धर्म, कला और संस्कृति

भारत में आध्यात्मिक गुरु और अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संस्था के संस्थापक-आचार्य श्रील प्रभुपाद को सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस, यानी इस्कॉन, के संस्थापक के रूप में जाना जाता है। दुनियाभर के लोग उन्हें कृष्ण चैतन्य के प्रतिनिधि और दूत के रूप में देखते हैं।

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मुगलों के शासन के दौरान समाज में आतंक तो व्याप्त था ही, साथ में, समाज रूढ़िवाद और छूआछूत जैसी कठिन समस्याओं में भी जकड़ा हुआ था। उस दौर में हिन्दुत्व की भावना को सुरक्षित रखने के लिए वैष्णव आन्दोलन का प्रचार-प्रसार चल रहा था और उसे पूरे देश में लोकप्रिय बनाने का श्रेय श्री चैतन्य को जाता है।

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बुलंदशहर के बेलौन गांव में सर्व मंगला देवी को समर्पित बेलौन मंदिर में देवी का दर्शन करने प्रतिदिन हजारों लोग आते हैं। सर्व मंगला देवी को सुख की देवी माना जाता है।

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राजस्थान में अलवर जिले की राजगढ़ तहसील स्थित बरवा की डूंगरी की तलहटी स्थित नारायणी माता भारत के प्रसिद्ध लोक तीर्थों में से एक है।

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महामारी के दो साल बीत जाने के बाद, इस बार की जन्माष्टमी बेहद खास है। मथुरा के मंदिरों में इस बार जन्माष्टमी के त्योहार का भव्य आयोजन किया जा रहा है।

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गुजरात के वडोदरा में भगवान शिव का एक ऐसा मंदिर है जो देखते ही देखते गायब हो जाता है और फिर अचानक ही दोबारा दिखने लगता है। मंदिर की इसी खूबी के कारण यह दुनियाभर में प्रसिद्ध और भोले के भक्त इस घटना को अपनी आंखों से देखने के लिए दौड़े चले आते हैं।

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ब्रज क्षेत्र में गुरु पूर्णिमा को एक लोक पर्व के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन मुड़िया पूनों मेले के आयोजन के पीछे भगवान वेद व्यास का जन्म दिवस व चैतन्य महाप्रभु सम्प्रदाय के शिष्य आचार्य सनातन गोस्वामी का आषाढ़ शुक्ला पूर्णिमा को निर्वाण और गिरिराज गोवर्धन को साक्षात श्रीकृष्ण का प्रतिरूप माने जाने की अटूट आस्था है।

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राजस्थान की अरावली पर्वतमाला के मध्य में अनोखा परशुराम महादेव मंदिर स्थित है। माना जाता है कि त्रेता युग में परशुराम इस मंदिर में बनी गुफा के रास्ते से यहां आए थे। यहां बैठकर उन्होंने भगवान शिव की आराधना की और उन्हें प्रसन्न करके अमरत्व का वरदान व प्रसिद्ध फरसा सहित कई दिव्यास्त्र प्राप्त किए। 

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ब्रजभूमि में मौजूद कोकिलावन में शनि देव की कृपा बरसती है। हर शनिवार को लाखों श्रद्धालु कोकिलावन धाम की परिक्रमा करते हैं। मान्यता है कि यहां बने सूर्य कुंड में स्नान के बाद शनिदेव के दर्शन करने वाले व्यक्ति पर शनिदेव की काली छाया कभी नहीं पड़ती।

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वृन्दावन में भी आपको ऐसे कई आश्चर्य दिखाई दे जाएंगे। यहां कई ऐसे सन्त भी हुए हैं, जिनके चमत्कारों के किस्से हमेशा चर्चा में रहते रहे हैं। आज भी अनेक संत हैं, जिनके आश्चर्यजनक चमत्कारों को यहां आने वाले श्रद्धालु अक्सर देखते रहते हैं। ऐसा ही एक चमत्कार है, पागल बाबा का मंदिर और उसके पागल बाबा। पागल बाबा और उनके इस मंदिर के निर्माण की कहानी दोनों ही बेहद दिलचस्प है।

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