क्या देशभर में बलात्कारों की मौजूदा लहर सिर्फ़ कानून और व्यवस्था की समस्या है या यह समाज में व्याप्त किसी गहरी अस्वस्थता का लक्षण है? आजकल यह सवाल सामाजिक समूहों में गरमागरम बहस का विषय बना हुआ है...
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क्या देशभर में बलात्कारों की मौजूदा लहर सिर्फ़ कानून और व्यवस्था की समस्या है या यह समाज में व्याप्त किसी गहरी अस्वस्थता का लक्षण है? आजकल यह सवाल सामाजिक समूहों में गरमागरम बहस का विषय बना हुआ है...
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15 सितंबर को लोकतंत्र का अंतर्राष्ट्रीय दिवस विशेष रूप से भारत जैसे जीवंत लोकतंत्र में विशेष महत्व रखता है। इस वर्ष, 2500 किलोमीटर लंबी मानव श्रृंखला के साथ विश्व रिकॉर्ड बनाने के लिए कर्नाटक की पहल लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखने में नागरिक सहभागिता और एकता का एक शक्तिशाली प्रतीक है।
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विभिन्न राज्यों में स्थानीय पुलिस बल के खिलाफ जनता का आक्रोश और असंतोष बढ़ता ही जा रहा है। स्वतंत्रता के बाद से ही मांग की जा रही है कि पुलिस व्यवस्था में भ्रष्टाचार, जवाबदेही की कमी और अक्षमता के दीर्घकालिक मुद्दों को संबोधित करने के लिए कठोर सुधारों की प्रक्रिया तत्काल प्रारंभ की जाए, मगर ये बदलाव अभी भी लंबित है...
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अनेक बार आपके साथ ऐसा हुआ होगा। आप जल्दी में अपने गंतव्य पर पहुंचना चाहते हैं, लेकिन चौराहे पर ट्रैफिक रुका हुआ है, क्योंकि किसी वीआईपी को उधर से गुजरना है। आप किसी बड़े मंदिर में दर्शन के लिए लाइन में लगे हैं, तभी नेताजी अपने चमचों के साथ आगे बढ़ते चले जाते हैं, बिना रोक टोक के...
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भारत की खाद्य सुरक्षा पहल अब तक लगभग 80 करोड़ नागरिकों को अनाज के मुफ़्त वितरण पर निर्भर रही है। लेकिन, इस अभियान की अपनी सीमाएं हैं और अब इसके लिए एक अधिक प्रभावी व टिकाऊ समाधान पर विचार करने का समय आ गया है।
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नए आपराधिक कानून भारतीय नागरिकों को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। इन कानूनों का उद्देश्य सभी के लिए अधिक सुलभ, सहायक और कुशल न्याय प्रणाली बनाना है। यहां हम आपको नए आपराधिक कानूनों के प्रमुख प्रावधानों के बारे में बिंदुवार बता रहे हैं।
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