भारतीय भौतिकी विज्ञान में केएस कृष्णन का अतुलनीय योगदान है। नोबेल पुरस्कार विजेता सीवी रमन के रमन प्रभाव के सैद्धान्तिक पक्ष में भी उन्होंने अपना योगदान दिया है। इस आलेख को पूरा पढ़ने के लिए अभी सब्सक्राइब करें, महज एक रुपये में, अगले पूरे 24 घंटों के लिए...

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'शून्य' की खोज हो या 'ज्यामिति' की या 'पेड़ों में जीवन' का पता लगाना हो, अथक मेहनत और शोध के दम पर ऐसी उपलब्धियां भारतीय हमेशा हासिल करते रहे हैं, लेकिन श्रेय हमेशा कोई दूसरा ले जाता रहा है। इसी कड़ी में, अब एक और शोध व खोज जुड़ने वाली है, पादपों की खोज। जी हां, नई जानकारियों से पता चला है की भारतीय ''ऋषि पराशर'' ने ''थिओफ्रैस्टस'' से वर्षों पहले 'वनस्पति विज्ञान' पर प्रामाणिक ग्रंथ लिखे हैं। ग्रीस के प्रसिद्ध दार्शनिक एवं प्रकृतिवादी, थिओफ्रैस्टस को विश्वभर में वनस्पति विज्ञान के जनक के रूप में सम्मान के साथ याद किया जाता है, लेकिन इसके लिए ''पराशर ऋषि'' ने प्रमाणिक ग्रंथ लिखा है, जिनमें तमाम पादपों की पहचान, जड़, तने को लेकर बहुत ही सूक्ष्म तरीके से की गई है। इस नए शोध के आधार पर कहना होगा कि भारत ही वह पहला देश है, जिसे 'वनस्पति शास्त्र' का पितामह देश और पराशर ऋषि को ऐसे वैज्ञानिक के रूप में गिना जाएगा, जिन्होंने सबसे पहले ''वनस्पति विज्ञान'' को लिपिबद्ध करने का काम किया है। इसलिए सही मायने में ‘फादर ऑफ बॉटनी’ पराशर ऋषि ही हैं। इस आलेख को पूरा पढ़ने के लिए अभी "सब्सक्राइब करें", महज एक रुपये में, अगले पूरे 24 घंटों के लिए...

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वैज्ञानिकों ने शोध में पाया है कि बीन परिवार के एक पौधे की पत्तियों से निकाली गई प्राकृतिक नीली डाई इंसानी आंखों को हानिकारक लेजर विकिरण से बचाने में सक्षम है। इसका उपयोग संभावित हानिकारक विकिरण को कमजोर करने और आंखों या अन्य संवेदनशील ऑप्टिकल उपकरणों को ऐसे वातावरण में आकस्मिक क्षति से बचाने के लिए उपयोगी है, जहां संभावित हानिकारक विकिरण उपयोग में हैं। इस आलेख को पूरा पढ़ने के लिए अभी सब्सक्राइब करें, महज एक रुपये में, अगले पूरे 24 घंटों के लिए... 

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महामारी के दौर में ज्यादातर कामकाज और आधिकारिक बैठकें ऑनलाइन हो रही हैं, लेकिन कई बार बिना किसी की जानकारी के वर्चुअल कॉन्फ्रेंस कुछ अनजाने लोग भी शामिल हो जाते हैं। ऐसे लोगों का पता करने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रोपड़, पंजाब और ऑस्ट्रेलिया के मॉनाश विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने ‘फेक-बस्टर’ नामक एक अनोखा डिटेक्टर ईजाद किया है, जो बिना किसी की जानकारी के वर्चुअल कॉन्फ्रेंस में भाग ले रहे धोखेबाजों का पता लगा सकता है। इस आलेख को पूरा पढ़ने के लिए अभी "सब्सक्राइब करें", महज एक रुपये में, अगले पूरे 24 घंटों के लिए...

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कोविड-19 से जारी जंग को लेकर मैसूर की एक विनिर्माण इकाई ने सकारात्मक पहल की है। इस कंपनी ने एक ऐसे पीपीई किट का निर्माण करने में सफलता हासिल की है जो साफ़ हवा को पूरे शरीर तक पहुंचाने में सक्षम है। इस खबर को पूरा पढ़ने के लिए महज एक रुपये में "सब्सक्राइब करें" अगले पूरे 24 घंटों के लिए...

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कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए भारतीय वैज्ञानिक दिन-रात ऐसे उपाय खोजने में जुटे हैं, जिससे इस चुनौती से निपटने में मदद मिल सके।

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