए जबकि अधिकांश लोग शरीर को जितनी कैलोरी की जरूरत है, उससे ज्यादा खाना खा रहे हैं। इसमें भी फास्ट फूड का सेवन ज्यादा हो रहा है, इससे बच्चे भी मोटापे के शिकार हो रहे हैं। डॉ. पवेनिन्द्र लाल ने बताया कि एक साथ अधिक खाने के बजाय कम और ज्यादा बार खाना चाहिए। 18 से कम और 65 की उम्र के बाद न कराएं सर्जरी बेरियाट्रिक सर्जरी ग्रोइंग एज (18 साल की उम्र से पहले) और 65 साल की उम्र के बाद नहीं करानी चाहिए। यदि डॉक्टर की सलाह न मानी जाए तो बेरियाट्रिक सर्जरी कराने के कुछ साल बाद अमाशय की क्षमता खुद ब खुद बढ़ जाती है।
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आगरा : गर्भावस्था के दौरान डॉक्टर के परामर्श के बिना कोई दवा न लें क्योंकि इसका असर आपके गर्भस्थ शिशु पर पड़ सकता है। यहां तक कि डॉक्टर की सलाह के बिना ली गई एंटीबायटिक दवाएं आपके गर्भस्थ शिशु की सुनने की क्षमता भी समाप्त कर सकती हैं। चिकित्सा तकनीक के ऐसे विकसित दौर में जब गर्भ में ही बच्चे के सुनने की क्षमता का पता लगाया जा सकता है, तब मामूली सी लापरवाही बच्चों के बहरेपन के प्रतिशत को बढ़ाने में उत्प्रेरक का काम कर रही है।
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आगरा : भारतीय संस्कृति और जीवनशैली में ह्रदय को स्वस्थ्य रखने की क्षमता थी। मगर, बदलते दौर में भागमभाग की जिंदगी और पाश्चात्य सभ्यता से दिल के रोग बढ़ रहे हैं। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दुनिया में ह्रदय रोगियों के मामले में भारत तीसरे नंबर पर है।
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आगरा : बच्चों के ज्यादा सोने को लेकर हमेशा चिड़चिड़ करने वाले माता-पिता को यह समझ लेना चाहिए कि किशोरों के बेहतर मानसिक व शारीरिक विकास के लिए कम से कम नौ से साढ़े नौ घंटे की नींद आवश्यक है। विकास सम्बंधी कई हार्मोन किशोरों में नींद के दौरान ही बनते हैं। यानी बेहतर विकास और तनाव रहित दिनचर्या के लिए दिमाग का भोजन है नींद। यदि नींद पूरी न हो तो तनाव, चिड़चिड़ापन, मूड का खराब रहने का असर स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। यहां तक कि नींद पूरी न होने पर किशोर डायबिटीज और ओबेसिटी का भी शिकार हो सकते हैं।
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