मथुरा

मथुरा। जवाहरबाग काण्ड के वहां आज रविवार यहां का जायजा लेने पंहुची केन्द्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति को जवाहरबाग में नहीं जाने दिया गया। एसपी सिटी के घर जाने के बाद वह जवाहरबाग की ओर निकलीं लेकिन जैसे ही उनका काफिला जवाहरबाग के गेट पर पंहुचा तो पुलिस ने उनको वहीं रोक दिया। वह काफी देर तक अंदर जाने के प्रयास में लगी रहीं लेकिन पुलिस के अधिकारियों ने उन्हें अंदर जाने नहीं दिया। इस दौरान उनकी पुलिस के अधिकारियों से काफी देर तक बहस भी हुयी लेकिन उन्हें बैरंग लौटना पड़ा। जवाहरबाग के अंदर नहीं जाने पर सांसद निरंजन ज्योति ने पुलिस अधिकारियों से कहा कि अगर इतनी सख्ती वो पहले ही दिखा देते तो यह घटना आज नहीं होती। हमें अंदर जाने के लिये जो सख्ती दिखाकर तहकीकात की जा रही है वह सही नहीं है। अगर पहले ही ध्यान दे देते तो घटना से बचा जा सकता था। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने इस मामले में जरा भी रूचि नहीं ली। अराजक तत्वों को इस घटना को अंजाम देने में सरकार ने पूरी मदद की है। दो वर्ष तक सरकार ने इस ओर देखा भी नहीं। यहां लग्जरी गाड़ियां आती जाती थी उन्हें कभी रोकने का प्रयास नहीं किया गया। अब तो यह भी साबित हो गया है कि यहां हथियार लाये जाते थे। उन्होंने घटना की उच्च स्तरीय जांच की मांग की।

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डीएम, एसएसपी के लिये बयान मथुरा। जवाहरबाग की घटना की जांच सौंपे जाने के बाद आज अलीगढ मण्डल के आयुक्त चन्द्रकांत मथुरा आये और उन्होंने पीडब्ल्यू डी गैस्ट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते कहा कि मुझे यहां की जांच सौंपी गयी है और मैं पूरी निष्पक्षता के साथ ये जांच कर शासन को इसकी रिपोर्ट पेश करूंगा। चूंकि अभी मुझे इसके बारे में प्राथमिक जानकारी ही है, यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा कि इसमें कौन दोषी है। हां इतना जरूर है कि पुलिस-प्रशासन की इसमें चूक रही है। बताया कि हमने डीएम और एसएसपी तथा एडीएम से बातें की हैं और उनके बयानों को दर्ज किया है। साथ ही कुछ पत्रकारों द्वारा भी अपने बयान दर्ज कराये गये हैं और कुछ साधारण लोग भी हमारे पास आये और इस संबंध में अपनी जानकारी हमें बतायी है। 15 दिन के अंदर जांच की रिपोर्ट शासन को भेज दी जायेगी। सरकार ने ऐसी घटनाओं को रोकने के लिये सुझाव मांगे हैं। पत्रकारों ने जब उनसे यह पूछा कि प्रशासन द्वारा एसपी के साथ पूरी फोर्स क्यों नहीं भेजी? तो वे इस बात को टाल गये और कहा कि इसका जबाव तो जिला प्रशासन ही देगा। 

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शहीद पुलिस अधिकारियों को मौके पर छोड़ने वाले भी आने चाहिये सामने मथुरा। जवाहरबाग प्रकरण में साहस का परिचय देकर शहादत देने वाले दोनों पुलिस अधिकारियों की मौत को लेकर अब जनपद में तरह-तरह के सवाल लोग खड़ा करने लगे हैं। लोगों का कहना है कि इस पूरे प्रकरण में डीएम और एसएसपी की भूमिका की भी जांच होनी चाहिये और तब तक उन्हें यहां से हटा देना चाहिये ताकि वे जांच को प्रभावित न कर सकें। वहीं जवाहरबाग ऑपरेशन में साहसी दोनों पुलिस अधिकारियों को अकेला छोड़ने वाले कुछ पुलिस के अधिकारियों और उनके साथ गयी पुलिस टीम से भी पूछताछ होने पर पता चलेगा कि आखिर ये लोग कैसे उन दोनों को अकेला छोड़कर चले आये। वरिष्ठ अधिकारियों ने क्यों एसपी सिटी को अकेले वहां जाने दिया? यह ऐसे सवाल हैं जो आज जनमानस उठा रहा है। योजना को अमलीजामा पहनाने से पूर्व सुरक्षा व्यवस्था और हथियारों के माकूल बंदोबस्त न होने का परिणाम था कि दोनों की जान चली गयी। अब वरिष्ठ अधिकारी भले ही अपने आप को कितना भी सही बतायें लेकिन इन दोनों पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों की जरूर इस प्रकरण में चूक रही है। मुख्यमंत्री से लेकर तमाम जानकार भी इस तथ्य को सही मान रहे हैं। अगर बढिया योजना और पूरी ताकत से ऐसे दुष्टों पर हमला होता तो कम से कम दो लोकप्रिय अधिकारियों की जान नहीं जाती। कमिश्नर अलीगढ को जांच सौंपी गयी है और इस जांच में अभी तक ज्यादा पूछताछ भी नहीं हुयी है। इतनी बड़ी घटना के बाद भी प्रदेश सरकार और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस पहलू को गंभीरता से नहीं लिया। दोषियों के खिलाफ अभी तक कोई कार्यवाही न होने से भी लोग क्षुब्ध हैं। जनपद के लोग इस बात को जोरशोर से उठा रहे हैं कि जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी इस मामले में पूरी तरह असफल साबित हुये। भले ही रामवृक्ष जैसा आताताई और उसके प्रमुख कमाण्डर इस घटना में मारे गये हों लेकिन बड़े अधिकारियों को अब तक इसमें सजा आखिर क्यों नहीं दी गयी? रोज-रोज यह सवाल तेजी से उठ रहा है।

