धर्म, कला और संस्कृति

ब्रजभूमि में मौजूद कोकिलावन में शनि देव की कृपा बरसती है। हर शनिवार को लाखों श्रद्धालु कोकिलावन धाम की परिक्रमा करते हैं। मान्यता है कि यहां बने सूर्य कुंड में स्नान के बाद शनिदेव के दर्शन करने वाले व्यक्ति पर शनिदेव की काली छाया कभी नहीं पड़ती।

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वृन्दावन में भी आपको ऐसे कई आश्चर्य दिखाई दे जाएंगे। यहां कई ऐसे सन्त भी हुए हैं, जिनके चमत्कारों के किस्से हमेशा चर्चा में रहते रहे हैं। आज भी अनेक संत हैं, जिनके आश्चर्यजनक चमत्कारों को यहां आने वाले श्रद्धालु अक्सर देखते रहते हैं। ऐसा ही एक चमत्कार है, पागल बाबा का मंदिर और उसके पागल बाबा। पागल बाबा और उनके इस मंदिर के निर्माण की कहानी दोनों ही बेहद दिलचस्प है।

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वृंदावन में बांके बिहारी जी का विशाल मंदिर है, जहां देश-विदेश से भक्त सिर्फ उनकी एक झलक पाने के लिए यहां आते हैं।

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भगवान श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा में एक ऐसा स्थान भी है, जहां भक्त ध्रुव ने अपनी अटल तपस्या की थी। मथुरा से करीब 10 किलोमीटर दूर नेशनल हाईवे-2 से होते हुए आप महोली गांव की तरफ बढ़ेंगे तो राह में आपको प्राचीन ध्रुव टीला मिलेगा। बड़े-बड़े पत्थर और मिट्टी के ढेर से बने इस टीले की लंबाई करीब 200 फुट और ऊंचाई करीब 150 फुट है। माना जाता है ध्रुव ने यहीं पर भगवान नारायण का आह्वान किया था...

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वृंदावन यदि राधा का धाम है तो मीरा ने भी इसी वृंदावन में 15 साल तक रहकर अपनी साधना से प्रभु श्रीकृष्ण के प्रति अपना अगाध प्रेम जताया था। मीरा बाई वर्ष 1524 में भगवान कृष्ण की तलाश में वृंदावन आईं थी। वह यहां वर्ष 1539 तक रहीं।

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मानव मन के भावों को, शब्दों में पिरोकर, उसे अभिनय से जीवंत करने वाले रंगकर्मी हबीब तनवीर ने कई नाटकों का लेखन और निर्देशन किया। रंगमंच पर उनके निर्देशित नाटक, न केवल दर्शकों का मनोरंजन करते, बल्कि विशेष सामाजिक संदेश भी देते। उनकी रचनाओं ने मनुष्य जीवन की विभिन्न अनुभूतियों को बड़ी ही सुंदर रीति से दृश्य दिए। इस आलेख को पूरा पढ़ने के लिए अभी "सब्सक्राइब करें", महज एक रुपये में अगले पूरे 24 घंटों के लिए... 

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