देश

किसी भी देश की सुख, शांति व समृद्धि की पहचान वहां की श्रेष्ठ न्याय प्रणाली से होती है। न्याय प्रणाली के अन्तर्गत उस देश के न्यायाधीशों की भूमिका सर्वोपरि होती है। न्यायाधीशों के विवेकपूर्ण निर्णयों से देश की उन्नति को रास्ते मिलते हैं। इसके विपरीत, जिस देश की न्यायपालिका भ्रष्ट आचरणों में रत होती है तो उस देश की अवनति सुनिश्चित है। ऐसी परिस्थिति में न केवल वहां की जनता प्रताड़ित होती है, अपितु वह देश शनैः शनैः गरीबी रेखा से नीचे चला जाता है।

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क्या बहुजन समाज पार्टी का विलय कांग्रेस में हो जाना चाहिए या फिर मायावती को भाजपा के एनडीए से जुड़ जाना चाहिए? क्या छोटी-छोटी क्षेत्रीय पार्टियों का कोई भविष्य है? क्या वोट-काटवा पार्टियों के चुनावी गठबंधन, तेज ध्रुवीकरण के चलते, कभी भाजपा को सत्ता से बाहर करने की हैसियत रखते हैं? पिछले कई चुनावों के परिणामों के संदर्भ में ये सवाल आज प्रासंगिक हो गए हैं।

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भारतीय राजनीति का नक्शा बदल देने वाले दो सबसे बड़े 'कारक' हैं – जातिवाद और सांप्रदायिकता। ये दोनों ही कारक चुनावी रणनीतियों से लेकर शासन तक, हर पहलू को प्रभावित करते हैं। साल 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की तैयारियों में यह साफ दिख रहा है...

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लोकतंत्र में संसद का अस्तित्व एक मंदिर सदृश है, जिसमें प्रवेश करते ही सकारात्मक विचार स्वतः उत्पन्न होने चाहिए। संसद सत्तापक्ष को जनता के हितार्थ कार्य करने के लिए निर्देशित करती है तथा प्रस्तावित योजनाओं पर पक्ष व विपक्ष को अपना मत रखने का भी पूर्ण अधिकार प्रदान करती है...

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हिंदुस्तान के किसी भी शहर में तशरीफ ले जाएं, यकीनन आपको हर जगह दीवारों पर पेंटिंग्स, पृष्ठभूमि में "आई लव..." होर्डिंग के साथ सेल्फी पॉइंट और निश्चित रूप से सार्वजनिक शौचालयों के बाहर महात्मा गांधी के चश्मे दिखाई देंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2014 के स्वच्छ भारत मिशन के ये प्रतीक स्वच्छ भारत की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम का प्रतिनिधित्व करते हैं।

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नवनिर्वाचित अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कुछ भारतीयों को ‘लज्जित’ कर लगातार अपने सैनिक विमानों से भारत वापस भेजा जा रहा है। अपने अमेरिकी दौरे के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने इस मसले पर जहां अमेरिकी प्रशासन के साथ सहयोग की बात की, वहीं विपक्षी इसकी आलोचना कर रहे हैं...

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