बृज खंडेलवाल

बृज खंडेलवाल वरिष्ठ पत्रकार हैं और पिछले ढाई दशक से मीडियाभारती के लिए लगातार लेखन कार्य कर रहे हैं।

प्रधान मंत्री के संबोधन से लोगों को अच्छे दिन फिर लौटने की उम्मीद जागी है। ऐसा माहौल बनाया जा रहा है कि ट्रंप युद्ध का भारत पर कोई असर नहीं होगा। देवी देवताओं की कृपा से अर्थव्यवस्था ‘बूम’ करेगी और भारत का ‘विश्व गुरु’ बनने का अभियान गति पकड़ेगा।

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हाल ही में ग्रेटर नोएडा में एक दिल दहलाने वाली घटना ने तथाकथित आधुनिक भारतीय समाज की काली सच्चाई को प्रकाशित किया है। 28 वर्षीय निक्की को उनके पति और ससुराल वालों ने 36 लाख रुपये की दहेज मांग के लिए क्रूरता से प्रताड़ित कर जला दिया। यह भयावह घटना 21 अगस्त को हुई, जिसे निक्की के छह साल के बेटे ने अपनी आंखों से देखा, जिसने बताया कि उसकी मां पर कोई पदार्थ डाला गया, थप्पड़ मारा गया और फिर जिंदा जला दिया गया...

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रात के सन्नाटे में जब घरों की रोशनी बुझ जाती है, तब भी लाखों युवाओं की आंखें चमकती स्क्रीन पर टिकी रहती हैं। अनगिनत नोटिफिकेशन्स की खनक मानसिक जंजीर बन चुकी है...

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पिछले दो महीनों से कर्नाटक दहशतख़ेज़ ख़बरों से घिरा रहा है। एक ‘व्हिसलब्लोअर’ ने आरोप लगाया कि सैकड़ों महिलाओं और लड़कियों का रेप करके उनकी हत्या की गई और उनकी लाशें श्री मंजूनाथ मन्दिर, धर्मस्थल के आसपास छुपा दी गईं। यह आरोप धमाकेदार था: धर्मस्थल जैसा पवित्र स्थान, छुपे हुए अपराधों की क़ब्रगाह बना दिया गया...

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राजस्थान के रेगिस्तान को बढ़ने से रोकने और हरियाली बढ़ाने में इंदिरा गांधी नहर और बेहतर जल प्रबंधन ने अहम भूमिका निभाई है। इस परियोजना ने थार के रेगिस्तान में पानी पहुंचाकर कृषि योग्य भूमि बढ़ाई, वनाच्छादन को प्रोत्साहित किया और स्थानीय वर्षा दर में सुधार किया है।

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भारत के चारों तरफ़ इस वक़्त एक अशुभ ‘आर्क ऑफ इंस्टैबिलिटी’ यानी अस्थिरता का घेरा बन गया है। एक-एक कर पड़ोसी मुल्क आर्थिक तबाही, सियासी उथल-पुथल और जनाक्रोश की आग में जल रहे हैं। नेपाल की ‘सोडा वाटर क्रांति’ से लेकर श्रीलंका के ‘राजपक्षा विद्रोह’ तक, नौजवानों की आवाज़ें ज़ोर से गूंजीं, लेकिन सत्ता के क़िलों को हिला पाने में नाकाम रहीं। ये अलग-थलग वाक़ये नहीं हैं, बल्कि पूरी दक्षिण एशिया की साझा त्रासदी है।

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