विविधा

किसी जमाने में दूर-दूर तक सुविख्यात रहे मथुरा के अखाड़े आज वीरान पड़े हैं। एक वक्त था जब डेढ़ सौ से ज्यादा छोटे-बड़े अखाड़ों में मल्ल-शिक्षा सिखाई जाती थी। आज कई अखाड़े स्थानीय प्रभावशाली लोगों की निजी जागीर बन गए हैं और बाकी बचे – खुचे अखाड़ों को अंगुलियों पर आसानी से गिना जा सकता है। 

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महात्मा गांधी ने अपने जीवन दर्शन को "मेरा जीवन ही मेरा संदेश है" से व्यक्त किया है। उनका विविध और सक्रिय व्यक्तित्व सत्य और सिर्फ सत्य पर ही आधारित था। अहिंसा इनके जीवन का दूसरा सबसे बड़ा सिद्धांत था। (Read in English)

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करीब 95 वर्ष पहले गांधीजी ने 22 सितम्बर 1921 को अपने पहनावे में परिवर्तन करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया। एक सुपरिष्कृत गुजराती पहनावे के स्थान पर उन्होंने केवल एक साधारण धोती एवं शॉल पहनने का फैसला किया। (Read in English)

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देश में जब अंग्रेजी कुशासन का दौर चल रहा था तब उन्हें सीधे-सीधे चुनौती देने एवं ललकारने का साहस मालवा में सीहोर की धरती पर कुंवर चैन सिंह ने दिखाया। उन्होंने अपने साथियों के साथ फिरंगियों से लोहा लिया उन्हें नाको चने चबवाए लेकिन अंत में वह वीरगति को प्राप्त हो गए। देश में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ पहली सशस्त्र क्रांति का पहला शहीद मंगल पांडे को माना जाता है। मगर कुंवर चैन सिंह की शहादत मंगल पांडे के शहीद होने की घटना से भी करीब 33 वर्ष पहले की है।

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मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से करीब 45 किलोमीटर दूर स्थित सीहोर में मकर संक्राति का पर्व गुड़, तिल्ली और मिठास के लिए नहीं बल्कि देश की आजादी के संघर्ष में शहीद हुए 356 अनाम शहीदों की शहादत के पर्व के रूप में याद किया जाता है। 

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इस तथ्‍य की जानकारी बहुत कम है कि अंग्रेजों के विरुद्ध ज्‍यादातर विद्रोह दक्षिण भारत में शुरू हुए। 18वीं सदी के अंत में मद्रास प्रेजीडेंसी में पुली थेवर और वीरापंडी कट्टाबोमन, पल्लियाकर (पॉलीगर), 1799 और 1801 के बीच विद्रोह करने वाले मरुडू पांडेयन भाई, 1806 की वेल्‍लोर गदर तथा 1792 से 1805 में केरल में कोट्टयम के पजास्सी राजा का विद्रोह 1857 की क्रां‍ति के पहले के कुछ उदाहरण हैं। सभी विद्रोहियों को फांसी देकर, सिर काटकर या तोपों से उड़ाकर निर्दयता से मार डाला गया था। लेकिन, इन सभी ने माफी मांगने और अंग्रेजों के अधीन रहने से इंकार कर दिया था। (Read in English)

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