देश

भाजपा सरकार द्वारा शुरू की गई ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ की पहल कई चिंताएं पैदा कर रही है। ऐसा प्रतीत होता है कि चुनाव सुधारों के वास्तविक प्रयासों के बजाय ध्यान भटकाने की रणनीति पर काम किया जा रहा है...

Read More

भारत का लोकतांत्रिक ढांचा अपनी जीवंत चुनावी प्रक्रिया के आधार पर फल-फूल रहा है और  नागरिकों को हर स्तर पर शासन को सक्रिय रूप से आकार देने में सक्षम बनाता है। स्वतंत्रता के बाद से अब तक लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के 400 से अधिक चुनावों ने निष्पक्षता और पारदर्शिता के प्रति भारत के चुनाव आयोग की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया है। हालांकि, अलग-अलग और बार-बार होने वाले चुनावों की प्रकृति ने एक अधिक कुशल प्रणाली की आवश्यकता पर चर्चाओं को जन्म दिया है। इससे ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ की अवधारणा में रुचि फिर से जग गई है।

Read More

हिंदुत्व की राजनैतिक विचारधारा को सशक्त बनाने के लिए जातिवाद का मकड़जाल तोड़ना ही होगा। जाति व्यवस्था ने ऐतिहासिक रूप से भारत के विभिन्न समुदायों को हाशिए पर धकेल दिया है। इन जातिगत बाधाओं को कम करने की आवश्यकता केवल सामाजिक न्याय के बारे में नहीं है बल्कि यह हिंदुओं और हिंदुत्व विचारधारा के एकीकरण के लिए भी आवश्यक है।

Read More

कुछ प्रांतों में जहां शिक्षा और सामाजिक जागृति है, खासतौर पर दक्षिणी राज्यों में, वहां ग्राम पंचायतों ने विकास और प्रगति के द्वार खोले हैं, लेकिन आम तौर पर स्थानीय निकायों की उपलब्धियां जिक्र या गिनने योग्य नहीं हैं...

Read More

एक अंग्रेज ने 1885 में कांग्रेस पार्टी की नींव डाली थी। अब एक लंबी यात्रा के बाद थकावट और ठहराव की शिकार हो चुकी है यह कांग्रेस...

Read More

ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के कारण तेजी से उभरते पारिस्थितिक संकट के संदर्भ में बुनियादी मानव अधिकार के रूप में स्वच्छ हवा व पानी के अधिकार को शामिल करना आज की सबसे बड़ी जरूरत है। पुलिस को मानवीय बनाना और पर्याप्त सुधार लागू करना भी इस बुरे वक्त की मांग है। हर इंसान को स्वच्छ हवा व पेयजल तथा पूर्ण सुरक्षा मिले, ये प्रावधान मानव अधिकारों की सूची में प्राथमिकता के आधार पर जोड़े जाएं।

Read More



Mediabharti