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मथुरा। राष्ट्रीय लोकदल के नेता कुँ. नरेन्द्र सिंह जिन्होने जवाहरबाग प्रकरण को लेकर लेखपाल और वकीलों के साथ मिलकर आताताईयों के विरूद्ध धरने-प्रदर्शन और आवाज बुलंद की थी। आज वे भी इस बात को मानते हैं कि इस घटना में डीएम-एसएसपी की भूमिका संदिग्ध रही है। वरना दो पुलिस के अधिकारियों की मौत नहीं होती। ताज्जुब इस बात का है कि आज तक इन दोनों अधिकारियों का तबादला सरकार ने क्यों नहीं किया? वहीं शहर कांग्रेस के अध्यक्ष आबिद हुसैन कहते हैं कि इस घटना में दोनों वरिष्ठ अधिकारियों ने बिना आपसी तालमेल के कैसे मुकुल द्विवेदी और अन्य लोगों को हल्के पुलिस बल के साथ भेजा? इन दोनों वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की जांच होनी चाहिये और तब तक इन्हें यहां से पद से हटा देना चाहिये। वरना ये लोग जांच को प्रभावित करेंगे, क्योंकि संपूर्ण प्रकरण की जांच अलीगढ कमिश्नर द्वारा की जा रही है। पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों का अब यहां रहना भी उचित नहीं है।

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मथुरा। केन्द्रीय मंत्री निरंजन ज्योति ने आज पीडब्ल्यू डी गैस्ट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुये कहा कि करीब 28 माह से जवाहरबाग पर कब्जा करे सपा के गुण्डों के साथ यदि सख्ती बरती जाती तो आज इस तरह की घटना न घटती। हमारे दो होनहार अधिकारी इन उपद्रवियों के हाथों मारे गये। इसका हमें भारी दुख है। जवाहरबाग में रसद और सोलर प्रोजेक्ट के लगाये जाने के पीछे सरकार के किसी बड़े मंत्री का हाथ है। यदि सरकार का संरक्षण न होता तो जवाहरबाग कब का खाली हो गया होता। 4 मार्च 1994 को एक दिन की परमीशन लेकर जवाहरबाग में ये उपद्रवी रूके थे लेकिन परमीशन खत्म होने के बाद जिला प्रशासन का दायित्व बनता था कि वे जवाहरबाग को खाली करायें लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया, क्योंकि इसके पीछे उन्हें प्रदेश सरकार का डर था। जवाहरबाग की जमीन हथियाने में सरकार शामिल है। कोर्ट के आदेश के बाद प्रदेश सरकार हरकत में आयी है। उन्होंने कहा कि घटना को चार दिन होने के बाद भी सरकार का एक भी नुमाइंदा यहां नहीं आया। घटना के आरोपी रामवृक्ष यादव को मरा हुआ दर्शाया गया है लेकिन उसका कोई शव आज तक पुलिस प्रशासन द्वारा बरामद नहीं कराया गया है। इससे सिद्ध होता है कि सरकार के इशारे पर प्रशासन कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से सरकार द्वारा कमिश्नर को जांच सौंपी गयी है, उसी तरह से यदि इस जांच में संसदीय कमेटी भी शामिल की जाती तो अच्छा रहता। हम इसकी जानकारी केन्द्र सरकार को देंगे और संसदीय समिति को जांच में शामिल कराने के लिये कहेंगे जिससे जांच निष्पक्ष रूप से हो सके।

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मथुरा। कोतवाली सुरीर अंतर्गत तेहरा पुल के पास तेजगति से आते एक ट्रक के चालक ने लापरवाही से वाहन चलाते दो लोगों में टक्कर मार दी जिससे दोनों गंभीर रूप से घायल हो गये और उपचार के दौरान उनकी मौत हो गयी। बताया गया कि ट्रक संख्या जीजे 12 1582 के अज्ञात चालक ने लापरवाही से वाहन चलाते तेहरा पुल के पास खड़े 41 वर्षीय राकेश और उसके साथी 32 वर्षीय हेमराज को टक्कर मारी जिससे  दोनों की मौत हो गयी। मृतक राकेश के भतीजे अनीश पुत्र रनवीर निवासी गढी बालकिशन मांट ने ट्रक चालक के खिलाफ रिपोर्ट लिखाई है।

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