विविधा

देश की स्वतंत्रता के लिए असंख्य लोगों ने अपना योगदान दिया। स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं और पुरुषों ने बराबर की हिस्सेदारी दी। स्वतंत्रता के इतने साल बाद, आज जमीन से लेकर आकाश तक ऐसा कोई क्षेत्र नहीं, जहां महिलाओं ने अपनी उपस्थिति न दर्ज कराई हो। राष्ट्र के विकास में बराबरी से अपना योगदान देने वाली ऐसी ही एक महिला थीं - सुचेता कृपलानी...

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पितृ पक्ष आश्विन माह में कृष्ण प्रतिपदा से अमावस्या तक होता है। इन 15 दिनों में लोग अपने पितरों यानी पूर्वजों को जल देते हैं तथा उनकी मृत्यु तिथि पर श्राद्ध करते हैं। इस दौरान, वृन्दावन के प्रमुख मंदिरों में सांझी कला को आकर्षक रूप से प्रस्तुत करने की परम्परा निभाई जाती है...

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उत्तर प्रदेश के रायबरेली में एक छोटे से गांव भवानी दीनपुर स्थित स्कूल में अपने डांस मूव्स के जरिए सुर्खियों में आए प्राइमरी शिक्षक कौशलेश मिश्रा अब सभी को ‘स्वच्छता मूव्स’ सिखा रहे हैं...

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भारत को स्वतंत्रता यूं ही प्राप्त नहीं हुई है। अपने रक्त से असंख्य क्रांतिवीरों ने भारत माता का अभिषेक किया है। स्वतंत्रता का उद्देश्य सम्मुख रख वे हंसते-हंसते फांसी पर झूले हैं। वह दौर ही दूसरा था। गुलामी और अत्याचार के बीच न डिगने का संकल्प अटल था। यही संकल्प और अनथक प्रयासों की परिणति आज स्वतंत्र भारत के रूप में हमारे समक्ष है। मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले ऐसे ही एक वीर थे... राजेंद्र नाथ लाहिड़ी..

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साल 2019 में 26 फरवरी को हुए बालाकोट एयर स्ट्राइक को भला कौन भूल सकता है! जब भारतीय वायुसेना ने दुश्मन के घर में घुसकर आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया। पाकिस्तान के बालाकोट में मौजूद जैश-ए-मोहम्मद के दहशतगर्दों के कैंप पर एयर स्ट्राइक करके ‘न्यू इंडिया’ ने साबित कर दिया था कि ‘छेड़ोगे को छोड़ेंगे नहीं’...

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आजाद भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने भी बिहार की इस राजधानी को अपना कार्यक्षेत्र बनाया। पटना से 80 किलोमीटर की दूरी पर, उत्तरपूर्व में स्थित छपरा से करीब 70 किलोमीटर दूर पुराने सारण जिले के गांव जीरादेई में साल 1884 में सरलता और सादगी के अवतार राजेन्द्र बाबू का जन्म हुआ।

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