स्वास्थ्य

खतरनाक वायरस ‘निपाह’ तेजी से पूरे देश में फैल रहा है। फिलहाल इसका कोई इलाज नहीं है हालांकि कुछ विदेशी संस्थानों में इसका टीका खोजने पर अनुसंधान शुरू हो चुका है।

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नई दिल्ली : होम्‍योपैथी चिकित्‍सा का लाभ उठाने वाले मरीजों की संख्‍या में पिछले पांच सालों के दौरान 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

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योग ने यूं तो हमेशा से ही लोगों का ध्यान अपनी ओर आकृष्ट किया है, पर पिछले तीन वर्ष के दौरान योग को लेकर आम लोगों की जागरूकता में आमूलचूल बदलाव देखने में आया है।

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हैपेटाइटिस संक्रमण के कारण फैलने वाला यकृत (लिवर) संबंधी रोग है। वर्ष 2015 में इससे दुनियाभर में लगभग 13.4 लाख लोगों की मौत हो गई थी। (यह संख्‍या क्षय रोग से होने वाली मौतों के बराबर थी)। हैपेटाइटिस से होने वाली मौतों में से ज्‍यादातर का कारण पुरानी यकृत बीमारी / यकृत कैंसर का प्राथमिक स्‍वरूप रहा। (सिरोसिस के कारण होने वाली मौतें – 7,20,000 और  हैप्‍टो सेल्‍यूलर कार्सिनोमा के कारण होने वाली मौतें – 4,70,000)।  अभी भी समय के साथ हैपेटाइटिस संक्रमण से होने वाली मौतों की संख्‍या बढ़ रही हैं। (Read in English: Possibilities To Make India A Viral Hepatitis Free Nation…)

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योग का आमूल विज्ञान एक बेहतरीन जीवनशैली है जिसे इस प्रकार तैयार किया गया है कि उसके द्वारा तनाव से उत्‍पन्‍न विकारों और जीवनशैली से उत्‍पन्‍न होने वाले मधुमेह जैसे विकारों को प्रभावशाली तरीके से दुरुस्‍त किया जा सकता है। आधुनिक अनुसंधानों से पता लगा है कि योग द्वारा मनोवैज्ञानिक और शारीरिक लाभ प्राप्‍त होते है। योग केवल शारीरिक कसरत नहीं है (इन्‍स और विन्‍सेंट, 2007)। (Read in English: Managing Type 2 Diabetes Through Yoga...)

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विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के विश्‍व मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य सर्वे 2011 पर आधारित एक अध्‍ययन के अनुसार विश्‍व स्‍तर पर भारत में डिप्रेशन यानी अवसाद की दर सबसे ज्‍यादा है। अधिक चिंताजनक स्थिति यह है कि सभी आयु के लोग, किशोर से लेकर प्रौढ़ तक, अवसाद से ग्रस्‍त हो रहे हैं। यह सभी आर्थिक पृष्‍ठभूमि वाले लोगों को प्रभावित कर रहा है। चाहे एक अभावग्रस्‍त व्‍यक्ति जो एक शाम के भोजन के लिए जद्दोजहद कर रहा है या एक अमीर व्‍यक्ति जो विला‍सितापूर्ण जीवन व्‍यतीत कर रहा है। इससे भी चिंताजनक बात यह है कि अवसाद ग्रस्‍त व्‍यक्ति भावनात्‍मक रूप से कमजोर मानसिक स्थिति में अपना जीवन ही समाप्‍त करने का निर्णय ले लेता है। भारत में किशोरों और युवाओं में आत्‍महत्‍या की बढ़ती प्रवृति ने यह इस बात को रेखांकित किया है कि इस बीमारी पर गंभीरतापूर्वक विचार किया जाना चाहिए। (Read in English: Tackling Depression With Yoga…)

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