धर्म, कला और संस्कृति

संपूर्ण विश्व को शांति का संदेश देने वाले महात्मा बुद्ध के कैवल्य ज्ञान प्राप्ति के बाद पूरे देश में तेजी से उनके अनुयायी बढ़ गए थे। भारत के विभिन्न शक्तिशाली राजाओं ने महात्मा बुद्ध की शिक्षाओं को अपने साम्राज्य में प्रचारित किया। ...तो क्या महात्मा बुद्ध के चरण बुंदेलखण्ड भूमि पर भी पड़े होंगे? इस आलेख को पूरा पढ़ने के लिए अभी "सब्सक्राइब करें", महज एक रुपये में, अगले पूरे 24 घंटों के लिए...

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विश्व प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में भक्तों पर सोने-चांदी की पिचकारियों से टेसू के रंगों की बौछार की गई तो भक्त आनंद से झूम उठे। भक्ति और प्रेम का ऐसा रंग बरसा कि सब देखते ही रह गए। पूरा आलेख पढ़ने के लिए अभी सब्सक्राइब करें महज एक रुपये में, अगले पूरे 24 घंटों के लिए...

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विभिन्न लोक कलाओं के माध्यम से भारतीय मानस की रचनात्मकता और जीवन-दृष्टि की झलक मिलती है। लोककला का एक ऐसा ही रूप है, कठपुतली नृत्य। महाराष्ट्र के सिंधु दुर्ग गांव के निवासी परशुराम आत्माराम गंगवाने इस लोक कला के संरक्षण के लिए समर्पित हैं।

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छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में एक शिल्प कला को आदिवासियों ने अब तक संजो कर रखा है। नाम है, ढोकरा शिल्प। इस शिल्प कला का उपयोग करके बनाई गई मूर्ति का सबसे पुराना नमूना मोहनजोदड़ो की खुदाई से प्राप्त होता है।

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बिना बाहों के बैले नृत्यांगना बनने का सपना किसी अजूबे से कम नहीं हो सकता है। ब्राजील के एक दूरस्थ अंचल से निकलकर बैले नृत्य के जरिए सोशल मीडिया स्टार बनने तक का विटोरिया ब्यूनो का सफर किसी परी कथा से कम नहीं है। 

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पूरी दुनिया में धर्म और जाति के नाम पर तमाम लड़ाई-झगड़े और बड़े-बड़े युद्ध होते रहे हैं। स्वतंत्र भारत में भी आजादी के साथ-साथ धर्म के नाम पर हुए बंटवारे के बाद से ही हिन्दुओं और मुस्लिमों के बीच एक चौड़ी खाई बनने लगी थी।

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