प्रशासन और पंडा समाज की वार्ता रही विफल
-यातायात व्यवस्था के विरोध में वृन्दावन रहा बंद
-एसडीएम के निर्णय से पण्डा और व्यापारियों मे बेचैनी
मथुरा। वृन्दावन में बाहरी वाहनों के प्रवेश पर पिछले सात दिनों से व्यापारी और पण्डा समाज के आंदोलन और आज शनिवार वृन्दावन बंद के बाद प्रशासन ने इसे हटाने से स्पष्ट मना कर दिया। वार्ता विफल रहने के बाद वृंदावन नगर की जनता व व्यापारी भी अनशन में उतर आए। हालांकि प्रशासन ने सुझावों पर विचार करने के संकेत दिए हैं। वहीं सिटी मजिस्टेªट ने इस संबंध में बताया कि प्रशासन के इस कदम से लोगों को राहत है, वृंदावन में कुछ ही दुकानें बंद रही थी, फिलहाल नो एन्ट्री का व्यवस्था जारी रहेगी।
विदित हो कि धर्मनगरी वृंदावन में शनिवार व रविार को लगने वाले साप्ताहिक जाम के मद्देनजर जिला प्रशासन ने इन दोनों ही दिन वृंदावन में वाहनों का प्रवेश वर्जित कर दिया है। यह नई व्यवस्था कारगर रही, ट्रायल में सफल रहने के बाद अगले दो सप्ताह भी नगर में जाम देखने को नहीं मिला। हालांकि इस नई व्यवस्था से व्यापारी व पंडा समाज के लोगों में भारी आक्रोश है, उनका कहना है कि अगर यह व्यवस्था लागू रहती है, तो इससे धर्म नगरी आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में गिरावट आएगी। इसी को लेकर वह शुरूआत से ही इसका विरोध जता रहे हैं। अनशन कर रहे तीर्थ पुरोहित महासंघ व पंडा महासभा के बैनर तले वृंदावन में अनशन किया जा रहा है। अनशन के दौरान आज शनिवार को जिला प्रशासन ने अनशन कर रहे पंडा समाज के लोगों के साथ वार्ता की। यह वार्ता विफल रही, एसडीएम ने प्रशासन का रूख स्पष्ट किया तो प्रतिनिधिमंडल मायूस हो गया। वार्ता विफल रहने से यह तय हो गया कि प्रशासन वृंदावन में लगने वाले जाम को लेकर बेहद सख्त है। जाम से निपटने के लिए प्रशासन सख्त कदम उठा रहा है। वार्ता विफल रहने के फलस्वरूप वृंदावन की जनता व बड़ी संख्या में व्यापारी भी अनशन के समर्थन में उतर आए। उन्होंने टैªफिक व्यवस्था का तीखा विरोध जताया। फिलहाल यह व्यवस्था जारी रहेगी। प्रशासन ने इसे हटाने से स्पष्ट मना कर दिया। वार्ता विफल रहने के बाद वृंदावन नगर की जनता व व्यापारी भी अनशन में उतर आए। हालांकि प्रशासन ने सुझावों पर विचार करने के संकेत दिए हैं।
विदित हो कि धर्मनगरी वृंदावन में शनिवार व रविार को लगने वाले साप्ताहिक जाम के मद्देनजर जिला प्रशासन ने इन दोनों ही दिन वृंदावन में वाहनों का प्रवेश वर्जित कर दिया है। यह नई व्यवस्था कारगर रही, ट्रायल में सफल रहने के बाद अगले दो सप्ताह भी नगर में जाम देखने को नहीं मिला। हालांकि इस नई व्यवस्था से व्यापारी व पंडा समाज के लोगों में भारी आक्रोश है, उनका कहना है कि अगर यह व्यवस्था लागू रहती है, तो इससे धर्म नगरी आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में गिरावट आएगी। इसी को लेकर वह शुरूआत से ही इसका विरोध जता रहे हैं। अनशन कर रहे तीर्थ पुरोहित महासंघ व पंडा महासभा के बैनर तले वृंदावन में अनशन किया जा रहा है। अनशन के दौरान आज शनिवार को जिला प्रशासन ने अनशन कर रहे पंडा समाज के लोगों के साथ वार्ता की। यह वार्ता विफल रही, एसडीएम ने प्रशासन का रूख स्पष्ट किया तो प्रतिनिधिमंडल मायूस हो गया। वार्ता विफल रहने से यह तय हो गया कि प्रशासन वृंदावन में लगने वाले जाम को लेकर बेहद सख्त है। जाम से निपटने के लिए प्रशासन सख्त कदम उठा रहा है। वार्ता विफल रहने के फलस्वरूप वृंदावन की जनता व बड़ी संख्या में व्यापारी भी अनशन के समर्थन में उतर आए। उन्होंने टैªफिक व्यवस्था का तीखा विरोध जताया। फिलहाल यह व्यवस्था जारी रहेगी। वृन्दावन की अधिकांश दुकानें आज इसके चलते बंद रहीं जिससे जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया। पण्डा समाज और राजनैतिक दलों के नेताओं ने भी साथ उतरकर इस व्यवस्था का पूरा विरोध किया। प्रत्यक्ष रूप से नहीं बल्कि परोक्ष रूप से कांग्रेस, भाजपा और सपा भी इसका विरोध कर रही है। बसपा तो खुलकर धरना और व्यवस्था के विरोध में है और खुलेआम उनके नेता धरने पर बैठकर बाजार बंद कराने और रैलियों में शामिल होकर अपना समर्थन जता रहे हैं। आज शनिवार इस संबंध में एसडीएम सदर वैभव शर्मा ने व्यापारी नेताओं, पण्डाओं एवं स्थानीय लोगों से बात की। इस दौरान बसपा नेता योगेश द्विवेदी, भाजपा नेता पं. देवेन्द्र शर्मा, नवलगिरी, ताराचंद, नंदकुमार पाठक, सुरेशचन्द, नूतन बिहारी पारिक, अजय, कृष्ण मुरारी, नीरज गौतम, अशोक वाष्र्णेय आदि मौजूद थे।
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