संपादकीय

बांग्लादेश की घटनाओं के बाद हमें सावधान हो जाना चाहिए। कम्युनिस्ट तो सिस्टम को नहीं तोड़ पाए, लेकिन फंडामेंटलिस्ट मानसिकता वाले तत्व लोकतंत्र को संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों से ही उसको ध्वस्त करने पर आमादा हैं।

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हालिया तीन राज्यों में हुए चुनावों के बहाने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा कार्यकर्ताओं ने बताया है कि ऐसे लड़े जाते हैं चुनाव...

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साल 1947 में स्वतंत्रता मिलने पर बहुत से सेक्युलरवादियों ने सोचा था कि युगों से चला आ रहा विचारधाराओं का संघर्ष, ‘टू नेशन थ्योरी’ के जनक मोहम्मद अली जिन्ना को पाकिस्तान मिलने के बाद समाप्त हो जाएगा। जिन्ना शुरू से ही कहते आए थे कि हिन्दू, मुस्लिम दो अलग राष्ट्र हैं, इसलिए विभाजन ही इस दम घोंटू स्थिति का एकमात्र समाधान है...

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कैसे ये तथ्य नजरअंदाज करें कि आबादी के नियंत्रण से आज भारत की सामाजिक आर्थिक व्यवस्था सुदृढ़ हुई है, मध्यम वर्ग की जीवन शैली तथा शिक्षा स्तर काफी सुधरा है। स्वास्थ्य भी बेहतर हुआ है। साल 1952 में शुरू हुए परिवार नियोजन अभियान का प्रभाव अब दिखने लगा है। ऐसे में जनसंख्या वृद्धि का सुझाव कौन मानेगा?

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मणिपुर, भारत के सात पूर्वोत्तर राज्यों में से एक प्राकृतिक संसाधनों से ओत-प्रोत राज्य है। इस राज्य को दक्षिण एशिया का ‘प्रवेश द्वार’ भी माना जाता है। मणिपुर भारत के सर्वाधिक सुन्दर स्थानों में से एक है। यहां की शांत जलवायु, हरे-भरे लहलहाते घने वन और सुन्दर झीलें इस पर्वतीय क्षेत्र की सुन्दरता में चार चांद लगा देते है...

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सिर्फ चुनावों में तमिल भावनाओं को जागृत करने के लिए कच्चतिवू टापू के विवादित हस्तांतरण को मुद्दा बनाया गया था। अब भाजपा इस मुद्दे को क्यों नहीं उठा रही है…?

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