किसी भी देश की सुख, शांति व समृद्धि की पहचान वहां की श्रेष्ठ न्याय प्रणाली से होती है। न्याय प्रणाली के अन्तर्गत उस देश के न्यायाधीशों की भूमिका सर्वोपरि होती है। न्यायाधीशों के विवेकपूर्ण निर्णयों से देश की उन्नति को रास्ते मिलते हैं। इसके विपरीत, जिस देश की न्यायपालिका भ्रष्ट आचरणों में रत होती है तो उस देश की अवनति सुनिश्चित है। ऐसी परिस्थिति में न केवल वहां की जनता प्रताड़ित होती है, अपितु वह देश शनैः शनैः गरीबी रेखा से नीचे चला जाता है।
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