विविधा

पश्चिमी राजस्थान में रहने वाले घेवर राम और गौरी देवी के पास केवल डेढ़ बीघा ज़मीन है। सूखे की मार के चलते उन्हें हर बार आजीविका की तलाश में इधर से उधर विस्थापित होना पड़ता था लेकिन अब यह सिलसिला थम गया है। दरअसल अब उन्होंने बागवानी-चारागाह प्रणाली को अपना लिया है। (Read in English)

Read More

हिमाचल प्रदेश के ऊना ज़िला प्रशासन ने इस वर्ष देश में अपनी किस्म की एक अनूठी पहल करते हुए एक वन बेटियों को समर्पित किया है और जनसाधारण को नारा दिया है- 'बेटी बचाओ, पेड़ लगाओ...। 

Read More

करीब 100 साल पहले जून 1916 में गुजरात के अहमदाबाद क्लब में पहली बार आए एक बेहद स्टाइलिश मेहमान के काठीवारी ड्रेस को लेकर गुजरात के ही एक बैरिस्टर ने मज़ाक उड़ाया। नए आए मेहमान ने क्लब के लॉन में मौज़ूद थोड़े-बहुत लोगों को संबोधित किया लेकिन बैरिस्टर अपने दोस्तों के साथ पत्ते खेलते रहे। बैरिस्टर को पता था कि संबोधित कर रहा शख्स कोई और नहीं बल्कि मोहनदास करमचंद गांधी हैं जो कि हाल ही में दक्षिण अफ्रीका से स्वदेश लौटकर अहमदाबाद में ही सत्याग्रह आश्रम की नींव रख चुके हैं। एक बेहद सफल वकील बन चुके बैरिस्टर को गांधी के कार्यों से कोई मतलब नहीं था लेकिन गांधी जब अहमदाबाद पहुंचे तो बैरिस्टर से बातचीत के लिए जोर दिया। बैरिस्टर ने भी बिना मन से ही सही, गांधी से मिलने का फैसला कर लिया। (Read in English)

Read More

बढ़ती जीवन प्रत्याशा की वजह से दुनियाभर में बुजुर्गों की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है। बुढ़ापा आने पर हर व्यक्ति में शारीरिक, सामाजिक, बीमारी संबंधी और मनोवैज्ञानिक रूप से कई बदलाव आते हैं जबकि उनकी जरूरतों, उनकी स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताएं उतनी तेजी से नहीं बदल पाती। हमारी व्यवस्था जीवनपर्यंत चलती रहती है और कभी-कभी इसमें बदलती जीवनचर्या के हिसाब से बदलाव भी लाया जा सकता है। (Read in English) 

Read More

किसी जमाने में दूर-दूर तक सुविख्यात रहे मथुरा के अखाड़े आज वीरान पड़े हैं। एक वक्त था जब डेढ़ सौ से ज्यादा छोटे-बड़े अखाड़ों में मल्ल-शिक्षा सिखाई जाती थी। आज कई अखाड़े स्थानीय प्रभावशाली लोगों की निजी जागीर बन गए हैं और बाकी बचे – खुचे अखाड़ों को अंगुलियों पर आसानी से गिना जा सकता है। 

Read More

महात्मा गांधी ने अपने जीवन दर्शन को "मेरा जीवन ही मेरा संदेश है" से व्यक्त किया है। उनका विविध और सक्रिय व्यक्तित्व सत्य और सिर्फ सत्य पर ही आधारित था। अहिंसा इनके जीवन का दूसरा सबसे बड़ा सिद्धांत था। (Read in English)

Read More

करीब 95 वर्ष पहले गांधीजी ने 22 सितम्बर 1921 को अपने पहनावे में परिवर्तन करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया। एक सुपरिष्कृत गुजराती पहनावे के स्थान पर उन्होंने केवल एक साधारण धोती एवं शॉल पहनने का फैसला किया। (Read in English)

Read More

देश में जब अंग्रेजी कुशासन का दौर चल रहा था तब उन्हें सीधे-सीधे चुनौती देने एवं ललकारने का साहस मालवा में सीहोर की धरती पर कुंवर चैन सिंह ने दिखाया। उन्होंने अपने साथियों के साथ फिरंगियों से लोहा लिया उन्हें नाको चने चबवाए लेकिन अंत में वह वीरगति को प्राप्त हो गए। देश में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ पहली सशस्त्र क्रांति का पहला शहीद मंगल पांडे को माना जाता है। मगर कुंवर चैन सिंह की शहादत मंगल पांडे के शहीद होने की घटना से भी करीब 33 वर्ष पहले की है।

Read More

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से करीब 45 किलोमीटर दूर स्थित सीहोर में मकर संक्राति का पर्व गुड़, तिल्ली और मिठास के लिए नहीं बल्कि देश की आजादी के संघर्ष में शहीद हुए 356 अनाम शहीदों की शहादत के पर्व के रूप में याद किया जाता है। 

Read More

इस तथ्‍य की जानकारी बहुत कम है कि अंग्रेजों के विरुद्ध ज्‍यादातर विद्रोह दक्षिण भारत में शुरू हुए। 18वीं सदी के अंत में मद्रास प्रेजीडेंसी में पुली थेवर और वीरापंडी कट्टाबोमन, पल्लियाकर (पॉलीगर), 1799 और 1801 के बीच विद्रोह करने वाले मरुडू पांडेयन भाई, 1806 की वेल्‍लोर गदर तथा 1792 से 1805 में केरल में कोट्टयम के पजास्सी राजा का विद्रोह 1857 की क्रां‍ति के पहले के कुछ उदाहरण हैं। सभी विद्रोहियों को फांसी देकर, सिर काटकर या तोपों से उड़ाकर निर्दयता से मार डाला गया था। लेकिन, इन सभी ने माफी मांगने और अंग्रेजों के अधीन रहने से इंकार कर दिया था। (Read in English)

Read More