धर्म, कला और संस्कृति

आगरा में ताजमहल से करीब 70 किलोमीटर की दूरी पर उत्तर दिशा में यमुना नदी के किनारे बाबा भोलेनाथ की नगरी तीर्थ बटेश्वर धाम देशभर में प्रसिद्ध है। बाबा बटेश्वर नाथ धाम से सैकड़ों कहानियां जड़ी हुई हैं। ये सभी कहानियां सतयुग, द्वापर, त्रेता और कलयुग कालखंड की हैं।

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मथुरा शहर में आदिकाल से चार महादेवों की पूजा का परंपरा चली आ रही है। हालांकि, मथुरा में अब हर गली-मोहल्ले में अनगिनत महादेव मंदिर बन गए हैं, मगर ऐसी मान्यता है कि यहां पूर्व में चार महादेव ही पूजे जाते थे।

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ब्रज क्षेत्र के गोवर्धन स्थित मानसी गंगा के बारे में कहा जाता है कि यह भगवान श्री कृष्ण के चरणों से उत्पन्न हुई है। श्रीकृष्ण के मन से आविर्भूत होने के कारण ही इसका नाम 'मानसी गंगा' पड़ा।

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राजस्थान के सिरोही शहर से करीब 20 किलोमीटर दूर अरावली स्थित नांदिया ग्राम की पवित्र धरती पर रिछी पर्वत की गोद में प्रसिद्ध रिछेश्वर महादेव मंदिर स्थित है। 

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भारत में आध्यात्मिक गुरु और अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संस्था के संस्थापक-आचार्य श्रील प्रभुपाद को सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस, यानी इस्कॉन, के संस्थापक के रूप में जाना जाता है। दुनियाभर के लोग उन्हें कृष्ण चैतन्य के प्रतिनिधि और दूत के रूप में देखते हैं।

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मुगलों के शासन के दौरान समाज में आतंक तो व्याप्त था ही, साथ में, समाज रूढ़िवाद और छूआछूत जैसी कठिन समस्याओं में भी जकड़ा हुआ था। उस दौर में हिन्दुत्व की भावना को सुरक्षित रखने के लिए वैष्णव आन्दोलन का प्रचार-प्रसार चल रहा था और उसे पूरे देश में लोकप्रिय बनाने का श्रेय श्री चैतन्य को जाता है।

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